19/10/2026
शर्म आनी चाहिए ऐसी सोच पर! 😡
किराये पर मकान देना किसी का निजी फैसला हो सकता है, लेकिन किसी की जाति के आधार पर उसे किराये का घर न देना समाज के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
मकान की पहचान उसकी दीवारों से होती है, इंसान की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके संस्कार और व्यवहार से होती है।
SC/ST होना कोई अपराध नहीं है और न ही किसी को उसकी जाति के कारण अपमानित करना सही है। हर इंसान को सम्मान के साथ जीने और रहने का अधिकार है।
🏠 मकान किराये पर देने से पहले इंसान का चरित्र, व्यवहार और किराया देने की क्षमता देखिए, उसकी जाति नहीं।
जातिवाद से समाज नहीं, सिर्फ नफरत बढ़ती है। हमें ऐसा समाज बनाना है जहाँ इंसान की पहचान उसकी जाति से नहीं, उसके इंसान होने से हो।
संविधान समानता सिखाता है, भेदभाव नहीं! 🇮🇳
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