"सर्वे रस कर्ता भोक्ता एक नारायण।"
इस संसार में समस्त रसों (आनंद, स्वाद, भाव) का निर्माण करने वाले और उस रस का भोग करने (अनुभव करने) वाले एकमात्र नारायण (ईश्वर) ही हैं।
Shakun Raghuvanshi
"कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्"
Spirituality | Sustainability | Social Empathy
🇮🇳 9911161753
आपने एक बार फिर करुणा दिखाई बाबा,
आपके एक इशारे ने मेरी जिंदगी बदल दी!
Jagadguru Swami Sudarshanacharya ji Maharaj
Shri Sidhdata Ashram
Shri Lakshmi Narayan Divyadham
Ramanuj swami
Vishisht Advait
Shakun Raghuvanshi
Iamshakun
जय गुरुदेव
नानक नाम जहाज है,
चढ़े सो उतरे पार
जो श्रद्धा कर सेंवदे,
गुर पार उतारणहार।
02/05/2026
सेवा परमो धर्म:
सेवा स्वरूप इस जीवन के सही अर्थ को जो जान गया, वो प्रभु को जान गया जी।
Bansi vidya niketan school
ShubhSamay Vaidik Foundation
Shakun Raghuvanshi
Anju Dagar
Vikas mittal
Alpana mittal
Red cross society
Bijender sorount
ध्यान रहे, यह कलियुग है प्रधान!
यहां गुरु और भगवान का रूप ओढ़कर अनेक कालनेमी घूम रहे हैं जो तुम्हें परंपरा की दुहाई देकर तुम्हारा मान, सम्मान, "इज्जत", धन, ज्ञान सब लूट लेना चाहते हैं।
श्री गुरु महाराज जी की करुणा का केंद्र
ShubhSamay Vaidik Foundation
ShubhSamay Vaidik Farm
Shakun Raghuvanshi Shridhar
Yagya Yog Sewa Paryavaran Rashtra Nirman
आज का पावन प्रभात
अद्भुत आध्यात्मिक संयोग लेकर आया है—
सोमवार की शिवमय ऊर्जा
और मोहिनी एकादशी की विष्णुमयी कृपा का संगम।
इस दिव्य दिवस पर
जहाँ एक ओर भगवान शिव
अपने भक्तों के समस्त दुःख, भय और बाधाओं का हरण करते हैं,
वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु
मोहिनी स्वरूप में समस्त पापों का नाश कर
जीवन में धर्म, सौभाग्य और संतुलन का संचार करते हैं।
यह संयोग केवल तिथि नहीं,
बल्कि एक अवसर है—
अपने भीतर के विकारों को त्यागकर
सत्य, संयम और साधना के मार्ग पर अग्रसर होने का।
आज का दिन यह संदेश देता है कि
जिसने स्वयं को जीत लिया,
उसके लिए संसार में कुछ भी अप्राप्य नहीं।
प्रभु से प्रार्थना है कि
आपके जीवन में
शक्ति, शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि का प्रकाश सदैव बना रहे।
आपको सोमवार एवं मोहिनी एकादशी की
अंतःकरण से हार्दिक शुभकामनाएँ।
प्रेरक प्रसंग
!! अपने लक्ष्य पर ध्यान !!
एक बार की बात है। एक तालाब में कई सारे मेढ़क रहते थे। उन मेढ़कों में एक राजा मेंढक था। एक दिन सभी मेढ़कों ने सोचा कि क्यों न एक प्रतियोगिता रखी जाए। तालाब के किनारे एक ऊँचा पेड़ था। राजा मेंढक ने कहा— “जो भी इस पेड़ पर चढ़ जाएगा, वही विजेता कहलाएगा।”
सभी मेढ़कों ने प्रतियोगिता स्वीकार कर ली और अगले दिन उसका आयोजन किया गया। प्रतियोगिता शुरू होते ही मेंढक एक-एक करके पेड़ पर चढ़ने लगे। कुछ ऊपर तक पहुँचे, लेकिन फिसलकर नीचे गिर गए।
धीरे-धीरे कई मेंढक प्रयास करते रहे, पर बार-बार गिरने से कुछ ने हार मान ली। जो मेंढक पहले ही असफल हो चुके थे, वे नीचे खड़े होकर कहने लगे— “यह असंभव है, कोई नहीं चढ़ सकता।”
उनकी नकारात्मक बातों को सुनकर कई और मेंढकों ने भी कोशिश करना छोड़ दिया। लेकिन एक मेंढक लगातार प्रयास करता रहा। बार-बार गिरने के बावजूद उसने हार नहीं मानी और अंततः वह पेड़ के शीर्ष तक पहुँच गया।
यह देखकर सभी मेंढक आश्चर्यचकित रह गए और उसकी सफलता का कारण पूछने लगे। तब पता चला कि वह मेंढक बहरा था। उसे किसी की नकारात्मक बातें सुनाई ही नहीं दीं। वह तो यही समझता रहा कि सभी उसे प्रोत्साहित कर रहे हैं— “तुम कर सकते हो, आगे बढ़ते रहो।” इसी विश्वास के कारण वह सफल हो गया।
सबने उसकी खूब सराहना की और उसे पुरस्कृत किया गया।
शिक्षा:-
हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए और दूसरों की नकारात्मक बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।
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