03/08/2026
*"उनकी याद में मनोभाव"*
सभी को जय भीम नमो बुद्धाय...
उम्मीद करते हैं कि
आप जहां भी हैं, बारिश की स्थिति अच्छी होगी ।
में अभी जहां पे हु इस जगह "दीक्षाधामधम्म प्रशिक्षण केंद्र (मध्यवर्ती गुजरात) इलाके में बारिश हो रही है ।
मैं वहीं हूं.. और प्रकृति के नज़ारे का अनुभव कर रहा हूं ।
यानी, एक अच्छा अनुभव..!
लेकिन, मन में यह ख्याल भी रहता है कि प्रकृति का इतना प्रभाव न पड़े कि किसी भी जीव के अस्तित्व पर आन पड़े।
ऐसे में, हमारे पास मैत्री का ही सही ज़रिया है; जो कम से कम अपने लिए सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है..।
यहां, परसों शाम से बारिश शुरू हुई, और फिर रात में तत्पश्चात अब सुबह भी लगातार बारिश हो रही है...!
इसी बहाने प्रकृति को करीब से देखा जा सकता है ।
शांत, धीमी बारिश किसी तरह नई ऊर्जा पैदा कर रही है..!
आज से ठीक 35 साल पहले, 1991 में, आज ही के दिन, भजा धम्म शिबीर सेंटर में एक खूबसूरत प्राकृतिक माहौल में हमारे 15 दोस्तों का "धम्मचारी दीक्षाधाम" शिबीर चल रहा था..!
2 अगस्त, 1991 की रात को, मेरा "व्यक्तिगत दीक्षा" धम्मचारी सुवज्र जी की साक्षी में हुई, और 4 अगस्त को महाविहार (पुणे, महाराष्ट्र) में धम्मचारी सुभूति जी के करकमलों द्वारा "जाहिर धम्मचारी दीक्षा" हुई । एक अद्भुत अनुभव जो आज तक हृदय में जीवित है।
यह उन दिनों की एक हमेशा रहने वाली याद, हृदय को छू लेने वाली स्मृति है; जो मुझे हर दिन एक नई ऊर्जा या प्रकाश की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
ऐसा लगता है कि "क्षणभंगुर समय" के इस बहाव में, यह क्षणभंगुर जीवन "शरण गमन" के प्रकाश से नियंत्रित होता है..!
पूज्य बाबा साहब को अनंत वंदन जिन्होंने नर्क से बाहर निकल दिया।
मेरे गुरु बोधिसत्व भंते उर्गेयन संघरक्षित जी को कोटि कोटि वंदन; सही राह दिखाई।
मेरे कल्याण मित्र, आचार्य एवं उपाध्यायों को सहृदय कृतज्ञता व्यक्त करता हूं; मुझे ठोक ठाक कर के "इंजीनियर" की भूमिका की है।
आज भी मेरे अन्य 15 सहदिक्षार्थी संघबंधु मेरे स्मृतिपट पर अनेकविद प्रेरणा देते रहते हैं ।
साथ ही आज सारा जगत "मैत्री दिन" मना रहा है; हाला की यह योगनुयोग है; इसे में अपना सौभाग्य समझता हूं।
मंगलकामनाएं..!
धम्मचारी आनंदशाक्य
दीक्षाधाम गुजरात
धम्म प्रशिक्षण शिबीर केन्द्र,
दि: 2.8.2026