कट्टर हिन्दू यदुवंशी क्षत्रिय

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Photos from Real क्षत्रिय अहीर जाट गुर्जर मराठा रोड़'s post 10/10/2020
08/10/2020

राष्ट्र के प्रति समर्पित 'यादव साहब' को नमन है :-

ये चित्र मुम्बई के कुर्ला इलाके में रहने वाले चित्रकार #नितिन_महादेव_यादव के हैं। जिनको प्यार से "आधा पुलिसवाला" भी कहा जाता है। कई लोग इन्हें 'यादव साहब' कह कर भी बुलाते है।

नितिन मात्र 5वीं कक्षा के छात्र थे जब उन्होंने कागज़ को बीस रुपये के नोट के आकार में काटा और अपने पेंट ब्रश की मदद से हूबहू असली नोट जैसा पेंट कर दिया ।
उस नोट को लेकर नितिन एक होटल में गये और काउंटर पर वह नोट पकड़ा दिया । नोट इतना हूबहू पेंट हुआ था कि सामने खड़े व्यक्ति ने उसे असली नोट समझ कर रख लिया।
जब नितिन ने बताया के वह नोट नकली है तो सभी लोग पांचवीं कक्षा के इस छात्र की प्रतिभा का लोहा मान गये।

एक रोज़ नितिन मुम्बई के ही एक पुलिस स्टेशन में नेमप्लेट पेंट कर रहे थे।
थाने में एक मर्डर केस आया, मर्डर का गवाह होटल में काम करने वाला एक वेटर था। पुलिस उससे मर्डर करने वाले व्यक्ति का हुलिया पूछ रही थी और वेटर समझा नही पा रहा था।
नितिन थानेदार के पास गये और उनसे कहा कि अगर वह वेटर को केवल आधा घंटा उसके साथ बैठने दें तो वह मर्डर करने वाले व्यक्ति का हूबहू स्केच तैयार कर सकता है।

पहले थानेदार ने नितिन की बात को मज़ाक में लिया पर नितिन के बार बार आग्रह पर थानेदार मान गया।

उसके बाद जो हुआ वह चमत्कार था। वेटर से मर्डर करने वाले का हुलिया पूछने के बाद नितिन ने थानेदार के हाथ मे एक स्केच पकड़ाया। वह चेहरा हूबहू मर्डर करने वाले व्यक्ति से मिलता था।

स्केच की मदद से 48 घंटे के अंदर वह आरोपी पकड़ा गया। सारा पोलिस महकमा अब नितिन का मुरीद बन चुका था।

कुछ समय के पश्चात एक लड़की से बलात्कार हुआ जो मूक बधिर थी । ना बोल सकती थी, ना सुन सकती थी । नितिन को तत्कालीन डीएसपी ने याद किया और बच्ची से मिलवाया।
नितिन बलात्कारी का चेहरा बच्ची की आंखों में देख चुके थे। नितिन ने एक एक कर के कई स्केच बनाये । कई तरह की आंखें, कई तरह का चेहरा । कई तरह के नैन-नक्श । एक एक कर इशारे के ज़रिये बच्ची बताती गयी की बलात्कारी कैसा दिखता है।
8 घँटे की अथक मेहनत के बाद नितिन मनोहर यादव ने डीएसपी के हाथ में बलात्कारी का स्केच थमा दिया।

स्केच की मदद से अगले 72 घण्टे में बलात्कारी को पकड़ा गया।

नितिन अब मुम्बई पोलिस के लिये संजीवनी बूटी बन चुके थे । हर एक केस में नितिन के स्केच ऐसी जान फूंक देते के पुलिस उसे आसानी से सुलझा लेती ।
बीते 30 वर्ष के अंतराल में यादव पुलिस के लिये करीबन 4000 से अधिक स्केच बना चुके हैं।

उल्लेखनीय है के केवल यादव की बनायी हुई तस्वीर की बदौलत मुम्बई पुलिस 450 से अधिक खूंखार से खूंखार अपराधी को गिरफ्तार कर चुकी है ।

अब वह विषय, जिसके लिये यह पूरा लेख लिखा गया है....

30 साल में किसी भी स्केच या तस्वीर के लिये नितिन ने पुलिस या किसी भी अन्य व्यक्ति से "एक नया पैसा " भी नहीं लिया है।

बार-बार पुलिस महकमे के बड़े से बड़े अफसर ने नितिन को ईनामस्वरूप धनराशि देने का प्रयास किया पर नितिन ने एक रुपया भी लेने से इनकार कर दिया ।

#नितिन_मनोहर_यादव चेम्बूर एजूकेशन सोसाइटी के एक स्कूल में शिक्षक रहे।
जो तनख्वाह आती उसी से गुज़र बसर करते रहे।
वह कहते हैं कि स्केच बना कर वह एक तरह से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों की पहचान होती है तो वह सलाखों के पीछे जाते हैं।

नितिन 30 साल तक अपना काम राष्ट्र सेवा के भाव से करते रहे और आज भी एक बुलावे पर सब कामकाज छोड़ कर हाज़िर हो जाते हैं।
30 साल की इस सेवा में नितिन को करीबन 164 प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सम्मानित किया है ।

नितिन बड़े फक्र से सम्मानपत्र और ट्रॉफी दिखाते हुये कहते हैं ....
"यही मेरी कमाई है। यही मेरी जमापूंजी है"

कभी कभी लगता है के यह राष्ट्र कैसे चल रहा है। चहुंओर बेईमानी का दबदबा है। चहुंओर भ्रष्ट आचरण का बोलबाला है।

फिर किसी दिन नितिन महादेव यादव जैसे किसी समर्पित व्यक्ति के विषय में पढ़ कर ऐसा लगता है कि राष्ट्र के प्रति समर्पित यादव जैसा एक व्यक्ति भी हज़ारों बेईमानों पर भारी है।

सादर/साभार

सुधांशु टाक

(अमित जी)

#मुम्बई #पुलिस #स्केच #यादव #नितिन #महादेव

07/10/2020

वक्त का चक्र कैसे घुमता है पहले मुगल जिनका बलत्कार किया करते थे और अपनी बहन बेटीयों का बलत्कार करवा कर भीख की रियासतें लेते थे। वह आज हमारे श्रेष्ठ बेटीयों का बलत्कार कर रहे हैं।

Photos from कट्टर हिन्दू यदुवंशी क्षत्रिय's post 23/09/2020

हिंदुआ सूर्य, अहीरवाल रत्न,भगवान श्री कृष्ण की पीढ़ी के 163वे, रेवाड़ी रियासत के क्षत्रिय यदुवँशी अहीर शासक अमर शहीद, रणधुरंधर महाराजा राव तुलासिंह बहादुर जी की पुण्यतिथी पर शत शत नमन,राव साहब वह शख्सयित थे, जिन्होंने आजादी के पहले स्वाधीनता संग्राम मे सबसे अहम योगदान दिया था।

महाराजा तुलासिंह जी बहादुर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख राजनायकों में से एक थे।

उन्हे हरियाणा राज्य मे ” राज नायक” माना जाता है। विद्रोह काल मे, हरियाणा के दक्षिण-पश्चिम इलाके से सम्पूर्ण बिटिश हुकूमत को अस्थायी रूप से उखाड़ फेंकने तथा दिल्ली के ऐतिहासिक शहर मे विद्रोही सैनिको की, सैन्य बल, धन व युद्ध सामाग्री से सहायता प्रदान करने का श्रेय राव राजा तुलासिंह जी को जाता है।

राव राजा तुला सिंह का जन्म 9 दिसंबर 1825 मे अहीरवाल प्रान्त के लंदन कहे जाने वाले रेवाड़ी जिले में भगवान कृष्ण के वंशज अफ़रिया गोत्र के चंद्रवंशी अहीर राज-घराने में हुआ था।

***** वृष्णि कुल तिलक अफ़रिया अहीर मूलतः द्वारिकाधीश की ज्येष्ठ रानी रुक्मणि जी से हुए पुत्र युवराज प्रदुम्न के पीढ़ी के वंशज हैं।
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इनके पिताजी श्री कृष्ण की पीढ़ी के 155वे थे जिनका नाम राव राजा पूर्ण सिंह था एवम माता का नाम रानी साहिबा ज्ञान कंवर था।

राव तुलासिंह की शिक्षा तब शुरू हुई जब वो पांच साल के थे।

साथ-साथ ही उन्हें शस्त्र चलाने और घुड़सवारी की शिक्षा भी दी जा रही थी।

राव तुला सिंह जब 14 साल के थे तब उनके पिता राव राजा पूर्ण सिंह जी का निधन हो गया और 14 दिनों बाद उन्हें रेवाड़ी का भावी महाराजा बनाया गया।

सरकारी दस्तावेजों अनुसार महाराजा तुला सिंह का राज्य कनीना, बवाल, फरुखनगर, गुड़गांव, फरीदाबाद, होडल और फिरोजपुर झिरका तक फैले 358 गाँव की रियासत थी ।

इनके स्वर्गीय पिता के शासन के दौर तक यह रियासत इतनी समर्द्ध थी कि इस राजघराने के पास निवास हेतू 12 राजमहल और दुर्ग थे ।

अंग्रेजो से मुठभेड़ तो इनके स्वर्गीय पिता राजा राव पूरण सिंह के समय से ही शुरु हो गया था और अंग्रेजों ने एक युद्ध में इस राजघराने के प्रसिद्ध गोकुल गढ़ दुर्ग को ध्वस्त कर दिया था जहां रेवाड़ी राज्य की राजमुद्रा ढालने की टकसाल थी।

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महाराजा तुलाराम सिंह जब राजगद्दी पर नशीन हुए उसी दिन से अंग्रेजों के प्रति उनके दिल में आक्रोश की भट्टी सुलग रही थी।

उस समय देश पर अंग्रेजों का कब्ज़ा था और जब एक 14 साल का बच्चा राज गद्दी पर बैठा हो तो इस बात को अंग्रेज एक मौके रूप में देखते थे।

अंग्रेज चाहते थे कि वह इस प्रांत को अपनी सीमा के अन्दर ले लें ।
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जब 1857 की क्रांति की शुरुआत हुई तो महाराजा राव तुला सिंह भी इस आग में कूद पड़े। पुस्तकें बताती हैं कि मेरठ से शुरू हुई इस लड़ाई में महाराजा तुलासिंह और उनके प्रधान सेनापति राव गोपालदेव सिंह जो उनके चचेरे भाई थे, दोनों शूरमे शामिल थे।

महाराजा तुला सिंह अपने भाई राव गोपाल देव सिंह, नांगल पठानी ठिकाने के सगोत्रीय भाई राव किशन सिंह और राव राम सिंह आदि के संग मिलकर अहीरवाल की सेना ले अंग्रेजो से जा भिड़े।

एक तरफ अंग्रेजी हुकूमत भारतीय सिपाहियों को मार रही थी क्योकि वह कारतूस का प्रयोग नहीं कर रहे थे तो वहीँ दूसरी तरफ महाराजा तुला सिंह जी और राव गोपाल देव सिंह जी जैसे वीर योद्धा अंग्रेजों की नाक में दम कर रहे थे।

मेरठ में इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को दम चखाकर, दिल्ली की और रास्ता लिया. जहाँ बीच में कुछ 600 लोगों को भी जेल से छुड़ा लिया गया था. दिल्ली में जो लड़ाई लड़ी गयी थी उस जगह अंग्रेजी सेना में भगदड़ की भी ख़बरें लिखी हुई हैं।

इस के बाद अहीरवाल नरेश महाराजा राव तुलासिंह को लगा कि अब अपने प्रांत में चलकर अंग्रेजों को वहां से भगाया जाये।

17 मई, 1857 को 500 यदुवँशी रणवीरों की सेना ने तहसील मुख्यालय पर धावा बोल दिया।
तहसीदार तथा थानेदार को बाहर निकल कर तहसील के खजाने और सरकारी दफ्तरों आदि पर पूर्ण रूप से कब्ज़ा कर लिया।

महाराजा तुलासिंह ने अंग्रेज़ो की स्वाधीनता को ठोकर मार कर रेवाड़ी को 450 गाँव की स्वतंत्र रियासत घोषित कर दिया।
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इंग्लैंड में गूंजा था इस जांबाज़ राजा का नाम-
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इस बात की खबर जब अंग्रेजों को हुई तो सभी हैरान रह गये।
यहाँ जो हुआ था उसकी खबर इंग्लैंड तक गयी और बड़े अधिकारियों को बोला गया कि जल्द से जल्द राव राजा तुलासिंह को गिरफ्तार किया जाए अन्यथा यह आग जल्दी ही देश के अन्य हिस्सों मैं भी फैल जाएगी ।

जितनी भी बार अंग्रेजों ने इनके साथ लड़ाई लड़ी थी सभी जगह अंग्रेजों को जान बचाकर भागना पड़ा था।

रेवाड़ी रियासत को अपने अधीन करने के लिए अंग्रेज़ो ने निरंतर हमले किये।

अंग्रेज अब यह समझ चुके थे कि यादवो और उनके राजा तुला सिंह पर काबू पाए बिना वे चैन से दिल्ली पर शासन नहीं कर सकते ।

इसलिए राजा राव तुलासिंह को तहस-नहस करने के लिए 2 अक्टूबर 1857 को ब्रिगेडियर जनरल शोबर्स एक भारी सेना तोपखाने सहित लेकर रेवाड़ी की ओर बढ़े तथा 5 अक्टूबर 1857 को पटौदी में उनकी झड़प राव तुलाराम की एक सैनिक टुकड़ी से हुई।

अंग्रेज रावतुलाराम की सैनिक तैयारी को देखकर दंग रह गए. यह विदेशी लश्कर एक माह तक राव तुलाराम को घेरे में लेने की कोशिश करता रहा।

अंग्रेजों ने दस नवम्बर 1857 को एक बड़ी सेना जबरदस्त तोपखाने के साथ कर्नल जैराल्ड की कमान में रेवाड़ी की सेना के खिलाफ रवाना की।

16 नवम्बर 1857 को जैसे ही अंग्रेजी सेना नसीबपुर के मैदान के पास पहुंची राव राजा तुलासिंह और उनके यादव वीर अंग्रेज़ो की सेना उन पर टूट पड़ी।

यह आक्रमण बड़ा भयंकर था कि अंग्रेजी सेना के छक्के छूट गए।
उनके कमाण्डर जैराल्ड सहित अनेक अफसर मारे गए!

राव राजा तुलासिंह की फौज बड़ी वीरता से लड़ी जिसकी दुश्मनों ने भी तारीफ की।

नसीबपुर मे हुए युद्ध में राव राजा तुला सिंह की सेना को बहुत क्षति पहुंची जिसके बाद वह सहायता लेने के लिए रूस, अफगानिस्तान आदि देश के शासको के पास गए।

रूस के archives में राव तुला सिंह का वह पत्र आज भी सुरक्षित हैं जो उन्होंने सैन्य सहायता के रशिया को लिखा था।
राव तुला सिंह सर्वप्रथम भारतीय राजदूत भी थे जो रशिया गए थे बेशक़ सैन्य सहायता ही मांगने गए हो।

ये काफ़ी कम लोग जानते होंगे कि राव राजा तुला सिंह- हिंदी, अरबी, फ़ारसी,अंग्रेज़ी, उर्दू, रशियन आदि कई भाषाओं के ज्ञानी थे।

जब राव राजा तुला सिंह को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु का पता लगा तो उन्हें गहरा धक्का लगा और भारत को आजाद कराने की तड़प लिए 23 सितम्बर 1863 को भारतमाता का एक शूरवीर पुत्र काबुल में स्वर्ग सिधार गया ।

वहां उनका शाही सम्मान के साथ दाह संस्कार कर दिया गया और अस्थियां सम्मान के साथ रेवाड़ी राजघराने को सौंप दी गईं।


इनकी मृत्यु के बाद भी इनके वंशजो ने अंग्रेज़ों से युद्ध जारी रखा। फलस्वरूप अंग्रेज़ो ने रेवाड़ी रियासत के अधीन कई दुर्गों को तहस नहस कर दिया जिसमें गोकलगढ़, सोहना, गढ़ी बोलनी के दुर्ग मुख्य है ।

आज हममें से बहुत ही कम लोग इनके बारें में जानते हैं।

यह एक शर्म की बात है कि एक योद्धा जो देश के लिए लड़ा और उसकी जीवनी हम अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पा रहे हैं।

महाराजा राव तुलासिंह बहादुर अमर रहें।
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इस राजघराने के हाल के राजा साहब है श्री राव इंद्रजीत सिंह जी जो श्री कृष्ण की पीढ़ी के 160वे हैं।

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जय श्री कृष्ण
जय यदुवंश
जय माँ योगमाया

Photos from कट्टर हिन्दू यदुवंशी क्षत्रिय's post 22/09/2020

यदुवंशी गोपों की बलवान नारायणी सेना से बड़ी सेना पुरें विश्व में किसी की भी नहीं थी।💪
गौ माता का मांस खाने वाली कंगना रनौत की क्या औकात जो गौ रक्षक यदुवंशीयो की नारायणी सेना को चंपू सेना बोलें।

20/09/2020

१९१० के बाद
हरियाणा में यदुवंशी अहीर क्षत्रिय महासभा
यूपी में अहीर क्षत्रिय महासभा
बिहार बंगाल में गोप क्षत्रिय महासभा
मध्य प्रदेश में ठाकुर जमींदार क्षत्रिय महासभा थी।
आज एक स्वाभीमानी वीर योद्धा शासक गौ रक्षक कौम को धर्म विरोधी बनाने की शाजिस हो रही है जिसमें कई हद तक यह शिव कुमार और लाल प्रताप जैसे ईसाई मिशनरी से पैसे खाने वाले नेता कामयाब हो गए हैं।

18/09/2020

यदुवंश के संस्थापक महाराज यदु के वंशजों को क्यों कहा जाता है गोप?जानिए कहा है असली यदुवंशी गोप--चंद्रवंशी चक्रवर्ती सम्राट महाराजा ययाति के जेष्ठ पुत्र यदु के वंशजो को यादव या यदुवंशी कहा जाता है।

जब महाराज यदु ने विशाल सर्प का दमन किया तो अभीर अतार्थ अहीर कहलाए,प्राचीन काल में जिसके पास सबसे ज्यादा गौ धन होता था उनका राज्य को समृद्ध माना जाता था महाराज यदु के पास दस लाख गाय थी,ऋग्वेद के 10 मंडल के 62 वे अध्याय में 10 वे श्लोक में यदु महाराज को "गोप" कहा गया है।इसके साथ ही अन्य पुराणों में भी इनके वंशजो को गोप ही कहा गया है, जैसे की भागवत पुराण में महाराज वासुदेव और महाराज नंद को गोप कहा गया है,तथा राधा रानी के पिता वृषभानु गोप से ले कर सभी मथुरा ब्रज वासी को भी गोप कहा गया है और महाभारत में नारायणी सेना के सभी यादवो को गोप कहा गया है।यादवो की कुलदेवी और नंद बाबा की बेटी माँ विंध्यावासिनी भी गोपी(अहीरानी) थी

गोप शब्द का अर्थ होता है राजा या कहे तो इलाके का ठाकुर,मुखिया,चौधरी।गोप का एक अर्थ अधिक गौ धन वाला या गौ रक्षक भी होता

#गर्गसंहिता में #गर्ग_ऋषि लिखते हैं:-

'परा न विदिता भूवि गोप जात:'

अर्थ:- #गोप(यादव) जाति से बढ़कर #पृथ्वी पर कोई पैदा हुआ ही नहीं।हिन्दू जाति में #अहीर एक ऐसी जाति है,जिसमें आज भी आर्यों का पवित्र खून प्रवाहित होता है ।

यादव गोप अहीर गोपाल जैसे शब्दों को एक दूसरे का पर्यावाची कहा जाता है। वैसे तो गोप सभी यदुवंशियो की पदवी है पर सरकारी दस्तावेजो के अनुसार बिहार बंगाल के #कृष्णोत(वृष्णिवंशी), #मधुरौत(मधुवंशी), #भोजवंशी और #सदगोप गोत्र के यदुवंशी अभीरों को गोप कहा गया है और यह यादव बड़े पैमाने पर बिहार बंगाल में जमींदार और रियासतदार रहे है,और इन यदुवंशी क्षत्रियो के पास हजारो साल पुराने यदुवंशी क्षत्रिय,अभीर गोप होने के दस्तवजे है।
गोप यादव बड़े पैमाने पर जमींदार रियास्तदार रहे है,शरिर से भी काफ बलिष्ठत होते है कुश्ती और तलवार बाजी का जबरदस्त शौक होता इन्हें,पुराने समय में इनके सबसे कुशल योद्धा में से एक माना जाता और वैदिक क्षत्रिय का दर्जा प्राप्त था।

दानासुर का अंत कर नेपाल में भगवान श्री कृष्ण ने यदुवँश की पताका स्थापित की थी और अपने ही एक पुत्र और नारायणी सेना के यादवो को नेपाल में बसा दिया था,जिन्होंनो नेपाल अभीर राजवँश की स्थापना की इसी राजवँश में आगे चलकर जन्म हुआ आभिरपति महाराजा भक्तमान सिंह गुप्त(गोप) का, जिन्होंने सर्वप्रथम सिंह औ गुप्त (गोप) उपाधि धारण की,गुप्त शब्द गोप शब्द को ही नेपाली भाषा में कहते है,अगर आप इतिहास के अच्छे जानकार है तो आपको यह अछे से मालुम होगा पुरे भारत पर राज करने वाले गुप्त राजवँश भी वृष्णि वंशी गोप यादव थे जी हां नेपाल के ही राजा आभिरपति महाराजा भक्तमान सिंह गुप्त(गोप) के वंशज बिहार जा कर बस गए थे और गुप्तवंश की नींव डाली थी,यदुकूल शिरोमणि वीर अहीर लोरीक देव की जीवनी में भी समुद्रगुप्त को अहीर जाती का होने वर्णन है,अगर आप उत्तर भारत से है तो आपने यदुवँश शिरोमणि वीर अहिर लोरीक का नाम जरूर सुना होगा, वीर लोरीक देव भोजवंशी यादव थे जो बाद में वीर लोरीक देव के वंशज ही यूपी के बलिया से माइग्रेट कर बिहार में बस गए,बंगाल ग्रेजेटियर में बिहार में भोजवँशी यादवो का होने का वर्णन है पर समय के साथ वीर लोरीक देव के वंशज भोजवंशी यादव कृष्णोत (वृष्णि) और मधुरौत (मधु) गोत्र के यादवो में विलय हो गए।

बंगाल के Durgapur Midnapore Bardhawan और birbhum के जिलो को गोप भूमि या गोपगढ़ के नाम से भी जाना जाता है,जहाँ गोप यादवो के नारजोल,गुस्खरा,दुर्गापुर जैसे बड़े बड़े राजवँश रहे है जिनका धाक आज भी उन इलाके में कायम है,दुर्गापुर के ही सदगोप यादव महाराजा हरिवंश नारायण यदुवंशी ने बंगाल में अंग्रेजो के खिलाफ युद्धघोष का ऐलान किया था और वीरगती को युद्ध करते वे प्राप्त हो गए थे,बिहार की बात करे तो मधेपुरा,मधुबनी पूर्णिया के इलाको को यादव लैंड या गोप भूमि के नाम से जाना जाता है जहाँ नजरगंज,मुरहो,रानीपट्टी जैसे मधुवंशी गोप यादवो के रजवाड़े रहे है।महाराज मधु यादव के वंशज होने के कारण यह मधुरौत या मथुरौत कहलाए, देश के सबसे बड़े यादव राजवँश में से एक नजरगंज रियासत भी इनकी देन है जहाँ महाराजा मोहन लाल यादव जैसे वीरो ने जन्म लिया,नजरगंज राजवँश की धाक पुरे देश में थी इस राजवँश के राजा चौधरी पृथ्वी लाल चंद्र यादव ने देश के लिए अनेको trophies जीते,और all इंडिया यादव महासभा का आयोजन करवाया,इस राजवँश के पास दार्जिलिंग में में फ्लॉवर जैसे बड़े होटल रिजॉर्ट है तथा विदेशों में भी इनके कई आलिशान होटल है।

इनके अलावा बिहार में गोप यादवो के परसादी,गोलकपुर,हाथी जमींदारी,लंगोई,बेलवरगंज,खुशरहुपुर इत्यादि जैसे बड़े बड़े जमींदारी और रियासते रहे है,बांका के जमींदार अमर शहीद चौधरी महेन्द्र गोप का नाम तो अंग्रेजो के संसद में गूंजा था जिन्होंनो बांका बिहार में अंग्रेजो के विरुद्ध क्रान्ति की बिगुल बजाई थी और 5 सालो तक अंग्रेजो को भाड़ी टक्कर दी और कई हजारो अंग्रेजी सैनिको को मौत के घाट उतार दिया था।दानापुर(बिहार) रेजिमेंन्ट में भी सबसे ज्यादा गोप यादव ही भर्ती होते थे जिंहोने विश्व युद्ध और कारगिल जैसे खतरनाक युद्ध लड़े,दानापुर रेजिमेंन्ट में ही कृष्णोत गोत्रीय यादव जमींदार और सेनापति कुंवर रंजीत सिंह यादव ने क्रन्तिकारी बाबु कुँवर सिंह की सेना का नेतृत्व किया था और बाबू कुंवर सिंह के मृतुयु के बाद भी संघर्ष जारी रखा परन्तु क्षल से अंग्रेजो ने इन्हें बंदी बना लिया था और काला पानी की सजा दी थी।

सन 1911 में यदुवंशी क्षत्रिय समाज को संगठित करने के लिए बिहार के मधुरौत और कृष्णोत गोत्र के यदुवंशी क्षत्रीय जमींदारों ने राजा रास बिहारी मंडल,दामोदर राय,स्वयंवबर दास जी रईस एवं अन्य यदुवंशी ज़मीदारों के संग मिलकर और नज़रगंज प्रिंसली स्टेट पूर्णीया के यदुवंशी महाराजा चौधरी पृथ्वी लाल चंद्र यादव और रेवाड़ी नरेश राजा राव बलबीर सिंह बहादुर के कुशर नेतृत्व में बिहार में "क्षत्रिय यदुवंशी गोप महासभा" का गठन किया फिर सन 1925 में पूर्णिया और रेवाड़ी में all india yadav mahasabha का आयोजन भी करवाया।

राजनीती की बात करे तो गोप यादव राजनीती में अवल है,परसादी स्टेट के कृष्णोत गोत्रीय यादव जमींदार दरोगा प्रसाद राय और मुरहो स्टेट के मधुवंशी यादव जमींदार बाबु बीपी मंडल जी बिहार के मुख्य मंत्री रहे है,आपको बता दे की ओबीसी समाज को उसका हक मुरहो स्टेट के क्षत्रिय गोप यादव जमींदार बाबु बीपी मंडल यादव ही दिलवाए थे।बंगाल में सदगोप यादवो की भी राजनीतिक पकड़ अच्छी है। फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी पकड़ है,भोजपुरी अभिनेता और मनेर बिहार के हाथी जमींदारी के कृष्णोत गोत्रीय यादव राय साहब कुणाल सिंह यादव जी को भोजपुरी जगत का अमिताभ बच्चन कहा जाता है जो आजकल यदुकुल शिरोमणि वीर लोरीक देव महान की जीवनी पर फिल्म यदुवंशम द गॉर्ड ऑफ़ यूनिवर्स पर काम कर रहे है जो पुरे भारत में रिलीज की जाएगी,इस फिल्म का ट्रेलर साल के आखिरी महीने तक आने की उम्मीदें है।इन यदुवंशियो के नाम पर बड़े बड़े तीर्थ स्थल भी है भारत में जैदी गोपेश्वर महादेव,गोपपुरी इत्यादि।

तो मित्रो ऐसा रहा है रुतबा चंद्रवंशी क्षत्रित गोप अभीर यादवो का मित्रो आजकल गुजरात के भेड़ बकरी वाले गड़ेरिये और भीमते चिमटे भी फेसबुक पर गोप अभिर यादव लिखकर यादव बनने का नाकाम कोसिस कर रहे है पर इनको पता नहीं यादव बनने के लिए यदुवँश में अहीरानी के कोख से जन्म लेना पड़ता है बलिदान देना पड़ता है न की इतिहास चुराने से यादव बन जाओगे हे यदुवंशियो इन इतिहास चोरो से सावधान रहें और इनका अच्छे से इलाज करे।

जय माँ विंध्यावासिनी
जय यदुवंशम जय जगतगुरु कृष्णम

© - राय कृष्णा यदुवंशी व टीम यदुवंशी साम्राज्य

07/09/2020

मुगलों के नाजायज औलादों हमारे बाप दादाओं ने आरक्षण के लिए लाठियां खाई है। तुम्हारे तरहां मुगलों को भारत में बुलाकर उनको अपनी बेटीयां देकर मुगलों के दरबार और सेना में बड़े बड़े अफसर बनकर और मुगलों के अंतर्गत अपनी रियासतें चलाकर और देश को ८०० साल गुलाम बनाकर तो हमने आरक्षण नहीं लिया हैं ना हम लोगों ने तो ईमानदारी से आरक्षण लिया है।

06/09/2020

भगवान श्री कृष्ण की श्रद्धा में सदैव लीन रहने वाले कवि इशरदास रोहडिया(चारण), जिनका जन्म विक्रम संवत 1515 में राजस्थान के भादरेस गांव में हुआ था। जिन्होंने मुख्यतः 2 ग्रंथ लिखे हैं "हरिरस" और "देवयान"। यह आजसे 500 साल पहले ईशरदासजी द्वारा लिखे गए एक दुहे में स्पष्ट किया गया है कि कृष्ण भगवान का जन्म अहीर(यादव) कुल में हुआ था।

दुहा इस प्रकार है:-
"नारायण नारायणा, तारण तरण अहीर,
हुँ चारण हरिगुण चवां, वो तो सागर भरियो क्षीर।"

अर्थ:-
अहीर जाति में अवतार लेने वाले हे नारायण(श्री कृष्ण)! आप जगत के तारण तरण(सर्जक) हो, मैं चारण (आप श्री हरि के) गुणों का वर्णन करता हूँ, जो कि सागर(समुंदर) और दूध से भरा हुआ है।

जय श्रीकृष्ण वासुदेव यादव🚩
जय यदुवंश जय अहीराणा🚩

02/09/2020

आज #पेरियरवादी ललई सिंह यादव का जन्मदिन है उसको आज भीमते सूद्र मानसिकता और मिशनरीज के लोग हम क्षत्रिय अहिरो पर जबरन थोपने का प्रयास कर रहे है पर उनको मालूम नही है हम क्षत्रिय अहीर न उसको मानते है न कभी मानेंगे उसके

#निम्नलिखित कारण
1 हमारा महान इतिहास रहा है एक से एक देवताओ वीर राजाओ और यौद्धाओं ने हमारी जाती मैं जन्म लिया है
2 हमारे पुर्वज खुद भगवान श्री कृष्णा बलदाउ है इससे बड़ी गर्व की बात हमारे लिए कोई हो ही नही सकती हमारे लिए फिर हम भीमते बौद्ध ललई को क्यो माने
3 हम एक स्वाभिमानी बहादुर लड़ाकू जमीदार किसान क्षत्रिय कोम है जिसनेे हमारी जाती की बदनामी की हो हम उसको क्षत्रिय अहीर आदर्श कभी नही मानेंगे

4 उसके पिता को जातिके नियम तोड़ने पर यादव जाती से बहिस्कृत किया गया था मतलब उसको यादव जाती से कोई सम्बंध ही नही रहा था अगर कारण बता दिया बहिष्कार का तो तथाकथित भीमते और असली शूद्रो की भावना आहत हो सकती है

5 क्षत्रिय अहिरो द्वारा जाती बहिस्कृत करने के कारण उसने जलनवश अपने नाम से यादव उपनाम हटा के बौद्ध बन गया था अब ऐसे व्यक्ति का कोई लेना देना भी नही है क्षत्रिय यदुबंशी से

6 ललई सिंह के दादा बहुत बड़े जमीदार थे खुद ललई ने 110 बीघा का अंगूर का बाग भीमता बौद्ध बनने के बाद शूद्रो को दान दिया था इसका मतलब वो कोई न वो वंचित जाती से था न वंचित
परिवार से
7 इस जाति बहिस्कृत व्यक्ति जिसका पहले से ही क्षत्रियों अहिरो से कोई लेना देना नही था अब भीमते जबरन इसको हमारा आदर्श बनाकर क्यो पेश कर रहे है कारण है वो क्षत्रिय अहिरो का ब्रेनवाश करना चाहते है उनको बहुजन सूद्र बनाना चाहते है

मेरी जाती अपना क्षत्रिय इतिहास नही भूली वो एक मार्शल कोम है इसका भारत मे ही नही विश्व मे भी इतिहास है मेरी अहिरो से ये विनती है अपना लड़ाकू मार्शल गौरवशाली इतिहास पढ़े और दुसरो को भी बतावे ताकि इन सूद्र भीमता मानसिकता वालो से मेरी वीर अजेय मार्शल क्षत्रिय कोम की रक्षा हो सके और देश जाति को दुष्टों से बचा सके
वीर अहीर क्षत्रिय अहीर

thanks to #चौधरी सुजान सिंह यादव

Photos from कट्टर हिन्दू यदुवंशी क्षत्रिय's post 01/09/2020

आज ललाई सिंह जैसा बेहुदा नास्तिक व्यक्ति जिसने दुसरे समाज के लिए अपने आप को यादव मानें से इंकार कर दिया था उस बेहूदा समाज में कलंक डालने वाले व्यक्ती को आज हम इतना याद कर रहे हैं।
लेकिन १९१० में अहीर यदुवंशी क्षत्रिय महासभा बनाकर सभी यादव जातियों को एक करने वाले रेवाड़ी रियासत के राजा राव बलबीर सिंह और यादवों को १९९३ में ओबीसी आरक्षण दिलाने वाले मुरहो स्टेट के राजा शासब राय बी.पी.मंडल जी को कितने लोग याद करते हैं हमारे असली महापुरुष यह थे ना की ललाई जैसा नास्तिक जो अपने समाज का साथ छोड़ दुसरे समाज की चमचागिरी करें।

27/08/2020

जडेजा जादौन भाटी वह निच जाति के लोग हैं जिन्होंने प्राचिन काल में कहीं पर भी शासन नहीं किया है और ना ही इनका कहीं पर सिल्लालेख मोजूद है और ना ही इन्होंने अहीरों के तरहां कुषाण हुण,तुर्क, मुगल और अंग्रेजो से युद्ध लड़ा है बस इनको मुगल काल में राजस्थान में मुगलों के द्वारा इनको कुछ रियासतें मिल गई करौली और जैसलमेर छोड़ भाटी हर जगहा ऊंट चराते है और जादौन ब्रज छेत्र में बकरी पालते हैं। जब की ब्रज छेत्र में अहीरों के पास ६ से ७ रियासतें हैं और जमींदारी है। अरे जडेजा जादौन भाटी तो वह छोटी जाति के लोग हैं की जब बड़े बड़े भगवताचार्य और चारण मंच में बेटकर अहीरों को कृष्णावंशी और योध्दा बताते हैं तो यह लोग निचे बेटकर ताली बजाते हैं और आज यह लोग हमारी बराबरी कर रहे हैं।😊

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