04/07/2026
आयुर्वेद के अनुसार उत्तम दातून के गुण
* ताज़ा और हरा होना चाहिए।
* मध्यम मोटाई का होना चाहिए।
* रसयुक्त (नम) होना चाहिए।
* स्वाद में कड़वा, तिक्त या कषाय होना चाहिए।
* छाल चिकनी हो तथा कीटों से रहित हो।
* एक सिरा चबाने योग्य (रेशेदार) होना चाहिए।
* लंबाई लगभग 8–10 इंच होनी चाहिए।
दातून के लाभ
* दाँतों को मजबूत बनाता है और कीड़ों से बचाता है।
* मसूड़ों को स्वस्थ एवं मजबूत रखता है।
* मुँह की दुर्गंध दूर करने में सहायक है।
* लार का स्राव बढ़ाकर पाचन में सहायता करता है।
* वात, पित्त और कफ तीनों दोषों के संतुलन में सहायक माना गया है।
* पायरिया, मसूड़ों की सूजन और मसूड़ों से रक्तस्राव जैसी समस्याओं में लाभकारी माना गया है।
दातून के लिए उपयोगी वृक्ष
* नीम
* बबूल
* खैर
* अर्जुन
* करंज
* जामुन
* आम
* पीपल
दातून करने की विधि
* सुबह खाली पेट दातून करें।
* एक सिरे को चबाकर रेशेदार बना लें।
* धीरे-धीरे सभी दाँतों और मसूड़ों की सफाई करें।
* अंत में गुनगुने पानी से कुल्ला करें।
आयुर्वेदिक संदर्भ
📖 चरक संहिता - सूत्रस्थान 25/40–41
दातून को दंतधावन का उत्तम साधन बताया गया है।
📖 सुश्रुत संहिता - सूत्रस्थान 2/2
दातून से मुखशुद्धि, दंतबल तथा रोगनाश का वर्णन मिलता है।
📖 अष्टाङ्ग हृदयम् - सूत्रस्थान 5/41
तिक्त एवं कषाय रसयुक्त दातून को मुख और दाँतों के लिए हितकारी बताया गया है।
* प्रकृति की गोद में, आयुर्वेद के साथ।