07/08/2026
""मेरी दुकान रहने दो""
मेरी रोज़ी-रोटी को मारकर
विकास का नाम रहने दो...
सड़क को, साहब,
चौड़ी न करो—
मेरी दुकान रहने दो।
ईंटों का शहर तो
फिर भी बस जाएगा,
मेरे बच्चों की भूख का भी
थोड़ा ध्यान रहने दो।
— अभिलाषा अग्रवाल "आशाएं"
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