29/10/2024
'सर्वभाषा पुस्तकोत्सव' में हमारे पास हर विधा की पुस्तकें आपके ऑर्डर की प्रतीक्षा में हैं -
1. कथा - कहानी-संग्रह, लघुकथा-संग्रह, उपन्यास, विज्ञान-गल्प, मिथक, फँतासी साहित्य इत्यादि
2.कथेतर - जीवनी-आत्मकथा, राजनीतिक, ऐतिहासिक, सामाजिक तथ्यपरक साहित्य, यात्रा-वृत्तांत, व्यंग्य साहित्य, ट्रू-्एकाउंट, संस्मरण, प्रेरक इत्यादि।
3.कविता - कविता, गीत, ग़ज़ल
4.अनुवाद- 38 से अधिक भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में श्रेष्ठ व पुरस्कृत पुस्तकें
25/09/2024
*Urgent Requirement*
*DTP Operator-2*
(Hindi Typing Speed 40wpm)
Sarva Bhasha Trust
(Book Publishing Service)
Location: Dwarka Sector - 5, Opposite JDM Apartment
Rajapuri, Uttam Nagar, New Delhi- 59
Write to [email protected]
Call - 011-35853664
WhatsApp- 9205461387
31/07/2024
सादर आमंत्रण, आइएगा अवश्य
30/07/2024
स्वप्नदर्शी भोजपुरी कवि जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी जी की पुस्तक 'दियारिया जरत रहे' अब अमेज़न पर उपलब्ध है ।
लिंक- https://www.amazon.in/dp/9395518421
13/05/2024
माधव कौशिक की शायरी फैसले देती है और सवाल भी करती है। उसके भीतर मनुष्यता के गिरते हुए सूचकांक का मलाल भी है। तभी वे फरमाते हैं कि : `मैं उस इंसान को इंसान कैसे मान लूं माधव /सड़क पर जो किसी को भी गिरा कर भूल जाता है।` वह जानता है शायरी किसी शहंशाह और सामंत के आगे नहीं, मजलूमों के आगे झुकती है । उनके अंदाज ए बयां की मिसाल यह कि उनकी शायरी लफ्जों की सादगी से खुशहाल दिखती है । वह भारतीय आबोहवा में धुली और पगी है। हमारी आत्मा के निर्मल एकांत में वह हमारे ही वुजूद से बतियाती और यथार्थ से गुफ्तगू करती हुई दिखती है। `कड़ी धूप में नंगे पैरों` की चुनिंदा ग़ज़लें इसी बात का प्रमाण हैं।
Link- https://www.amazon.in/dp/811920851X?ref=myi_title_dp
10/05/2024
लोकगीत-सी लड़की' पर डॉ चन्द्रकला त्रिपाठी जी की टिप्पणी आई है । वे लिखती हैं-
"क्या लिखती है यह लोकगीत सी लड़की,लिखती है कि वहीं बसी रहती है! पचरा हो,प्रभाती हो,जांत हो कि कजरी उसे सब पता है। जीवन जब कभी नदी में नहा कर आया नया नया सा मिलता है तो उसका पता संभाल लेती है और फिर उसे चिट्ठी लिखती है।हर चिट्ठी में कलेजा उड़ेल देती है। भाषा को नाव की तरह आवेगों के हवाले कर देती है और दरअसल आवेग में ही रहती है। ऐसी चिट्ठियों के पतों से उसकी पृथ्वी भरी हुई है।
पृथ्वी के हर छोर से उसके घर बुलाया करते हैं।घर वे ऋतुओं की तरह खुले हुए हैं। अपने सारे ठोस को बदल कर तरल बह उठते हैं वे घर, जहां यह बयार की तरह पहुंचती है।
सारी बातों के बीच सरगोशी से पूछती है -' स्प्रिचुअलटी का क्या चल रहा है?' सिर्फ वह जानती है कि मैं उसके हवाले हो चुकी हूं,कब से? यह भी वही जानती है।
किताब के हर पन्ने पर हरे रंग के बारे में सोचती और उसी में बसी हुई लड़की मिलेगी। हम दोनों हरे में बसते हैं।हम दोनों की पैदाइश का महीना जून है,जब हरे रंग की कोंख तक ताप उतर आता है। बहुत सारे संयोगों से भरी है हमारी निकटता। सबसे बड़ा मेल यह है कि आकृति बहुत मनुष्य है। उसे इस सुंदर सम्मोहक किताब के लिए बहुत बधाई।"
लिंक- https://www.amazon.in/dp/8196243294?ref=myi_title_dp
10/05/2024
यह माना गया है कि आर्य भारत के मूल निवासी नहीं थे | कुछ इतिहासविद कहते हैं कि आर्यों का वास्तविक घर मध्य एशिया में था | दूसरे इतिहासविदों का मत था कि इनका वास्तविक घर दक्षिणी रूस या दक्षिण-पूर्व यूरोप में था | वे आर्य जो भारत में बस गए थे, इंडो-आर्यन कहलाए | 'आर्यों का जीवन एवं इतिहास' यह एक ऐतिहासिक पुस्तक है। लिंक- https://www.amazon.in/dp/8196210183?ref=myi_title_dp
10/05/2024
विद्वान, चिंतक और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी डॉ. सन्त कुमार त्रिपाठी का लोकप्रिय उपन्यास 'तुम्हें जाना कहाँ है' जीवन के अनेक पहलुओं का दस्तावेज़ तो है ही, जीवन का मार्ग भी है, जीवन की सीख भी है। इस पुस्तक पर वरिष्ठ साहित्यकार श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी ने चर्चा करते हुए कहा था, "शब्द-शब्द में संवाद है और अक्षर-अक्षर में माटी की सोंधी महक है । 'तुम्हें जाना कहाँ है' उपन्यास जीवन-राग से जीवन-वैराग की कहानी होते हुए भी मोह और विछोह से अलग की कहानी है।
लिंक - https://www.amazon.in/dp/9395518405?ref=myi_title_dp
10/05/2024
गए तीन दशकों से लिख रही प्रो.रचना शर्मा की लेखनी सशक्त है। कविता जिस कथ्य और संवेदना के माध्यम से लोक तक पहुंचती है, उससे जुड़ा कवि ही कविता के साथ साथ लोक के साथ भी न्याय करता है। कवि का न्याय संपूर्ण समाज के हित में होता है; वह निज और सामाजिक के भेद को भुला कर ब्रह्मांडव्यापी मानवीय संवेदना का विन्यास रचता है। कवि की बगिया में निरंतर पल्लव, पत्ते, टहनियां, फूल विकास पाते रहते हैं। कवि का काम जीवनानुभव, प्रकृति और दृश्य दृश्यांतर में व्याप्त उन तत्वों की खोज करनी होती है तथा उसे अपनी भाषा व शैली में व्यक्त करना होता है जिससे सृष्टि को नया अर्थ मिले, शब्द को नए विचार मिलें। रचना शर्मा की कविता उत्तरोत्तर परिष्कृति की कविता है। 'मेरे फूल, मेरी टहनियां' उनकी बहुविध भाव संसार का ज्ञापन हैं।
लिंक- https://www.amazon.in/dp/9395518863?ref=myi_title_dp
27/04/2024
मुनव्वर राना: गालिब और मीर से होती हुई आज की शायरी जिस मुकाम पर आ पहुँची है, मुनव्वर राना उसकी नई कलम हैं। अपने सरोकारों को लेकर सदैव संजीदा रहे राना की शायरी बोलचाल वाली है। ‘ग़ज़ल में हम कभी भरती की गुलकारी नहीं लाते' के ऐलान पर कायम राना ने यथार्थ को इतने करीब से देखा है जिसकी मिसाल उनकी शायरी में कदम-कदम पर मिलती है। जज़्बाती शायरी के समर्थक राना मानते हैं कि उनकी शायरी ओल्ड एज होम के खिलाफ ऐलाने जंग है। राना की कलम में अवध की मिट्टी की खुशबू है तो उनके अंतःकरण में माँओं, बेटियों, लड़कियों और बुजुर्गों के लिए हमदर्दी | उनकी संवेदना का आँगन विशाल है। उनके भीतर एक कौमी शायर सांस लेता है, ‘मुहाजिरनामा' जिसकी एक उम्दा मिसाल है। कहना न होगा कि सभी पीढ़ियों के लोग राना की शायरी के मुरीद हैं। 'ग़ज़ल में आपबीती' राना की बेहतरीन ग़ज़लों का चयन है।
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GAZAL MAIN AAPBITI
मुनव्वर राना की क़लम की स्याही में अवध की मिट्टी की ख़ुशबू है तो उनकी संवेदना में माँओं, बच्चों, लड़कियों और बुजुर्गो....
21/04/2024
आदरणीय सर को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ
02/12/2023
'पुस्तकायन' (साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली) में हमारे स्टॉल (स्टॉल नं-01) पर Sahitya Akademi