डोनाल्ड ट्रंप की गप्पें, अमेरिका की फीकी चमक और भारत की गरजती चुप्पी
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एक ज़माना था जब अमेरिका बोलता था और दुनिया सुनती थी। लेकिन अब हालात कुछ और कह रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता जब बार-बार मंच पर आकर ये कहें कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान का युद्ध रोका, तो लगता है जैसे कोई फिल्मी डायलॉग दे रहा हो — पर अफ़सोस, ये सियासत है, सिनेमा नहीं। अमेरिका अब भी दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त है, इसमें दो राय नहीं। उसकी सेना, उसकी अर्थव्यवस्था, उसकी टेक्नोलॉजी — सब टॉप क्लास है। चीन और रूस जैसे देश अब भी उससे पीछे हैं, लेकिन अब उसकी चमक पहले जैसी नहीं रह गई।
डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति बने थे, तो उन्होंने एक ही बात बार-बार कही — "हम जंग नहीं चाहते।" और मानना पड़ेगा, उनके पहले कार्यकाल में कोई नया युद्ध शुरू नहीं हुआ। लेकिन अब, जब वो फिर से सत्ता में लौटने का सपना देख रहे हैं, तो हर तरफ आग ही आग है — रूस-यूक्रेन से लेकर इजराइल-हमास तक। ट्रंप दावा करते हैं कि अगर वो राष्ट्रपति होते तो सब कुछ शांत होता। लेकिन अब तक उन्होंने किसी भी मोर्चे पर कोई ठोस पहल नहीं की। उल्टा, उनके झूठे दावों ने अमेरिका के राष्ट्रपति पद की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका की बड़ी कमाई अब हथियारों से होती है। वो मिडिल ईस्ट के देशों को अरबों डॉलर के हथियार बेचता है, और ये सौदे डर के नाम पर होते हैं। कभी ईरान का डर दिखा कर, कभी आतंकवाद का। सऊदी अरब को जितने हथियार अमेरिका ने बेचे हैं, वो भारत के पूरे रक्षा बजट से भी ज्यादा हैं। ये वही खेल है जिसमें जंग भले न हो, लेकिन जंग का माहौल बना रहे — तभी तो धंधा चलता है।
लेकिन ट्रंप की सबसे मज़ेदार बात तब सामने आई जब उन्होंने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध रोक दिया। भारत ने सीधा कहा — "कोई बातचीत नहीं हुई, कोई डील नहीं हुई।" ट्रंप चाहें जितनी बार दावा करें, भारत ने उन्हें कभी श्रेय नहीं दिया। पाकिस्तान जरूर उनकी तारीफ कर बैठा, क्योंकि उन्हें शायद कोई और सुन नहीं रहा। भारत ने ना सिर्फ चुप्पी साधी, बल्कि उस चुप्पी में भी गरज थी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को चिन्हित कर लिया, रास्ते बंद कर दिए और दुनिया को दिखा दिया कि अब की बार भारत चुप नहीं बैठेगा, लेकिन उसके फैसले अब किसी विदेशी दबाव से नहीं होंगे।
ट्रंप की बेताबी ये बताती है कि उन्हें किसी भी तरह से श्रेय चाहिए। चाहे रूस-यूक्रेन हो या भारत-पाकिस्तान, हर जगह वो बस अपनी पीठ थपथपाना चाहते हैं। लेकिन भारत अब उस दौर में नहीं है जहाँ उसे अमेरिका की मुहर चाहिए हो। "ऑपरेशन सिंदूर" अभी रुका नहीं है, बस भारत ने वक्त तय करने का अधिकार अपने पास रखा है। अमेरिका क्या कहता है, अब वो मायने नहीं रखता।
आज भारत की डिफेंस इंडस्ट्री इतनी मजबूत हो गई है कि दूसरे देश उससे हथियार खरीदना चाहते हैं। ये कोई रातों-रात नहीं हुआ — ये उस लीडरशिप का कमाल है जो फैसले खुद लेती है और दुनिया को दिखाती है कि नया भारत झुकता नहीं, अपनी चाल खुद चलता है। अब कोई भी देश भारत को “पीड़ित” और पाकिस्तान को “आतंकवादी” कह कर बराबरी पर खड़ा नहीं कर सकता। जो करेगा, वो भारत की चुप्पी से ही समझ जाएगा कि उसका स्तर क्या है।
डोनाल्ड ट्रंप की गप्पों से अब भारत पर कोई असर नहीं होता। आज भारत का सिर ऊँचा है, और अमेरिका... अब खुद को साबित करने की कोशिश में लगा है। ज़माना बदल चुका है। अब तालियाँ तब बजती हैं जब भारत बोले, न कि जब अमेरिका दावा करे।
जय हिन्द 🌹
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