Vijay Partap

Vijay Partap

Share

vijay Partap

Photos from Vijay Partap's post 09/04/2022

सम्राट अशोक के जन्मदिन की हार्दिक मंगलकामनाएं
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
1. जिस राजा का चक्र राष्ट्रीय ध्वज में है।
2. जिस राजा के चार सिंह मुखी के चिन्ह को राष्टीय मुद्रा माना जाता है।
3. जिस राजा को दुनिया का सर्वोत्तम राजा माना गया।
4. जिस राजा के कारण भारत का नाम पूरी दुनिया में उज्ज्वल हुआ।
5. जिसके नाम से सर्वोच्च पुरुस्कार अशोक चक्र दिया जाता है।
6. जिस राजा का साम्राज्य अफगानिस्तान और ईरान तक फैला था।
7. भारत का पहला प्राणी चिकित्सालय जिसके शासन में खुला।
8. पर्यावरण के प्रति जागरूकता अभियान का सर्व प्रथम जिस राजा ने शुरू किया।
9. जिस राजा के कारण बौद्ध धम्म विश्वव्यापी हुआ।

उस महान चक्रवर्ती राजा को प्रियदर्शी सम्राट अशोक के नाम से पूरी दुनिया मानती है।

उस महान सम्राट अशोक की जयंती को धूमधाम से मनाएं
(सम्राट अशोक जयंती - 09अप्रैल2022 )

सभी साथियों को भारत की शान अशोक महान के जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं ।

05/04/2022

जन अधिकार पार्टी जिंदाबाद
मा.बाबू सिंह कुशवाहा जी जिंदाबाद

#भागीदारी_परिवर्तन_मोर्चा #जिसकी_जितनी_संख्या_भारी_उसकी_उतनी_हिस्सेदारी िकार_पार्टी #मिशन_2024

16/03/2022
Photos from Vijay Partap's post 07/01/2022

के #पूर्व_कोऑपरेटिव_चेयरमैन ार के के #जालौन_जिला_अध्यक्ष #श्री_मूल_शरण_कुशवाहा_जी साथ में #श्री_ब्रजमोहन_कुशवाहा_जी( #मंडल_कोऑर्डिनेट) ोड़कर #आज #हजारों_समर्थकों के साथ िकार_पार्टी #ज्वाइन की
आपको बहुत-बहुत बधाई
िकार_पार्टी #माननीय_बाबू_सिंह_कुशवाहा_जी
#

Photos from Vijay Partap's post 05/01/2022

पूर्व DIG जवाहर सिंह मौर्य की पत्नी मृदुला सिंह मौर्य ने जन अधिकार पार्टी JOIN की और कुर्सी विधानसभा से प्रत्याशी बनाया गया .... अभी तो JOINING शुरू हुई है ... जल्द ही और धमाके दिखाई देंगें💪💪💪
*P
#चुनाव2022

03/01/2022

*राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले*
-03 जनवरी, 1831 (जयंती विशेष)

महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में माली जाति में 3 जनवरी 1831 को जन्‍मी सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थी। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले शिक्षक होने के साथ भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता, समाज सुधारक और मराठी कवयित्री भी थी। इन्‍हें बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए समाज का कड़ा विरोध झेलना पड़ा था। कई बार तो ऐसा भी हुआ जब इन्हें समाज के ठेकेदारों से पत्थर भी खाने पड़े।

आजादी के पहले तक भारत में शूद्र और स्त्री की गिनती दोयम दर्जे में होती थी। आज की तरह उन्‍हें शिक्षा का अधिकार नहीं था। वहीं अगर बात 18वीं सदी की करें तो उस समय शूद्र और स्त्री का स्कूल जाना भी पाप समझा जाता था। ऐसे समय में सावित्रीबाई फुले ने जो कर दिखाया वह कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। वह जब स्कूल पढ़ने जाती थीं तो लोग उन पर पत्थर फेंकते थे। इस सब के बावजूद वह अपने लक्ष्य से कभी नहीं भटकीं और लड़कियों व महिलाओं को शिक्षा का हक दिलाया। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है। भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई ने अपने पति समाजसेवी महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर 1848 में उन्होंने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की थी।

*नौ साल की उम्र में हो गया था विवाह-*

सावित्रीबाई का विवाह बहुत ही छोटी उम्र में हो गया था। उनका विवाह महज नौ साल की उम्र में वर्ष 1940 में ज्योतिराव फुले से हो गया। शादी के बाद वह जल्द ही अपने पति के साथ पुणे आ गईं। विवाह के समय वह पढ़ी-लिखी नहीं थीं। लेकिन पढ़ाई में उनका मन बहुत लगता था। उनके पढ़ने और सीखने की लगन से प्रभावित होकर उनके पति ने उन्हें आगे पढ़ना और लिखना सिखाया। सावित्रीबाई ने अहमदनगर और पुणे में शिक्षक बनने का प्रशिक्षण लिया और एक योग्य शिक्षिका बनीं।

*9 छात्राओं के लिए पहले स्‍कूल की स्‍थापना की-*

सावित्रीबाई ने 3 जनवरी 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ महिलाओं के लिए पहले स्‍कूल की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पांच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। तत्कालीन सरकार ने इन्हे सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया।

*लोग पत्‍थर मारते, गंदगी फेंकते-*

भारत में आजादी से पहले समाज के अंदर छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह और विधवा-विवाह जैसी कुरीतियां व्याप्त थी। सावित्रीबाई फुले का जीवन बेहद ही मुश्किलों भरा रहा। महिलाओं के उत्थान के लिए काम करने, छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें एक बड़े वर्ग द्वारा विरोध भी झेलना पड़ा। वह स्कूल जाती थीं, तो उनके विरोधी उन्हें पत्थर मारते और उनपर गंदगी फेंकते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुंच कर गंदी हुई साड़ी बदल लेती थीं। आज से एक सदी पहले जब शूद्र और स्त्री का शिक्षा ग्रहण करना महापाप माना जाता था उस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में पहला बालिका विद्यालय खोल पूरे देश में एक नई पहल की शुरुआत की।

*समाज में महिलाओं को हक दिलाना था उनका लक्ष्य-*

देश में विधवाओं की दुर्दशा भी सावित्रीबाई फुले को बहुत दुख पहुंचाती थी। इसलिए 1854 में उन्होंने विधवाओं के लिए एक आश्रय खोला। वर्षों के निरंतर सुधार के बाद 1864 में इसे एक बड़े आश्रय में बदलने में सफल रहीं। उनके इस आश्रय गृह में निराश्रित महिलाओं, विधवाओं और उन बाल बहुओं को जगह मिलने लगी जिनको उनके परिवार वालों ने छोड़ दिया था। सावित्रीबाई उन सभी को पढ़ाती लिखाती थीं। उन्होंने इस संस्था में आश्रित एक विधवा के बेटे यशवंतराव को भी गोद लिया था। उस समय आम गांवों में कुंए पर पानी लेने के लिए अतिशूद्र या नीच जाति के लोगों का जाना वर्जित था। यह बात उन्हें और उनके पति को बहुत परेशान करती थी। इसलिए उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर एक कुआं खोदा ताकि वह लोग भी आसानी से पानी ले सकें। उनके इस कदम का उस समय खूब विरोध भी हुआ।

*अपने पति का किया अंतिम संस्कार, खुद का प्‍लेग से निधन-*

सावित्रीबाई के पति ज्योतिराव का निधन 1890 में हो गया। उस समय उन्‍होंने सभी सामाजिक मानदंडों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने अपने पति का अंतिम संस्कार किया और उनकी चिता को अग्नि दी। इसके करीब सात साल बाद जब 1897 में पूरे महाराष्ट्र में प्लेग की बीमारी फैला तो वे प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद करने निकल पड़ी, इस दौरान प्लेग की बीमारी से पीड़ित एक अछूत जाति के बच्चे को पीठ पर लादकर लाने की वजह से वे खुद भी प्लेग की शिकार हो गई, इस तरह शिक्षा ममता समता की देवी जैसे विशेषणों को चरितार्थ करते हुए उन्होंने 10 मार्च 1897 को अंतिम सांस ली।
---------------

🇮🇳🇮🇳🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Photos from Vijay Partap's post 02/01/2022

जन अधिकार पार्टी के तत्वाधान में संचालित #बुंदेलखंड_जन_अधिकार_यात्रा राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय बाबू सिंह कुशवाहा जी की प्रेरणा एवं प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र निषाद, प्रदेश महासचिव रवींद्र ओमरे, झांसी मंडल प्रभारी श्री कालीचरन कुशवाहा, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी श्री शिवचरण कुशवाहा आदि सम्मानित पार्टी पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में जिला कार्यालय अतर्रा बांदा से आरंभ होकर विभिन्न जनपदों से होकर आज दिनांक 02 जनवरी 2021 को जोल्हूपुर नामक स्थान पर पहुंची । स्थानीय लोगों द्वारा यात्रा का अनेकों जगहों पर बहुत ही उत्साह पूर्वक एवं गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान मोहन कुशवाहा, रामकुमार सोनी, राजीव अहिरवार, जालौन जिला सचिव मोनू कुशवाहा आदि सम्मानित लोग उपस्थित रहे ।

01/01/2022

आप सभी देशवासियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

Want your business to be the top-listed Government Service in Ghazipur?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Address


Ghazipur