25/06/2026
📍 ग्राम - कटरिया, ज़िला गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश
इस वीडियो में आपको वॉलीबॉल खेलते कुछ बच्चे दिख रहे हैं ना?
ज़रा ठहरकर देखिए…
कुछ और भी दिख रहा है।
यह सिर्फ़ खेल नहीं है।
यह मिट्टी में जन्मे सपनों की उड़ान है।
यह उन पैरों की कहानी है जिनमें स्पोर्ट्स शूज़ नहीं, चप्पल हैं; पर चाल किसी मंझे हुए खिलाड़ी जैसी है।
यह उन हाथों की ताकत है, जिन्हें शायद महंगे कोच नहीं मिले, पर मेहनत ने खुद ही उनका गुरु बनना स्वीकार कर लिया।
हम अक्सर सिर्फ़ गेंद को उछलते देखते हैं,
लेकिन उसके साथ उछलती हुई उम्मीद नहीं देख पाते।
हम नहीं देख पाते वह दृढ़ इच्छाशक्ति, जो संसाधनों की कमी को बहाना नहीं बनने देती।
हम नहीं देख पाते वह जिद, जो मोबाइल की रीलों, बेकार आदतों और भटकाव से दूर रहकर शरीर को पसीने में और मन को लक्ष्य में ढाल रही है।
हम नहीं देख पाते कि ऐसे ही गांवों में किसान केवल खेतों में फसल नहीं उगाते,
वे देश के लिए खिलाड़ी भी तैयार करते हैं, सैनिक भी तैयार करते हैं, और सबसे बढ़कर चरित्रवान नागरिक तैयार करते हैं।
इन बच्चों की आंखों में जो चमक है, वह किसी स्टेडियम की लाइट से कम नहीं।
इनकी हंसी में गांव की सादगी है, इनके खेल में अनुशासन है, और इनके पसीने में भारत का भविष्य है।
कटरिया की यह धरती बता रही है कि प्रतिभा शहरों की गलियों में ही नहीं, गांव की मिट्टी में भी सांस लेती है।
बस उसे देखने वाली आंखें और सहारा देने वाले हाथ चाहिए।
कभी-कभी ऐसे दृश्य आंखों के कोने नम कर देते हैं, क्योंकि इनमें कमी नहीं दिखती-इनमें भारत दिखता है। 🇮🇳