Mukesh kumar Rai

Mukesh kumar Rai

Share

Police officer

04/03/2026

रंगों से एक बात सीखी जानी चाहिए ,
कि अगर निखरना है तो बिखरना जरूरी है ।
#फॉलोअर्स

25/01/2026

अब ये किसने बना दिया #ग्रीनलैंड

31/12/2025
27/10/2025

*एक ऐसी पूजा जिसमें कोई* *पुजारी नहीं होता,*
*जिसमें देवता प्रत्यक्ष हैं*
*जिसमें ढूबते सूर्य को भी पूजते हैं,*
*जिसमें व्रती जाति समुदाय से परे है,*
*जिसमें केवल लोक गीत गाते हैं,*
*जिसमें पकवान घर पर बनते हैं*,
*जिसमें घाटों पर कोई ऊँच नीच नहीं है,*
*जिसमें प्रसाद अमीर गरीब सभी श्रद्धा से ग्रहण करते हैं।*
*आप को छठ पूजा की हार्दिक शुभ कामनाएं 🙏*

22/09/2025

सुख, शांति और समृद्धि की, मंगलमय कामनाओं के साथ, आप और आप के परिवार को शारदीय नवरात्र की हार्दिक मंगल कामनाएं...🙏🙏🙏

13/09/2025

पिताजी अब उम्रदराज़ हो गए थे। चलते समय उनका संतुलन बिगड़ जाता, इसलिए वे दीवार को सहारा बना लेते।
जहाँ-जहाँ उनकी हथेलियाँ दीवार से टकरातीं, वहाँ पेंट घिस जाता और दीवार पर उनकी उंगलियों के हल्के-हल्के निशान रह जाते।

मेरी पत्नी अक्सर कहती—“दीवार कितनी गंदी दिखती है, कुछ तो करो।”
मैं चुप रहता, पर अंदर ही अंदर खीज भी महसूस करता।

एक बार पिताजी ने सिर दर्द के कारण बालों में तेल लगाया।
उस दिन चलते-चलते दीवार पर उनके हाथ से तेल के दाग पड़ गए।
पत्नी की झुंझलाहट और बढ़ गई। उसने मुझसे कहा—“अब तो हद हो गई।”

गुस्से में मैंने भी पिताजी को डाँट दिया। कहा—“आप दीवार मत पकड़ा करो, बिना सहारे चलने की कोशिश कीजिए।”
मेरे शब्दों ने उनका मन तोड़ दिया। वे चुप हो गए, और उनके चेहरे पर गहरी उदासी उतर आई।

उस दिन के बाद उन्होंने सचमुच दीवार पकड़ना छोड़ दिया।
लेकिन एक दिन वे अचानक लड़खड़ाकर गिर पड़े।
गिरने के बाद फिर कभी ठीक से खड़े नहीं हो पाए।
कुछ ही महीनों में वे हमें हमेशा के लिए छोड़कर चले गए।

मैं अंदर ही अंदर अपराधबोध से भर गया।
काश उस दिन मैंने कठोर शब्द न कहे होते… शायद वे और कुछ साल हमारे साथ रहते।

कई साल बीते। घर की पुताई का समय आया।
पेंटर आया तो मेरा बेटा, जो अपने दादाजी से बहुत जुड़ा हुआ था, बोला—
“इन उंगलियों के निशान मत मिटाना, ये दादाजी की यादें हैं।”

पेंटर भावुक हो गया। उसने कहा—
“इन निशानों को मैं सजाऊँगा, इन्हें और भी खास बना दूँगा।”
और सचमुच उसने उन हाथों के निशानों को एक सुंदर डिज़ाइन का रूप दे दिया।

धीरे-धीरे वे दीवारें हमारे घर की शान बन गईं।
आने वाला हर मेहमान कहता—“ये तो अनोखा और दिल छू लेने वाला सजावट है।”

समय का पहिया घूमता है।
अब मैं भी बूढ़ा हो चुका हूँ।
पैरों में कमजोरी है, चलते समय दीवार का सहारा लेता हूँ।

एक दिन मैंने याद किया कि मैंने अपने पिता को क्या कहा था।
मन में अपराधबोध जागा और मैंने बिना सहारे चलने की कोशिश की।
लेकिन तभी मेरा बेटा दौड़कर आया और बोला—
“पापा, दीवार पकड़ लीजिए… कहीं गिर न जाएँ।”

उसके शब्द सुनते ही मेरी आँखें भर आईं।
तभी मेरी पोती नन्हें कदमों से आई और मासूमियत से बोली—
“दादा जी, दीवार क्यों पकड़ते हो? मेरा कंधा पकड़ो न…”

मैं काँपते हाथ से उसका कंधा थाम लिया।
वह मुझे धीरे-धीरे सोफे तक ले आई।
उसकी मासूमियत ने मेरी आँखों से आँसू बहा दिए।

फिर उसने अपनी कॉपी खोलकर दिखाई।
उसमें बनाई हुई तस्वीर—दीवार पर बने मेरे पिताजी के हाथों के निशान।
नीचे लिखा था—
“अगर हर बच्चा अपने बड़ों का ऐसे सहारा बने तो कोई बूढ़ा अकेला नहीं होगा।”

मैं भीतर जाकर पिता जी की याद में रो पड़ा और मन ही मन उनसे माफी माँगी।

समय किसी को बख्शता नहीं।
आज जो जवान हैं, कल वे भी उम्र के इस पड़ाव से गुजरेंगे।
आओ, अपने बड़ों को सम्मान दें, उनकी तकलीफ़ समझें, और अपने बच्चों को भी यह सीख दें कि—
*बड़ों का सहारा बनना ही सबसे बड़ी सेवा है, यही सच्ची श्रद्धा है, यही पितरों का श्राद्ध है।*

11/09/2025

'मैं भी काफिर तू भी काफिर, मैं भी काफिर, तू भी काफिर,
फूलों की खुशबू भी काफिर, शब्दों का जादू भी काफिर ,
यह भी काफिर, वह भी काफिर, फैज और मंटो भी काफिर,
नूरजहां का गाना काफिर, मैकडोनाल्ड का खाना काफिर
बर्गर काफिर, कोक भी काफिर, हंसी गुनाह और जोक भी काफिर
तबला काफिर, ढोल भी काफिर, प्यार भरे दो बोल भी काफिर
सुर भी काफिर, ताल भी काफिर, भांगड़ा, नाच, धमाल भी काफिर
दादरा, ठुमरी, भैरवी काफिर, काफी और खयाल भी काफिर
वारिस शाह की हीर भी काफिर, चाहत की जंजीर भी काफिर
जिंदा-मुर्दा पीर भी काफिर, भेंट नियाज की खीर भी काफिर
बेटे का बस्ता भी काफिर, बेटी की गुड़िया भी काफिर
हंसना-रोना कुफ्र का सौदा, गम भी काफिर, खुशियां भी काफिर
जींस और गिटार भी काफिर, टखनों से नीचे बांधो तो
अपनी यह सलवार भी काफिर, कला और कलाकार भी काफिर
जो मेरी धमकी न छापे, वह सारे अखबार भी काफिर
यूनिवर्सिटी के अंदर काफिर, डार्विन का बंदर भी काफिर
फ्रायड पढ़ाने वाले काफिर, मार्क्स के सब मतवाले काफिर
मेले-ठेले कुफ्र का धंधा, गाने-बाजे सारे फंदा
मंदिर में तो बुत होता है, मस्जिद का भी हाल बुरा है
कुछ मस्जिद के बाहर काफिर, कुछ मस्जिद के अंदर काफिर
मुस्लिम देशों में मुस्लिम भी काफिर, गैर मुस्लिम तो हैं ही काफिर
काफिर काफिर मैं भी काफिर, काफिर-काफिर तू भी काफिर,
काफिर काफिर हम दोनों काफिर, काफिर काफिर सारा जहाँ ही काफिर। #कापी पेस्ट

24/04/2025

"छीनता हो स्वत्व कोई, और तू त्याग-तप के काम ले — यह पाप है।
पुण्य है — विच्छिन्न कर देना उसे, बढ़ रहा तेरी तरफ जो हाथ हो।"
#राष्ट्रकवि @पहलगाम

30/03/2025

🙏🙏जय हो 🙏🙏

22/03/2025

सामने वाले को हल्का जान कर भारी हैं आप,
आप का मे'यार देखा कितने मे'यारी हैं आप..

उफ़ तलक करते नहीं ज़िल्ल-ए-इलाही के ख़िलाफ़,
आप को दरबार की 'आदत है दरबारी हैं आप…
कापी पेस्ट 🙏🙏🙏

16/12/2024

मुझे अश्क़ छुपाने में कितनी देर लगेगी
ग़म तेरा भुलाने में कितनी देर लगेगी
तू जा रही है और मैं ये सोच रहा हूँ
नया व्याह रचाने में कितनी देर लगेगी
प्रेम?

Want your business to be the top-listed Government Service in Gorakhpur Airport Area?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Website

Address


Goplapur
Gorakhpur Airport Area