13/08/2021
प्राचीन युग और रामायण काल में आश्रम रूपी शोध संस्थानों की भूमिका -
पुष्पक विमान काल्पनिक लगता है और आधुनिक विज्ञान के अनुसार पहला उड़ने वाला हवाई जहाज १९०३ में बना, परन्तु सत्य आपके समक्ष निम्न है –
आधुनिक युग में १८९९ और १९०५ के बीच, राइट बंधुओं ने वैमानिकी अनुसंधान और प्रयोग का एक कार्यक्रम चलाया, जिसके परिणामस्वरूप १९०३ में पहली बार संचालित हवाई जहाज और दो साल बाद एक परिष्कृत, व्यावहारिक उड़ाने लायक हवाई जहाज का आविष्कार उन्होंने किया।
रामायण काल या प्राचीन युग में आश्रम रूपी शोध संस्थानों ने तो आज के वायुयान से उन्नत किस्म और तेज चलने वाले हवाई जहाज बहुत पहले ही दुनिया को दे दिया था और उसका सभी ने भरपूर उपयोग किया। वायुयान के लिए कार्य करते हुए आश्रम रूपी शोध संस्थान -
महर्षि भारद्वाज और अगस्त्य ऋषि के आश्रम में विमानशास्त्र विज्ञान का विकास काफी तेजी से हुआ। महर्षि भारद्वाज द्वारा रचित `यन्त्र-सर्वस्व´ के `विमान-प्रकरण´ में प्राचीन विमान-विद्या संबंधी अत्यन्त महत्वपूर्ण तथा चामत्कारिक तथ्य संगृहीत है। `यन्त्र-सर्वस्व´ ग्रन्थ वायुयान की रचना पर एक उत्तम वैज्ञानिक पुस्तक है। उन्हीं की लिखी एक प्राचीन पुस्तक `अंशुबोधिनी´ में अन्य अनेक विद्याओं का वर्णन हैं इसमे प्रत्येक विद्या के लिए एक-एक अधिकरण है। एक अधिकरण में विमानों के संचालन के लिए प्रयुक्त होने वाली शक्ति के अनुसार उनका वर्गीकरण किया गया है। महर्षि ने इसमें आठ प्रकार के विमानो का वर्णन किया है -
1. शक्त्युद्गम - बिजली से चलने वाला।
2. भूतवाह - अग्नि, जल और वायु से चलने वाला।
3. धूमयान - गैस से चलने वाला।
4. शिखोद्गम - तेल से चलने वाला।
5. अंशुवाह - सूर्यरश्मियों से चलने वाला।
6. तारामुख - चुम्बक से चलने वाला।
7. मणिवाह - चन्द्रकान्त, सूर्यकान्त मणियों से चलने वाला।
8. मरुत्सखा - केवल आयु से चलने वाला।
ऋषि अगस्त्य द्वारा रचित अगस्त्य संहिता में वायुयान पर विशेष संग्रह है। उन्होंने पुष्पक विमान कुबेर के निमित बनाया था।
उस समय गुरुकुल और आश्रम सभी ज्ञान-विज्ञान के विकास के लिए निरन्तर कार्य करते रहते थे। इसका परिणाम ये हुआ कि राम के राज्यकाल में विज्ञान मानवता को आगे बढ़ाने के लिए अपने चरम तक पहुँच सका। परन्तु हम अपनी अल्पबुद्धि से उसे काल्पनिक मानकर छोड़ दिए और रामायण में दिए गए ज्ञान को धरातल पर लाने का कोई प्रयास करना तो दूर उसको पूजा तक सीमित रखना बेहतर समझा।
बाल्मीकि जी ने राम के कार्यो को रामायण में लिपिबद्ध करने का कार्य किया था, तो आप उसे काल्पनिक कैसे कह सकते है?
जरुरत है नई पीढ़ी को उस ज्ञान पर मन्थन, शोध तभी तो मस्क के भाति और अविष्कारक समाज में आकर मानवता को राम की तरह विकास के मार्ग पर ले जायेंगे।

24/02/2021
27/01/2021
11/01/2021
10/01/2021