23/08/2024
आज बस्ती में हिंदू रक्षा समिति के बैनर पर बंगलादेश में हो रहे अत्याचार के विरोध में सारे सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनो ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी social worker
23/08/2024
आज बस्ती में हिंदू रक्षा समिति के बैनर पर बंगलादेश में हो रहे अत्याचार के विरोध में सारे सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनो ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया।
13/10/2022
जय श्रीराम,
हर तीसरे वर्ष चलता है भर्ती अभियान
विहिप संगठन हर तीन वर्ष में हितचिंतक अभियान चलाता है। इस बार नेतृत्व नें देश भर में 02 करोड हितचिंतक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। गोरक्ष प्रांत के सभी जिलों में कम से कम 25000 हितचिंतक बनाने का लक्ष्य है, जिसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। इससे हिंदू समाज में एकता आएगी और संगठन को विस्तार मिलेगा। इस कारण हर हिन्दू विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी में किसी के आप सभी सदस्य अवश्य बने।
अभियान तिथि 06नवम्बर से 21नवम्बर
आप सभी इस महाअभियान में सपरिवार जुड़ कर विश्व हिन्दू परिषद के कार्य को संबल प्रदान करें।
"भारत माता की जय"
27/09/2022
जय मां ब्रह्मचारिणी।
शानदार छवि
14/03/2021
30/10/2020
महर्षि वाल्मीकि भी एक विद्वान पंडित के रूप में प्रतिष्ठित हैं। जिन्हें अकस्मात ज्ञान की देवी सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है और संस्कृत के श्लोक उनके जिह्वा से प्रस्फुट होने लगती है। ब्रह्मा जी के आग्रह पर बाल्मीकि जी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन से जुड़ा महाकाव्य लिखने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने संस्कृत के श्लोकों से रामायण नामक ग्रंथ की रचना की जो देश ही नहीं अपितु विदेश में भी पढ़ा जाता है।
रामायण मर्यादित समाज व आत्म संयम , परिवार व समाज निर्माण आदि की शिक्षा देता है। राम चरित्र मानस श्री राम के जीवन का महाकाव्य है। श्री राम अवतारी पुरुष होते हुए भी अपनी मर्यादा का कभी उल्लंघन नहीं करते। शक्ति संपन्न होते हुए भी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कभी नहीं करते।
गुरु की आज्ञा व उनके प्रत्येक शब्दों का अक्षरसः पालन करते।
शक्ति सम्पन्न होते हुए भी उन्होंने एक छोटे – छोटे बानर – भालू की सेना के साथ पूरी राक्षस जाति का सर्वनाश किया। समुद्र पार करने के लिए उन्होंने तीन दिन तक समुद्र के समक्ष याचना की जबकि , उनके तरकस में ऐसे भी वाण थे जो पूरे समुद्र को सुखा सकते थे , फिर भी वह मर्यादा नहीं तोड़ते और समुद्र के समक्ष रास्ता मांगते रहे।
महर्षि वाल्मीकि का जन्म दिवस आश्विन मास की शरद पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा सोलह कालों से युक्त होता है।
इसी दिन रावण अपनी नाभि में अमृत धारण करता था।
श्री कृष्ण ने इस दिन अपनी सोलह हजार रानियों संग एक साथ रास रचाया था।
27/09/2020
*।। ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ।।*
*27 सितम्बर/जन्म-दिवस*
*हिन्दू जागरण के सूत्रधार अशोक सिंहल*
श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के दौरान जिनकी हुंकार से रामभक्तों के हृदय हर्षित हो जाते थे, वे श्री अशोक सिंहल संन्यासी भी थे और योद्धा भी; पर वे स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक प्रचारक ही मानते थे।
उनका जन्म आश्विन कृष्ण पंचमी (27 सितम्बर, 1926) को आगरा (उ.प्र.) में हुआ। सात भाई और एक बहिन में वे चौथे स्थान पर थे। मूलतः यह परिवार ग्राम बिजौली (जिला अलीगढ़, उ.प्र.) का निवासी था। उनके पिता श्री महावीर जी शासकीय सेवा में उच्च पद पर थे।
घर में संन्यासी तथा विद्वानों के आने के कारण बचपन से ही उनमें हिन्दू धर्म के प्रति प्रेम जाग्रत हो गया। 1942 में प्रयाग में पढ़ते समय प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) ने उन्हें स्वयंसेवक बनाया। उन्होंने अशोकजी की मां विद्यावतीजी को संघ की प्रार्थना सुनायी। इससे प्रभावित होकर उन्होंने अशोकजी को शाखा जाने की अनुमति दे दी।
1947 में देश विभाजन के समय कांग्रेसी नेता सत्ता पाने की खुशी मना रहे थे; पर देशभक्तों के मन इस पीड़ा से सुलग रहे थे कि ऐसे सत्तालोलुप नेताओं के हाथ में देश का भविष्य क्या होगा ? अशोकजी भी उन्हीं में से एक थे। इस माहौल को बदलने हेतु उन्होंने अपना जीवन संघ को समर्पित कर दिया।
बचपन से ही उनकी रुचि शास्त्रीय गायन में रही। संघ के सैकड़ों गीतों की लय उन्होंने बनायी। उन्होंने काशी हिन्दू वि.वि. से धातुविज्ञान में अभियन्ता की उपाधि ली थी। 1948 में संघ पर प्रतिबन्ध लगा, तो वे सत्याग्रह कर जेल गये। वहां से आकर उन्होंने अंतिम परीक्षा दी और 1950 में प्रचारक बन गये।
प्रचारक के नाते वे गोरखपुर, प्रयाग, सहारनपुर और फिर मुख्यतः कानपुर रहे। सरसंघचालक श्री गुरुजी से उनकी बहुत घनिष्ठता थी। कानपुर में उनका सम्पर्क वेदों के प्रकांड विद्वान श्री रामचन्द्र तिवारी से हुआ। अशोकजी अपने जीवन में इन दोनों का विशेष प्रभाव मानते थे। 1975 के आपातकाल के दौरान वे इंदिरा गांधी की तानाशाही के विरुद्ध हुए संघर्ष में लोगों को जुटाते रहे। 1977 में वे दिल्ली प्रांत (वर्तमान दिल्ली व हरियाणा) के प्रान्त प्रचारक बने।
1981 में डा. कर्णसिंह के नेतृत्व में दिल्ली में ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ हुआ; पर उसके पीछे शक्ति अशोकजी और संघ की थी। उसके बाद उन्हें ‘विश्व हिन्दू परिषद’ की जिम्मेदारी दे दी गयी। एकात्मता रथ यात्रा, संस्कृति रक्षा निधि, रामजानकी रथयात्रा, रामशिला पूजन, रामज्योति आदि कार्यक्रमों से परिषद का नाम सर्वत्र फैल गया।
अब परिषद के काम में बजरंग दल, परावर्तन, गाय, गंगा, सेवा, संस्कृत, एकल विद्यालय आदि कई नये आयाम जोड़े गयेे। श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन ने तो देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा ही बदल दी। वे परिषद के 1982 से 86 तक संयुक्त महामंत्री, 1995 तक महामंत्री, 2005 तक कार्याध्यक्ष, 2011 तक अध्यक्ष और फिर संरक्षक रहे।
सन्तों को संगठित करना बहुत कठिन है; पर अशोकजी की विनम्रता से सभी पंथों के लाखों संत इस आंदोलन से जुड़े। इस दौरान कई बार उनके अयोध्या पहुंचने पर प्रतिबंध लगाये गये; पर वे हर बार प्रशासन को चकमा देकर वहां पहुंच जाते थे। उनकी संगठन और नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम था कि युवकों ने छह दिसम्बर, 1992 को राष्ट्रीय कलंक के प्रतीक बाबरी ढांचे को गिरा दिया। कार्य विस्तार के लिए वे सभी प्रमुख देशों में गये। अगस्त-सितम्बर, 2015 में भी वे इंग्लैंड, हालैंड और अमरीका के दौरे पर गये थे।
अशोक जी काफी समय से फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित थे। इसी के चलते 17 नवम्बर, 2015 को उनका निधन हुआ। वे प्रतिदिन परिषद कार्यालय में लगने वाली शाखा में आते थे। अंतिम दिनों में भी उनकी स्मृति बहुत अच्छी थी। वे आशावादी दृष्टिकोण से सदा काम को आगे बढ़ाने की बात करते रहते थे। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब अयोध्या में विश्व भर के हिन्दुओं की आकांक्षा के अनुरूप श्री रामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण होगा।
* # # हर दिन पावन # #*
21/09/2020
शेरो का वैसे ही अकाल है समय ने उन्हें ग्रस लिया हे ईश्वर कुछ तो कृपा करें।स्व नंदकिशोर साहू आज हम सभी के बीच नहीं हैं अन्तर्मन को विश्वास नहीं हो रहा है । ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।
शत-शत नमन।
31/08/2020
प्रर्यावरण का संरक्षण होना चाहिए।