06/10/2026
किसी की मदद करते समय अक्सर ज़िंदगी हमें इंसानियत का एक नया सबक सिखा देती है। उस दिन भी ऐसा ही हुआ। मैं ज़रूरतमंद लोगों की सहायता कर रही थी, तभी पीछे से एक धीमी-सी आवाज़ आई—"बेटा, अगर खाना हो तो मुझे भी खिला दो... बहुत भूख लगी है।"
ये शब्द सुनकर दिल भर आया। उस पल महसूस हुआ कि किसी भूखे को भोजन कराना सिर्फ़ उसकी भूख मिटाना नहीं, बल्कि उसे यह एहसास दिलाना भी है कि वह अकेला नहीं है।
मैंने दादाजी को भोजन कराया और उनसे पूछा, "आप यहाँ क्यों बैठे हैं?" उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "डॉक्टर को दिखाने आया था, लेकिन जो पैसे थे, इलाज में खर्च हो गए। अब कुछ खाने के लिए पैसे नहीं बचे।"
उनकी बात सुनकर एक बार फिर एहसास हुआ कि हमारे आसपास ऐसे कई लोग हैं जिन्हें सिर्फ़ थोड़ी-सी संवेदना और एक मदद भरे हाथ की ज़रूरत है। आइए, जहाँ तक संभव हो, किसी की भूख मिटाने और उसके चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करें। क्योंकि इंसानियत का सबसे सुंदर रूप वही है, जो बिना किसी स्वार्थ के किसी के काम आए। ❤️🙏