19/11/2022
विवाह परिणय सूत्र ब्राह्मण समाज
इस पेज का उद्देश्य लोगो को एक प्लेटफार्म देना है जिससे जुड़ कर लोग शादी के लिए योग्य वरऔर वधू देख सके
19/11/2022
28/03/2017
आप सभी श्रेष्ठ बन्धुवों को नए वर्ष की ढेर सारी शुभ कामना
ब्राह्मणों के श्राप से आज भी शापित है गांधी -नेहरू खानदान
जानिए कैसे...??
बात सन् 1962 के विधान सभा चुनावों की है।
इंदिरा गांधी के लिये उस समय चुनाव जीतना बहुत मुश्किल था ,करपात्री जी महाराज के आशीर्वाद से इंदिरा गांधी चुनाव जीती ।
इंदिरा ग़ांधी ने उनसे वादा किया था चुनाव जीतने के बाद गाय के सारे कत्ल खाने बंद हो जायेगें . जो अंग्रेजो के समय से चल रहे हैं .लेकिन इंदिरा गांधी मुसलमानों और कम्यूनिस्टों के दवाब में आकर अपने वादे से मुकर गयी य .
-गौ हत्या निषेध आंदोलन
और जब तत्कालीन प्रधानमंत्री ने संतों इस मांग को ठुकरा दिया , जिसमे सविधान में संशोधन करके देश में गौ वंश की हत्या पर पाबन्दी लगाने की मांग की गयी थी ,तो संतों ने 7 नवम्बर 1966 को संसद भवन के सामने धरना शुरू कर दिया , हिन्दू पंचांग के अनुसार उस दिन विक्रमी संवत 2012 कार्तिक शुक्ल की अष्टमी थी , जिसे ” गोपाष्टमी ” भी कहा जाता है .
इस धरने में मुख्य संतों के नाम इस प्रकार हैं , शंकराचार्य निरंजन देव तीर्थ , स्वामी करपात्री महाराज और रामचन्द्र वीर है . राम चन्द्र वीर तो आमरण अनशन पर बैठ गए थे , लेकिन इंदिरा गांधी ने उन निहत्ते और शांत संतों पर पुलिस के द्वारा गोली चलवा दी , जिस से कई साधू मारे गए . इस ह्त्या कांड से क्षुब्ध होकर तत्कालीन गृहमंत्री ” गुलजारी लाल नंदा ” ने अपना त्याग पत्र दे दिया , और इस कांड के लिए खुद को सरकार को जिम्मेदार बताया था . लेकिन संत ” राम चन्द्र वीर ” अनशन पर डटे रहे जो 166 दिनों के बाद उनकी मौत के बाद ही समाप्त हुआ था . राम चन्द्र वीर के इस अद्वितीय और इतने लम्बे अनशन ने दुनिया के सभी रिकार्ड तोड़ दिए है . यह दुनिया की पहली ऎसी घटना थी जिसमे एक हिन्दू संत ने गौ माता की रक्षा के लिए 166 दिनों तक भूखे रह कर अपना बलिदान दिया था .
-इंदिरा के वंश पर श्राप
लेकिन खुद को निष्पक्ष बताने वाले किसी भी अखबार ने इंदिरा के डर से साधुओं पर गोली चलने और रामचंद्र वीर के बलिदान की खबर छापने की हिम्मत नहीं दिखायी , सिर्फ मासिक पत्रिका “आर्यावर्त ” और “केसरी ” ने इस खबर को छापा था . और कुछ दिन बाद गोरखपुर से छपने वाली मासिक पत्रिका “ कल्याण ” ने ” गौ अंक में एक विशेषांक ” प्रकाशित किया था , जिसमे विस्तार सहित यह घटना दी गयी थी . और जब मीडिया वालों ने अपने मुहों पर ताले लगा लिए थे तो करपात्री जी ने कल्याण के उसी अंक में इंदिरा को सम्बोधित करके कहा था “यद्यपि तूने निर्दोष साधुओं की हत्या करवाई है . फिर भी मुझे इसका दुःख नही है . लेकिन तूने गौ हत्यारों को गायों की हत्या करने की छूट देकर जो पाप किया है वह क्षमा के योग्य नहीं है , इसलिये मैं आज तुझे श्राप देता हूँ कि
” गोपाष्टमी ” के दिन ही तेरे वंश का नाश होगा ”
“
“आज मैं कहे देता हूँ कि गोपाष्टमी के दिन ही तेरे वंश का भी नाश होगा “
श्राप सच हो गया
जब करपात्री जी ने यह श्राप दिया था तो वहाँ “प्रभुदत्त ब्रह्मचारी “ भी मौजूद थे , करपात्री जी ने जो भी कहा था वह आगे चल कर अक्षरशः सत्य हो गया . इंदिरा का का वंश गोपाष्टमी के दिन ही नाश हो गया , सबुत के लिए इन मौतों की
तिथियों पर ध्यान दीजिये ,
1-संजय गांधी की मौत आकाश में हुई उस दिन हिन्दू पंचांग के अनुसार “ गोपाष्टमी ” थी .
2-इंदिरा की मौत घर में हुई उस दिन भी ” गोपाष्टमी थी
3-राजीव गांधी तमिलनाडू में मरे उस दिन भी “ गोपाष्टमी ” ही थी .
उस दिन करपात्री जी महाराज ने उपस्थित लोगों के सामने गरज कर कहा था .कि लोग भले इस घटना को भूल जाएँ लेकिन मैं इसे कभी नहीं भूल सकता . गौ हत्यारे के वंशज नहीं बचेंगे चाहे वह आकाश में हो या पाताल में हों , और चाहे घर में हो या बाहर हो यह श्राप इंदिरा के वंशजों का पीछा करता रहेगा
धर्मधुरन्दर स्वामी करपात्री जी महाराज की जय !!!
धर्म की जय हो !
अधर्म का नाश हो !
प्राणियों में सद्भावना हो !
विश्व का कल्याण हो !
गोहत्या बंद हो !
गोमाता की जय हो !
हर हर महादेव !
भारत विश्व के 10 सबसे अमीर देशों की सूची में हुआ शामिल !
मोदी जी ने जब से भारत की बाग़ डोर संभाली है, तब से हमें थोड़े थोड़े अंतराल के बाद कोई न कोई खुश खबरी सुनने को मिलती है। और यह ख़बरें ऐसी होती हैं जिन्हें सुनकर हम सब का सर गर्व से ऊंचा हो जाता है।
आपको यह जानकर बेहद ख़ुशी होगी कि भारत ने इटली, कनाडा और अास्ट्रेलिया को पीछे छोड़ कर दुनिया के टॉप ।0 अमीर देशाें की सूची में जगह बना ली है। इस सूची में अमेरिका पहले नंबर पर और चीन दूसरे नंबर पर है।
और यह कमाल मोदी जी की कोशिशों से संभव हो पाया है। अब दुनिया के दस सबसे अमीर देशों में भारत की भी गिनती होगी। अब आप यह कहेंगे कि इसके बावजूद भारत में इतने लोग गरीब क्यूँ है।
इसकी एक बड़ी वजह भारत की काले धन की समम्स्या है। और दूसरी वजह है भारत की लगातार बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत 5200 बिलियन अमेरिकी डॉलर का देश है, पर फिर भी यहां के लोग गरीब हैं। भारत की प्रति व्यक्यि आय बेहद कम है। यही सबसे बड़ी वजह है कि यहां के लोग अब भी गरीब हैं।
न्यू वर्ल्ड वैल्थ की रिपोर्ट के अनुसार अगले ।5 वर्ष भारत के बहुत सफल वर्ष होने वालें हैं। वह इन ।5 वर्षों में बेहद तेजी से आगे बढ़ेगा। पिछले ।5 वर्षों तक चीन सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था थी, वहीं वर्ष 2000-20।5 में आस्ट्रेलिया और भारत ने तेजी से वृद्धि की है।
इस दौड़ में भारत ने इस रेस में इटली को भी पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में आस्ट्रेलिया और कनाडा इटली को कहीं पीछे छोड़ देंगे। कमाल की बात तो यह है कि चीन आबादी के मामले में सबसे आगे है पर फिर भी दूसरा सबसे अमीर देश है।
इस सूची पर आप भी नज़र डालिए –
अमेरिका ( USD 48,700 billion) पहले नंबर पर,
चीन (USD ।7,300 billion) दूसरे नंबर पर,
जापान (USD ।5,200 billion) तीसरे नंबर पर,
जर्मनी (USD 9,400 billion) चौथे नंबर पर,
इंग्लैंड (USD 9,200 billion) पांचवें नंंबर पर,
फ्रांस (USD 7,600 billion) छठे नंबर पर,
भारत (USD 5,200 billion) सातवें नंबर पर,
इटली (USD 5,000 billion) आठवें नंबर पर,
कनाडा (USD 4,800 billion) नौवें नंबर पर,
आस्ट्रेलिया (USD 4,500 billion) दसवें नंबर पर शामिल है।
वैसे भी मोदी ने कल जो रामबाण चलाया है, उसके सामने सब को घुटने टेकने ही पड़ेंगें। अब जब सब का कला धन बाहर निकेलगा तो भारत की इस सूची पर यह पोजीशन कोई नहीं हिला पायेगा !
संघ ने दिया प्राचीन श्री गुरु दक्षिणा पद्धति को सामाजिक स्वरूप
किसी साफ-सुथरे मैदान या कमरे में 50- 100 लोग भगवा झंडे के सामने एकत्र हैं। ध्वज प्रणाम के बाद सब बारी बारी झंडे के सामने सर झुका कर लिफाफे में कुछ अर्पित कर शांत चित से अपने स्थान पर आ कर बैठ जाते हैं। पूजन पूरा होने पर कोई कार्यकर्ता आज के दिन अर्थात भगवा ध्वज और भारतीय गुरु परम्परा तथा वर्तमान परिस्थिति में राष्ट्र के प्रति अधिकतम समर्पण का आह्वान कर बैठ जाता है। इसके बाद कार्यक्रम समाप्त हो जाता है। सब लोग हंसी ख़ुशी अपने घरों को वापिस चले जाते हैं। कौन हैं ये लोग और इन्होंने आज क्या किया ? आप में से कुछ तो समझ ही गये होंगे कि ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ही हो सकते हैं। अगर ये बात सही है तो इन्होने लिफाफे में कुछ राशि के रूप में अपनी गुरु दक्षिणा अर्पित की है। क्या इस समर्पण का प्रचार होता है? अधिक राशि देने वाले का सम्मान होता है क्या? और इस लिफाफे में कितनी राशी होती होगी? आपकी सारी जिज्ञासाएं ठीक हो सकती है लेकिन संघ के कार्यकर्ता आपके सब सवालों पर मुस्करायेंगे जरूर। क्यूंकि वे साल दर साल से देखते आ रहे हैं, स्वयं गुरुदक्षिणा करते आ रहे हैं। वे जानते हैं कि संघ के लाखों कार्यकर्ता प्रतिवर्ष प्रचार - प्रसिद्धी से कोसों दूर रह कर अपना समर्पण करते आए हैं। स्वयंसेवक इसी लिफाफे में साधारण पुष्प , 50/100 रूपये से लेकर हजारो ही नहीं तो लाखों की राशि देश के लिए सहज समर्पित करते हैं। रोचक बात तो यह है कि उसी दरी पर हजारो रूपये अर्पित करने वाला स्वयंसेवक है तो उसी के पास उसके भारी भरकम समर्पण से पूरी तरह अंज़ान और बेखबर मात्र पुष्प चढ़ाने वाला स्वयंसेवक भी पूरे आत्मविश्वास से बैठा होता है। ये दृश्य किसी दूसरे ग्रह के नहीं हैं बल्कि इसी पृथ्वी लोक में जुलाई अगस्त में कहीं भी देखे जा सकते हैं। आपके मन में स्वाभाविक ही प्रश्न आयेगा कि जिस समाज में हर आम और खास आदमी में लोकेषणा इतनी ज्यादा मन मष्तिष्क में आ बैठी हो कि व्यक्ति बड़ी राशी तो दूर साधारण पंखे या मंदिर में लगने वाली टायल पर भी नाम लिखवाने का मोह नहीं टाल पाता उसी समाज में संघ ने ये चमत्कार कैसे कर दिखाया? इस सब को समझने के लिए संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार के जीवन का अध्ययन करनाआवश्यक है।
अदभुत संगठक डॉ. हेडगेवार-नागपुर में 1889 में जन्मे विश्व् के महान संगठनकर्ता प्राक्रतिक आपदा आदि में व् सेवा कार्यों में भी वे सबसे आगे रहते थे। ये सब करते हुए भी वे समाज में आए विकारों का बड़ी पैनी नजर से विश्लेष्ण करते रहते थे। १९१४ से १९२५ तक विशेष रूप से उन्होंने इसी मर्ज के मूल कारण खोजने पर अपने आपको केन्द्रित किया। उनकी खोज का मुख्य विषय रहता था कि हम बार बार बार गुलाम क्यूँ हो जाते हैं? पिछले डेढ़ दो हजार साल से भारत को अलग विदेशी जातियां गुलाम बनती रही हैं। हम एक हमलावर से जैसे कैसे निपटते उतने में दूसरी जाति आ चढ़ती थी। किसी कवि ने ठीक ही है कहा है-
सोचो कि हम पर हमला हर दम होता ही क्यूँ है?
हंसती है सारी दुनिया भारत रोता ही क्यूँ है?
डॉ हेडगेवार ने विचार किया कि आखिर भारत कब अपने आपको पहचानेगा? भयंकर विपरीत आर्थिक परिस्थितियों में अपनी डाक्टरी की पढाई पूरी कर एक भी दिन धन कमाने के लिए नौकरी या अपनी प्रेक्टिस नहीं की। उन्होंने व्यक्तियों की चिकित्सा करने के बजाये समाज और राष्ट्र के रोग का निदान ढूंडा। अपने निदान में उन्होंने देश भक्ति, व् अन्य श्रेष्ठ गुणों से युक्त एक जिमेवार नागरिक खड़ा करने को अपने जीवन का ध्येय बनाया। ऐसे श्रेष्ठ लोगों से युक्त समाज का संगठन खड़ा करने के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। इसी लक्ष्य की पूर्ति केलिए विजयदशमी 1925 को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। डॉ. हेडगेवार ने प्रचलित धारा से हट कर संघ के सारे नियम व् परम्पराएँ खड़ी की। ये विशेषताएं ही संघ की आज की सफलता का आधार सिद्ध हो गयी। इन परम्पराओं में श्री गुरु दक्षिणा पद्धति भी प्रमुख है।
महान गुरु शिष्य परम्परा- भारत की गुरु शिष्य परम्परा भी अदभुत है। भौतिकवादी रंग में रंगे विदेशी या अब तो भारत में भी विदेशी चश्मा लगाये लोगों को इस परम्परा की गहराई या ऊंचाई समझ में नहीं आती। स्वामी विवेकानन्द अपने साथ अपने गुरुदेव ठाकुर राम कृष्ण का चित्र रखते थे। अमेरिकी शिष्यों के पूछने पर बोले कि ये मेरे गुरुदेव हैं। मैं आज जो भी हूँ इनकी कृपा के कारण हूँ। शिष्यों ने पूछा ये कितने पढ़े हैं? स्वामी जी बोले ,'ये तो निरक्षर भटाचार्य हैं अर्थात पूरी तरह अनपढ़ हैं।' अमेरीकी शिष्यों को विश्वास नहीं हुआ। बोले कि आप जैसे महा विद्वान महापुरुष को इन्होने क्या सिखाया होगा? स्वामी जी बोले, ' ये मेरे जैसे हजारों विवेकानन्द पैदा कर सकते है। खैर, उनको स्वामी जी की अनेक बातों की तरह ये गुरु शिष्य सम्बद्ध भी समझ नहीं आया। हम सब जानते हैं कि भारत में गुरु को भगवन से भी अधिक बड़ा स्थान दिया गया है। शिष्य गुरुकृपा से जब जीवन की सच्चाई की कुछ थाह पा लेता है तो भाव-बिभोर हो कर उनकी प्रशंसा में अपने मन का आदर उड़ेल देता है। उदाहरण के लिए-
* गुरु गोबिंद दोउ खड़े काके लागूं पाए।
बलिहारी गुरु अपने गोबिं दियो मिलाये।
* यह तन विष की बेलरी गुरु अमृत की खान
शीश दिए गुरु मिले तो भो सस्ता जान।
इसी प्रकार एक अन्य सुन्दर भाव देखिये-
* गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुदेवो महेश्वरा।
गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मैव श्री गुरुवे नम:।।
गुरु उसके मन में जमी मोह माया की राख हटा कर भगवद्प्राप्ति की दिशा में बढ़ाता है। यहाँ यह रोचक है कि गुरु को प्रसन्न करने के लिए जहाँ शिष्य कठोर परिश्रम करता है वहीं गुरु भी शिष्य के निर्माण में अपने को पूरी तरह खपा देता है। इसके आलावा जहाँ गुरु शिष्य की कठिन परीक्षा लेता है वहीं हमारे यहाँ शिष्य भी खूब ठोक बजा कर गुरु को स्वीकार करता था। इस दृष्टि से विवेकानन्द और राम कृष्ण के अनेक प्रेरक प्रसंग हैं। भारत में गुरु शिष्य जोड़ी की अनंत श्रृंखला है। इनमे से प्रमुख का जिक्र करना हो तो श्री राम -वशिष्ठ, विश्वमित्र, भगवान श्री कृष्ण - संदीपनी, चन्द्रगुप्त -चाणक्य , शिवाजी - रामदास, दयानन्द -स्वामी बिरजानन्द, स्वामी विवेकानन्द - राम कृष्ण परमहंस आदि। हमारे स्वंतत्रता संग्राम में सावरकर - मडल लाल धींगड़ा, चन्द्र शेखर आजाद - शहीद भगत सिंह तथा राम परसाद बिस्मिल - अस्फाकउल्लाा खां उल्लेखनीय है। हमारी संस्कृति में एक और मान्यता के अनुसार जिस किसी से भी हम कुछ सीखते है, अपने जीवन निर्माण में जिनका भी योगदान रहता है हमने उन्हें भी आदरपूर्वक गुरु का स्थान दिया है। इस दृष्टि से माता को प्रथम गुरु का स्थान दिया गया है।
श्री गुरु दक्षिणा को बनाया संगठन का आधार- संघ की श्री गुरु दक्षिणा की इस प्राचीन पद्धति का समाज हितार्थ सफलतापूर्वक प्रयोग कर लेने में संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार की दूरदृष्टि ध्यान में आती है। शायद बहुत कम लोगों को पता होगा कि विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन आर एस एस का आर्थिक आधार भारत की ये प्राचीन गुरु दक्षिणा पद्धति ही है। जिस समय साम्यवादी और अन्य संघ विरोधी संघ को अमेरिका से पैसा आता है ऐसे आधारहीन आरोप लगा रहे थे, संघ चुपचाप स्वयंसेवकों में ध्येयनिष्ठा व् समर्पण का भाव जागृत करने में व्यस्त रहा। संघ की इस साधारण लेकिन अदभुत कार्य पद्धति पर संघ विरोधी ही नहीं बल्कि कई बार नये स्वयंसेवक भी विश्वास नहीं कर पाते हैं कि इसी गुरु दक्षिणा से प्राप्त धन से संघ का साल भर का खर्चा चलता है। संघ ने बहुत पहले ही संघ ने अपने लिए नियम बनाया कि संघ अपने खर्चे के लिए श्री गुरु दक्षिणा को ही आधार बनाएगा। किसी से आर्थिक सहायता नहीं ली जाएगी। स्वयं को ऐसे कठोर नियम में बाँध लेना किसी खतरे से कम नहीं था, वो भी ऐसे समाज में जहाँ भक्त भगवान की आरती के समय आंखे बंद कर गाता तो है- तेरा तेरे अर्पण क्या लागे मेरा लेकिन आंख खोल कर जैसे ही पैसा चढ़ाता है तो जेब में सबसे कम नोट कौन सा है' यह देखता है। इस नियम के कारण संघ को प्रारम्भ के १०/१२ साल बहुत कठिनाई आई। लेकिन संघ ने भयंकर आर्थिक कठिनयियो के बाबजूद इस नियम का श्रद्धापूर्वक पालन किया।
संघ के लिए वरदान सिद्ध हुई श्री गुरु दक्षिणा पद्धति - आज संघ बड़े बड़े कार्पोरेट हाउस, पूंजीपतियो या किसी राजनैतिक दल पर निर्भर नहीं है। यही कारण है कि राष्ट्र हित में सत्य बोलने में संघ को कोई कठिनाई नहीं आती। यह सुविधा अन्य संगठनों या राजनैतिक दलों को प्राप्त नहीं है। संघ के कार्यकर्ताओं का अपना सर्वश्व दाव पर लगा देने की सिद्धता का प्रेरणास्रोत्र संघ में गुरु के स्थान पर स्थापित परम पवित्र भगवा ध्वज है। इसी से प्रेरणा प्राप्त कर लाखो स्वयंसेवकों ने भयंकर कष्ट सहे, अपने न किये अपराध के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकाई लेकिन कहीं भी समझौता या कमजोरी नहीं दिखाई। स्वयंसेवकों के त्याग और बलिदान को देख कर देश भर के पुलिस अफसर हों या अनेक कांग्रेस के नेता भी संघ के प्रति श्रद्धा से भर गये। इससे भी बड़ी बात कि विपरीत समय में भी स्वयंसेवकों ने संघ के आर्थिक स्रोत को सूखने नहीं दिया। प्रतिबंध के दौरान भी श्री गुरुदाक्षिणा चलती रही। संघ की इस गुरु परम्परा से आर्थिक सुविधा से भी ज्यादा संघ को व्यक्तिनिष्ठ के स्थान पर ध्येयनिष्ठ कार्यकर्ता मिले। संघ की इस उपलब्धि पर अनेक राजनैतिक ही नहीं तो समाजिक और यहाँ तक कि संत महात्मा भी हैरान हैं। संघ शायद अकेली संस्था होगी जिसे आठ दशक की अपनी यात्रा में बिभाजन की पीड़ा सहन न करनी पड़ी हो। पद की होड़ में कार्यकर्त्ता परस्पर सर फुटबोल न होते हों। किसी व्यक्ति की जयजयक़ार के नारे के बजाये केवल भारत माता की जय के स्वर सुनाई देते हों।
विश्व गुरु
भूली बिसरी यादे जिनको भुला दिया सबने।
१. यूपी के लोग भिखारी होते हैं - राहुल गाँधी ( कांग्रेस )
२. पंजाब के 70% लोग नशेड़ी होते हैं – राहुल गाँधी
३. 90% बलात्कार तो लड़की की मर्जी से होते हैं – धरम वीर गोयत (हरयाणा कांग्रेस क ( कांग्रेस ) प्रवक्ता)
४. बीवी पुरानी हों जाये तो मजा नहीं आता – श्रीप्रकाश जैसवाल (कोयला मंत्री) ( कांग्रेस )
५. महंगाई अच्छी है, ये तो ऐसे ही बढ़ेगी – पी चिदंबरम ( कांग्रेस )
६. बलात्कार तो हर जगह होता है – रेणुका चौधरी ( कांग्रेस )
७. सोनिया जी कहेंगी तो झाड़ू भी लगाउँगा - भक्त चरणदास ( कांग्रेस )
८. पाकिस्तान के हिंदुओं को अपने ऊपर हों रहे अत्याचार के सबूत देने होंगे – सुशील शिंद ( कांग्रेस )
९. मैं सोनिया जी के लिए जान तक दे दूँगा – सलमान खुर्शीद ( कांग्रेस )
१०. बोफोर्स की ही तरह कोयला घोटाला भी जनता भूल जायेगी – सुशील शिंदे ( कांग्रेस )
११. हमारे सैनिकों को पाकिस्तान की सेना ने नहीं बल्कि उनकी वर्दियों में आतंकवादियों ने मारा है- एके एंटनी ( कांग्रेस )
१२. पुलिस और सेना के लोग मरने के लिए ही होते हैं – भीम सिंह ( कांग्रेस )
१३. पीने के लिए पानी नहीं है तो क्या बांधों में पेशाब कर के ला दूं - अजीत पवार ( कांग्रेस )
१४. महंगाई ज्यादा सोना खरीदने की वजह से बढ़ रही है – पी चिदंबरम ( कांग्रेस )
१५. पुलिस अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं को बेवजह परेशान ना करे - शिंदे ( कांग्रेस )
१६. पैसे पेड़ पर नहीं लगते – मनमोहन सिंह ( कांग्रेस )
१७. हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, जिससे महंगाई पर काबू किया जाये – मनमोहन सिंह ( कांग्रेस )
१८. गरीबी सिर्फ दिमाग का वहम है – राहुल गाँधी ( कांग्रेस )
१९. इस देश को हिन्दुओ से ज्यादा खतरा है – राहुल गाँधी
२०- बटाला हाउस में आतंकवादियों के मरने पर सोनिया जी बहुत रोयीं थीं - सलमान खुर्शीद ( कांग्रेस )
२१- सत्ता ज़हर है और माँ मेरे कमरे में आके रात में रोयीं थी - राहुल गाँधी ( कांग्रेस )
२२- देश के संसाधनों पे पहला हक़ मुसलमानों का है - मनमोहन सिंह ( कांग्रेस )
२३- भारत को RSS से ज़्यादा खतरा है न कि इस्लामिक आतंकवाद से- दिग्विजय सिंह ( कांग्रेस )
२४- केवल मुस्लिम लड़की ही हमारी बेटीयां हैं- अखिलेष यादव
२५- इसरत जहाँ मेरी बेटी है- नितीस कुमार !!! . ..
२६- ओसामा जी - दिग्विजय(कांग्रेस)
२७- श्री हाफीज सईद साहब - शिंदे (कांग्रेस)
२८- राम एक कल्पना है (कांग्रेस)
२९- भगवा और तिलक को देख कर गुस्सा आता है- मणी शंकर अय्यर (कांग्रेस)
३०- मैं हिन्दू नही हूँ- मनीष तिवारी (कांग्रेस)
31. क्या टंच माल है। (दिग्विजय सिंह)
32. पाँच रुपये में गरीवों को भरपेट भोजन मिल जाता है महँगाई कहाँ है (राज बबर)
33. गरीबी एक सोच है मानसिक बीमारी है (राहुल ग़ांधी)
34. रामायण एक कहानी है राम कभी पैदा नहीं लिए और राम सेतु राम ने नहीं बनाया (कांग्रेस)
35. श्री राम एक पियकड़ थे (करुणा निधि)
36. हिन्दू भी गाय का माँस खाते है (लालू प्रसाद)
37. जो लोग मंदिर जाते है लड़की छेड़ते है (राहुल ग़ांधी)
38. देश में आरक्षण का माहोल पैदा करो दंगा करो पब्लिक को उस्कावो
(कपिल सिम्बल) ऐसे लोगो कोआप क्या कहेंगे ?
कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों पर अपने
अतुलनीय साहस और शौर्य से दुश्मनों को
पराजित कर विश्वभर में भारतीय सेना का
डंका बजवाने वाले माँ भारती के वीर
सपूतों को नमन एवं समस्त देशवासियों को
“कारगिल विजय दिवस” की हार्दिक
शुभकामनाएं ।
देश के दुसरे सबसे बड़े दुश्मन भांड
मिडिया की माने तो रमजान के महीने के
दौरान एक मुस्लिम के मुहँ के पास अगर
रोटी लगा दी जाये तो इससे तनाव
हो सकता है भले ही उसने रोजा न
रखा हो.......
लेकिन अमरनाथ यात्रा के मार्ग में
हजारो बूढ़े यात्रियों बच्चों और महिलाओ
पर पथर फेंकने से कोई तनाव नहीं बढ़ता,
हवंन यज्ञ में पेशाब करने से भी कोई तनाव
नहीं बढ़ता, यात्रा में भोजन का एक मात्र
सहारा, सैकड़ो लंगरों को जलाने से भी कोई
तनाव नहीं बढ़ता. यात्री स्त्रियों को छेड़ने
से भी कोई तनाव नहीं बढ़ता
जो समाज अपनी स्त्रियों का आदर नहीं करता, वो प्रगति और समृद्धि को नहीं पा सकता। मेरी कामना है कि पूरे विश्व में स्त्रीत्व खिले।
मायावती को अपशब्द कहने वाले दयाशंकर सिंह को बीजेपी ने तुरंत पार्टी से निकाल दिया।
ये बीजेपी के चरित्र को दर्शाता है कि बीजेपी गलत बोलने वालो के लिए क्या निर्णय लेती है।
लेकिन ऐसी तत्परता अन्य पार्टियां क्यों नहीं दिखाती।
याद करो मोदी जी को सोनिया से लगाके इमरान मसूद तक ने क्या-क्या कहा है।
लेकिन कांग्रेस तो इन लोगो को इनाम देती है, उनका पद ऊँचा करके।
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