13, 14, 15 मार्च को समालखा (हरियाणा) में होगी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा इस वर्ष समालखा, (हरियाणा) में युगाब्द 5127, विक्रम संवत् 2082 चैत्र कृष्ण दशमी (द्वि-दिवसीय), एकादशी अर्थात् दिनांक 13,14 एवं 15 मार्च 2026 को आयोजित हो रही है। संघ की दृष्टि से यह सर्वोच्च निर्णायक इकाई की बैठक होती है। प्रतिवर्ष होने वाली बैठक का आयोजन इस वर्ष ग्रामविकास एवं सेवा साधना केन्द्र, पट्टीकल्याणा, समालखा, (हरियाणा) में हो रहा है।
यह वर्ष संघ शताब्दी का होने के नाते शताब्दी निमित्त आयोजित विजयादशमी उत्सव, गृहसंपर्क, हिन्दू सम्मेलन, युवा सम्मेलन, प्रमुख नागरिक गोष्ठी, सामाजिक सद्भाव बैठकें आदि कार्यक्रमों तथा अभियानों के वृत्तांत के साथ-साथ अनुभवों पर बैठक में विशेष चर्चा रहेगी। प्रतिनिधि सभा में गत वर्ष 2025-26 के संघ कार्य की समीक्षा तथा प्रांतों में हुए विशेष कार्यों का निवेदन होगा।
बैठक में वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा के साथ ही कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्ताव भी पारित किए जाएँगे। संघ शाखाओं द्वारा अपेक्षित सामाजिक परिवर्तन के कार्यों सहित विशेष रूप से पंच परिवर्तन के प्रयासों की चर्चा अपेक्षित है। संघ शिक्षा वर्ग तथा कार्यकर्ता विकास वर्ग सहित अन्य प्रशिक्षण वर्गों की योजनाओं पर विचार-विमर्श तथा आगामी वर्ष की संघ कार्य योजना का निर्धारण किया जाएगा।
बैठक में पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी तथा सभी सह सरकार्यवाह एवं अन्य पदाधिकारियों सहित कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहेंगे। बैठक में मुख्य रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि, प्रांत व क्षेत्र स्तर के प्रमुख पदाधिकारी सहित कुल 1489 कार्यकर्ता अपेक्षित हैं। बैठक में संघ प्रेरित विविध 32 संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री एवं संगठन मंत्री भी अपेक्षित रहेंगे।
सुनील आंबेकर
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
RSS Gorakhpur
BHARAT MATA KI JAI
02/10/2025
14/09/2025
🚩 गणवेश सिर्फ वस्त्र नहीं, यह विचार है। 🚩
जब स्वयंसेवक संघ का गणवेश पहनता है, तो वह केवल कपड़े नहीं बदलता — वह अपने जीवन का उद्देश्य चुनता है।
🔶 गणवेश पहनने से क्या होता है?
- यह हमें याद दिलाता है कि हम व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक सेवा के पथ पर हैं।
- यह अनुशासन, एकता और समर्पण का प्रतीक है।
- यह हर शाखा में एक समानता की भावना जगाता है — जाति, वर्ग, भाषा से ऊपर उठकर केवल "राष्ट्र" के लिए खड़ा होता है।
- यह हमें प्रेरित करता है कि हम अपने छोटे स्वार्थों से ऊपर उठकर देश और समाज के लिए कार्य करें।
🧭 गणवेश पहनना मतलब है—सेवा का संकल्प लेना।
यह वेश हमें हर दिन याद दिलाता है कि हम केवल दर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार हैं।
🌱 संघ का गणवेश एक साधना है — जो हर शाखा में, हर प्रणाम में, हर कदम में जीवंत होती है।
अगर आपने कभी सोचा है कि एक सामान्य व्यक्ति देश के लिए क्या कर सकता है — तो गणवेश पहनकर शाखा में आइए। उत्तर वहीं मिलेगा।
10/09/2025
एक समय था जब संघ का गणवेश केवल संघ के कार्यालयों में ही मिलता था, लेकिन अब यह बड़े शोरूम में भी उपलब्ध है, जो बदलाव का प्रतीक है। उत्साही कार्यकर्ताओं की बढ़ती संख्या और समाज के सभी वर्गों को साथ लाने का प्रयास इसका एक और संकेत है।
विजयदशमी पर्व को बस 22 दिन शेष हैँ यह संघ का शताब्दी वर्ष है इस वर्ष को संपर्क, संवाद, संगठन और सेवा के माध्यम से उन लोगों तक पहुंचने के लिए एक नए अध्याय के रूप में लिखा जा रहा है जो अभी तक नहीं पहुंचे हैं। यह अहम पहल है जो संघ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगी।
Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)
06/09/2025
भारत की समृद्धि और समरसता के लिए छात्रों में ‘स्व’ का भाव होना जरूरी - रमेश जी
सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) पक्कीबाग गोरखपुर में आज शिक्षक दिवस एवं प्रतिभा सम्मान समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि रमेश जी प्रान्त प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ- गोरक्ष प्रान्त ने डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एवं भारत के उज्ज्वल भविष्य को गढ़ने वाले देव तुल्य आचार्यों को नमन करते हुए कहा कि भारत समृद्ध, समरस तभी होगा जब छात्रों में स्व का भाव होगा। गुरु के तेजस्वी स्वरूप, परिश्रम व प्रयत्न के चलते ही सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
रमेश जी ने कहा कि छात्रों के अन्दर कृतित्व, नेतृत्व कुशलता, व्यक्तित्व विकास, समझदारी और समर्पण जैसे पाँच गुणों का होना आवश्यक है। विद्या भारती के विद्यालय संस्कार के साथ इन सभी पाँच गुणों से युक्त शिक्षा प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। आचार्य चाणक्य ने कहा है कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है। छात्र वर्तमान का कर्ता व भविष्य का निर्माता होता है।
उन्होंने कहा कि भारत का अर्थ है ज्ञान की खोज में लगे रहना। प्राचीन काल में भारत सम्पूर्ण विश्व को शिक्षा व मार्गदर्शन देने के लिए जाना जाता था। इसलिए भारत को विश्व गुरु कहा जाता था। विश्व को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का कार्य भारत निरंतर करता रहा है। योग, नियुद्ध, दर्शन, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान आदि का ज्ञान सर्वप्रथम भारत ने ही विश्व को दिया। भारत विश्व को परिवार मानता है जबकि विश्व के पश्चिमी देश विश्व को बाजार के रूप में देखते हैं।
अंत में उन्होंने विद्यालय के प्रतिभावान भैया बहिनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जो पिछड़ गए हैं वे निराश न हों, उन्हें और अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है। भारत की संस्कृति अपनों को आगे बढ़ाने की है।
इस अवसर पर सत्र 2024-25 में सम्पन्न हुई बोर्ड परीक्षा के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के मेधावियों के साथ ही खेल में विभिन्न प्रतियोगिताओं में स्थान लाने वालों को पुरस्कृत किया गया।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Telephone
Website
Address
Madhaw Dham Gorakhnath Road
Gorakhpur
273001

02/11/2025