19/12/2015
स्नातक अधिकार मंच
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19/12/2015
क्या आप सहमत हैं की स्नातकों को रोज़गार गारंटी मिले? यदि नहीं तो क्यों और यदि हाँ तो किस प्रकार? कृपया अपने विचार साझा करें. साथ में अपना मोबाइल नंबर अवश्य लिखें जिस से हम आप से संपर्क स्थापित कर स्नातकों को रोज़गार गारंटी के लिए छेड़ी गयी राष्ट्र व्यापी लड़ाई को आगे बढ़ा सकें. आप पेज पर अपने विचार एवं कमेंट के साथ मेरे मोबाइल नंबर ९९३६२९३६६७ पर कॉल कर सीधे मुझ से अपने विचार साझा कर सकते हैं. आपकी अति कृपा होगी. आइये स्नातकों को रोज़गार गारंटी के विषय को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनाएं जिस से देश के आमजन, विधानसभा और संसद में इस पर गंभीर मंथन प्रारम्भ हो और देश के करोड़ों स्नातक बेरोज़गारों के जीवन का सूनापन दूर हो सके, उनके चेहरे पर मुस्कान लौट सके और उनके भी जीवन में एक नए उजाले का आगाज़ हो.
सहायक अध्यापक पद पर समायोजित शिक्षामित्रों की नियुक्ति अवैध घोषित करने का इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय एक लाख पचहत्तर हजार शिक्षा मित्रों और हम सब पर वज्रपात है| लम्बे संघर्षों के बाद मिली सफलता पल भर में दिवास्वप्न में तब्दील हो गई| असहनीय वेदना के इन क्षणों में हम सब शिक्षा मित्रों के साथ चट्टान की तरह खडें हैं| सपने टूटने का दर्द कितना गहरा होता है यह न्यायालय के निर्णय से पता चला| चारो ओर हाहाकार है | शिक्षामित्र मौत को गले लगा रहे हैं| इच्छा मृत्यु मांग रहे हैं| फिर भी मोदी मौन हैं| संवेदनशील प्रधानमंत्री माने जाने वाले और उत्तर प्रदेश से प्रतिनिधित्व कर देश क़ी कमान सँभालने वाले नरेंद्र मोदी का उत्तर प्रदेश के इतने बड़े घटना क्रम पर संवेदना का एक शब्द भी न बोलना आश्चर्यजनक हैं जबकि यदि मोदी जी चाह ले तो समायोजित शिक्षामित्रों पर टूटा दुखों का पहाड़ पल भर में हट सकता है| शिक्षामित्रो के गम खुशियों में तब्दील हो सकते है| इसके लिए मोदी जी को इन चयनित शिक्षामित्रो के संदर्भ में एनसीटीई के नियमो में बस थोड़ी सी ढील देने भर की आवश्यकता है| केवल इतने से शिक्षामित्रों के नियुक्ति की तकनीकी बाधा दूर हो जाएगी और प्रदेश के पौने दो लाख घरों के चूल्हे जल उठेंगे| इन युवाओं के आँगन में एक बार फिर खुशियां खिलखिला उठेंगी | मै ईश्वर से कामना करता हूँ कि वो हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी और उत्तर प्रदेश के सांसद को ऐसा करने क़ी प्रेरणा दें| जहाँ तक भारतीय न्यायपालिका क़ी बात है मेरे दिल में इनके प्रति गहरी श्रद्धा है लेकिन शिक्षा मित्रो के विरुद्ध निर्णय में मेरी अंतरात्मा ने महसूस किया कि यहाँ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उलंघन हुआ है| इस मामले में शिक्षामित्रों को न्याय नहीं मिला |आखिर दोष क्या था शिक्षा मित्रों का? शिक्षा मित्रो ने तो किसी नियम कानून का उल्लंघन नहीं किया था| उन्होंने तो सरकार के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया था फिर सरकार के गलतियों क़ी सजा शिक्षा मित्रों को देना कहाँ का इंसाफ है? आत्महत्या कर रहे शिक्षा मित्रों से मेरा निवेदन है कि वे अपने कदम रोक लें| आज आवश्यकता हार मानने क़ी नहीं, महासंघर्ष छेड़ने क़ी है| जब समाज हित व न्याय के नाम पर केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों को संविधान संशोधन के माध्यम से बदल सकती है तो शिक्षा मित्रों का मसला तो केवल नियमों में ढील से जुड़ा है जो केंद्र सरकार के लिए चुटकियो का काम है | मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी से निवेदन है कि शिक्षा मित्रो के मसलो पर किसी भी तरह कि राजनीति से हटकर सर्वोच्च न्यायलय में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देने के साथ साथ इस प्रकरण पर माननीय प्रधान मंत्री जी के साथ आपात बैठक करें | ईश्वर मृतक शिक्षामित्रों क़ी आत्मा को शांति दें और उनके परिजनों को संकट क़ी इस घडी में इस दोहरी असहनीय वेदना को सहने क़ी शक्ति दें!
ओम शांति......शांति...... शांति !!!
सर्वे भवन्तु सुखिनः ....
मित्रों हमे अंगुलियां उठाने की सोच से उबरकर समाजहित के संघर्ष पर सामूहिक राय बनाते हुए इसके अनुपालन पर बढ़ना होगा....... क्यों की अबतक हम केवल अंगुलियां ही उठाते रहे है......आज आप मेरे पास जो भी देख रहे है वह दशकों के कड़े संघर्ष का परिणाम है....... समाज के प्रति पीड़ा और विडंबनाओं के विरुद्ध आक्रोश ने मुझे सामाजिक राजनैतिक मंच दिया...... आज भी मेरे जीवन में कड़ा संघर्ष विध्मान है.....धारा के विरुद्ध लड़ने के जज्बे ने मुझे नई राहे दी...वरना आज की बिकाऊ व्यवस्था में यदि केवल पद हासिल करना ही मेरा लक्ष्य रहा होता तो ये काम बहुत पहले हो चूका होता... मुझे समझौता स्वीकार नहीं है|
देश की विडम्बनाओं से जूझने वाला युवा जब अपनी समस्याओं में उलझा होगा फिर कैसे दूर होगी विडंबनाएं? क्या युवाओ की समस्याएं शासन सत्ता प्रायोजित नहीं है? आखिर सत्ता युवाओ की बाधाएं क्यों नहीं दूर करना चाहती? आखिर क्यों नहीं चाहते लोग परिवर्तन? यथास्थिवाद से किसे है लाभ?
आखिर कब तक जारी रहेगा ये सिलसिला?.....................
क्या आप चाहते हैं कि देश के सारे स्नातकों को रोजगार गारंटी मिलें? कृपया अपने- अपने विचार प्रस्तुत करें|
बेरोजगार स्नातक देश को कौन सी दिशा देंगें?........................... यह कोई क्यों नहीं सोचता?............एक स्नातक युवा का दर्द आखिर क्यों नहीं बन पाती आवाज?.................देश क़ी उच्च शिक्षा स्नातक का आखिर क्या मोल है?..................क्यों उपेक्षित और अपमानित हैं स्नातक?..........यदि देश का कर्णधार युवा है तो युवाओ के सबसे बड़े वर्ग स्नातक के लिए कोई नीति क्यों नहीं?...... स्नातको के हक़ अधिकारों का कब तक होता रहेगा हनन?
अपने विचारों के साथ अपना मोबाइल न. भी डालें |
मेरा समपर्क न. ९९३६२९३६६७ है |
04/09/2015
सभी देशवासिओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई !
स्नातक जैसे उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद न ही कोई भविष्य, न ही रोजगार और न ही समाज में मान सम्मान और स्थान| जबकि कल तक स्नातक करना गौरव का विषय था| लोग अपने नाम के साथ बीए लिखने में गर्व महसूस करते थे| मूर्धन्य साहित्यकार मोती जी जैसे लोग अपना| नाम मोती बीए लिखकर गौरवान्वित होते थे| समाज व्यवस्था और शासन प्रसासन में भी हर स्तर पर स्नातको का विशेष मान सम्मान व् स्थान हासिल था| आखिर कहा खो गया स्नातको का वह गौरव? विशेष शिक्षा से सामान्य शिक्षा में कब तब्दील हो गया स्नातक? हर वर्ष करोडो युवा स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद सड़क पर दर दर मरे फिर रहे है| रोजगार के आभाव में कोई रिक्सा ठेला चला रहा है, कोई मजदूरी कर रहा है तो कोई अपराध| कई युवा तो हालात से हारकर आत्महत्या कर रहे हैं| आज आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ी तादात स्नातक शिक्षको की हैं| नहीं सूझ रही इन्हे भविष्य की कोई राह| स्नातको के लिए सरकार के पास कोई नीति नहीं हैं| संविधान ने विधान सभा में स्नातक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था बनाई| सदन में हर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से मस स्नातक प्रतिनिधि चुना जाता हैं| परन्तु दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण हैं की सदन में आज तक स्नातको से हक़ और अधिकारों की एक भी आवाज नहीं उठी| अधिसंख्य स्नातको को तो यह भी नहीं पता कि उनका भी प्रतिनिधि चुना जाता हैं| आखिर कब तक जारी रहेगा अत्याचार और नाइंसाफी का सिलसिला| कौन दिलाएगा स्नातको को इंसाफ राम, बुद्ध, ईसा अथवा पैगम्बर|
याद रखें ईश्वर उसकी कोई मदद नहीं करता जो अपनी मदद के लिए खुद तैयार नहीं| हालात बदलने के लिए स्नातक युवाओ को खुद आगे आना होगा| महापरिवर्तन कि अलख जगानी होगी| परिवतन कि इस जंग में आपका आह्वान| आइये हमारे कदम से कदम मिलाइये| स्नातको का सुरक्षित भविष्य बनाइये|
जय हिन्द - जय क्रांति - जय स्नातक
स्नातक अधिकार मंच Political organisation
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