02/11/2024
Pleased to share that after Prithvi Awards we produced & launched a short movie under ESG Research Foundation on *water conservation*.
Hope you will like the same and forward to many to create awareness. Regards
2 BUCKETS | A Creative Documentary on Water Crisis | Short Film
"Water Conservation and Sustainability: An ESG PerspectiveThis video presentation, based on research from ESG Research Foundation, examines the intersection ...
02/11/2024
Pleased to share that after Prithvi Awards we produced & launched a short movie on . Hope you will like the same and forward to many to create awareness.
Click the link below to spare two minutes for Mother Earth.
2 BUCKETS | A Creative Documentary on Water Crisis | Short Film
"Water Conservation and Sustainability: An ESG PerspectiveThis video presentation, based on research from ESG Research Foundation, examines the intersection ...
23/07/2024
Please to share the analysis of GST for amendments proposed in Finance Bill 2024. Covers 25 important amendments with example. Happy learning Regards Atul Gupta
"The Union Budget & GST: A Detailed Analysis and Impact Assessment"
30/06/2024
*दिखावे का पुण्यकर्म*
एकादशी से अगले दिन एक भिखारी एक सज्जन की दुकान पर भीख मांगने पहुंचा। सज्जन व्यक्ति ने 1 रुपये का सिक्का निकाल कर उसे दे दिया।
भिखारी को प्यास भी लगी थी,वो बोला बाबूजी एक गिलास पानी भी पिलवा दो, गला सूखा जा रहा है। सज्जन व्यक्ति गुस्से में ...तुम्हारे बाप के नौकर बैठे हैं क्या हम यहां ? पहले पैसे,अब पानी, थोड़ी देर में रोटी मांगेगा, चल भाग यहां से।
भिखारी बोला:-बाबूजी गुस्सा मत कीजिये मैं आगे कहीं पानी पी लूंगा।पर जहां तक मुझे याद है,कल इसी दुकान के बाहर मीठे पानी की छबील लगी थी और मीठा शर्बत भी आप स्वयं लोगों को रोक रोक कर जबरदस्ती अपने हाथों से गिलास पकड़ा रहे थे, मुझे भी कल आपके हाथों से दो गिलास शर्बत पीने को मिला था। मैंने तो यही सोचा था,आप भले धर्मात्मा आदमी है, पर आज मेरा भरम टूट गया।
कल की छबील तो शायद आपने एकादशी पर लोगों को दिखाने के लिये लगाई थी।
मुझे आज आपने कड़वे वचन बोलकर अपना कल का सारा पुण्य खो दिया।
सेठजी मुझे माफ़ करना अगर मैं कुछ ज्यादा बोल गया हूँ तो।
सज्जन व्यक्ति को बात दिल पर लगी, उसकी नजरों के सामने बीते दिन का प्रत्येक दृश्य घूम गया। उसे अपनी गलती का अहसास हो रहा था। वह स्वयं अपनी गद्दी से उठा और अपने हाथों से गिलास में पानी भरकर उस बाबा को देते हुए उसे क्षमा प्रार्थना करने लगा।
भिखारी:-बाबूजी मुझे आपसे कोई शिकायत नही,परन्तु अगर मानवता को अपने मन की गहराइयों में नही बसा सकते तो एक दो दिन किये हुए पुण्य व्यर्थ है।
मानवता का मतलब तो हमेशा शालीनता से मानव व जीव की सेवा करना है।
आपको अपनी गलती का अहसास हुआ,ये आपके व आपकी सन्तानों के लिये अच्छी बात है।
आप व आपका परिवार हमेशा स्वस्थ व दीर्घायु बना रहे ऐसी मैं कामना करता हूँ,यह कहते हुए भिखारी आगे बढ़ गया।
सेठ ने तुरंत अपने बेटे को आदेश देते हुए कहा:-कल से दो घड़े पानी दुकान के आगे आने जाने वालों के लिये जरूर रखे हो।उसे अपनी गलती सुधारने पर बड़ी खुशी हो रही थी।
दोस्तों यह कहानी एक मैसेज देती है कि पूण्यकर्म हम जो भी करते है यदि सिर्फ दिखावे के लिए किये है तो पुण्यकर्म निष्फल हैं । यदि हमारे मन में हमेशा हर प्राणी के लिए शुभकामना है, शुभ भावना है तो यही सच्चा पुण्य है।
*जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है।।*
14/02/2024
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा
मां सरस्वती की जय हो
*आपको वसंत पंचमी की शुभकामनाएं*
19/12/2023
*सुदामा*
*होना सरल नहीं है ।*
*जैसे ही द्वारकाधीश ने तीसरी मुट्ठी चावल उठा कर फांक लगानी चाही, रुक्मिणी ने जल्दी से उनका हाथ पकड़ कर कहा, "क्या भाभी के लाये इन स्वादिष्ट चावलों के स्वाद का सारा सुख अकेले ही उठाएंगे स्वामी? हमें भी तो ये सुख उठाने का अवसर दीजिए।*
*द्वारकधीश के अधरों पर एक अर्थपूर्ण स्मित उपस्थित हो गयी, उन्होंने चावल वापस उसी पोटली में डाले और उसे उठाकर अपनी पटरानी को दे दिया सुदामा के साथ बातें करते हुए कब कृष्ण उनके पाँव दबाने लगे ये सुदामा को पता ही नहीं चला, सुदामा सो चुके थे किंतु कृष्ण अपनी ही सोच में मगन उनके पाँव दबाते हुए बचपन की बातें करते चले जा रहे थे तभी रुक्मिणी ने उनके कंधे पर हाथ रखा*
*कृष्ण ने चौंककर पहले उन्हें देखा और फिर सुदामा को फिर उनका आशय समझ कर वहां से उठकर अपने कक्ष में चले आये कृष्ण की ऐसी मगन अवस्था देखकर रुक्मिणी ने पूछा, "स्वामी आज आपका व्यवहार बहुत ही विचित्र प्रतीत हो रहा है। आप, जो इस संसार के बड़े से बड़े सम्राट के द्वारका आने पर उनसे तनिक भी प्रभावित नही होते हैं, वो अपने मित्र के आगमन की सूचना पर इतने भावविह्वल हो गए कि भोजन छोड़कर नंगे पांव उन्हें लेने के लिए भागते चले गए?*
*आप, जिनको कोई भी दुख, कष्ट या चुनौती कभी रुला नही पाई, यहाँ तक कि जो गोकुल छोड़ते समय मैया यशोदा के अश्रु देखकर भी नहीं रोये, वे अपने मित्र के जीर्ण शीर्ण, घावों से भरे पांवों को देखकर इतने भावुक हो गए कि अपने अश्रुओं से ही उनके पाँवों को धो दिया कूटनीति, राजनीति और ज्ञान के शिखरपुरुष आप, अपने मित्र को देखकर इतने मगन हो गए कि बिना कुछ भी विचार किये उन्हे समस्त त्रिलोक की संपदा एवं समृद्धि देने जा रहे थे?*
*कृष्ण ने अपनी उसी आमोदित अवस्था में कहा, वह मेरे बालपन का मित्र है रुक्मिणी परंतु उन्होंने तो बचपन में आपसे छुपाकर चने भी खाएं थे जो गुरुमाता ने उन्हें आपसे बांटकर खाने को कहा था? अब ऐसे मित्र के लिए इतनी भावुकता क्यों? सत्यभामा ने भी अपनी जिज्ञासा रखी*
*कृष्ण मुस्कुराये, "सुदामा ने तो वह कार्य किया है सत्यभामा, कि समस्त सृष्टि को उसका आभार मानना चाहिए, वो चने उसने इसलिए नहीं खाएं थे कि उसे भूख लगी थी बल्कि उसने इसलिए खाये थे क्योंकि वो नहीं चाहता था कि उसका मित्र कृष्ण दरिद्रता देखे, उसे ज्ञात था कि वे चने आश्रम में चोर छोड़कर गए थे, और उसे यह भी ज्ञात था कि उन चोरों ने वे चने एक ब्राह्मणी के गृह से चुराए थे*
*उसे यह भी ज्ञात था कि उस ब्राह्मणी ने यह श्राप दिया था कि जो भी उन चनों को खायेगा, वह जीवनपर्यंत दरिद्र ही रहेगा, सुदामा ने वे चने इसलिए मुझसे छुपा कर खाये ताकि मैं सुखी रहूँ, वो मुझे ईश्वर का कोई अंश समझता था, तो उसने वे चने इसलिए खाये क्योंकि उसे लगा कि यदि ईश्वर ही दरिद्र हो जायेगा तो संपूर्ण सृष्टि ही दरिद्र हो जायेगी, सुदामा ने संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के लिए स्वयं का दरिद्र होना स्वीकार किया*
*इतना बड़ा त्याग" रुक्मिणी के मुख से स्वतः ही निकला "मेरा मित्र ब्राह्मण है रुक्मिणी और ब्राह्मण ज्ञानी और त्यागी ही होते हैं, उनमें जनकल्याण की भावना कूट-कूट कर भरी होती है, इक्का दुक्का अपवादों को यदि छोड़ दिया जाए तो ब्राह्मण ऐसे ही होते हैं।*
*अब तुम ही बताओ ऐसे मित्र के लिए हृदय में प्रेम नहीं तो फिर क्या उत्पन्न होगा प्रिय, गोकुल छोड़ते हुए मैं इसलिए नहीं रोया था क्योंकि यदि मैं रोता तो मेरी मैया तो प्राण ही छोड़ देती। परंतु, मेरे मित्र के ऐसे पांव देखकर, उनमें ऐसे घावों को देखकर मेरा हृदय भर आया रुक्मिणी, उसके पांवों में ऐसे घाव और जीवन में उसकी ऐसी दशा मात्र इसलिए हुई क्योंकि वह अपने इस मित्र का भला चाहता था*
*पता है रुक्मिणी, परिवार को छोड़कर किसी और ने कभी इस कृष्ण का इतना भला नहीं चाहा, लोग तो मुझसे उनका भला करने की अपेक्षा रखते हैं, बस सुदामा जैसे मित्र ही होते हैं जो अपने मित्र के सुख के लिए स्वेच्छा से दरिद्रता एवं कष्ट का आवरण ओढ़ लेते हैं।*
*ऐसे मित्र दुर्लभ होते हैं और न जाने किन पुण्यों के फलस्वरूप मिलते हैं, अब ऐसे मित्र को यदि त्रिलोक की समस्त संपदा भी दे दी जाए तो भी कम होगा, कृष्ण अपने भावुकता से भर्राये हुए स्वर में बोले इधर कक्ष में समस्त रानियों के नेत्र सजल थे और उधर कक्ष के बाहर खड़े सुदामा के नेत्रों से गंगा यमुना बह रही थीं*
*कांपि उठी कमला मन सोचति*
*मो सो कहा हरि को मन ओंको*
*रिद्धि कपी सब सिद्धि कपी*
*नव निद्धि कपी बम्हना यह धौं को*
*सोच भयो सुर नायक के*
*जब दूसरि बार लिए भरि झौंको*
*मेरु डरो बकसैं जनि मोहि*
*कुबेर चबावत चाऊर चौंको*
22/09/2023
Some one has created a fake I'd. Will catch hold him in few hours. Pls don't entertain him
Atul
08/06/2023
गहराई से सोचो !
आपकी ज़िंदगी का कोच कौन है ??
अनीता_अल्वारेज,
अमेरिका की एक पेशेवर तैराक हैं जो वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान परफॉर्म करने के लिए स्विमिंग पूल में जैसे ही छलांग लगाई , वो छलांग लगाते ही पानी के अंदर बेहोश हो गई ,
जहाँ पूरी भीड़ सिर्फ़ जीत और हार के बारे में सोच रही थी वहीं उसकी कोच एंड्रिया ने जब देखा कि अनीता एक नियत समय से ज़्यादा देर तक पानी के अंदर है ,
एंड्रिया पल भर के लिए सब कुछ भूल गई कि वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता चल रही है , एक पल भी व्यर्थ ना करते हुए एंड्रिया चलती प्रतियोगिता के बीच में ही स्विमिंग पूल में छलांग लगा दी ,
वहाँ मौजूद हज़ारों लोग कुछ समझ पाते तब तक एंड्रिया पानी के अंदर अनीता के पास थी ,
एंड्रिया ने देखा कि अनीता स्विमिंग पूल में पानी के अंदर बेहोश पड़ी है ,
ऐसी हालत में ना हाथ पैर चला सकती ना मदद माँग सकती ,
एंड्रिया ने अनीता को जैसे बाहर निकाला मौजूद हज़ारों लोग सन्न रह गए , एंड्रिया ने अनीता को तो बचा लिया ,
लेकिन हम सबकी ज़िंदगी में बहुत बड़ा सवाल छोड़ गई !
इस दुनियाँ में ना जाने कितने लोग हम सबकी ज़िंदगी से जुड़े हैं कितनों से रोज़ मिलते भी होंगे ,
जो इंसान हर किसी से अपने मन की बात नहीं कह पाता कि असल ज़िंदगी में वह भी कहीं डूब रहा है , वह भी किसी तकलीफ़ से गुज़र रहा है , वह भी किसी बात को लेक़र ज़िंदगी से परेशान हो रहा है , लेकिन बता नहीं पा रहा है
जब इंसान किसी को अपने मन की व्यथा , अपनी परेशानी नहीं बता पाता तो मानसिक तनाव इतना बढ़ जाता है कि वह ख़ुद को पूरी दुनियाँ से अलग़ कर लेता है , सबकी नज़रों से दूर एकांत में ख़ुद को चारदीवारी में क़ैद कर लेता है ,
ये वक़्त ऐसा होता है कि तब इंसान डूब रहा होता है , उसका मोह ख़त्म हो चुका होता है , ना किसी से बात चीत ना किसी से मिलना जुलना ,
ये स्थिति इंसान के लिए सबसे ख़तरनाक होती है ,
जब इंसान अपने डूबने के दौर से गुज़र रहा होता है , तब बाक़ी सब दर्शकों की भाँति अपनी ज़िंदगी में व्यस्त होते हैं किसी को ख़्याल ना होता कि एक इंसान किसी बड़ी परेशानी में है ,
अगर इंसान कुछ दिन के लिए ग़ायब हो जाए तो पहले तो लोगों को ख़्याल नहीं आएगा , अगर कुछ को आ भी जाए तो लोग यही सोचेंगे , पहले कितनी बात होती थी अब वो बदल गया है या फिर उसे घमंड हो गया है या अब तो बड़ा आदमी बन गया है इसलिए बात नहीं करता , जब वो बात नहीं करता तो हम कियूँ करें !
या फिर ये सोच लेते हैं कि अब दिखाई ना देता तो वो अपनी ज़िंदगी में मस्त है इसलिए नहीं दिखाई देता ,
अनीता पेशेवर तैराक होते हुए डूब सकती है तो कोई भी अपनी ज़िंदगी में बुरे दौर से गुज़र सकता है , ये समझना ज़रूरी है
लेकिन उन लोगों से हट कर कोई एक इंसान ऐसा भी होगा जो आपकी मनोस्थिति तुरंत भाँप लेगा , उसे बिना कुछ बताये सब पता चल जाएगा , आपकी ज़िंदगी के हर पहलू पर हमेशा नज़र रखेगा , थोड़ा सा भी परेशान हुए वो आपकी परेशानी आकर पूछने लगेगा ,
आपके बेहवियर को पहचान लेगा , आपको हौसला देगा आपको सकारात्मक बनायेगा और एंड्रिया की तरह कोच बन कर आपकी ज़िंदगी को बचा लेगा ,
हम सबको ऐसे कोच की ज़रूरत पड़ती है…
ऐसा कोच कोई भी हो सकता है , आपका भाई , बहन , माँ , पापा ,
आपका कोई दोस्त , आपका कोई हितैषी , आपका कोई रिश्तेदार , कोई भी , जो बिना बताये आपके भावों को पढ़ ले और तुरंत एक्शन ले।
गहराई से सोचो आपकी ज़िंदगी का कोच कौन है ??
07/06/2023
Nominate for Your good work in ESG today itself..... Best Wishes
23/12/2022
Biodiversity is rapidly declining; hence this review is much needed.
The purpose of new standard is to reflect global best practices on biodiversity management to support companies in addressing their impacts.