कुछ हँस के बोल दिया करो,
कुछ हँस के टाल दिया करो,
यूँ तो बहुत परेशानियां है तुमको भी मुझको भी,
मगर कुछ फैंसले वक्त पे डाल दिया करो,न जाने कल कोई हंसाने वाला मिले न मिले..
इसलिये आज ही हसरत निकाल लिया करो !!
समझौता करना सीखिए..क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना किसी रिश्ते को हमेशा के लिए तोड़ देने से बहुत बेहतर है ।।।
किसी के साथ हँसते-हँसते उतने ही हक से रूठना भी आना चाहिए !
अपनो की आँख का पानी धीरे से पोंछना आना चाहिए !
रिश्तेदारी और दोस्ती में कैसा मान अपमान ?
बस अपनों के दिल मे रहना आना चाहिए...!
- गुलज़ार
Dil dadakne do
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गुलशन के फूलों में तुम होमहक तुम्हारी साँसों में ,मन -मंदिर की शोभा बनकरज़िंदा हर अहसासों में,जिधर देखता तुम ही तुम होऔर नहीं कुछ दीख रहा ,जीवन की हर डाल -डाल परतुम बसती विश्वासों में !
14/06/2017
एक बार जरूर पढ़ना सांवली लड़की -लड़कियों के लिए सांवलापन होना अभिशाप है क्या.???
अँगूठी पहनाई जा चुकी थी।
सब अब खाने की प्लेट ले कर अपना-अपना कोना पकड़ चुके थे
नेहा अब अपनी सहेली और होने वाली जेठानी व नन्द के साथ सिमटीं-सिकुड़ी बैठी थी।
इतने में सासु माँ कमरे में आयी और नेहा के पास बैठते हुए बोली,
" देखो नेहा अब शादी में कुछ ही दिन बचें हैं,तो धूप में कम निकलना।
बेसन, दही, और हल्दी का लेप रोज़रात को लगाया करना। उससे रंग साफ़ हो जाएगा।"नेहा ने हाँ में सिर हिला दिया।
अब जेठानी चहकते हुए बताने लगी, " हाँ नींबू और टमाटर का रस लगाओ तो रंग साफ़ हो जाएगा।देवर जी को गोरी-चिटटी लड़कियाँ पसंद हैं, मेरे जैसी"और खिलखिला कर हँस पड़ी।
फिर माहौल हल्का हो गया।
ख़ैर, धीरे-धीरे कर के शादी के दिन नज़दीक आने लगे।
जब तब ससुराल से फ़ोन आता तो घर में रहने, ऑफ़िस से जल्दी आने व धूप में कम निकलने की हिदायत मिलने लगी।
आकाश भी जब फ़ोन करता तो अधिकतर, उसके साँवलेपन को ले कर छेड़ दिया करता था, तो कभी सीरीयस हो कर कहता,
" नेहा मुझे तुम्हारे साँवलेपन से कोई शिकायत नही है,मगर मम्मी का अरमान है कि बहुएँ उनकी 'Milky-white' हों।
नेहा जवाब देना तो चाहती मगर मम्मी की हिदायत कि वजह से चुप रह जाती।
अपनी चिढ़ मम्मी पर निकालती, तो मम्मी कहती,"अरे इतने बड़े घर में रिश्ता हो रहा है,
सिर्फ़ इसलिए कि तू बैंक में नौकरी करने लगी,वरना एक साधारण मास्टर की बेटी की शादी कभी हो पाती क्या वहाँ।
तू देख, वो रईस लोग हैं।
तू क़िस्मत वाली है की तेरे ऐसे रंग-रूप के बाद भी उन्होंने तुम्हें चुना है।"
फिर नेहा चुप हो जाती।उसे भी लगता की मम्मी सच ही तो कह रही है।
लेकिन जैसे-जैसे दिन नज़दीक आने लगे, सासु-माँ, और आकाश का ये प्रेशर बढ़ने लगा।
नेहाख़ुद में अन्दर ही अन्दर और चिढ़ने लगी।
जो रंग खिलना चाहिए था, ऊबटन लगने के बाद वो और मुरझाने लगा।
शादी से एक सप्ताह पहले आकाश का जन्मदिन था।
आकाश ने पार्टी में नेहा को भी बुलाया था।
सासु माँ ने पहले ही फ़ोन पर समझा दिया था कि पार्लर होती हुई पार्टी में आए।
माँ ने भी भाई के साथ पार्लर भेज दिया।
नेहा जब पार्टी में भाई के साथ पहुँची तो उसे देखते ही,सासु माँ लाल-पीली होने लगी।
बड़ी बहु को बुला कर इन्स्ट्रक्शन दिया कि
"ले जाओ इसे बाथरूम में और अपने मेक-अप से तैयार कर दो।
"मगर नेहा नही गयी। वहीं खड़ी रही।
सासु-माँ के तलवे का ग़ुस्सा सिर पर चढ़ गया और लगभग धक्का देते हुए नेहा को बोलीं,
" न रंग है न रूप, फिर तुम्हें घमंड किस बात का है।
हम ने अपने से नीच घर से रिश्ता जोड़ कर ग़लती कर दी।
"इतने में आकाश भी आ गया वहाँ, हल्ला सुन कर और नेहा का हाथ पकड़ कर बाथरूम की तरफ़ भाभी के साथ बढ़ने लगा।
नेहा ने धीरे से उसके हाथ से अपने हाथ को आज़ाद करवाते हुए वापिस सासु माँ की तरफ़ बढ़ने लगी और उनकेक़रीब जा कर बोली,"हाँ, मैं साधारण घर से हूँ।
मेरा रंग साँवला है।मुझे घमंड तो नही मगर गर्व है अपने आप पर।
मैं अपनी कड़ी मेहनत से आज एक छोटे से मुक़ाम पर हूँ,
और हाँ मेरे घरवाले आपके जितने रईस तो नही,
मगर उनमें इतना संस्कार तो है की,इंसान को इंसान समझते हैं,
उन्हें रंग-रूप के आधार पर तौलते नही हैं..
और आकाश तुम .. ख़ैर तुमसे कोई शिकायत नही है,क्यूँकि तुमने बचपन से ही यही देखा है, की औरतें सजावटी समान हैं,
तो उनका well decorated होना लाज़मी है।"
कहते हुए उसने अपनी अँगूठी निकाल कर अपनी होने वाली सास के हाथ में थमा दी
और भाई का हाथ पकड़ कर,हॉल से बाहर निकल गयी,""
एक आज़ाद हवा के झोंके की तरह.......
दुनियाँ की सबसे*अच्छी किताब* हम स्वयं हैं*
खुद को समझ लीजिए*
सब समस्याओं का*समाधान* हो जाएगा...
13/06/2017
06/06/2017
हम दोनों ने 18 की उम्र में घर छोड़ा,
तुमने JEE पास कीमेने Army के लिए Test पास की
तुम्हे IIT मिली,मुझे Armyतुमने डिग्री हांसिल की,
मेने कठोर प्रशिक्षण,तुम्हारा दिन सुबह 7 से शुरू होकर शाम 5 खत्म होता
मेरा सवेरे 4 बजे से रात 9 बजे तक और कभी कभार 24 घंटे...
तुम्हारी कनवोकेशन सेरेमनी हुई,
मेरी नियुक्ति हुई,
सबसे बेहतर कंपनी तुम्हे लेकर गयी और सबसे शानदार पैकेज मिला,
मुझे कंधो पर regiment ke naam के साथ पलटन ज्वाइन करने का आदेश मिला,
तुम्हे नोकरी मिली,मुझे जीने का तरीका,
हर सांझ तुम परिवार से मिलते,
मुझे उम्मीद रहती की जल्द मिलूँगा,
तुम हर त्यौहार उजाले और संगीत में मनाते,
मैं अपने commander संग बंकर में,
हम दोनों की शादी हुई.....
तुम्हारी पत्नी रोज तुम्हे देख लिया करती,
मेरी पत्नी बस मेरे जिन्दा रहने की आस करती,
तुम्हे बिजनेस ट्रिप पर भेजा गया,
मुझे लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल पर भेजा गया,
हम दोनो लोटे ......
हम दोनों की पत्नियां आंसू नहीं रोक पाई....
लेकिन....तुमने उसके आंसू पोंछ दिए,
मैं नहीं पोंछ पाया,
तुमने उसे गले लगा लिया,मैं नहीं लगा पाया,
क्यूंकि मैं एक तिरंगे में लिपटे हुए कॉफिन के अन्दर छाती पर मैडल लेकर लेटा हुआ था,
मेरे जीने का तरीका ख़त्म हो गया....
तुम्हारी नोकरी जारी है....
हम दोनों ने 18 की उम्र में घर छोड़ाइस लेख ने हमें रुलाया सीना गर्व और मन ग्लानि से भर आया
इस माटी की खातिर न जाने कितनो ने अपना चिराग गंवाया:'
(मेरे सभी फोजी भाइयो के लिए
वंदे मातरम
जय हिंद
सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ ।नौसिखिये परिंदों को बाज बनाता हूँ ।।चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी ।तब दुनिया बदलने की आवाज बनाता हूँ ।।समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के ।और मैं डूबती कश्तियों को जहाज बनाता हूँ ।।बनाए चाहे चांद पे कोई बुर्ज ए खलीफा ।अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता ह
चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाए,
वैद बेचारा क्या करे, कितना मरहम लगाए ।
अर्थ: संत कबीर जी कहते हैं कि चिंता वो
अदृश्य डाकिनी है जो मनुष्य के हृदय को
आघात पहुँचाती है, वह घाव किसी को नहीं
दिखाई देता है। यहां तक की विश्व को कोई
भी वैद्य जितना चाहे उतना मरहम लगा कर भी
इसका इलाज नहीं कर सकता है।
गुजर गये गुजरने वाले कब के पर वो रहगुजर
नहीं गुजरे
शमाए बुझ गयी चिराग हार मान बैठे, ढीठ वो
मगर नहीं गुजरे
अब कर भी क्या सकते है हेमंत उनके लिए
एक नमन के शिवा
जिस गली को उनके लिए अच्छा कहा उसपर
हम उम्रभर नहीं गुजरे।।
कुछ नहीँ था मेरे पास खोने को,
जब से मिले हो तुम डर गया हूँ मैँ |
मैंने तो हमेशा ही तुझसे महोब्बत की है,
तेरे ना मानने से हकीक़त नहीं बदलेगी |
पागल नहीं थे हम जो तेरी हर बात मानते थे,
बस तेरी खुशी से ज्यादा कुछ अच्छा ही नही
लगता था..!!!
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