01/06/2026
Trust the process 🙏
सही समय पर सही काम ही इंसान को सफल बनाता है। मैंने अपनी जिंदगी का लगभग आधा पड़ाव पार कर लिया है और मैं कुछ सब्जियाँ आज भी नहीं बना पाती हूँ क्योंकि जिस उम्र में ये सारी चीजें मां बाप सिखाना चाहते हैं वही उम्र पढ़ाई करने की होती है. मैनें घर के काम नौकरी के बाद सिखना शुरू किया है और उसी क्रम में आज पहली बार कटहल की सब्जी बनाई है.. मैं किचन का काम जिंदगी भर कर सकती हूं और सीख सकती हूं पर पढ़ाई करके करियर बनाने की एक उम्र होती है।
31/05/2026
Thank you all for the beautiful birthday wishes! Your messages mean the world to us... 🙏🙏
31/05/2026
श्रीमानजी के जन्मदिन के दिन नवग्रह मंदिर डबरा जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
30/05/2026
Happy birthday partner 💓 💗 मां पीतांबरा तुम्हें दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करें।
29/05/2026
गांव में कोई भी अंकल नहीं होता, यहां सभी लोग चाचा ,ताऊ, बाबा ,भैया, दादा होते है जो अपनेपन की खुशबू ये शब्दों को बोलने से आती है वो अंकल बोलने से कभी नहीं आती। गांव एक पूरा परिवार की तरह होता है। यहां किसी के यहां भी कोई भी कार्यक्रम हो तो न्योता पूरे गांव को परिवार समझकर दिया जाता है। और वह न्योता जब जमीन पर बैठकर सभी के साथ खाया जाता है, तो उसका स्वाद फाइव स्टार होटल के खाने के स्वाद को भी फीका कर देता हैं। आज हमारी पुलिस लाइन में पिछले सात दिनों से हो रही भागवत कथा का समापन हुआ और उसी का भण्डारा खाकर अपने गांव की याद आ गई।
28/05/2026
आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा
बे-वक़्त अगर जाऊँगा सब चौंक पड़ेंगे
इक 'उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा
जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा
ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुम ने मिरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा
यारों की मोहब्बत का यक़ीं कर लिया मैं ने
फूलों में छुपाया हुआ ख़ंजर नहीं देखा
महबूब का घर हो कि बुज़ुर्गों की ज़मीनें
जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा
ख़त ऐसा लिखा है कि नगीने से जड़े हैं
वो हाथ कि जिस ने कोई ज़ेवर नहीं देखा
पत्थर मुझे कहता है मिरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उस ने मुझे छू कर नहीं देखा।
28/05/2026
किसान को अन्नदाता इसलिए कहा जाता है कि वो एक छोटे से कीड़े से लेकर इंसान और जानवरों तक का भी पेट भरता है। बचपन से ही दादाजी को पहला निवाला चिड़ियों को तथा खाने का लास्ट निवाला, कुत्ते को देने की प्रथा को देखते हुए हम बड़े हुए हैं। दादी भी जब घी निकालती थी तो उसके लास्ट का बचा हुआ
भाग, जिसमें कुछ शक्कर और आटा मिलाकर चीटियों के खाने की व्यवस्था करती थी। इन प्रथाओं के सहारे ही हम बुजुर्गों को कम से कम याद तो रखते हैं।
28/05/2026
कल तक उड़ती थी जो मुँह तक आज पैरों से लिपट गई.
चंद बूँदे क्या बरसी बरसात की ,धूल की फ़ितरत ही बदल गई...
27/05/2026
ग्रामीण परिवेश में मेरी परवरिश होने से आधुनिक फूड से बहुत ज्यादा मेरा वास्ता नहीं है।ये फूड कितना हानिकारक है?ये इस छोटी सी और नई पीढ़ी को समझाना थोड़ा मुश्किल है। टेक्नोलॉजी के इस दौर में ये नई पीढ़ी रोज नित नई चीजों से परिचित हो रही है। गर्मी आ गई है और बच्चों की आइसक्रीम के लिए डिमांड न हो, ऐसा हो नहीं सकता।बाहर की आइस्क्रीम खाने से बेटर, मुझे घर में हेल्दी चीजों से बनी आइस्क्रीम बनाना ज्यादा उचित लगा तो आज हम दोनों ने बैठकर घर में ही आइसक्रीम बना ली।
27/05/2026
बडी बहन को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.... मां पीताम्बरा की कृपा आप पर हमेशा बने रहे..