"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से.....
सुरह -23 अल -मॉमिनून(51-53)
ए पैगंबरों ,सुथरी चीज़ें खाओ और नेक काम करो /मैं जानता हूँ जो कुछ तुम करते हो /और यह तुम्हारा दीन एक ही दीन है /और मैं तुम्हारा रब हूँ तो तुम मुझसे डरो /फिर लोगों ने अपने दीन (धर्म) को आपस में टुकड़े-टुकड़े कर लिया/
सबसे पहले सिर्फ़ दीन (धर्म) हुआ, उसका नाम "सनातन धर्म " कहा गया ,आज इसी को सत्य सनातन वैदिक हिंदू धर्म कहते हैं,फिर उसके ही टुकड़े-टुकड़े कर दिए गये और उसीको यहूदी, ईसाई, इस्लाम, मोहम्मदी, शिया, सुन्नी, देवबंदी,बरेलवी, बोहरा, पाकिस्तान, बांग्लादेश, और नज़ाने क्या-क्या नाम दिए जा रहे हैं /"श्रीरामचरित्रमानस" में धर्म (दीन) के कलियुग में टुकड़े-टुकड़े किए जाने को गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं "प्रकट कीन्ह बहू पन्थ" /
भारत महासंघ
अखण्ड भारत हेतु राजनीतिक व सामाजिक आं?
सृष्टि के आरंभ से अभी हाल ही 1947 तक यह राष्ट्र एक रहा है,सिर्फ़ अँग्रेज़ों के षड्यंत्र व कुछ सत्ता लोभियों
के कारण हमारा देश खंड खंड हुआ / अब फिर ईश्वर का इशारा हो रहा है,संकेत मिल रहे हैं ,विश्वास हिल्लोरे
ले रहा है की एक बार फिर हमारी प्यारी "भारत माता" अपने मूल स्वरूप में हमें दर्शन देने को हैं ,बस आवश्यकता
इस बात की है की हम भी उस ओर अपने कदम बढ़ा दें /जैसे मंगल ग्रह पर जाने की हम ने सोची ,औ
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से.....
सुरह -23 अल-मॉमिनून(35-38)
क्या यह शख्स तुम से कहता है की जब तुम मर जाओगे और मिट्टी और हड्डियाँ हो जाओगे तो फिर तुम निकले जाओगे /बहुत ही बेइद और बहुत ही बेइद (असंभव) है जो बात उनसे कही जा रही है /
इसमें असंभव कुछ भी नही पुनर्जनम की और स्पस्ट इशारा कर रही हैं यह सुरह इस इल्म की तफ्सिलात के लिए "श्रीमद् भगवद् गीता "जी को पढ़ना चाहिए जो "रूह" (आत्मा) की अमरता की ही बात करती है /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से.....
सुरह - 22 अल-हज (52-54)
और हमने तुमसे पहले जो भी रसूल और नबी भेजा तो जब उसने कुछ पढ़ा तो शैतान ने उसके पढ़ने में मिला दिया / फिर अल्लाह शैतान के डाले हुए को मिटा देता है / फिर अल्लाह अपनी आयतों को पुख़्ता कर देता है /और अल्लाह इल्म वाला हिकमत (तत्वदर्शिता) वाला है /
यह आयात क़ुरान में शैतान द्वारा की गयी मिलावट को सुधारने की इजाज़त देती है और इसी आयात की मदद से बहुत सी मिलावट वाली आयतों को क़ुरान में से हटाने का सही वक़्त आ गया है /क़ुरान को दुरुस्त कर हमें अल्लाह का काम करना चाहिए /अपनी राय दें /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से .....
सुरह - 20 ता. हा. (7-8)
और तुम चाहे अपनी बात पुकार कर कहो ,वह चुपके से कही बात को जनता है /और इससे ज़्यादा छुपी बात को भी / वह अल्लाह है /उसके सिवा कोई माबूद(पूज्य) नहीं /तमाम अच्छे नाम उसी के हैं /
"श्रीरामचरितमानस" में इसी बात को कहा गया है "बिनु पग चलही ,सुनही बिनु काना "यानी वह बिना पैरों के चल लेता है ,बिना कानों के सुन लेता है /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से........
सुरह -18 अल कहफ़ (109)
कहो कि अगर समुद्र मेरे रब की निशानियों को लिखने के लिए रोशनाई हो जाए तो समुद्र ख़त्म हो जाएगा इससे पहले की मेरे रब की बातें ख़त्म हो,अगरचे हम उसके साथ उसी के मानिंद और समुद्र मिला दें /
"श्रीरामचरितमानस" में इसी बात को इस प्रकार कहा गया है "हरी अनंत हरी कथा अनंता ,कहहीं सुनही बहूबिधि सब सन्ता " यानी ईश्वर(अल्लाह) अनंत है,उनकी बातें भी अनंत हैं ,इन्हें संत बहुत प्रकार से कहते और सुनते हैं/
संत कबीर दास जी ने कुछ यूँ कहा "सब धरती काग़ज़ करूँ ,लेखनी सब वन राई,सात समुद्र की मसि करूँ ,हरी (गुरु) गुण लिखा ना जाए " यानी सब धरती का कागज हो जाए,जंगलों की लकड़ियों की कलम बना दी जाए,सात समुद्रों की श्याही बना दी जाए ,तो भी ईश्वर के गुण नहीं लिखे जा सकते /
"क़ुरान"भारतीय नज़रिए से......
सुरह -17 बनी इसराईल (94-96)
और जब उनके पास हिदायत आ गयी तो उन्हें ईमान लाने से इसके सिवा और कोई चीज़ रुकावट नहीं बनी कि उन्होनें कहा कि क्या अल्लाह ने बशर (इंसान) को रसूल बनाकर भेजा है /कहो की अगर ज़मीन में फरिश्ते होते कि उसमें चलते फिरते तो आल्लबत्ता हम उन पर आसमान से फरिश्ते को रसूल बनाकर भेजते /कहो कि अल्लाह मेरे और तुम्हारे दरमियाँ गवाही के लिए काफ़ी है/ बेशक वह अपने बन्दो को जानने वाला, देखने वाला है /
"श्रीरामचरितमानस" में राम जनम के प्रसंग के द्वारा "ईश्वर"(अल्लाह) के मनुष्य (इंसान) बनने का पूरा कारण देते हुए गोस्वामी तुलसीदासजी लिखते हैं "विप्र धेनु सुर संत हित लिन्ह मनुज अवतार " यानी विद्वानो ,गायों ,देवो ,और
संतों के लिए ही भगवान मनुष्य रूप में जनम लेते हैं /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से .....
सुरह -17 बनी इस्राइल (81)
और कह कि हक़(सत्य) आया और बातिल(असत्य) मिट गया /बेशक बातिल मिटने ही वाला था /
इसके कहे जाने से बहुत पूर्व "आदि जगदगुरु शंकराचार्य जी" ने सूत्र दिया था "ब्रहां सत्यम जगत मिथ्या"यानी ईश्वर सत्य है और संसार असत्य /
सुरह -17 बनी इस्राइल (85)
और वे तुमसे रूह(आत्मा) के बारे में पूछते हैं /कहो की रूह मेरे रब के हुक्म से है /और तुम्हें बहुत थोड़ा इल्म दिया गया है /
"श्रीमद् भागवत गीता जी " में है रूह(आत्मा) का तफ़सील से इल्म(ज्ञान) /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से .....
सुरह -16 अन-नहल (103-105)
और हमें मालूम है कि ये लोग कहते हैं कि इसे तो एक आदमी सिखाता है /जिस शख्स की तरफ वे मंसूब करते हैं/ उसकी ज़बान अजमि (गैर अरबी) है और यह क़ुरान साफ़ अरबी ज़बान है / बेशक जो लोग अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं लाते ,अल्लाह उन्हें कभी राह नहीं दिखाएगा और उनके लिए दर्दनाक सज़ा है / झूठ तो वे लोग गढ़ते हैं जो अल्लाह की आयतों पर ईमान नहीं रखते और यही लोग झूठे हैं /
यहाँ मुमकिन है कि कोई "भारतीय" ही मोहम्मद साहब को संस्कृत या हिन्दी में सिखाता हो जिसका वे अपनी स्वयं की ज़बान व समझ से तर्जुमा अरबी में करते हों और इस तरह क़ुरान की आयतें नाज़ील फ़ाज़ील होती होंगी / आप सब भी अपनी तर्बियत और तफ्सिलात के साथ इस आयात पर अपनी राय ज़रूर दें /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से.....
सुरह - 16 अन-नहल(68-69)
और तुम्हारे रब ने शहद की मक्खी पर 'वही' (प्रकाशना) किया कि पहाड़ों और दरखतों और जहाँ टत्टियाँ बाँधते हैं उनमें घर बना /फिर हर किस्म के फलों का रस चूस और अपने रब की हमवार की हुई राहों पर चल /उसके पेट से पीने की चीज़ निकलती है,इसके रंग मुख्तलिफ हैं ,इसमे लोगों के लिए शिफा(आरोग्य) है /बेशक इसमें निशानी है उन लोगों के लिए जो ग़ौर करते हैं /
हमारी भारतीय संस्कृति में आरोग्य प्राप्ति हेतु जो शास्त्र है उसे "आयुर्वेद "कहते हैं और इसके अनुसार भी "शहद" के साथ सभी औषधियाँ लेना स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से......
सुरह -16 अन-नहल(66-67)
और बेशक तुम्हारे लिए चौपायों में सबक है/ हम उनके पेटों के अंदर के गोबर और खून के दर्मियान से तुम्हें खालिस दूध पिलाते हैं,खुशगवार पीने वालों के लिए और खजूर और अंगूर के फलों से भी /तुम उनसे नशे की चीज़ें भी बनाते हो और खाने की अच्छी चीज़ें भी / बेशक इसमें निशानी हैं उन लोगों के लिए जो अकल रखते हैं/
इसलिए भारतीय संस्कृति के अनुसार भी दुधारू पशुओं कालालन,पालन,संरक्षण शुद्ध दूध के लिए करना ही चाहिए/ इसी लिए श्री कृष्ण भगवान गायों को पालने वाले "गोपाल" बने हैं /सभी तरह की सुरा शराब को बुरी बताया गया है /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से.....
सुरह -16 अन-नहल (61)
और अगर अल्लाह लोगों को उनके जुल्म पर पकड़ता तो ज़मीन पर किसी जानदार को नहीं छोड़ता /लेकिन वह एक मुक़र्रर वक़्त तक लोगों को मोहलत देता है /फिर जब उनका मुक़र्रर वक़्त आ जाएगा तो वे ना एक घड़ी पीछे हट सकेंगे और ना आगे बढ़ सकेंगे /
"श्रीरामचरितमानस" के अयोध्या कांड में भगवान राम के वनवास के प्रसंग में इस विषय पर जितना लिखा मिलता है ,उतना अन्यत्र कहीं नहीं मिलता ,होना था राज तिलक ,हो गया .चौदह साल का वनवास "सजि प्रतिति बाहुबिधि गढ़ी छोली, अवध साढ़साती तब बोली "अयोध्या पर शनि ग्रह की साढ़ेसात साल की साढ़े साती लग गयी /आगे कहते हैं "काहु ना कौउ सुख दुख कर दाता , निज कृत कर्म भोग़ू सब भ्राता "यानी कोई किसी को सुख दुख नहीं देता , यह तो सब अपने ही किए कर्मों का फल है ,जो समय आने पर मनुष्य को स्वयं ही भोगना पड़ता है /
"क़ुरान" भारतीय नज़रिए से.....
सुरह -15 अल-हिज्र(39-42)
इब्लीस ने कहा ,ए मेरे रब,जैसे तूने मुझे गुमराह किया है इसी तरह मैं ज़मीन में उनके लिए मुज्यन (दिलकशी) करूँगा और सब को गुमराह कर दूँगा /सिवा उनके जो तेरे चुने हुए बंदे हैं /
अल्लाह ने फरमाया ,यह एक सीधा रास्ता है जो मुझ तक पहुँचता है / बेशक जो मेरे बंदे हैं उन पर तेरा ज़ोर नहीं चलेगा /सिवा उनके जो गुमरहों में से तेरी परवी करें /और उन सबके लिए जह्न्नम का वादा है /
"श्रीरामचरितमानस" में कहा गया है "ईश्वर के इशारे पर नाचती माया देखी,
माया के इशारे पर नाचता संसार देखा और माया से छुड़ाने वाली ईश्वर की भक्ति देखी "/
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