25/12/2025
दिनांक 17.12.2025 को कलेक्टरेट महिला एव बाल विकास सभागार मे समेकित बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत ग्वालियर में साइबर सुरक्षा एवं बाल तस्करी जैसे अत्यंत संवेदनशील एवं समसामयिक विषयों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के अधिकारियों/कर्मचारियों को साइबर अपराधों से सुरक्षा तथा बाल तस्करी की रोकथाम, पहचान एवं कानूनी प्रक्रिया के संबंध में जागरूक एवं प्रशिक्षित करना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति (CWC), किशोर न्याय बोर्ड (JJB), बाल देखभाल संस्थानों (CCI) के अधीक्षक एवं केयर टेकर, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), चाइल्ड हेल्पलाइन स्टाफ, श्रम विभाग के निरीक्षक तथा विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती उपासना राय द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण के उद्देश्य, आवश्यकता एवं बाल संरक्षण के क्षेत्र में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर माध्यमों के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
साइबर सुरक्षा विषय पर प्रशिक्षण साइबर सेल के टीआई श्री धर्मेंद्र शर्मा द्वारा दिया गया। उन्होंने साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों, जैसे सोशल मीडिया के दुरुपयोग, ऑनलाइन ठगी, साइबर बुलिंग एवं बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की जानकारी दी तथा इनसे बचाव के व्यावहारिक उपाय भी बताए।
बाल तस्करी विषय पर श्री आलोक बेंजामिन द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने बाल तस्करी की पहचान, इसके कारण, रोकथाम के उपाय, पीड़ित बच्चों के पुनर्वास तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला के अंत में श्री मनीष सिंह ,प्रभारी ICPS द्वारा उपस्थित सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों एवं आयोजन से जुड़े अधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के साथ अनुभव साझा करने एवं प्रश्नोत्तर सत्र के साथ किया गया।
04/12/2025
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य सचिव
डॉ संजीव कुमार शर्मा ने विभागीय अधिकारियों की बैठक में योजनाओं की समीक्षा की -
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य सचिव डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने बाल संरक्षण के संबंध में समीक्षा के दौरान कहा कि बालकों से संबंधित मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने बाल अधिकारों के क्षेत्र में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा भी की। इसके साथ ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को बाल संरक्षण आयोग द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का संवेदनशीलता के साथ निराकरण करने की बात भी कही।
कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण के संबंध में आयोजित बैठक में कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह, सीईओ जिला पंचायत श्री सोजान सिंह रावत सहित कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास श्रीमती उपासना राय, जिला शिक्षा अधिकारी श्री हरिओम चतुर्वेदी सहित बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े विभागीय अधिकारी एवं बाल संरक्षण आयोग के पदाधिकारी उपस्थित थे।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण के सदस्य सचिव डॉ. संजीव शर्मा ने ग्वालियर जिले में बाल अधिकारों के क्षेत्र में किए गए नवाचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण के लिये अनुकूल प्रशासनिक तंत्र, त्वरित सहायता प्रणाली और विभागीय समन्वय को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। उन्होंने बाल संरक्षण के क्षेत्र में ग्वालियर जिले में किए गए नवचारों की प्रशंसा करते हुए ग्वालियर की तर्ज पर ही आयोग के माध्यम से अन्य जिलों में लागू करने की इच्छा जाहिर की।
इसके साथ ही प्रदेश भर में पुलिस विभाग के माध्यम से संचालित मुस्कान अभियान के तहत पुलिस विभाग द्वारा घर-घर जाकर लोगों को महिला संरक्षण एवं बाल संरक्षण के संबंध में जागरूक करने के लिये किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण के लिये जन जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने ग्वालियर जिले में महिला संरक्षण एवं बाल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्वालियर जिले में बाल मित्र कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को काउंसलिंग का कार्य किया जा रहा है। पॉस्को एक्ट के बारे में भी जन जागरूकता के लिये जिले में निरंतर स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने आयोग से आग्रह किया कि बच्चों को गोद लेने की जो प्रक्रिया है उसका सरलीकरण किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया की जा सके।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह ने मुस्कान अभियान के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत जिले भर में पुलिस अधिकारियों के माध्यम से महिला संरक्षण एवं बाल संरक्षण के संबंध में जनजागरूकता लाने का कार्य किया जा रहा है।
बैठक में आयोग के माध्यम से किए गए प्रयासों के संबंध में भी जानकारी दी गई। पिछले 6 माह में आयोग द्वारा 26 हजार से अधिक शिकायतों का निराकरण, 2800 से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्ति, 2400 से अधिक बच्चों का पुनर्वास करने के साथ-साथ लगभग 2000 बच्चों को उनके गृह जिलों में सुरक्षित वापस भेजा गया है। आयोग ने शिकायतों के प्रभावी निराकरण के लिये एआई आधारित तकनीक, उन्नत शिकायत प्रबंधन मंच तथा पॉस्को अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, आईटीआई एवं बाल स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम लागू किए हैं।
बैठक में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री सोमेश महंत द्वारा जिले में नशा मुक्ति केन्द्र न होने के कारण नशे में लिप्त बालकों की समस्याओं के निराकरण में दिक्कतों का सामन करना पड़ रहा है। आयोग के माध्यम से जिले में नशा मुक्ति केन्द्र भी स्थापित किया जाना चाहिए।
बैठक के प्रारंभ में कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती उपासना राय ने महिला एवं बाल विकास विभाग व शिक्षा विभाग के माध्यम से बाल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की प्रजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी।
आयोग के सदस्यों ने संस्थाओं का किया भ्रमण
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य सचिव डॉ. संजीव शर्मा एवं उनकी टीम ने ग्वालियर भ्रमण के दौरान जिले में संचालित बाल देखरेख संस्था, प्रगति मंडल, महिला मंडल, विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण का भ्रमण कर बालकों के हितार्थ उपलब्ध कराई जा रहीं सेवाओं का भी अवलोकन किया।