चलो देश के साथ।
जागो अंधभक्तो
नेताओं की राजनीतिक रैलिया कैसिल करो तेल बचाओ Pushkar Singh Dhami deshbhakt dialogue Narendra Modi Uttarakhand DIPR
Pahadi Army Uttrakhand - पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड
पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड
पर्वतीय अस्मिता संस्कृति व संसाधनों की रक्षक
जय पहाड़ी- जय पहाड़,जय कुमाऊं-जय गढ़वाल
पहाड़ी हिन्दू जिंदाबाद
फौजी भाईयो का अपमान,फौजियो के परिवारों का समर्पण के खिलाफ़ अभद्र टिप्पणी सहन नहीं किया जायेगा
सामाजिक मर्यादा और शब्दों की सीमा में लगाम लगाओ नहीं तो जेल जाना पड़ेगा।
Pahadi Army Uttrakhand - पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड पहाड़ी आर्मी जिंदाबाद
30/05/2026
कलम की ताकत,सच की आवाज़
समाज का आइना पत्रकारिता का अंदाज.
आप सभी सम्मानित पत्रकार भाईयो को हिंदी पत्रकारिता दिवस की बधाइयाँ।
एकजुट एकमुठ
पहाड़ी आर्मी से जुड़ो अपनी जड़ों से जुड़ो
इस बार पहाड़ी एकता की होगी बात
मिशन 2027 हो जाओ तैयार
26/05/2026
क्या देवभूमि की पहचान सिर्फ नारों तक सीमित रह गई है?
उत्तराखंड को “देवभूमि” कहा जाता है, लेकिन आज सवाल यह उठ रहा है कि क्या हमारी अपनी संस्कृति, लोक पर्व, परंपराएं और विरासत राजनीति के बीच कहीं पीछे छूटती जा रही हैं?
जिस राज्य का निर्माण पहाड़ की संस्कृति, लोकभाषा, परंपरा और अलग पहचान बचाने के लिए हुआ था, वहां आज कई पारंपरिक उत्तराखंडी त्योहारों पर सार्वजनिक अवकाश तक नहीं मिलते। लेकिन वोट बैंक की राजनीति के दबाव में फैसले तुरंत होते दिखाई देते हैं।
क्या केवल चुनिंदा वर्गों को खुश करने से देवभूमि की आत्मा बच पाएगी?
क्या
मकर संक्रांति / उत्तरायणी
घुघुतिया
बसंत पंचमी
फूलदेई
बिखोती / बैसाखी
बिस्सू मेला
रम्माण
हरेला
हिलजात्रा
घी संक्रांति / ओलगिया
नंदा देवी राजजात यात्रा
खतड़ुवा
जौलजीबी मेला
पूर्णागिरि मेला
मौण मेला
चिपला जात
गेंद मेला
हरेला, इगास, फूलदेई, घी संक्रांति, उत्तरायणी जैसे पर्व हमारी पहचान नहीं हैं?
उत्तराखंड की जनता की मांग:
सभी प्रमुख उत्तराखंडी लोक पर्वों पर भी सरकारी अवकाश घोषित हों
स्कूलों में पहाड़ी संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा मिले
राज्य निर्माण के मूल उद्देश्य और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान मिले
देवभूमि की असली पहचान उसकी संस्कृति, लोक परंपराएं और पर्व हैं… इन्हें बचाना केवल सरकार नहीं, हम सभी की जिम्मेदारी है।
जारी आदेश के आधार पर जनचर्चा हेतु साझा। यह पोस्ट केवल जन-जागरूकता और सांस्कृतिक संवाद हेतु है।
बेहद शर्मानक और चौकाने वाली घटना
दुरुस्त पहाड़ो में डाकिये ज़ब हरियाणा से होंगे तो यही हालात होंगे !
बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र की यह घटना आज सिर्फ एक उदाहरण है मै जिला प्रशासन से आग्रह करता हूँ ऐसे बत्तमीज बेहूदा कर्मचारियों को तुरंत बर्खास्त किया जाय
Pushkar Singh Dhami
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