22/10/2026
हमारा एक ही सवाल है…
एक देश, एक कानून.. फिर दोहरा व्यवहार क्यों?
केरल में Zero FIR, तो राजस्थान में इनकार क्यों?
राजस्थान की बेटी रितु बराला के साथ दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बर्बरता की। रितु ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए परिवेदना दी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उसने अपने गृह राज्य राजस्थान में Zero FIR दर्ज कराने के लिए थाने में शिकायत दी।
राजस्थान की बेटी अपने ही प्रदेश के पुलिस कमिश्नरेट में न्याय की गुहार लगाती रही, लेकिन दुर्भाग्य देखिए प्रदेश के CMO के अधिकारियों, गृह मंत्री, गृह राज्य मंत्री, गृह सचिव और पुलिस कमिश्नर में से किसी ने भी बात करना तक उचित नहीं समझा। इससे अधिक संवेदनहीनता और क्या होगी कि न्याय मांग रही राजस्थान की बेटी की आवाज़ सुनने वाला इस सरकार में कोई नहीं है।
राजस्थान कांग्रेस के कार्यकर्ता 3 दिन से Zero FIR के लिए सत्याग्रह कर रहे थे। लेकिन सुनवाई नहीं होने पर जब हमने कार्रवाई के लिए अल्टीमेटम दिया, तब राजस्थान पुलिस ने हमसें बात की लेकिन FIR दर्ज नहीं की। पुलिस ने लिखित में जवाब दिया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) के तहत Zero FIR दर्ज नहीं हो सकती।
अब जब पुलिस ने अपना इनकार लिखित में दे दिया है, तो हमने इस फैसले को न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है। हम माननीय न्यायालय की शरण में जाएंगे, रितु की FIR दर्ज कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और कानून की गलत व्याख्या कर अपने दायित्वों से मुंह मोड़ने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय कराएंगे।
लेकिन विडंबना देखिए... जिस प्रदेश में बेटियों को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़े, जुल्म सहने के बाद इंसाफ़ के लिए दर-दर भटकना पड़े और उनके न्याय के लिए हो रहे सत्याग्रह को सत्ताधारी "नौटंकी" कहकर अपमानित करें, वहां की सत्ता की संवेदनशीलता पर मर चुकी है। राजस्थान की बेटी की न्याय की पुकार को "नौटंकी" कहना केवल शर्मनाक नहीं, बल्कि सत्ता के उस अहंकार का प्रमाण है, जहां अन्याय से पीड़ित बेटी का दर्द सुनने के बजाय उसकी आवाज़ को ही अपमानित किया जाता है।
भाजपाई सत्ता राजनीतिक दबाव में कानून के प्रावधानों को नकारने की कोशिश कितनी भी कर ले, लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। रितु को न्याय दिलाना हमारा संकल्प है, और दोषियों की कानूनी जवाबदेही तय कराना हमारा लक्ष्य।
हमारा सत्याग्रह स्थगित हुआ है, संघर्ष नहीं! न्याय होकर रहेगा।