10/03/2026
#सच्चाई
असली पुष्पा और सांभा तो मेडिपल्स हॉस्पिटल निकला।
जोधपुर मेडिपल्स हॉस्पिटल ने लेटर जारी करके अपनी सफाई दी ।
मुआवजे की राशि के बारे में समाज के ठेकेदारों के लोगों ने झूठ बोला और सोशल मीडिया पर ये कहकर प्रचार किया कि एक करोड़ का मुआवजा जारी किया है हॉस्पिटल ने।
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20/02/2026
मुक्तिधाम काम में यहां क्विंटल लो के घी से हवन होता है एकमात्र बिश्नोई समाज ऐसा समाज है जो देसी घी से हवन यज्ञ करते हैं और खोपरा और देसी घी की आहुति देते हैं पर्यावरण शुद्धता और एकता का संदेश देते हैं एकमात्र ऐसा समाज है जो पर्यावरण संरक्षण के लिए हमेशा आगे रहता है धन्य है वह मेरे गुरु जंभेश्वर भगवान को जो हमें यह मार्ग अपनाने का बोला और हमेशा प्रकृति के लिए समर्पित रहने के लिए हमें एकता का संदेश दिया,🔥🔥🔥
20/02/2026
संतो के सानिध्य की बात करें तो खेजड़ी बचाओ आंदोलन के मजबूत संत सानिध्य स्वामी भागीरथ दास जी शास्त्री थे जिन्होंने हर बात पर मजबूती से सामना किया और जयपुर से लगाकर बीकानेर तक सरकार को हर दम सजग किया....🙏🙏
20/02/2026
📢 बिश्नोई समाज आत्मचिंतन करे — गुरु महाराज की शिक्षा और हमारी वर्तमान दिशा
बिश्नोई समाज अन्यथा न लेते हुए इन बातों पर गंभीरता से विचार करे।
यह किसी व्यक्ति, संस्था या स्थान विशेष के विरोध में नहीं है।
यह अपने ही समाज के भीतर झांकने का विनम्र प्रयास है।
🌿 गुरु महाराज ने हमें क्या बनाया था?
गुरु महाराज ने 29 नियम देकर बिश्नोई समाज को **कर्मप्रधान, पर्यावरण रक्षक, सादगीपूर्ण और पाखंड से दूर रहने वाला समाज** बनाया था।
उन्होंने स्पष्ट कहा —
* पाखंड और आडंबर से दूर रहो
* 68 तीर्थ हृदय भीतर हैं
* माता-पिता और गुरु सेवा ही सच्चा तीर्थ है
* सुबह-शाम अपने घर में हवन, भजन, संध्या करके विष्णु स्मरण करो
29 नियमों में —
* 16 कर्तव्य करने के लिए
* 13 कार्य त्यागने के लिए
स्पष्ट व्यवस्था दी गई थी।
उन्होंने मूर्ति पूजा का निषेध किया और **ज्योत के रूप में दर्शन** की परंपरा दी।
उन्होंने जीव दया पालनी और हरे वृक्ष न काटने का कठोर संदेश दिया।
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❓ लेकिन आज हम क्या कर रहे हैं?
🔥 मुकाम और फेरी का चलन
पहले वर्ष में केवल फाल्गुन और आसोज में बड़े मेले लगते थे।
अब हर महीने फेरी काटने की होड़ है।
क्या यह श्रद्धा है या अनजाने में बढ़ता आडंबर?
क्या बस ऑपरेटरों प्रतिस्पर्धा ने इसे परंपरा बना दिया?
🌫 हवन — श्रद्धा या प्रदूषण?
हवन एक पवित्र धार्मिक प्रक्रिया है — जिसकी अपनी मर्यादा है।
शांतचित्त होकर सीमित सामग्री से, संयमपूर्वक, सबदवाणी श्रवण करते हुए किया जाने वाला साधन।
लेकिन आज —
* अत्यधिक घी
* अधजले खोपरे
* डिब्बाबंद रासायनिक हवन सामग्री
* अपूर्ण दहन
* विशाल और बेतरतीब हवन कुंड
परिणाम?
वैज्ञानिक दृष्टि से —
* कार्बन डाइऑक्साइड
* कार्बन मोनोऑक्साइड
* नाइट्रोजन ऑक्साइड
* सल्फर डाइऑक्साइड
* कणीय पदार्थ (SPM)
का उत्सर्जन होता है।
नाइट्रोजन ऑक्साइड पानी से मिलकर नाइट्रिक अम्ल बना सकते हैं —
जिससे संगमरमर तक प्रभावित हो सकता है।
काले धुएँ के ऊँचे गुब्बार क्या पर्यावरण को शुद्ध कर रहे हैं?
या हमारे पर्यावरण प्रेमी होने के दावे पर प्रश्न खड़े कर रहे हैं?
गुरु महाराज ने पर्यावरण बचाने का संदेश दिया था —
क्या यह उसी की दिशा है?
📖 29 नियम — कितनों को याद हैं?
कठोर सत्य —
* लगभग 90% समाज को 29 नियम कंठस्थ नहीं
* 99% को शब्दवाणी स्मरण नहीं
* नियमों का आचरण करने वाले बहुत कम
हमने धर्म को आयोजन बना दिया है,
जबकि गुरु महाराज ने उसे जीवनशैली बनाया था।
सिर्फ हवन या धोक लगाकर लौट आना —
पूरे धर्म का पालन नहीं है।
🌳 जीव दया — क्या सीमित हो गई?
दुनिया हमें हिरण रक्षक के रूप में जानती है — यह गौरव है।
लेकिन क्या जीव दया सिर्फ एक प्रजाति तक सीमित है?
राजस्थान में बाढ़बंदी, कुत्तों की बढ़ती संख्या, शिकार —
हरियाणा और पंजाब में भी घटती संख्या —
क्या हमने वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान दिया?
क्या घायल जीवों की समुचित व्यवस्था है?
क्या शिकार मामलों की कानूनी पैरवी मजबूत है?
हरे वृक्ष नहीं काटने का नियम
फिर भी —
* लाखों खेजड़ियाँ कटीं
* सोलर प्लांट के नाम पर खेतों से वृक्ष हटाए गए
* हरियाणा के बिश्नोई क्षेत्रों में भी कटान
क्या हम सिर्फ नाम भर के पर्यावरण रक्षक रह गए?
🍺 मुकाम की कड़वी सच्चाई
* कुछ लोग मुकाम जाकर दारूबाजी करते हैं
* ताशबाजी होती है
* अनुशासनहीनता
क्या यह समाधि स्थल की मर्यादा है?
🌑 अमावस्या व्रत
गुरु महाराज ने अमावस्या व्रत का नियम दिया।
लेकिन बड़ी अमावस्या पर भी अधिकांश लोग व्रत नहीं रखते।
अमावस्या के दिन भंडारे चल रहे हैं।
क्या यह नियम के अनुरूप है?
🧘 संत, गायक और नेतृत्व
गायनाचार्य युवाओं को आधुनिक संदर्भ में जोड़ने में सीमित प्रयास कर रहे हैं।
कुछ संत पद और धन के मोह में बंधे दिखते हैं।
अशिक्षित लोग भगवा पहनकर समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
महासभा और ग्राम स्तर के पदाधिकारी —
क्या अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं?
यदि हर ग्राम प्रधान हर अमावस्या को पूरा गांव एकत्र करे —
हवन, भजन और सामाजिक चर्चा करे —
तो समाज में क्रांति आ सकती है।
🏢 धर्मशालाओं का सदुपयोग
मुकाम में सैकड़ों धर्मशालाएँ हैं —
ज्यादातर साल भर खाली रहती हैं।
क्यों न —
* संस्कार शिविर
* 29 नियम अध्ययन शिविर
* JEE/NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
* पर्यावरण प्रशिक्षण कार्यक्रम
चलाए जाएँ?
⚠ सबसे बड़ा प्रश्न
हम आम बिश्नोई कितने जागरूक हैं?
जब तक समाज जागरूक नहीं होगा —
पदों पर बैठे लोग भी जवाबदेह नहीं होंगे।
✅ हमें क्या करना चाहिए?
1. 29 नियमों को कंठस्थ और आचरण में लाना
2. शब्दवाणी का अध्ययन अनिवार्य बनाना
3. हवन में सादगी और वैज्ञानिक संतुलन
4. पाखंड और दिखावा त्यागना
5. जीव दया को व्यापक अर्थ में अपनाना
6. वृक्ष रक्षा को वास्तविक अभियान बनाना
7. धर्मशालाओं का सामाजिक-शैक्षणिक उपयोग
8. युवाओं को जोड़ना
9. कानूनी ज्ञान और प्रशिक्षण शिविर
10. ग्राम स्तर पर जवाबदेही
🙏 अंतिम विनम्र निवेदन
यह आलोचना नहीं —
यह अपने ही घर को संभालने की पुकार है।
गुरु महाराज ने हमें सबसे प्रगतिशील, पर्यावरण-प्रेमी और कर्मप्रधान समाज बनाया था।
क्या हम उस ऊँचाई पर खरे उतर रहे हैं?
गुरु महाराज सब देख रहे हैं।
उनकी आत्मा प्रसन्न हो —
इसके लिए आयोजन नहीं, आचरण बदलना होगा।
20/02/2026
खेजड़ी काटने वाले के साथ उसकी पैरवी करेंगे वो भी उससे ज्यादा दोसी होगे ,
गुरु जंभेश्वर भगवान सब देख रहे है
20/02/2026
आज देवेंद्र बुड़िया भी अपने पद से आस्तीफा दे सकता है - सूत्रों के हवाले
20/02/2026
सेल्यूट है इन दोनों पर्यावरण प्रेमी योद्धाओं को। राजस्थान सरकार को आखिरकार उनकी मांग माननी पड़ी। खेजड़ी कटाई पर पूर्णतः प्रतिबंध।
20/02/2026
मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद जी आचार्य के आश्रम जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछी तथा आशीर्वाद लिया - Paras Ram Bishnoi