03/12/2023
भ्रष्ट्राचारियों और राष्ट्रद्रोहियों के साथ कैसा बर्ताव होना चाहिए, उसका उदाहरण हमारे इतिहास में घटी एक घटना से मिलता है।
यह सजा भी किसी राजा या सरकार द्वारा नही बल्कि उसके परिजन द्वारा ही दी गई।
ई.सन 1311 में जालौर दुर्ग के गुप्त भेद अल्लाउद्दीन खिलजी को बताने के फलस्वरूप पारितोषिक स्वरूप मिला धन लेकर विका दहिया खुशी खुशी अपने घर लौट रहा था। इतना धन उसने पहली बार ही देखा था। चलते चलते रास्ते में सोच रहा था कि युद्ध समाप्ति के बाद इस धन से एक आलिशान हवेली बनाकर आराम से रहेगा। हवेली के आगे घोड़े बंधे होंगे, नौकर चाकर होंगे।
उसकी पत्नी हीरादे सोने चांदी के गहनों से लदी रहेगी। अलाउद्दीन द्वारा जालौर किले में तैनात सूबेदार के दरबार में उसकी बड़ी हैसियत समझी जायेगी।
घर पहुंचकर कुटिल मुस्कान बिखेरते हुए धन की गठरी अपनी पत्नी हीरादे को सौंपने हेतु बढाई।
अपने पति के हाथों में इतना धन व पति के चेहरे व हावभाव को देखते ही हीरादे को अल्लाउद्दीन खिलजी की जालौर युद्ध से निराश होकर दिल्ली लौटती फौज का अचानक जालौर की तरफ वापस मुड़ने का राज समझ आ गया।
वह समझ गयी कि उसके पति विका दहिया ने जालौर दुर्ग के असुरक्षित हिस्से का राज अल्लाउद्दीन की फौज को बताकर अपने वतन जालौर व अपने पालक राजा कान्हड़ देव सोनगरा चौहान के साथ गद्दारी की है। यह धन उसे इसी गद्दारी के पारितोषिक स्वरूप प्राप्त हुआ है।
उसने तुरंत अपने पति से पुछा- क्या यह धन आपको अल्लाउद्दीन की सेना को जालौर किले का कोई गुप्त भेद देने के बदले मिला है?
विका ने अपने मुंह पर कुटिल मुस्कान बिखेर कर व खुशी से अपनी मुंडी ऊपर नीचे कर हीरादे के आगे स्वीकारोक्ति कर जबाब दे दिया।
उसे तत्काल समझ आ गया कि उसका पति भ्रष्ट्राचारी है। उसके पति ने अपनी मातृभूमि के लिए गद्दारी की है और अपने उस राजा के साथ विश्वासघात किया है। हीरादे आग बबूला हो उठी और क्रोद्ध से भरकर अपने पति को धिक्कारते हुए दहाड़ उठी- अरे! गद्दार आज विपदा के समय दुश्मन को किले की गुप्त जानकारी देकर अपने देश के साथ गद्दारी करते हुए तुझे शर्म नहीं आई?
क्या तुम्हें ऐसा करने के लिए ही तुम्हारी माँ ने जन्म दिया था?
अपनी माँ का दूध लजाते हुए तुझे जरा सी भी शर्म नहीं आई?
क्या तुम एक क्षत्रिय होने के बावजूद क्षत्रिय द्वारा निभाये जाने वाले राष्ट्रधर्म को भूल गए?
विका दहिया ने हीरादे को समझाने का प्रयास किया हीरादे जैसी देशभक्त क्षत्रिय नारी उसके बहकावे में कैसे आ सकती थी?
पति पत्नी के बीच इसी बात पर बहस बढ़ गयी। विका दहिया की हीरादे को समझाने की हर कोशिश ने उसके क्रोध को और ज्यादा भड़काने का ही कार्य किया।
हीरादे पति की इस गद्दारी से बहुत दुखी व क्रोधित हुई। उसे अपने आपको ऐसे गद्दार पति की पत्नी मानते हुए शर्म महसूस होने लगी।
उसने मन में सोचा कि युद्ध के बाद उसे एक गद्दार व देशद्रोही की बीबी होने के ताने सुनने पड़ेंगे। इन्ही विचारों के साथ किले की सुरक्षा की गोपनीयता दुश्मन को पता चलने के बाद युद्ध के होने वाले संभावित परिणाम और जालौर दुर्ग में युद्ध से पहले होने वाले जौहर के दृश्य उसके मन मष्तिष्क में चलचित्र की भांति चलने लगे। जालौर दुर्ग की रानियों व अन्य महिलाओं द्वारा युद्ध में हारने की आशंका के चलते अपने सतीत्व की रक्षा के लिए जौहर की धधकती ज्वाला में कूदने के दृश्य, छोटे छोटे बच्चों के रोने कलपने के दृश्य।
उसे उन योद्धाओं के चेहरे के भाव, जिनकी पत्नियां उनकी आँखों के सामने जौहर चिता पर चढ़ अपने आपको पवित्र अग्नि के हवाले करने वाली थी, स्पष्ट दिख रहे थे। साथ ही दिख रहा था जालौर के रणबांकुरों द्वारा किया जाने वाले शाके का दृश्य जिसमें जालौर के रणबांकुरे दुश्मन से अपने रक्त के आखिरी कतरे तक लोहा लेते लेते कट मरते हुए मातृभूमि की रक्षार्थ शहीद हो रहे थे।
एक तरफ उसे जालौर के राष्ट्रभक्त वीर स्वातंत्र्य की बलि वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देकर स्वर्ग गमन करते नजर आ रहे थे तो दूसरी और उसकी आँखों के आगे उसका भ्रष्ट्राचारी राष्ट्रद्रोही पति खड़ा था।
ऐसे दृश्यों के मन आते ही हीरादे विचलित व व्यथित हो गई। उन वीभत्स दृश्यों के पीछे सिर्फ उसे अपने पति की गद्दारी नजर आ रही थी। उसकी नजर में सिर्फ और सिर्फ उसका पति ही इस सबका जिम्मेदार था।
हीरादे की नजर में पति द्वारा किया गया यह एक ऐसा जघन्य अपराध था जिसका दंड उसी वक्त देना आवश्यक था। उसने मन ही मन अपने गद्दार पति को इस गद्दारी का दंड देने का निश्चय किया।
उसके सामने एक तरफ उसका सुहाग था तो दूसरी तरफ देश के साथ अपनी मातृभूमि के साथ गद्दारी करने वाला गद्दार पति। उसे एक तरफ देश के गद्दार को मारकर उसे सजा देने का कर्तव्य था तो दूसरी और उसका अपना उजड़ता सुहाग।
आखिर उस देशभक्त वीरांगना ने तय किया कि- "अपनी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए यदि उसका सुहाग खतरा बना है तो ऐसे अपराध व दरिंदगी के लिए उसकी भी हत्या कर देनी चाहिए। गद्दारों के लिए यही एक मात्र सजा है।"
मन में उठते ऐसे अनेक विचारों ने हीरादे के रोष को और भड़का दिया उसका शरीर क्रोध के मारे कांप रहा था। उसके हाथ देशद्रोही को सजा देने के लिए तड़प उठे। हीरादे ने आव देखा न ताव पास ही रखी तलवार उठाकर एक झटके में अपने गद्दार और देशद्रोही पति का सिर काट डाला।
हीरादे के एक ही वार से विका दहिया का सिर कट कर लुढक गया।
वह एक हाथ में नंगी तलवार व दुसरे हाथ में अपने गद्दार पति का कटा मस्तक लेकर अपने राजा कान्हड़ देव के समक्ष उपस्थित हुई और अपने पति द्वारा गद्दारी किये जाने व उसे उचित सजा दिए जाने की जानकारी दी।
कान्हड़ देव ने इस राष्ट्रभक्त वीरांगना को नमन किया और हीरादे जैसी वीरांगनाओं पर गर्व करते हुए अल्लाउद्दीन की सेना से आज निर्णायक युद्द के लिए चल पड़े।
हीरादे अनायास ही अपने पति के बारे में बुदबुदा उठी-
"हिरादेवी भणइ चण्डाल सूं मुख देखाड्यूं काळ"
अर्थात्- विधाता आज कैसा दिन दिखाया है कि इस चण्डाल का मुंह देखना पड़ा।
इस तरह एक देशभक्त वीरांगना अपने पति को भी देशद्रोह व भ्रष्टाचार का दंड देने से नहीं चूकी।
देशभक्ति के ऐसे उदाहरण विरले ही मिलते है जब एक पत्नी ने देशद्रोह के लिए अपने पति को मौत के घाट उतार कर अपना सुहाग उजाड़ा हो। देश के ही क्या दुनियां के इतिहास में राष्ट्रभक्ति का ऐसा अतुलनीय अनूठा उदाहरण कहीं नहीं मिल सकता।
काश आज हमारे देश में भ्रष्ट्राचार में लिप्त बड़े बड़े अधिकारियों, नेताओं व मंत्रियों की पत्नियाँ भी हीरादे जैसी देशभक्त नारी से सीख ले अपने भ्रष्ट पतियों का भले सिर कलम न करें पर उन्हें धिक्कार कर बुरे कर्मों से तो रोक सकती ही है।
16/03/2022
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07/02/2022
Lata Mangeshkar was only five-year-old when her father Pt Deenanath Mangeshkar started giving her singing lessons. Pt Deenanath Mangeshkar was a well-known Marathi theatre artiste and Hindustani Classical vocalist. Lata even participated in his plays. But life had other plans.
At 13, just as she was about to start her music career, Lata lost her father. Being the eldest among her five siblings, the responsibility of the family fell upon her and she took the challenge head-on. She started singing in films and became the sole bread-earner of her family.
Lata also worked hard to support her siblings -- Asha Bhosle, Usha Mangeshkar, Meena Mangeshkar and Hridaynath Mangeshkar. Today, all five siblings are renowned artistes and have even worked together in several projects.
03/09/2021
3 सितम्बर 1857 आज का ही दिन था जब...बिठूर में एक पेड़ से बंधी 13 वर्ष की लड़की को, ब्रिटिश सेना ने जिंदा ही आग के हवाले किया, धूँ धूँ कर जलती वो लड़की, उफ़ तक न बोली और जिंदा लाश की तरह जलती हुई, राख में तब्दील हो गई।
ये लड़की थी नाना साहब पेशवा की दत्तक पुत्री मैना कुमारी। जिसे 160 वर्ष पूर्व, आज ही के दिन, आउटरम नामक ब्रिटिश अधिकारी ने जिंदा जला दिया था।
जिसने 1857 क्रांति के दौरान, अपने पिता के साथ जाने से इसलिए मना कर दिया, की कही उसकी सुरक्षा के चलते, उसके पिता को देश सेवा में कोई समस्या न आये।और बिठूर के महल में रहना उचित समझा।
नाना साहब पर ब्रिटिश सरकार इनाम घोषित कर चुकी थी और जैसे ही उन्हें पता चला नाना साहब महल से बाहर है, ब्रिटिश सरकार ने महल घेर लिया, जहाँ उन्हें कुछ सैनिको के साथ बस मैना कुमारी ही मिली।
मैना कुमारी, ब्रटिश सैनिको को देख कर महल के गुप्त स्थानों में जा छुपी, ये देख ब्रिटिश अफसर आउटरम ने महल को तोप से उड़ने का आदेश दिया।। और ऐसा कर वो वहां से चला गया पर अपने कुछ सिपाहियों को वही छोड़ गया।
रात को मैना को जब लगा की सब लोग जा चुके है, और वो बहार निकली तो 2 सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया और फिर आउटरम के सामने पेश किया।
आउटरम ने पहले मैना को एक पेड़ से बंधा, फिर मैना से नाना साहब के बारे में और क्रांति की गुप्त जानकारी जाननी चाही। पर उस से मुह नही खोला।
यहाँ तक की आउटरम ने मैना कुमारी को जिंदा जलने की धमकी भी दी, पर उसने कहा की वो एक क्रांतिकारी की बेटी है, मृत्यु से नही डरती। ये देख आउटरम तिलमिला गया और उसने मैना कुमारी को जिंदा जलने का आदेश दे दिया।
इस पर भी मैना कुमारी, बिना प्रतिरोध के आग में जल गई, ताकि क्रांति की मशाल कभी न बुझे।
बिना खड्ग बिना ढाल वाली गैंग या धूर्त वामपंथी लेखक चाहे जो लिखे पर हमारी स्वतंत्रता इन जैसे असँख्य क्रांतिवीर और वीरांगनाओं के बलिदानों का ही प्रतिफल है और इनकी गाथाएँ आगे की पीढ़ी तक पहुँचनी चाहिए, इन्हें हर कृतज्ञ भारतीय का नमन पहुँचना चाहिये !
शत शत नमन है इस महान बाल वीरांगना को ! 🙏🏻
#ऐतिहासिक_दिन_विशेष_114 अभ्युदय👍
19/08/2021
महादेव शिव की कृपा से, ३ महीने का अभ्यास, ३० घंटे स्टूडियो का काम - डेमो से लेकर फिनिशिंग तक, ३ हफ्ते की वीडियो शूटिंग और आखिर में ३ दिन की वीडियो एडिटिंग के बाद, आज हमने शिव तांडव स्त्रोतम जारी किया है जिसे मेरी पत्नी सीमा मैंदोला ने गाया है, मेरे द्वारा म्यूजिक कैसा हो उस पर विचार कर रावत स्टूडियो, हरिद्वार के मालिक दिनेश रावत जी द्वारा बनाया गया और मेरे सबसे अच्छे मित्र श्री सुनील कौशिक द्वारा शिव तांडव का नृत्य किया गया ।
मुझे उम्मीद है कि आप सभी हमारे इस प्रयास को एक बार जरूर देखेगें और चैनल को सब्सक्राइब करके अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करेगें। धन्यवाद...💐
https://youtu.be/ZTR-LR4Xwzw
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कृपया लाइक और कमेंट करें अगर आपको लगता है कि हम इसके लायक हैं...
मेडीटेशन के लिहाज से कुछ ऐसी ध्वनियों का प्रयोग किया गया, जो हेडफ़ोन में ही सुनाई देगी, अतः सु:खद अनुभव हेतु हेडफ़ोन का उपयोग कर सुनें ।
धन्यवाद...💐
Shiv Tandav Strotam with Tandav | रावण रचित शिव तांडव स्तोत्रम् | Shiva Song | Singer Seema Maindola
मान्यता है कि शिवभक्त रावण ने कैलाश पर्वत ही उठा लिया था और जब पूरे पर्वत को ही लंका ले चलने को उद्यत हुआ । उस समय अपन...
10/08/2021
अद्भुत जानकारी
ये हमारे देश के नए हीरो, अलिम्पिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा के कोच हैं….जिनका नाम है उवे होंन, नीरज ने आज जेवलिन 87.6 m दूर फेंका लेकिन उनके कोच में 1984 में जैवेलिन 104.6 m की दूरी तक फेंका था, और उन्हीं के चलते बाद में जैवेलिन के डिज़ाइन में परिवर्तन किया गया…उसकी सेंटर ऑफ़ ग्रैविटी को 4 सेंटीमीटर आगे की तरफ़ खिसकाया गया ताकि वो थोड़ा कम डिस्टन्स तक जाए, क्यूँकि इस तरह न किए जाने पर जैवेलिन के पवेलियन में बैठे दर्शकों और स्पोर्ट्स अफ़िशल को जैवेलिन लगने का ख़तरा रहता…
1986 में पुराने जैवेलिन की जगह नया और थोड़ा हल्का मॉडिफ़ायड जैवेलिन उपयोग में लाया जाने लगा और उवे हॉन का वो रेकर्ड कभी न टूटने वाला एक ऐसा रेकर्ड बनकर रह गया जो रेकर्ड तो है लेकिन अब रिकॉर्डेड नहीं, क्यूँकि अब उस रेकोर्ड को अधिकारिक रूप से समाप्त मान लिया गया है…
हालाँकि ये तो टेक्निकल रीज़न था, जिसके चलते उनके रिकोर्ड को गिनती में नहीं लिया जाता, लेकिन इससे उस खिलाड़ी की महानता कम नहीं हो जाती, और इसीलिए दुनिया के इस महानतम जैवेलिन थ्रोअर को भारत के ओलिम्पीयन ऐथ्लीट का कोच चुना गया…
10/08/2021
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