Sanskriti Rakshak Sangthan

Sanskriti Rakshak Sangthan

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An Youth oriented organisation which is dedicated to the development and growth of our country in all fields of human endeavor.

It is dedicated to the development and growth of our country in all fields of human endeavour - cultural, social, academic, moral, national and spiritual - by promoting a sense of patriotism, national unity and integrity.

Photos 03/05/2016

Photos 29/04/2016

फेसबुक द्वारा आज संगठन के पेज को प्रमाणित किया गया ! सभी कार्यकर्ताओं को बधाई ! अपने सभी मित्रो को पेज पर इन्वाईट भेज कर जोड़े ! पेज पर वेरिफाय बेज देखा जा सकता है !

Mobile uploads 26/08/2015

Agree!?

Mobile uploads 25/08/2015
Mobile uploads 03/08/2015

कलाम जी के बड़े भाई है जिनकी छाता रिपेयर करने की दुकान है !अदभुत है क्या कोई कल्पना कर सकता है जिस के प्रधानमंत्री जी ने 3 दिन पहले पैर छुए हो जो कलाम का बड़ा भाई हो उसकी छाता रिपेयर की दुकान होगी !कलाम जी ने अपने सहयोगी सृजन पाल सिंह से कुछ महीने पहले कहा था की मेरे बड़े भाई 99 साल के है अगले वर्ष गर्मियो में वो 100 साल के हों जायेंगे !तब मैं तुम सब को रामेश्वरम ले चलूँगा और अपना घर दिखाऊंगा !वही हम अपने बड़े भाई का 100 वा जन्मदिन मनाएंगे !मैं 100 वे जन्मदिन की ख़ुशी अपने भाई के चेहरे पर देखना चाहता हूँ !धन्य है ऐसा परिवार ऐसी ईमानदारी ऐसी राष्ट्र निष्ठा क्या देश के राजनेता व नौकरशाही व आम जनता कोई सबक लेगी इस महान परिवार से ?-विनय द्विवेदी !!!

Photos 13/08/2014

इस झंडे से सहमत हो तो एक लाइक और एक शेयर बनता है !

Courtesy : Pencilled Fancies

gaon chodab nahi (we will not leave our village) 13/10/2013

इस गीत को सुनना ही अपने आप में बेहतरीन अनुभव है। कोई गरीब आदिवासियों की व्यथा कोई समझने की कोशिश नहीं कर रहा है...उन्ही की व्यथा बताता ये गीत ...जरुर सुने , और समर्थन करते हो तो शेयर कीजिये

gaon chodab nahi (we will not leave our village) The song describes the present day exploitation of tribal land and forests in the name of development.

13/10/2013

सभी मित्रो को विजयादशमी की शुभकामनाये ... :)

12/10/2013

सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है,
शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं।
मुख से न कभी उफ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं,
जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग-निरत नित रहते हैं,
शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को।
है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में
खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़।
मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है। - रामधारी सिंह दिनकर

Cover photos 12/10/2013

जय माता दी

02/10/2013

अच्छी फिल्मो के भूखे लोग लंच बॉक्स देखकर अपनी भूख शांत करें ! एक अच्छी फिल्म है :)

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