14/12/2025
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी 🚩
मातृभूमि से बढ़कर कोई बात नही होती हम हिन्दू है भैया हमारी कोई जाति नही होती। �
14/12/2025
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी 🚩
12/12/2025
Ending this year with one truth the more you do, the more you learn..
❤️
Mittar ❤️
Pc~
जात पात की करो बिदाई हिंदू हिंदू भाई भाई 🚩
❤️🙏🏻
जात पात की करो बिदाई हिंदू हिंदू भाई भाई 🚩
🙏🚩🛕🕉️💐
11/07/2023
प्रभु श्री राम की पावन जन्म भूमि अयोध्या के बनने का अद्भुत दृश्य....
आस्था से विश्वास, विश्वास से प्रेम, प्रेम से वचनवढता, वचनवढता से संकल्प का अद्भुत संगम..
जय श्री राम ❤️
05/09/2022
यह दुर्गा भाभी हैं, वही दुर्गा भाभी जिन्होंने साण्डर्स वध के बाद राजगुरू और भगतसिंह को लाहौर से अंग्रेजो की नाक के नीचे से निकालकर कोलकत्ता ले गयी. इनके पति क्रन्तिकारी भगवती चरण वर्मा थे. ये भी कहा जाता है कि चंद्रशेखर आजाद के पास आखिरी वक्त में जो माउजर था, वो भी दुर्गा भाभी ने ही उनको दिया था.
14अक्टूबर 1999 में वो इस दुनिया से गुमनाम ही विदा हो गयी कुछ एक दो अखबारों ने उनके बारे में छापा बस.
आज आज़ादी के इतने साल के बाद भी न तो उस विरांगना को इतिहास के पन्नों में वो जगह मिली जिसकी वो हकदार थीं और न ही वो किसी को याद रही चाहे वो सरकार हो या जनता.
एक स्मारक का नाम तक उनके नाम पर नही है कहीं कोई मूर्ति नहीं है उनकी. सरकार तो भूली ही जनता भी भूल गयी,
ऐसी वीर वीरांगनाओं को हम शत शत नमन करते है 🙏
और भविष्य मे ऐसे तमाम वीरों को सम्मान दिलाने के लिये प्रयासरत रहें .
28/03/2021
मैं आपसे पूरे दावे से कहता हूं :- श्रीनरेंद्र मोदी साधारण व्यक्ति नही है ।।
ओर इस समय केवल नरेंद्र मोदीजी ही नही ..... अनेकों मुख्य शक्तियां धरती पर है ....
में विवाद नही चाहता, अपने जीवन से प्रेम करता हूँ । इस कारण ज़्यादा विस्तार से बात करना उचित नही है ।।
फिलहाल सिर्फ इतना कह सकता हूँ :- भारत का प्रधामनंत्री उन सभी शक्तियों में श्रेष्ठ है ।
कोई भी मुझे यह सलाह नही देंवें, की इस पेज से राजनीति क्यो हो रही है ? हनुमान जी हो या गिलहरी वे सभी श्रीराम के साथ थे -- क्या वह राजनीति थी ? या श्रद्धा ?? हमे लगता है, एक एक हिन्दू को अपने पंतप्रधान का समर्थन करना चाहिए ।। वह चाहे सेलिब्रिटी हो, या मेरे जैसा साधारण आदमी ....अगर भारत के प्रधामनंत्री का समर्थन हिन्दू नही करेंगे, तो समर्थक क्या इराक पाकिस्तान सोदिया से लाएं ??
" जो कार्य विक्रमादित्य ने 2000 वर्ष पहले किया था, वही कार्य नरेंद्र मोदी 2021 में करने जा रहे है ।"
07/12/2020
आज नौसेना दिवस है, भारत मे छत्रपति शिवाजी महाराज को नौसेना का जनक कहा जाता है क्योंकि मध्ययुगीन भारत में शिवाजी पहले राजा थे, जिन्होंने नौसेना का महत्व देखकर उसका निर्माण किया।
इस विषय में उनकी दृष्टि इतनी पैनी थी कि उन्होंने आदेश दिए थे कि विदेशी साहूकार-व्यापारी उदाहरणार्थ फिरंगी, फरांशिस, वलंदेज, डिंगमार (आधुनिक अँगरेज, फ्रांसीसी, हॉलैंडवासी, डेनमार्कवासी) इत्यादि को समुद्र तट पर स्थान न दिया जाए। देना ही हो, तो तट से दूर, भूमि पर स्थान देकर, इन्हें कड़ी निगरानी में रखा जाए, क्योंकि तट पर रहकर ये अन्य से मिल राज्य के लिए खतरा बन सकते हैं व फिर इन्हें तट से हटाना मुश्किल होता है।
शिवाजी ने नौसेना निर्माण व उसके नित्य कार्य में यह ध्यान रखा था कि राज्यकार्य संपन्न होते समय प्रजा को रंचमात्र दुःख न हो। यह प्रशासकीय नीति उनकी दूरदर्शिता व लोककल्याण मनोवृत्ति का प्रतीक है।
शिवाजी की नौसैनिक दूरदर्शिता अत्यंत श्रेष्ठ स्तर की थी। उन्होंने महाराष्ट्र तट पर विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग, स्वर्णदुर्ग व पद्मदुर्ग जैसे महत्वपूर्ण जलदुर्गों का निर्माण करके अपने नौसैनिक प्रतिस्पर्धी विदेशियों जैसे जंजीरा के सिद्दी, पुर्तगाली व विशेषतः अँगरेजों को नियंत्रण में रखा जो (अँगरेज), सिद्दीयों को खुले व छुपे रूप से शिवाजी के विरुद्ध सहायता देते थे।
अंततः शिवाजी ने अँगरेजों का राजापुर (महाराष्ट्र) स्थित केंद्र नष्ट कर दिया (1661)। शिवाजी की नौसैनिक परंपरा में ही मराठों ने आगे सशक्त नौसेना का निर्माण किया जिसके पराक्रमी नौसेनाध्यक्ष/ सेनापति (दर्यासारंग) कान्होजी आंग्रे थे, जिनकी समुद्र पर इतनी धाक थी कि अँगरेज समुद्र पर मराठों से दूर ही रहते थे। वीर कान्होजी आंग्रे को सम्मानित करने हेतु भारतीय नौसेना का एक पोत, 'कान्होजी आंग्रे' भी है। यह स्थिति शिवाजी के बाद भी थी, जिसका श्रेय शिवाजी को है।
साभार :- शैतान सिंह भाटी डांगरी
17/11/2020
जोधपुर में एक बच्चे द्वारा पटाखे फोड़ने पर उस पर जुर्माना लगाया गया है। एक बच्चे पर जुर्माना सोच से भी परे है!
बच्चों के लिए दिवाली ना अच्छा खाने का त्योहार है
ना नए कपड़े पहनने का इनको दिए झालर से भी कम मतलब होता है
बच्चों के लिए तो दिवाली केवल आतिशबाजी का त्यौहार ही रहता आया है ।
आज की स्थिति यह है कि मुझ जैसा बड़ा तबका मात्र इसलिये पटाखे चलाता है क्योंकि इसका विरोध किया जाता है व्यवस्था के द्वारा..
यह देश हमारा है। यदि कोई दोगली नीति अपनाता है, तो हमें उसका पुरजोर विरोध करना चाहिये। अगर पटाखे प्रदूषण करते ही हैं तो इन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए चाहे क्रिसमस हो या नववर्ष।
फिर इस वर्ष तो संकट विशेष है। कोरोना में प्रदूषण भयंकर हानिकारक है, यह हम जानते हैं और कोरोना के कारण ही बहुसंख्य में लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। यह तो उचित समय नहीं...
तो फिर
- पटाखे खुले स्थानों पर चलायें।
- हमारी परंपराओं को न तोड़ें
- किसी के कहने से नहीं, स्वयं का विवेक काम में लेकर पटाखे चलायें।
त्यौहार है तो ध्येय केवल इतना ही है--
विदित रहे दीपावली , का इतना है मर्म !
तम से लड़ना ही सदा, है प्रकाश का धर्म !!
इसी भाव से लीजिए, मेरा विनत प्रणाम !
हृदय सदा बसते रहें, अवधपती श्री राम !!