Jawahar Kala Kendra - JKK

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JKK is focused to the preservation & promotion of the various genres of Indian art & culture

The institution’s enormous and uniquely structured building was designed by the renowned Indian architect of international repute -Charles Correa. The architecture of JKK is based on the concept of Indian astrology and resembles the square-grid plan of Jaipur city. The main building contains administrative block, an ethnographic museum, temporary exhibition galleries, open air theatre, air conditioned theatre, an arena, library, dormitories, and coffee house.

15/04/2026

Venue:- Jawahar Kala Kendra Time : 6.30 to 7.30 PM
Organised by INDIAN ARMY SYMPHONY BAND COLLABORATION WITH JAWAHAR KALA KENDRA

Feeling immensely proud watching the incredible Indian Army Band perform! 🇮🇳🎶 Their talent and dedication are truly inspired.

15/04/2026

आज दिनांक 15 अप्रैल, 2026 को सायं 6:30 बजे से 7:30 बजे तक मध्यवर्ती सभागार को "इण्डियन आर्मी सिम्फनी बैण्ड प्रस्तुति का सांस्कृतिक कार्यक्रम" मुख्यालय दक्षिण पश्चिमी कमान के 22 वें राइजिंग डे पर आयोजित किया जा रहा हैं ।

इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय सेना के दक्षिणी पश्चिमी कमान के सैन्य अधिकारियों द्वारा बैण्ड प्रस्तुति के माध्यम से संगीत की विविधता एवं समृद्ध परम्परा को एक मंच पर प्रस्तुत करते हुए जन सामान्य को राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक आम्तीयता का अनुभव, कला तथा प्रतिभा प्रदर्शन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय सेना के दक्षिणी पश्चिमी कमान के सैन्य अधिकारियों द्वारा 22वें रेज़िंग डे के उपलक्ष्य में बैण्ड प्रस्तुति के माध्यम से संगीत की विविधता एवं समृद्ध परम्परा को एक मंच पर प्रस्तुत करते हुए जन सामान्य को राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक आम्तीयता का अनुभव कराना है व कला तथा प्रतिभा प्रदर्शन को प्रोत्साहन देने का प्रयास है, अतः केन्द्र द्वारा राष्ट्रीय एकता तथा देशभक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है

Photos from Jawahar Kala Kendra - JKK's post 10/04/2026

जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का आज शुक्रवार को समापन हो गया। समारोह के तीसरे एवं अंतिम दिन रंगायन सभागार में शाम के समय कलाकारों द्वारा दी गई प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति से सराबोर प्रस्तुतियों ने वहां उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वाद्य संगीत प्रस्तुति से हुआ, जिसमें श्री ज़ेयान हुसैन एवं उनके दल ने वायलिन एवं बांसुरी वादन के माध्यम से वातावरण को सुरीला कर दिया।

राग खमाज की मध्य लय की बंदिश (ताल दीपचंदी, 14 मात्रा) से शुरुआत हुई, इसके पश्चात ‘ना मानूंगी’ छोटा ख्याल प्रस्तुत किया गया। जुगलबंदी में तानों एवं झाला का प्रभावी संयोजन देखने को मिला। अंत में राग हंसध्वनि की प्रस्तुति के साथ वाद्य कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसने श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई से जोड़ दिया।

समापन समारोह के उक्त कार्यक्रम की अगली कड़ी में अर्जुन एवं समूह द्वारा पारंपरिक घूमर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात बिशनलाल एवं समूह ने शेखावटी क्षेत्र का प्रसिद्ध डेरू नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने लोक जीवन की जीवंत झलक प्रस्तुत की। उर्मिला कुमारी एवं समूह द्वारा ग्रामीण भवाई नृत्य की प्रस्तुति दी। इस कौशल एवं रोमांच की शैली ने दर्शकों से भरपूर प्रशंसा अर्जित की। बाल कलाकारों ने सिर पर मटके रखकर संतुलन, लय के साथ नृत्य प्रस्तुत किये, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

जवाहर कला केंद्र के 33वें स्थापना दिवस के तीन दिवसीय समापन समारोह के तीसरे एवं अंतिम दिन कला एवं संस्कृति विभाग की शासन उप सचिव एवं जवाहर कला केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक अनुराधा गोगीया ने बताया कि समारोह का मुख्य आकर्षण बाल कलाकारों द्वारा राजस्थान की पारंपरिक लोक विधाओं की प्रस्तुति रही, जिसने केन्द्र की नवाचारी सोच एवं गुरु-शिष्य परंपरा को सशक्त रूप में अभिव्यक्त किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान बाल कलाकारों की प्रतिभा, ऊर्जा एवं लोक परंपराओं के प्रति उनकी गहरी समझ ने यह सिद्ध किया कि युवा पीढ़ी के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक विरासत को सशक्त रूप से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

10/04/2026
08/04/2026

जेकेके के स्थापना दिवस समारोह के दूसरे दिन, दिनांक 09 अप्रैल 2026 को मुजफ्फर रहमान एवं उनके समूह की विशेष प्रस्तुति आयोजित की जाएगी।

08/04/2026

जवाहर कला केन्द्र के 33वें स्थापना दिवस पर आज कार्यक्रम का शुभारंभ लंगा समूह की प्रस्तुति से हुआ, जिसमें सादिक खान लंगा एवं उनके दल ने अपनी सुमधुर गायकी से वातावरण को सुरमयी बना दिया। उन्होंने “गजानंद जी आवो” से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की, जिसके पश्चात “चैरा री माखी”, “चरखो”, “जीवडो” तथा “धोरा वालो देश” जैसे लोकगीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को राजस्थान की मरु-संस्कृति से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

07/04/2026

*जवाहर कला केन्द्र का 33 वाँ स्थापना दिवस 8 अप्रैल (बुधवार) को, तीन दिवसीय भव्य समारोह (8 से 10 अप्रैल तक) में पहले दिन बाल लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी आकर्षण का केन्द्र- जवाहर कला केन्द्र*

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