10/08/2024
बधाई बेटियों को🙏
बीकानेर जिले की नोखा तहसील का दूर देहात का एक गांव *“ढींगसरी“* !
आज भारत के राष्ट्रीय टीवी चैनल्स पर इस गांव का नाम लिया जा रहा है यहां की बेटियों की एक बड़ी उपलब्धि के लिए। आज कर्नाटक के बेलगांव में हुए लड़कियों के UNDER 17 राष्ट्रीय फुटबाल टूर्नामेंट में पहले सिक्किम, गुजरात आदि को हराने बाद आज फाइनल मैच में कर्नाटक को हराकर राजस्थान की टीम ने स्वर्ण पदक जीता। लेकिन इसमें जो खास बात है वह यह कि मैच खेलने वाली सभी 11 लड़कियां राजस्थान के एक ही जिले बीकानेर की हैं। बीकानेर की ही नहीं, सभी नोखा तहसील की है। और तहसील ही नहीं, सभी 11 लड़कियां “ ढींगसरी “ गांव की ही है। जिनमे कप्तान सहित अधिकांश लड़कियां “राजवी” परिवार की ही है।
हालांकि यह गांव फुटबाल में पहले भी नाम कमा चुका है। RAC में कमांडेंट रहे इसी गांव के श्री मगनसिंह जी राजवी भारत की राष्ट्रीय टीम के कप्तान रह चुके हैं, व ओलंपिक में खेल चुके हैं। आपको अर्जुन अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। आज की यह सफलता भी श्री मगनसिंह जी राजवी की सोच व प्रयासों का फल है। ये सभी बच्चियां “ ढींगसरी “ गांव में स्थित “श्री मगनसिंह राजवी फुटबाल एकेडमी” की प्रशिक्षु हैं। गांव के ही मेहनती युवक विक्रमसिंह राजवी, जोकि इनके कोच हैं, उनकी ही मेहनत से यह सब संभव हुआ है।
बहुत बहुत बधाई सभी बालिकाओं को, उनके परिजनों को, श्री मगनसिंहजी को, कोच श्री विक्रमसिंह जी को व आप सभी को 🙏
🙏🙏
10/08/2024
बधाई नहीं रुकना चाहिए 💪
भारत के बेटे पर पूरा देश गर्व करता है
जीता रजत मैडल
10/08/2024
खिलाड़ी और उसके दुर्भाग्य की एक और कहानी।
ये शिवानी पवार है, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाँव के छोटे से किसान परिवार से आती है। ये कभी फुटबॉल खेलना चाहती थी, लेकिन रेसलिंग चैम्पीयन फातिमा बानो को शिवानी में एक रेसलर नज़र आया और उन्होंने शिवानी को ट्रेन करना शुरु कर दिया।
Very Good! अब जैसा कि होता है। देसी घरों में लड़की अगर स्पोर्ट्स में जाए तो भाई लोग चाचा ताए के लड़के आलू-चना करनी शुरु कर देते हैं। शिवानी को भी कोसने लगे पर शिवानी ने इसका एक ही समाधान निकाला कि जो भी उसको कुश्ती करने से रोकेगा, वो उससे बात करनी बन्द कर देगी।
चलो कोई नहीं, बाप-भाई की टोका-टोकी से जीत भी ली तो पैसे की तंगी से कैसे जीतेगी? क्योंकि एक रेसलर की डाइट और ट्रैनिंग सस्ती तो होती नहीं। अब क्या करें?
तो अब शिवानी ने लोकल दंगल लड़ने शुरु किए और उसमें जो भी प्राइज़ मनी मिलती, उसे अपनी डाइट और ट्रैनिंग पर खर्च करती। इस पैसे के साथ जब मेहनत मिली तो शिवानी नैशनल खेलने लगी जिसमें बेहतरीन प्रदर्शन कर दिल और मैडल दोनों में जीत मिलनी शुरु हो गई।
Cut To:
2021 अन्डर23 वर्ल्ड चैम्पीयनशिप के 50केजी कैटेगरी में शिवानी ने राउन्ड 16 में पहले बेलारूस की पहलवान को पटक के (won by Pin/fall) हराया। फिर क्वाटर फाइनल में यूक्रेन की पहलवान को 13-6 से मात दी। सेमीफाइनल में फिर रशिअन पहलवान को पटक के हराया और फाइनल में अमेरिकन दीदी से हार गई।
इस तरह शिवानी अन्डर 23 वर्ल्ड चैम्पीयनशिप में सिल्वर लाने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी और यहीं से पैरिस ओलिम्पिक 2024 में 50 किलो श्रेणी के लिए उनकी तैयारियाँ शुरु हो गईं। (पेरिस ओलिम्पिक की ऑफिशियल साइट पर उनका नाम आने लगा)
अब द सेड पार्ट, एक अन्य पहलवान, जो ओलिम्पिक में साम-दाम दण्ड भेद कर क्वालफिकेशन चाहती थी वो 53 किलो श्रेणी में लड़ी और बुरी तरह हार गई। यहाँ नियमों ने कहा कि आप क्वालिफिकेशन के लिए कोई एक श्रेणी ही चुन सकते हो, पर इस सीनियर पहलवान को जाने कैसे 50kg में एक मौका मिल गया।
अब यहाँ शिवानी का कहना है कि वो अच्छी भली 5 पॉइंट आगे चल रही थी कि अचानक रेफरीज़ उसके अगैन्स्ट पॉइंट्स देने कर दिए और वो हार गई।
पर जो जीत के ओलिम्पिक गयी उसने कैसा कीर्तिमान रचा और फिर कैसे उसका फाइनल मिस हुआ, ये बात बताने की ज़रूरत नहीं।
बताने वाली बात ये है कि जब विनेश 53 में नहीं जीत पाईं और उन्होंने 50 किलो में लड़ने का निर्णय लिया, तब शिवानी के मैच को 4 घंटे तक रोक कर रखा गया ताकि विनेश तैयार हो सकें। शिवानी का कहना है कि जब उन्होंने रेसलिंग छोड़ने की धमकी दी तब मामले की गंभीरता को समझ उनका मैच हुआ और वो हार गईं। इसके खिलाफ शिवानी ने भारतीय कुश्ती संघ को इसकी शिकायत की है।
इन सब नेगेटिव बातों के इतर, खुशी इस बात की है कि शिवानी का मनोबल अभी भी कायम है। वो अगले ओलिम्पिक की तैयारी करना चाहती हैं। शिवानी का इंस्टाग्राम देखा तो उनके द्वारा लिखे 2 quotes पढ़कर ही समझ आ गया कि ये लड़की इतनी पॉजिटिव कैसे है।
पहला कोट था -
“मंज़िल पाने की उम्मीद मत छोड़िए क्योंकि सूरज डूबने के बाद ही दुबारा सवेरा होता है”
और दूसरा
“जिसकी गति और मति सत्य की होती है, उसका रथ आज भी श्रीकृष्ण चलाते हैं”
भविष्य के लिए बहुत बहुत शुभकामनायें पहलवान, सौभाग्य न सब दिन सोयेगा, देखें आगे क्या होयेगा।
18/02/2024
शेखावाटी का भगीरथ - यशवर्धन सिंह शेखावत
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नदियां विषय तो भूगोल का है लेकिन इनके बहाने इतिहास लिखा गया है। हमारे राजपुताने ने नदियों के किनारे और नदियों के बहाने बहुत कुछ लुटते और मिटते देखा है। जो बाणगंगा के मुहाने पर अगर महाराणा सांगा बाबर को मसल देते तो हिंदुस्तान का इतिहास क्या होता ? लेकिन हम बाणगंगा हार गए। अगर बनास के मुहाने पर राणा प्रताप विजयी हुए होते तो कैसा होता ? लेकिन बनास ने भी हमारे पुरखों का खून निचोड़ लिया। बाणगंगा और बनास का पानी अब सूख चुका है। लेकिन मैं मानता हूं इन दोनो नदियों ने पराजय का महान प्रायश्चित किया है। खानवा और हल्दीघाटी के युद्ध की शहादतों में दो नाम इन नदियों के भी शामिल हैं। हम नदियों पर और नदियों के कारण युद्ध और जीवन हारी हुई सभ्यता के लोग हैं।
इतिहास में जिस नस्ल ने नदियों की इस लड़ाई को जीत लिया समझो उसने सबकुछ जीत लिया। एक ऐसी ही लोकतांत्रिक लड़ाई शेखावाटी ने जीत ली है और इस लड़ाई के विजेता सेनापति रहे हैं यशवर्धन सिंह शेखावत। यमुना के पानी को राजस्थान लाने को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच बनी सहमति शेखावाटी को निहाल करने वाली है।
कल से ही मेरे मन में बहुत सी बातें उमड़ - उमड़ कर बाहर आ रही है। मैं सोच रहा हूं कि शेखावाटी कितना सौभाग्यशाली है कि जिस यमुना के तीर अष्टछाप के कवियों ने जीने और मरने की इच्छा में जीवन न्यौछावर कर दिया वह यमुना मैया खुद शेखावाटी पधार रही है। रसखान तो लिखते हैं कि -
"जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदीकूल कदम्ब की डारन"
अर्थात अगर वे अगले जन्म में पक्षी बनें तो यनुमा के किनारे कदंब के पेड़ की डाल पर ही बसेरा करें।
अष्टछाप के कवि गोविंद स्वामी ने जो सदियों पहले यमुना जी के बारे में लिखा किसे मालूम था वह असल मायने में शेखावाटी के लिए चरितार्थ होगा। गोविंद स्वामी लिख गए कि -
जमुना सी नाहिं कोऊ और दाता।
जेइ इनकी सरन जात हैं दौरि के ताहि कों तिहि छिनु करी सनाथा॥
बात तो ठीक है शेखावाटी के लिए अब यमुना से बड़ी दाता कौन है ? अब तो पूरा शेखावाटी यमुना के पानी से सनाथ होने वाला है। ठीक वैसे ही जैसे सतलुज के पानी से मारवाड़ सनाथ हो गया।
जब छप्पनिया अकाल पड़ा तो बीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने तबाही के साल को अपनी आंखों से देखा और वहीं से उन्हे गंगनहर बनाकर सतलुज के पानी को मारवाड़ लाने की ठान ली। मेरा तो मानना है कि छप्पनिया अकाल मारवाड़ से ज्यादा शेखावाटी को लील गया। सुजीत सराफ का उपन्यास " हरिलाल एंड संस " इस बात की ठीक पड़ताल करता है। असल बात यह है कि काल के मारे शेखावाटी के बनियों का शेखावाटी से बड़ा पलायन उसी काल के बाद शुरू हुआ था। इस उपन्यास की पूरी कहानी ही छप्पनिया अकाल के इर्द - गिर्द रची गई है। एक बारह वर्षीय लड़का अकाल का मारा कलकत्ता भागता है और व्यापार सीखता है। सुजीत सराफ शेखावाटी की बदहाली को याद करके लिखते हैं कि कलकत्ता में चावल चांदी जैसे, दाल सोने जैसी लगती है क्या स्वर्ग इससे सुंदर हो सकता है ? क्या शेखावाटी में किसीने आम देखें है ?
जिस शेखावाटी में किसी ने आम तक नहीं देखे उसे अपना भगीरथ 100 साल पहले मिल जाना चाहिए था। लेकिन देर सवेर शेखावाटी को यशवर्धन सिंह शेखावत जैसा भागीरथ 2024 में मिला है जिसने शेखावाटी को यमुना के जल की लड़ाई जिताकर निहाल कर दिया है।
21/04/2023
भवानी सिंह ने किए दो पदक देश के नाम....
झुंझुनूं निवासी भवानी सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में हो रहे है वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम में पेटांक सिंगल गेम में जीतकर पूरे देश का नाम रोशन किया है। वर्ल्ड गेम के पहले ही दिन भवानी सिंह ने रजत पदक भारत के खाते में कर दिया था।
तथा आज दूसरा पदक देश के नाम करते हुए लॉन बॉल व्यक्तिगत स्पर्धा में #कांस्य_पदक जीता।
सनद रहें दोनों पदक विजेता भवानी सिंह को 15 वर्ष पूर्व उनके पिता ने अपनी किडनी दी थी। भवानी सिंह अभी राजस्थान स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत है।
देश का नाम रोशन करने पर भवानी सिंह को इस उपलब्धी की ढेर सारी शुभकामनायें
02/10/2022
श्री करणी माता के 635 वें जन्मोत्सव की आप को हार्दिक शुभकामनाएं ॥ 🙏🏻
चकलू मांढावत री धिन आढ़ी देवल्ल।
जिणरी कूंखें जलमिया, किनियाणी करनल्ल।
चौदह सो चम्मालवे, सातम सुकरवार।
आसोज मास उजालपख, आई लियो अवतार।।
19/08/2022
एक गिरधर थे जो मथुरा, गोकुल, वृंदावन के लोगों को घनघोर बारिश से बचाना चाहते थे इसलिए गिरिराज गोवर्धन को अंगुली पर थामे रखा था और लोगों को बचाया.
यहां तो गुंडे थे जो इस गिरधर सिंह से छूट कर कैसे जाते ? ये वो अपराधी थे जो झालावाड़ की जनता को आतंकित किए हुए थे.
बाड़मेर के मुंगेरिया निवासी और वर्तमान में अकलेरा के DSP गिरधर सिंह चौहान की बहादुरी के चर्चे आज हर किसी की जुबां पर हैं.
अपनी जान की परवाह किए बिना अपराधियों से भिड़ गए और उन्हें सींखचों के पीछे पहुँचा दिया.
इनके वाहन चालक जयवीर सिंह ने भी अपने अधिकारी की मंशा के अनुसार साथ निभाया और दोनों ने बंदूकधारियों को खूब सेवा पूजा करके गिरफ्तार किया.
अपनी शानदार पुलिसिंग के लिए पुलिस बेड़े में गिरधर सिंह का नाम सम्मान के साथ लिया जाता हैं इसी सम्मान को बरकरार रखें यही भगवान से प्रार्थना हैं.
माँ भगवती आपको और शक्ति प्रदान करें
05/08/2022
Jaipur...पहचान करवाने में मदद करें , इस व्यक्ति ने जयपुर सवाई मान सिंह अस्पताल से बच्चे का अपहरण किया है,..किसी के पास भी अगर कोई सूचना हो तो संबंधित नम्बर पर बताएं
26/07/2022
कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मनों को सबक सिखाते हुए मातृभूमि की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों की वीरता, पराक्रम और बलिदान के प्रतीक कारगिल विजय दिवस पर अमर सपूतों की शहादत को नमन।
#कारगिल_विजय_दिवस
07/06/2022
पिछले कुछ समय पूर्व है राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान पुलिस कर्मचारियों के लिए राजस्थान रोडवेज में एक पासधारी यात्रा शुरू करने का योजना लेकर आई थी इसमें प्रत्येक पुलिस कर्मचारी सीआईए स्तर तक के खाते से ₹200 और ₹100 सरकार के खाते से कुल मिलाकर ₹300 प्रत्येक पुलिसकर्मी के नाम से कांटे जाकर सीधा रोडवेज डिपार्टमेंट को दी जा रही थी उसकी एवज में कार्ड धारी पुलिसकर्मियों को रोडवेज में सरकारी यात्रा करने दी जा रही थी जिसे रोडवेज ने निशुल्क यात्रा कहा,अब यह बताओ यह निशुल्क यात्रा कहां से हुई? जब प्रत्येक पुलिसकर्मी के खाते से ₹300 प्रति महीने कट रहे हैं तो यात्रा निशुल्क कैसे हुई ? चाहे वह पुलिसकर्मी यात्रा करें या ना करें ₹300 तो उसके खाते से कटेंगे ही महीने के महीने राजस्थान में लगभग 90000 पुलिसकर्मियों का इसमें पंजीकरण हुआ था इस हिसाब से लगभग लगभग 3 करोड रुपए महीने के रोडवेज डिपार्टमेंट को सिधे ही ट्रांसफर हो रहे थे कुल मिलाकर 36 करोड रुपए सालाना ट्रांसफर हो रहे थे, अब चाहे इसमें पुलिसकर्मी यात्रा करें या ना करें रोडवेज को प्रति साल ₹36 करोड़ राजस्थान पुलिस के सिपाही अपने खातों से पैसे कटवा कर दे रहे थे , अब रोडवेज डिपार्टमेंट का कहना है कि हमें घाटा हो रहा है तो भाई घाटा हो रहा है तो ये योजना बंद कर दो, एक तो 36 करोड रुपए सालाना ले रहे हो दूसरा तुम्हें ऊपर से घाटा भी हो रहा है महीने के 3 करोड रुपए आप ले रहे हो उसमें हद मार के महीने में पुलिसकर्मी एक करोड़ की यात्रा कर लेते होंगे बाकी के दो करोड़ तो आपके ऐसे ही बच रहे हैं फिर रोडवेज ने कहा कि हम तो पांच से ज्यादा सवारी नहीं उठाएंगे किन्हीं तीन मुलजिम को लेकर कोई आठ पुलिसकर्मी जा रहे हैं तो वह क्या तुम्हारे लिए अलग-अलग बस में जाएंगे तुम तो 5 से ज्यादा सवारी बैठ आओगे नहीं,,,,,,,, दूसरी बात रास्ते में कोई पुलिसकर्मी बैठेगा तो वह क्या पहले बस में चढ़कर पहले से बैठे पुलिसकर्मियों गिनेगा की पांच बैठे हैं तो मैं उतर जाऊं पांच नहीं बैठे हैं तो मैं चढ जाऊं........ आप पैसे काट रहे हो तो उसमें क्या फर्क पड़ता है 5 बैठो चाहे 20 ,,,पैसे मिल रहे हैं ना आपको........ किसी व्यक्ति को 6:00 बजे जाना है अर्जेंट किसी काम से कोर्ट में दूसरे जिले में अब जो बस आ रही है उसमें से पहले ही 5 सवारी बैठी है तो क्या वह पीछे आने वाली बसों का वेट करते रहेगा और सभी बसों में 5/5 सवारी आएगी तो उसको बस कौनसी में बैठना होगा....... इसका भी अमेंडमेंट किया गया सवारी की संख्या बढ़ाकर 5 से 10 की गई अब कल परसों दोबारा उसको 5 सवारी तक सीमित कर दिया यह गलत है रोडवेज प्रशासन चाहे तो इस योजना को बंद कर सकता है
इसमें एक नियम और दिल्ली से कोई पुलिस कर्मी आएगा जाएगा दिल्ली भी शाखा है पुलिस की तो उसको सुविधा का लाभ नहीं दिया जाएगा यह भी सरासर गलत है दिल्ली भारत की राजधानी है और पुलिस का काम पड़ता है सुप्रीम कोर्ट में पड़ता है पैसे भी ले रहे हो वहां सुविधा भी नहीं दे रहे हो इसमें भी अमेंडमेंट हुआ था पहले........ अभी अचानक से वापस बंद कर दिया गया राजस्थान रोडवेज कि जो सबसे निचले स्तर के बसे हैं उनमें यह सुविधा दी गई है क्यों भाई बाकी जो अन्य बसे हैं और रात को किसी व्यक्ति को किसी काम से दूसरे जिले में निकलना है उस समय कोई लग्जरी या कोई स्लीपर या कोई स्पेशल बस चलती है रोडवेज की वही निकलती है इसके अलावा सामान्य बस रात को नहीं निकलती है तो वह सिपाही बताओ कौन सी बस में जाएगा ???? क्या वह सुबह तक लोकल बस का इंतजार करेगा इसके अलावा राजस्थान पुलिस को देश के हर हिस्से में सम्मन वारंट की तामील हेतु मुलजिम तलाश हेतु जाना पड़ता है जहां तक राजस्थान रोडवेज की बस जा रही है वहां तक यात्रा पास होना चाहिए जैसे राजस्थान से हरिद्वार कोई बस जारी है तो उसमें वहां तक की यात्रा का पास बनना चाहिए बस तो राजस्थान की ही है पैसे भी राजस्थान रोडवेज ले रही है तो फिर इसमें बॉर्डर का भेदभाव क्यों .......
यह कुछ कमियां है जिन को दूर किया जाए और अगर नहीं किया जाए तो राजस्थान पुलिस अधिकारियों और राजस्थान रोडवेज के अधिकारियों से निवेदन है कि इस योजना को समय रहते ही बंद कर दिया जाए कोई जरूरी नहीं है अगर रोडवेज प्रशासन नहीं चाहता है वह चाहता है कि हम घाटे में जा रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं योजना को बंद कर दो अब सबसे महत्वपूर्ण जो बिंदु है वह यह है कि एक तो यात्रा करने वाले पुलिसकर्मियों की यात्रा संख्या सीमित न की जाए ,,,नंबर दो बसों की श्रेणी लोकल बस से बढ़ाकर स्लीपर बस तक की जाए,,,,,, नंबर 3 पूरे भारत में जहां तक राजस्थान रोडवेज की बस जाती है वहां तक पास जारी किया जाए क्योंकि भारत के प्रत्येक ऐसे में राजकार्य जाना पड़ता है ,,,,,नंबर चार यह महीने के महीने पास को रिन्यू करवाने का झंझट खत्म किया जाए एक बार पास बन गया तो उसको 5 साल से पहले रिन्यू करवाने में ज्यादा झंझट खत्म किया जाए,,,, नंबर 5 टिकट काटते समय पर पुलिसकर्मी को सीट नंबर दिया जाए।।।।। ओर अगर ये सब सम्भव नही हो तो योजना को बंद किया जाए
06/06/2022
मुझे नही लगता आपको इसमें कुछ समझने या बताने की जरूरत हो.......
धन दौलत की लालसा ने प्रकृति का बेड़ा गर्क कर दिया।।