17/10/2024
#जवाहर_सर्किल_जयपुर
मनोरंजन एवं ड्रामा
17/10/2024
#जवाहर_सर्किल_जयपुर
10/05/2024
यह रोड़ सऊदी अरब का नही..राजस्थान के "जैसलमेर" जिला मुख्यालय से तनोटमाता होते हुए "सम" तक जाता है.........
11/12/2023
राजस्थान सरकार के अधीन समस्त संग्रहालय एवं संरक्षित स्मारकों पर सैनिक और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को #निशुल्क प्रवेश
29/05/2023
#जवाहर_सर्किल, #जयपुर
22/02/2023
#पटवा_हवेली (जैसलमेर)
19/02/2023
#सूर्यगढ़ (जैसलमेर)
19/02/2023
#आमेर_दुर्ग (जयपुर)
29/01/2023
रामगंज का इतिहास पुरानी पोस्ट
जयपुर रामगंज को सवाई जयसिंह ने चार चौकड़ियों में शामिल कर बेहतरीन ढंग से बसाया था। युद्ध में विजय दिलाने वाली मां महाकाली का प्रतीक मानकर रामगंज चौपड़ स्थापित की गई। घाटगेट, तोपख़ाना हुजूरी, रामचंद्र जी और गंगापोल चौकड़ी से जुड़े इलाके में मुसलमान और हिंदू योद्धाओं को बसाकर घाटगेट में तोपख़ाना और सैनिक छावनी क़ायम की गई। कभी रामगंज में तोपों की गर्जना सुनाई देती थी। सवाई रामसिंह के समय प्रधानमंत्री फैज़ अली ख़ान ने रामगंज चौपड़ का जीर्णोद्धार करवाया। गंगापोल चौकड़ी में युद्ध में वीरता दिखाने वाले सामंतों को बसाया गया। घाटगेट और तोपख़ाना हुजूरी में मुसलमान सैनिकों की हवेलियां बनी। तोपख़ाने के रास्ते में अफगानिस्तान से आमेर आए तोप बनाने वाले कारीगरों को बसाया। इनकी तोपों ने जयपुर पर हमला करने वाले दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे।
घोड़ा निकास रोड पर पुराना तबेला रहा। यहां सैनिकों के घोड़ों की टाप सुनाई देती थी। युद्ध और शाही जुलूसों की शान हाथियों के लिए महावतों का मोहल्ला भी यहां की शान रहा। एक महावत को जयपुर रियासत का मंत्री भी बनाया गया था। जगन्नाथ शाह के रास्ते में चीता पालकों के घरों में चीते पलते और राजाओं के साथ शिकार पर जाने वाले शिकारियों का मोहल्ला और हिंसक शेरों को जिंदा पकड़ने वालों के नाहरवाड़ा में कभी हिंसक शेर रहते।
हिंदू मुसलमानों में प्रेम की गांठों को मजबूत बनाने वाले पतंगबाज़ और आतिशबाज़ जयपुर की शान है। फौजदार और सिपाहियों की वीरता के क़िस्से आज भी यहां के लोगों की यादों में बसे हैं। पोलों की स्टिक बनाने का काम हो या फिर कमान, तलवार आदि बनाने की कला में लोहारों ने ऊंचा काम किया। संगीत को ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले ध्रुपद गायक बाबा बहराम ख़ाँ डागर तो गुणीजन खाने की शान थे।
रामगंज चौपड़ पर गौहर जान की हवेली में संगीत की महफिल सजती थी। यह नृत्यांगना राज की महफिलों को सजाया करती थी। सारंगी वादक कानजी और भोला तबले वालों की गली आज भी मशहूर है। कल्लू कव्वाल के अलावा फिल्मों में हसरत जयपुरी, शमीम जयपुरी, शायर अंजुम और पारस ने रामगंज का नाम दुनिया में ऊंचा किया। रथख़ाना, फीलख़ना (हाथीख़ाना), शतुरख़ाना के सैनिकों ने सेना का मान बढ़ाया। फूटा खुर्रा में कमान बनाने वाले रहे। रेगरों की कोठी में बनी जूतियां राजा और रईस पहनते। मन्नू खां और महबूब ख़ान अंतिम फौजदार रहे।
महाराजा कॉलेज और सेंट जेवियर स्कूल के ठेकेदार ज़मरूद्दीन रामगंज के थे। इतिहास के जानकार देवेंद्र भगत के मुताबिक 1961 की गणना के मुताबिक रामगंज की चारों चौकड़ियों की आबादी 1,29,566 थी। इसके तहत तोपखाना में 27,348 और घाटगेट में 43,900 लोग रहते थे।
09/11/2022
#सिटी_पैलेस, उदयपुर
✍️Archaeological and Museum department
05/05/2022
11/10/2021
दुनिया की सबसे साफ नदियों में से एक। यह भारत में है। उमनगोट नदी, मेघालय राज्य में शिलांग से 100 किमी.
ऐसा लगता है जैसे नाव हवा में है; पानी इतना साफ और पारदर्शी है।
काश हमारी सभी नदियाँ ऐसी ही स्वच्छ होती