04/10/2026
अध्यात्म (Spirituality) के रास्ते चलने का अर्थ ये नहीं है कि हमारे अंदर कोई इच्छा ही न रहे..हमारे अंदर क्रोध ही न रहे, कोई भाव ही न रहे..जिंदगी है, तो इच्छा, क्रोध व अन्य भावनाएं रहेंगी ही, मगर अध्यात्म हमें सिखाता है कि हम इच्छाओं के गुलाम न बनें. इच्छा करें, इच्छा की पूर्ति के प्रयास करें, मगर इच्छा की पूर्ति न हो तो जो सच है, स्वीकारते चलें. Attachment और detachment का संतुलन बनाकर चलना ही Spirituality का रास्ता है. यहां क्रोध आता है और चला जाता है, रुकता नहीं है. हम क्रोध को एक गवाह के तौर पर देखते हैं. क्रोध हमें deal नहीं करता..हम क्रोध नहीं है, हम क्रोध को अनुभव करने और देखने वाले गवाह मात्र हैं.