15/06/2025
"व्यवस्था में हो सही सुधार।
हक मिले जो हैं सही हकदार।।
सरकार प्रशासन रखें संज्ञान।
समस्याओं की हो समाधान।।"
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15/06/2025
"व्यवस्था में हो सही सुधार।
हक मिले जो हैं सही हकदार।।
सरकार प्रशासन रखें संज्ञान।
समस्याओं की हो समाधान।।"
जमशेदपुर प्रखंड के सुनीता मंडल को लगभग तीन साल से नहीं मिल रही है पेंशन की राशि। हर दरवाजा खटखटा कर जब ना मिली आवाज तो पंहुची पोटका के पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल के पास।
समस्या की होगी समाधान - बोले करुणा मय मंडल।
ज्ञात रहे जमशेदपुर (करनडीह) प्रखंड के पंचायत - लुआबासा स्थित गांव - केशीकुदर के सुनीता मंडल, पिता - स्व.अधर मंडल की सामाजिक सुरक्षा पेंशन की स्वीकृति विगत तिथि - 01/02/2019 को हुई थी। तब से वर्ष 2022 के मार्च माह तक इन्हें नियमित पेंशन राशि इनके बैंक खाते के माध्यम से सही सलामत मिल जा रही थी पर उसके बाद से अचानक इनका पेंशन आना बंद हो गया। इनके द्वारा पंचायत में संपर्क साधा गया तथा ब्लॉक का भी चक्कर कटा गया पर लगभग तीन साल तक में भी जब समस्या की समाधान नहीं हो पाई तो इन्होंने थक हार कर आज पोटका के पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल के आवासीय कार्यालय में अपने भतीजे के साथ आकर अपनी सारी दुखड़ा सुनाई गई।
ज्ञात रहे उक्त महिला "अनीमिया" के शिकार है तथा इनकी ब्लड नहीं बनती है इन्हें बीच बीच में ही ब्लड चढ़वाना पड़ता है। अविवाहित सुनीता जंहा माता पिता के सहारे अपनी जिंदगी गुजारने की ठनी थी वंही माता पिता भी उन्हें छोड़ चली है। ऐसे में एक भाई के पुत्र अशोक मंडल उन्हें देखभाल करते हैं। अशोक मंडल टिस्को के ठेकेदार मजदूर हैं - वे बताते हैं जब उनकी बुआ सुनीता की ब्लड खत्म हो जाती है तो उन्हें एक बार में चार पांच यूनिट ब्लड चढ़ानी पड़ती है ऐसे में अपने कंपनी के परिचित अफसरों से रिक्वेस्ट करके ब्लड का व्यवस्था करते हैं एवं अपनी बुआ को स्वस्थ्य करते हैं। आज के तारीख में जंहा अपने सगे बेटे अपने मां के कुछ करने के लिए कतराते हैं वंही अशोक जैसे भतीजे एक मिशाल है।
ऐसी असहाय बीमार सुनीता को तीन साल से पेंशन नहीं मिलना कंही ना कंही आज भी हमारी व्यवस्था की कमी को ही दर्शाती है।
पूर्व जिला पार्षद श्री मंडल ने पीड़ित सुनीता को साहस देते हुए निश्चित रूप से हर हाल में उनके हक दिलवाने की बात कही तथा उन्हें आश्वस्त किए।
सुनीता के साथ उनके भतीजा अशोक मंडल भी पूर्व पार्षद श्री मंडल के आवासीय कार्यालय में पंहुचे थे।
15/06/2025
"সহজ আর গ্রামের ভাষায়
আজকে হাল টাঙা।
ধরা কৌমার্যের সমাপ্তিতে
কিছু অবসর মাঙ্গা।।
সৃষ্টির সেই চিরন্তন বিধি
প্রকৃতি-পুরুষ শক্তি।
দুইয়ের মিলনে নব প্রজন্ম
সৌন্দর্যের নব দ্বীপ্তি।।
মাতৃ শক্তি শুভাবির্ভাবের
শুভ সূচনা সন্ধিক্ষণ।
প্রকৃতির নব সৃষ্টির এই
প্রেম পূর্ণ পূর্ব ক্ষণ।।
পৌরাণিক শুভ পবিত্র
আজিকার শুভ দিন।
শুভ রজ:স্বলা সংক্রান্তি
প্রথা ব্যপ্ত এ গ্রামীণ।।
শূন্য ক্ষেত্রে নব শস্যের
নব প্রজন্মের সৃষ্টি।
মৃত্তিকায় মাতৃ শক্তির
স্বত: দৈবিক পুষ্টি।।
সেই অবিনাশী অনন্তের
কাল চক্র গতি।
পূর্বজের পবিত্র পার্বন
আজি শুভ তিথী।।
পরম্পরার পরিপ্রেক্ষে
ঝুলছে কোথাও ঝুলা।
কোল্হানের সুবিক্ষাত
হচ্ছে হরিনা মেলা।।
শুভ দিনের শুভ ক্ষণে
এই আন্তরিক ইচ্ছা।
প্রিয় জনে জানাই সবে
প্রীতি ও শুভেচ্ছা।।"
🙏🙏
করুণাময় মণ্ডল
প্রাক্তন জেলা পার্ষদ
পোটকা পূর্ব সিংভূম
(ঝাড়খণ্ড)
৯৬৯৩৬২৩১৫১
প্রস্তুতী - ১৫/০৬/২০২৫
পুর্বাহ্ন - ৯.৩০ মিনিট
🙏🌹"শুভ রজ: সংক্রান্তি"🌹🙏
13/06/2025
"গ্রামে গ্রামে জেগেছে সাড়া।
বাংলা শেখার সবার তাড়া।।
মাতৃভাষা অমৃত সমান।
সচেষ্ট সবাই বাড়াতে মান।।"
🙏 জয় বাংলা ভাষার জয় 🙏
13/06/2025
"গুড নাইট, শুভ রাত্রি বলে
বিদায় নিলো সবাই।
হ্যাটসএপ এবং ফেসবুক তে
রয়ে গেলাম একাই।।
ভাবছি মনে কি করবো
লিখবো নাকি কবিতা।
অতি সাধারণ ছোট্ট করে
দিয়ে মনের কথা।।
দৃশ্য তো আর যায় না দেখা
লাইট আছে বন্ধ।
গুনগুন করে শব্দ একটা
টেবুল ফেনের ছন্দ।।
অন্ধকারেই তার কথাটি
ভাবতে ভাবতে ভাবি।
গ্রীষ্ম রাতে সবার থেকে
ওরেই বেশি দাবি।।
সকাল থেকে সকাল অবধি
যে ঘুরছে নিরন্তর।
ঘড়ির কাঁটার সাথেই ঘোরা
সারা গ্রীষ্ম ভর।।
ঐ বিজলী আর পাঙ্খা
দুই বন্ধুতে মিলে।
যত গ্রীষ্মের প্রখরতা
সব ভুলিয়ে দিলে।।
গ্রীষ্মে প্রিয় দুই বন্ধুকে
জানাই ধন্যবাদ।
দুজন সদাই কাছে থেকে
ঘুচাও পরমাদ।।"
🙏🙏
করুণাময় মণ্ডল
প্রাক্তন জেলা পার্ষদ
পোটকা পূর্ব সিংভূম
(ঝাড়খণ্ড)
৯৬৯৩৬২৩১৫১
প্রস্তুতী - ১২/০৬/২০২৫
রাত্রি - ১১.০২ মিনিট।
🙏🙏🌹"শুভ রাত্রি"🌹🙏🙏
13/06/2025
"जानी पहचानी थी सफर
कैसे अनजानी बन गई।
स्वस्थ्य सबल सपरिवार थे
कैसे कहानी बन गई।।
सच कहते हैं स्वर्ग की राह
आसमान से होती है।
स्वर्ग जाने वालों की सफर
दिव्य विमान से होती है।।
अहमदाबाद अब गवाह है
इस अद्भुत सफर की।
इस आसमान की राह से
उस स्वर्ग की डगर कि।।
कितने परिवार बच्चे बुजुर्ग
कितने माता बहनें।
जो भी थे इस सफर में
सब ने खोई जानें।।
विदा ली थी घर से जब ये
हवा में थी अंतिम बातें।
ओझल भी ना हुई होगी
अंत की वो मुलाकातें।।
सुनी होगी घर वालों ने
शुनी हो गई सारी घरें।
विश्वास ना करने वाली
सुनी होगी वो सच खबरें।।
किसे पता है साजिश ये
भगवान या हैवानों की।
रहस्य जब ना हो उजागर
संदेह सदा अनजानों की।।
मनुष्यों के इस जीवन में
आती है कुछ मनहूंस पलें।
छीन लेती है सारी खुशियां
पल भर की वो पल कालें।।
हे जीवन के अंतिम यात्री
मिले सब को प्रभु चरण।
गर हुआ है साजिश शिकार
हो रहस्य का उद्भेदन।।"
🙏🙏
करुणामय मंडल
पूर्व जिला पार्षद पोटका
पूर्वी सिंहभूम झारखंड
9693623151
प्रस्तुति - 13/06/2025
अपरान्ह - 12.36 मिनट।