23/03/2022
23 मार्च - भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस पर उनको शत-शत नमन। इस अवसर पर आइए जानें भगत सिंह को देशप्रेम की प्रेरणा कहां से मिली..
*आर्यसमाजियों के द्वारा स्थापित डीएवी कॉलेज, लाहौर का भव्य भवन जहा पर भाई परमानंद जी ने भगत सिंह नाम की चिंगारी को मशाल मे बदल दिया था...*
*भगत सिंह के दादा श्री अर्जुन सिंह जी का यज्ञोपवीत संस्कार स्वयं "महर्षि दयानंद सरस्वती जी" ने ही करवाया था ओर ओर दादा ने अपने दोनो पोतों का....."स्मरण" रहे सिख समाज मे यज्ञोपवित संस्कार नही होता हैं...*
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सरदार अर्जुन सिंह जी एक कट्टर आर्य समाजी थे। वे महर्षि दयानंद जी के आरम्भिक शिष्यों में से एक थे जिनका यज्ञोपवित संस्कार खुद महर्षि दयानंद जी ने करवाया था । लोगो ने तो मंदिर से आर्य समाज तक का सफ़र तय किया था *लेकिन सरदार अर्जुन सिंह जी ने गुरुद्वारे से आर्य समाज तक का सफर तय किया था।*
उनको वैदिक साहित्य का इतना अध्ययन था की मूर्ति पूजा श्राद्ध आदि विषयों पर आर्य समाज की तरफ से शास्त्रार्थ लड़ते थे । प्रतिदिन यज्ञ करना उनकी आदत
थी । जब वे सफ़र में जाते थे तब भी अपनी हवन सामग्री यज्ञ कुंड इत्यादि साथ लेकर चलते थे । जब उन्होंने अपने दोनों पोतो जगत सिंह और भगत सिंह का यज्ञोपवीत करवाया था तब उन्होंने अपने दोनों पोतो को दायं और बायं बाजू के निचे लेकर ये प्रतिज्ञा ली थी की *मै अपने दोनों पोतो को देश की बली वेदी पर दान करता हूँ।*
भगत सिंह जी के पिता जी का नाम सरदार किशन सिंह था और माँ का नाम विद्यावती था । दोनों परिवार सिख थे लेकिन उनका विवाह आर्य समाज के तरीके से हुआ था अर्थात फेरे गुरुग्रन्थ साहिब के स्थान पर यज्ञके फेरे लिए थे । *उस समय लोगो ने कहा की देखो कैसा दामाद आया है जो खुद वेदमन्त्र पढ़ रहा है ।*
भगत सिंह जी के चाचा अजित सिंह जी भी दृढ़ आर्य समाजी थे । आर्य समाज के लिए उन्होंने बहुत ट्रैक्ट लिखे जिनमे से ' विधवा की पुकार' मुख्य है ।
*भगत सिंह अपने दादा जी को जबभी पत्र लिखते थे तो ओ३म् और नमस्ते ही लिखते थे।* भगत सिंह लाला लाजपत राय जी द्वारा संचालित नेशनल कोलेज के छात्र थे । और प्रसिद्ध आर्य विद्वान जयचन्द्र विद्यालंकार , उदयवीर शास्त्री तथा भाई परमानन्द जी के शिष्य थे ।
भगतसिंह का जनेऊ संस्कार "पूजनीय प्रभो हमारे...." के रचनाकार पूज्य लोकनाथ तर्क वाचस्पति जी द्वारा हुआ था । भगतसिंह का प्रसिद्ध चित्र तिरछी टोपी वाला आर्यसमाज कलकत्ता(विधान सारणी) में लिया गया था क्योंकी भगत सिंह ने लाहौर में सांडर्स को मारने के बाद वेश बदलकर वही शरण ली थी ।
✍️प्रस्तुति: महिमा सागर
*साभार पुस्तक : 'युगद्रष्टा भगत सिंह और उनके मृत्युंजय पुरखे'*
लेखिका : सरदार भगतसिंह के छोटे भाई कुलतार सिंह जी की सुपुत्री वीरेन्द्र सिंधु

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