Department Of Agriculture & Farmer Welfare District Jhajjar

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Dept of agriculture & farmer welfare
In service of farmers'

11/04/2026
11/11/2025

पराली प्रबंधन वेरिफिकेशन के लिए गांव बीघड़ में एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी नोडल अधिकारियों व पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। शिविर में कृषि विकास अधिकारी डॉ. अंकित ढिल्लों ने बताया कि पराली प्रबंधन के अंतर्गत 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए किसानों को अब किसी भी दफ्तर के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। पात्र किसानों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया उनके गांव में ही की जाएगी, जिससे उन्हें सुविधा मिलेगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रूप से संपन्न होगी।
उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी सरपंच, नंबरदार, पटवारी, ग्राम सचिव व वीएलडीए को साझा रूप से सौंपी गई है। यह संपूर्ण प्रक्रिया एक मोबाइल एप के माध्यम से की जाएगी, जिसके संचालन का प्रशिक्षण सभी संबंधितों को प्रदान किया गया है। ग्रीन जोन में प्रत्येक अधिकारी को 100-100 किसानों की सूची आवंटित की गई है। किसान अपने संबंधित अधिकारी से संपर्क कर वेरिफिकेशन करवाकर योजना का लाभ उठा सकते हैं।

Photos from DIPRO Fatehabad's post 11/11/2025
11/11/2025

कृषि विकास अधिकारी डॉ. अंकित ढिल्लों ने रबी सीजन में गेहूं की बिजाई करने वाले किसानों से सुपरसीडर तकनीक अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धान की कटाई और बिजाई के बीच उचित प्रबंधन से फसल की बेहतर स्थापना होती है और पराली प्रबंधन भी सुचारू रूप से किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कंबाइन में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) का उपयोग किया जाए, ताकि फसल अवशेष खेत में समान रूप से फैल सकें और सुपरसीडर का संचालन बिना किसी रुकावट के हो सके।
उन्होंने किसानों को बीज उपचार के महत्व के बारे में भी बताया और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि बीज का उपचार सही क्रम में किया जाए। 40 किलोग्राम बीज हेतु बीजोपचार प्रक्रिया का पालन करें जिसमें कीट नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफॉस 160 मि.ली. को 2 लीटर पानी में मिलाकर बीज पर छिडक़ाव करें और छाया में सूखा दें। रोग प्रबंधन के लिए रैक्सिल (टेबुकोनाजोल) 13 मि.ली. को 400 मि.ली. पानी में मिलाकर बीज उपचार करें। जैव उर्वरक का उपचार कम से कम 6 घंटे के अंतराल पर फफूंदनाशक से करें, 200 मि.ली. एजोटोबैक्टर और 200 मि.ली. फॉस्फोटीका (पीएसबी) का प्रयोग बिजाई से पहले करें। उन्होंने कहा कि उपचार का क्रम नहीं बदलना चाहिए, क्योंकि इससे कीट व रोग नियंत्रण तथा सूक्ष्मजीवी उर्वरकों की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
गुलाबी तना छेदक सुंडी के प्रकोप पर भी डॉ. ढिल्लों ने किसानों से सजग रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि पहली सिंचाई से पहले रिजेंट (फिपरोनिल) ग्रेन्यूल 7 किलो को 20 किलो रेत में मिलाकर खेत में डालें और फिर पहली सिंचाई करें। यदि इसके बाद भी सुंडी का प्रकोप हो, तो कोराजन (क्लोरैन्ट्रानीलीप्रोल) 50 मि.ली. को 80-100 लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें। सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. जागीर सिंह ने भी किसानों से अपील की है कि वे सुपरसीडर तकनीक अपनाकर फसल की बेहतर स्थापना, कम लागत और पराली प्रबंधन में सक्रिय सहयोग करें।

11/11/2025

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु येलो जोन घोषित गांव धारनिया में बुधवार को किसानों के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर खंड कृषि अधिकारी डॉ. जय कुमार भोरिया, कृषि विकास अधिकारी डॉ. अंकित ढिल्लों, कृषि प्रवेक्षक मनोज बिश्नोई एवं मनोज खिचड़ उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने किसानों को पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव — जैसे मिट्टी की उर्वरता में कमी, पर्यावरण प्रदूषण तथा स्वास्थ्य संबंधी खतरे के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही सुपर सीडर जैसी आधुनिक कृषि मशीनरी का उपयोग कर पराली प्रबंधन एवं बिजाई करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
शिविर के दौरान किसानों ने सुपर सीडर के उपयोग में आने वाली समस्याओं को विभाग के समक्ष रखा, जिनके समाधान वहीं पर अधिकारियों द्वारा बताए गए।
इसके अतिरिक्त किसानों को समग्र रबी फसलों के बीज उपचार की विधिया तथा फायदों के बारे में बताया गया और साथ-साथ सरसों में खरपतवार नियंत्रण के उपाय के बारे में भी बताया गया।
अधिकारियों ने बताया कि पराली प्रबंधन अपनाने वाले किसानों को सरकार द्वारा 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। इस हेतु वेरिफिकेशन प्रक्रिया गांव में ही कृषि अधिकारी, पटवारी एवं ग्राम सचिव द्वारा की जाएगी, जिससे किसानों को किसी भी कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
साथ ही साथ किसानों को पराली जलाने पर होने वाले जुर्माना एवं एफआईआर के बारे में आगाह किया गया। अंत में किसानों से अपील की गई कि वे किसी भी परिस्थिति में पराली न जलाएं तथा वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।

11/11/2025

कृषि विकास अधिकारी डॉ. अंकित ढिल्लों ने बीघड़ क्षेत्र में पुलिस विभाग की टीम के साथ पेट्रोलिंग कर क्षेत्र में फसल अवशेष प्रबंधन की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने सुपरसीडर का उपयोग कर रहे किसानों की सराहना की तथा बीज उपचार के महत्व पर जोर देते हुए उसकी विधि के बारे में भी किसानों को विस्तार से अवगत करवाया। साथ ही उन्होंने कंबाइन में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) की आवश्यकता और लाभों के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने किसानों से पराली न जलाने की अपील की ताकि वातावरण के साथ-साथ भूमि की उर्वरता भी सुरक्षित रह सके। इस दौरान किसानों ने भी आश्वासन दिया कि वे पराली को न जलाकर उसके उचित प्रबंधन पद्धतियों को अपनाएंगे। उन्होंने हाथ से फसल की कटाई करने वाले किसानों की भी प्रशंसा की और उन्हें बताया कि वे भी पराली प्रबंधन करने पर 1200 रुपये प्रति एकड़ के प्रोत्साहन के पात्र हैं। इसके अलावा उन्होंने किसानों से आपसी सहयोग बनाए रखने की अपील की।

02/08/2025

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