Dr Shiv Singh Rathore

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Dr Shiv Singh Rathore Ex Chairman & Member RPSC, D Sc (Geoheritage & Geopark) Ph D (Hydro Geo Tourism) M Sc (Gold Medalist)

🙏 Join us for a Geoheritage Walk!📅 6th October | 6:30 AM📍 Mehrangarh Fort, JodhpurFollowed by breakfast at Chokhelao Pal...
04/10/2026

🙏 Join us for a Geoheritage Walk!

📅 6th October | 6:30 AM
📍 Mehrangarh Fort, Jodhpur

Followed by breakfast at Chokhelao Palace.

An enriching learning experience for all age groups. 🙏

03/10/2026

29/09/2026

ईगो के नीचे दबी ताक़त को बाहर निकालना ही आत्म-विकास की पहली सीढ़ी है।

हर इंसान के व्यक्तित्व में कुछ ताक़त (Strength) होती हैं और कुछ कमज़ोरियाँ (Weaknesses)। लेकिन विडंबना यह है कि इंसान अक्सर अपनी ताक़त का गुणगान और दूसरों की कमज़ोरियों की चर्चा करने में ही व्यस्त रहता है।

यदि हम दूसरों की कमियाँ गिनाने के बजाय अपनी ताक़त और कमज़ोरियों को पहचानें और उन पर ईमानदारी से काम करना शुरू करें, तो शायद सफलता के साथ-साथ एक बेहतर व्यक्तित्व का निर्माण भी कर सकें।

इस कहानी में हम अपनी ताक़त को इसलिए पहचान नहीं पा रहे हैं, क्योंकि हमने अपनी ताक़त—यानी गोल्फ बॉल—को अपनी तोंद यानी ईगो के नीचे दबा रखा है। ईगो हमें अपनी वास्तविक क्षमताओं को देखने और स्वीकार करने से रोकता है।

दूसरी ओर, जब हम दूसरों से ईर्ष्या करते हैं, तो वास्तव में हम अपनी ही ताक़त को कमजोर करते हैं। दूसरों की उपलब्धियों को देखकर जलने के बजाय हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और स्वयं को उनसे बेहतर बनाने की सकारात्मक प्रतिस्पर्धा रखनी चाहिए।

ईर्ष्या हमें भीतर से कमजोर करती है, जबकि प्रतिस्पर्धा हमें बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती है।

इसलिए दूसरों की कमज़ोरियाँ खोजने और अपनी ताक़त का गुणगान करने के बजाय, आइए हम स्वयं से एक सवाल पूछें—
“मेरी असली ताक़त क्या है, और मैं उसे कितना विकसित कर रहा हूँ?”

क्योंकि जिस दिन इंसान अपनी ताक़त को पहचानकर, अपनी कमज़ोरियों पर काम करना शुरू कर देता है, उसी दिन से उसके बेहतर इंसान बनने की यात्रा शुरू हो जाती है।

23/09/2026

*Update & Upgrade Yourself*

केवल अपनी गुणवत्ता बनाए रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय, परिस्थितियों और बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं में परिवर्तन करना भी आवश्यक है।

आज का युग प्रतिस्पर्धा का है। जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, वह धीरे-धीरे पीछे छूटने लगता है। इसलिए अपनी ज्ञान, कौशल, सोच और कार्यशैली को समय के साथ निरंतर अपडेट और अपग्रेड करते रहना चाहिए।

क्योंकि सफलता केवल बेहतर होने में नहीं, बल्कि समय के साथ बेहतर होते रहने में है।

21/08/2026

दीपक का कोई महत्व नहीं है
जब तक तम से नहीं लड़ेगा ;
दिनकर नहीं प्रभा बाँटेगा
जब तक स्वयं नहीं धधकेगा ;
कभी दहकती ज्वाला के बिन
कुंदन भला बना है सोना ;
बिना घिसे मेहंदी ने बोलो
कब पाया है रंग सलौना ;
जीवन के पथ के राही को
क्षण भर भी विश्राम नहीं है ;
कौन भला स्वीकार करेगा
जीवन एक संग्राम नहीं है।।…

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मैं उन समस्त अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित क...
15/08/2026

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मैं उन समस्त अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, जिन्होंने भारत माता को अंग्रेजी हुकूमत की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और हमें सदैव के लिए अपना ऋणी बना दिया।

आज के इस पावन पर्व पर हम सभी देशवासी उन महान बलिदानियों के सपनों के भारत के निर्माण का संकल्प लें। राष्ट्र के पुनरुत्थान, प्रगति और गौरव में अपना-अपना योगदान देकर भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करने के लिए निरंतर प्रयास करें।

आइए, हम सब मिलकर एक सशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर और गौरवशाली भारत के निर्माण का संकल्प लें और भारत माता का गौरव विश्व पटल पर और अधिक ऊँचा करें।
भारत माता की जय

अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित Springer Nature Journal की समीक्षा प्रक्रिया में योगदान देने और भू-विरासत (Ge...
08/08/2026

अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित Springer Nature Journal की समीक्षा प्रक्रिया में योगदान देने और भू-विरासत (Geoheritage) एवं सततता (Sustainability) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में शोध की गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं प्रगति को आगे बढ़ाने में सहभागी बनने का अवसर मेरे लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय है। यह केवल एक अकादमिक दायित्व ही नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में सार्थक योगदान देने की एक मूल्यवान जिम्मेदारी भी है। 🌍📚✨

“गुप्त नवरात्रि का संदेश यही है—ईश्वर ही सृष्टि के आदि और अंत हैं। गुणों और अहंकार से ऊपर उठकर अपना सर्वस्व माँ भगवती के...
15/07/2026

“गुप्त नवरात्रि का संदेश यही है—ईश्वर ही सृष्टि के आदि और अंत हैं। गुणों और अहंकार से ऊपर उठकर अपना सर्वस्व माँ भगवती के श्रीचरणों में समर्पित करें तथा धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के पावन संकल्प में सहभागी बनें। जय माता दी!” 🙏🌺

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