प्रचार विभाग लाजपत नगर

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The goal of the Sangh is to take our nation to the pinnacle of glory through organising the entire society & ensuring protection of Our Dharma.

25/12/2021

उमाशंकर जी द्वारा रचित श्री राम भक्त मणि कुंडल जी के जीवन प्रसंग पर आधारित 350 पृष्ठीय महाकाव्य *महामानव* ग्रंथ स्वयं उमाशंकर जी द्वारा आदरणीय अनिल जी (क्षेत्र प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र) को सप्रेम भेंट की गई ।

18/11/2021

उमाशंकर जी द्वारा रचित श्री राम भक्त मणि कुंडल जी के जीवन प्रसंग पर आधारित 350 पृष्ठीय महाकाव्य *महामानव* ग्रंथ स्वयं उमाशंकर जी द्वारा आदरणीय भवानी भीख जी (प्रांत सह कार्यवाह) को सप्रेम भेंट की गई ।
उक्त अवसर पर भवानी भीख जी द्वारा मणिकुंडल महाराज जी के संदर्भ में कहा गया कि राम भक्त मणि कुंडल जी केवल अयोध्यावासी वैश्य समाज के ही आराध्य ना होकर संपूर्ण हिंदू समाज के आराध्य है ।मणिकुंडल जी राम भक्ति, राष्ट्र भक्ति धर्म और सत्य आचरण के ज्वलंत प्रतीक है। उनका जीवन हिंदू समाज के लिए आदर्श स्थापित करता है, राम के प्रति किए गए त्याग भी उनका जीवन दर्शन दर्शाता है।
ज्ञातव्य है कि उमाशंकर जी 54 वर्ष पुराने बाल स्वयंसेवक है तथा विभिन्न दायित्व का निर्वाह करते हुए इस महाकाव्य की रचना उनके द्वारा की गई है, महाकाव्य में उनको संघ से प्राप्त संस्कारों की छाया परिलक्षित होती है।

13/10/2021
22/08/2021

★ *ॐ* ★
*🚩शुभ रक्षाबंधन🚩*
*जिस बंधन में मर्यादा और संस्कार है वही सम्बन्ध हैं।*
पवित्र त्योहार *रक्षाबंधन* की अनन्त शुभकामनायें।
इस पवित्र रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी शक्ति,सामर्थ्य व पुरुषार्थशाली पुरुषों के द्वारा *मातृशक्ति, हिन्दू धर्म,हिन्दू समाज,हिन्दू संस्कृति तथा हिन्दुराष्ट्र* के सम्मान,सेवा,सुरक्षा एवं संरक्षण का संकल्प दृढ़ हो।
सभी सनातनी रक्षासूत्र के पवित्र बंधन में बंधकर *मातृशक्ति,मातृसंस्कृति,मातृभाषा एवं मातृभूमि* के प्रति सभी सनातनियों के हृदय के अंतःकरण में भक्तिभावना का अहर्निश व तीव्र रूप से प्राकट्य हो।
*🚩येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।🚩*
*तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।*
*🚩भारत माता की जय🦁भारत अखण्ड हो🚩*

24/07/2021

#भगवा_ध्वज

"जिस राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर वेदकाल से आज तक हम स्फूर्ति पाते रहे। जिसमें सदियों के उत्थान पतन के रोमांचकारी क्षणों की गाथाएँ गुम्फित हैं। जिसमें त्यागी, तपस्वी, पराकर्मी, दिग्विजयी, ज्ञानी, ऋषि-मुनि, सम्राट, सेनापति, कवि, साहित्यकार, सन्यासी और असंख्य कर्मयोगी के चरित्रों का स्मरण अंकित है। जहाँ दार्शनिक उपलब्धियों के साथ जीवन होम करने के असंख्य उदाहरण हमारे स्मृति पटल पर नाच उठते हैं, यह परम पवित्र भगवाध्वज ही हमारी अखंड राष्ट्रीय परम्परा का प्रतीक बनकर हमारे सामने उपस्थित होता है।" - पंडित दीनदयाल उपाध्याय

Photos from प्रचार विभाग लाजपत नगर's post 30/05/2021

*लाजपत नगर, कानपुर उत्तर* सायंकाल 7.00 बजे *ई-शाखा* में जुड़ने का लिंक नीचे दिया गया है।
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Meeting URL: https://meet.google.com/xcs-fhsw-dfx

13/04/2021

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक , आद्यसरसंघचालक प.पू।डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी की जयंती पर शत शत नमन💐💐💐💐💐💐💐

Photos from प्रचार विभाग लाजपत नगर's post 12/04/2021
12/04/2021

#जीवन_परिचय भाग ५
संघ के संस्थापक - डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

भेद उत्पन्न करने की अंग्रेजों की नीति थी।लोगों में आपसी झगड़े लगा देना और खुद उसका लाभ उठाना ऐसी उनकी रीति थी।इसी दुष्ट हेतु को मन मे रखकर अंग्रेज़ों ने सन 1905 में बंगाल प्रान्त के दो भाग करने का निश्चय किया।बंगाल प्रान्त के नेताओं ने इसके विरुद्ध एआम जनता को जागृत किया। सब लोग क्रुद्ध हो गए। सभाएं होने लगी। जुलूस निकलने लगे। घोषणाएं होने लगी , " नही , हम बंगाल के टुकड़े नही होने देंगे।" बंकिम बाबू का वंदे मातरम गीत राष्ट्र गीत बन गया। वनडे मातरम के उच्चारण मात्र से लोगों में नाव चैतन्य उत्पन्न होने लगा ।

वह आंदोलन केवल बंगाल का नही रहा। भारतवर्ष के कोने कोने से " वन्दे मातरम की ध्वनि गूंजने लगी और लोग कहने लगे , " नही , हम बंगाल के टुकड़े नही होने देंगे। यह केवल बंगाल का प्रश्न नही है , सम्पूर्ण देश का प्रश्न हैं। वन्दे मातरम । भारत माता की जय । "

इस प्रकार के विचार सुनकर और घोषणाएं सुनकर , अंग्रेज अधिकारी चिड़ने लगे , वे जुल्म ढाने लगे। जबरदस्ती करने लगे। अन्याय पूर्ण आदेश देने लगे। उन्होंने कहा कि, " जो भी भारत माता की जय कहेगा , उसे कड़ी सजा दी जाएगी।"

परंतु देशभक्ति की लहर अंग्रेजो के रोके रुकी नही।वह सुदूर ग्रामों एवं नगरों में पहुंची। भावनाशील केशव उससे बहुत प्रभावित हुआ।

सन 1907 ईस्वी के अक्टूबर मास की घटना है सर्वत्र लोकमान्य तिलक के भाषण गूंज रहे थे। स्वदेश भक्ति की हवा देशभर में बह रही थी। ऐसे वातावरण में विजयादशमी को अर्थात दशहरे के त्यौहार पर केशव अपने चाचा श्री आबा जी हेडगेवार के पास रामपायली में पहुंचा।

केशव की विशेषता यह थी कि वह जहां भी जाता था अपने समवयस्कों को बहुत प्रभावित करता था ।वह सब अल्पकाल में ही उसके मित्र ही नहीं , अनुयाई बन जाते थे ।रामपायली में भी यही हुआ ।बहुत बड़ी संख्या में उसने वहां मित्र बनाएं। सबसे विचार विनिमय करने के बाद उसने दशहरा मनाने के संबंध में एक विशेष योजना बनाई।

महाराष्ट्र में दशहरे का त्यौहार विशेष ढंग से और बड़े उत्साह से मनाया जाता है उस दिन नए कपड़े पहन कर सब लोग गांव की सीमा के बाहर जाकर "सीमोल्लंघन" करते है । यहां पर शमी पूजन होता है रावण का पुतला जलाया जाता है। शमी और आपटा वृक्ष के पत्तों को उस दिन सोना कहते हैं ।जैसे सचमुच रावण को मारकर लंका से सोना लूट कर लाया हो ।इस ढंग से सब लोग घर घर जाते हैं , बड़ों के पैर छूते हैं और उन्हें सोना देते है और मिठाइयां खाते हैं।

रामपायली में दशहरे के दिन शाम को जब लोग सीमोल्लंघन करने के लिए जाने लगे। तब उनके साथ केशव भी था और उसके मित्र भी थे। नित्य की प्रथा के अनुसार जब शमी पूजन हुआ और लोग रावण के पुतले की ओर बढ़ने लगे तब केशव जोर से गरज उठा - " वंदे मातरम" तब उसके सब मित्र और उनके साथियों ने भी गर्जना की - " वंदे मातरम" एकाएक वहां का वायुमंडल मानो बदल गया सब लोग अपने अंतःकरण में नवचेतना का अनुभव करने लगे। सामने छोटा सा टीला था। केशव उस पर जाकर खड़ा हुआ और सब को संबोधित कर उसने कहा -

आज हमें अनेक प्रकार की सीमाओं ने कसकर बांध रखा है ।उन्हें पार करना हमारा कर्तव्य है ।हमें आज पारतंत्र्य , कायरता , अज्ञान और निपट स्वार्थ ने घेर रखा है ।इस घेरे को हमें तोड़ना होगा ।रावण प्रतिनिधित्व करता है अन्याय का, जुल्म जबरदस्ती का, क्रूर साम्राज्यवाद का और कुटिल राज्यकर्ताओं का। उसे हमें जलाना होगा ।यह पवित्र देश कार्य है , देव कार्य है। बोलिए "वंदे मातरम ! भारत माता की जय!"

सब लोगों में आवेश आ गया बालक और किशोर तेजी से आगे बढ़े रावण को तोड़ा , फोड़ा तथा जलाया गया । प्रभु रामचंद्र और भारत माता की जय जय कार करते हुए सब लोग अपने अपने घर लौटे । इस प्रकार इस वर्ष रामपायली की जनता को केवल पेड़ के पत्तों का नहीं नव विचारों का "सुवर्ण" प्राप्त हुआ। उस वर्ष रामपायली की जनता ने पुरानी सीमाएं लांग कर वास्तव में टीम उल्लंघन किया।

10/04/2021

#जीवन_परिचय भाग ४
संघ के संस्थापक - डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

छत्रपति शिवाजी महाराज की कथा सुनते समय बालक केशव कई बार मन ही मन उनकी सेना का एक सैनिक बन जाता था।कभी वह घुड़सवार होकर सरपट घोड़ा दौड़ाता , तो कभी किसी दुर्ग पर आक्रमण करता।कभी गुप्त मार्ग से अकस्मात किले पर पहुंच जाता तो कभी किला जीत लेता।प्रत्यक्ष जीवन मे भी इसी प्रकार प्रयत्न करना चाहिए , ऐसा उसे लगता था।

नागपुर नगर के मध्य में एक छोटा सा दुर्ग है। उसे "सीताबर्डी" किला कहते है।उन दिनों में उस किले पर भगवा ध्वज फहराता था।उसे देख केशव को बड़ी पीड़ा होती थी।वह अपने मित्रों से कहता था, " यह अंग्रेजों का झंडा हमे यहां से उखाड़ फेंकना चाहिए। किसी प्रकार यह सीताबर्डी किला हमे जीतना चाहिए और वहां पर भगवा ध्वज लहराना चाहिए।"

एक मित्र ने कहा - किसी तरह हम अंदर पहुंच जायेतो वहां के अंग्रेज सैनिकों को मारकर या भगाकर हम यह किला जीत सकते है।

परंतु हम वहां पहुंच कैसे पाएंगे ? दूसरे ने शंका उपस्थित की।

तीसरे ने उपाय बताया - क्यों न हम सुरंग खोदें । जममें के भीतर ही भीतर से किले में पहुंचने का मार्ग तैयार किया जाए।

चलो हम यह अभी प्रारंभ करें। अच्छे काम मे सुस्ती नही होना चाहिए।

जहां ये बालक खेला करते थे उसके पास में ही वझे गुरुजी का मकान था। उसका बहुत बड़ा आंगन था। चारो ओर परकोटा खींचा हुआ था। वझे गुरुजी के घर के लोग बाहर गए हुए थे। जब वझे गुरुजी पाठशाला जाते थे तब घर पर सब सुनसान रहता था।

वही स्थान योग्य माना गया।सब अपने अपने घर से खुदाई करने का सामान लेकर आये।कोई कुदाली ले आया तो कोई फावड़ा । कोई सब्बल तो कोई टोकनियाँ उठा लाया।

बाल देशभक्तों का यह कार्य चुपचाप चलने लगा।वझे गुरुजी के घर के आंगन में एक बड़ा भारी गड्ढा निर्माण हो गया।शाम को जब वझे गुरुजी घर आये तो बालकों के यह उद्योग देखकर वे चकित रह गए।उन्होंने एक दो को एक और बुलाकर पूछा कि ये क्या हो रहा है? किसलिए हो रहा है? तब उन बालकों ने सरलता से उन्हें अपनी पूरी योजना बताई। उन छोटे बालकों की भोली कल्पनाएं सुनकर वझे गुरुजी को हंसी आयी परंतु बालकों की तेजोमय आकांशाएँ देख कर आनंद भी हुआ। उन्होंने सब बालकों को एकत्रित कर पास में बैठाया और ढंग से समझाया। केशव उन सभी बालकों के अग्रणी था। उन्होंने केशव की विशेष रूप से सराहना की और उसे आशीर्वाद दिया - " तुम आगे चलकर देश की उत्तम सेवा करोगे।

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