01/04/2026
✍️भारतीय रिज़र्व बैंक स्थापना दिवस |
भारतीय वित्तीय प्रणाली के प्रमुख स्तंभ भारतीय रिजर्व बैंक के स्थापना दिवस के अवसर पर, भारतीय संविधान के शिल्पकार, गणतंत्र के महानायक, महामानव, परमपूज्य बोधिसत्व, भारतरत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के चरणों में शत-शत नमन।
यह सर्वविदित है कि भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना में बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके द्वारा दिए गए आर्थिक विचारों और सिद्धांतों ने ही RBI की नींव को मजबूत आधार प्रदान किया।
सन् 1926 में जब हिल्टन यंग कमीशन भारत आया, तब बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ “The Problem of Rupee: Its Origin and Its Solution” के माध्यम से भारतीय मुद्रा व्यवस्था पर गहन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनके विचारों से प्रभावित होकर ब्रिटिश सरकार ने इन्हें आधार बनाते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 लागू किया, जिसके तहत RBI की स्थापना हुई।
आज जब हम RBI का स्थापना दिवस मना रहे हैं, तो यह याद रखना आवश्यक है कि इसकी बुनियाद में बाबा साहेब के विचार, दृष्टि और दूरदर्शिता शामिल है।
बाबा साहेब को याद किए बिना RBI का स्थापना दिवस अधूरा है।
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07/11/2024
~ सभी देशवासियों को विद्यार्थी दिवस की हार्दिक बधाईयां एवं मंगलकामनाएं |
आज के दिन बालक भीमराव सकपाल अम्बेडकर {आधुनिक भारत के निर्माता बाबासाहेब अम्बेडकर} ने हाईस्कूल, राजवाड़ा चौक,जिला-सतारा में प्रथम बार स्कूल में प्रवेश लिया था |
~ बहुजन इतिहास व समाज की ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण तिथि है और होनी भी चाहिए क्योंकि परमपूज्य बोधिसत्व,भारत रत्न,भारतीय संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब डा.भीमराव अम्बेडकर जी ने आज ही के दिन 7,नवंबर,1900 को पहली बार बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने सतारा के प्रतापसिंह हाईस्कूल,राजवाड़ा चौक,जिला-सतारा में प्रथम बार स्कूल में प्रवेश लिया था |
‘‘इसी दिन से उनके शैक्षणिक जीवन की शुरुआत हुई थी,उस समय उन्हें भीमा कहकर बुलाया जाता था | स्कूल में उस समय उनका नाम रजिस्टर में क्रमांक- 1914 पर अंकित था | जिसके सामने आज भी बालक भीमराव के हस्ताक्षर मौजूद हैं। इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ को स्कूल प्रशासन ने बड़े सम्मान और गर्व के साथ सहेज रखा है |
29/10/2024
~ क्या आपको पता है आधुनिक भारत के निर्माता,विश्वरत्न,बाबा साहेब अम्बेडकर जी एवं मां के.आर.नारायण जी की भेंट |
‘‘सन् 1948 में एम.ए करने और प्रवक्ता की नौकरी नहीं मिलने के बाद के. आर. नारायणन दिल्ली में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी से मिलने गए | बाबासाहेब वायसराय की काउंसिल में श्रम विभाग के सदस्य थे. के. आर. नारायणन जी की योग्यता को देखते हुए बाबासाहेब ने उन्हें दिल्ली में ही भारत ओवरसीज विभाग जिसे अब विदेश विभाग कहा जाता है में 250 रुपये प्रतिमाह पर सरकारी नौकरी दिलवा दी |
~मां के. आर. नारायणन जी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली चले गए और एक पत्रकार के रूप में नौकरी करने लगे| उन्होंने वर्ष 1944-45 में हिंदू और द टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे समाचार पत्रों में काम किया इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी का इंटरव्यू भी लिया था |
28/10/2024
~ क्या आपको पता है कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति मां के. आर. नारायणन ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने बहुजनों के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनने का रास्ता खोला | उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ए.एस. आनंद ने नियमानुसार उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों के लिए दस न्यायविद उच्च न्यायालयों के कानून विशेषज्ञों का एक पैनल बनाकर मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजा |
आम तौर पर राष्ट्रपति ऐसी सूची पर अपनी मौन स्वीकृति दे देता है, लेकिन नारायणन जी ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश को यह टिप्पणी लिखते हुए उस फाइल को लौटा दिया कि “क्या इन दस व्यक्तियों के पैनल में रखने के लिए उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों में अनुसूचित जाति और जनजाति का कोई योग्य न्यायाधीश नहीं है?”|
~ देश के राष्ट्रपति की इस टिप्पणी से सरकार से लेकर न्यायालय में हड़कंप मच गया. न्यायालय में दलितों और आदिवासियों के प्रतिनिधित्व पर बहस होने लगी. मामला गंभीर हो गया. राष्ट्रपति की इस टिप्पणी को नकारने या फिर हल्के में लेने की किसी को हिम्मत नहीं हुई |
आखिरकार इस टिप्पणी ने सर्वोच्च न्यायालय में देश के शोषित वंचित पिछड़े आदिवासी समाज के प्रवेश का रास्ता खोला | यह डॉ. के.आर. नारायणन के जीवन की महत्वपूर्ण घटना थी, जिसके लिए बहुजन समाज हमेशा उनका ऋणी रहेगा |
~ मां कोचेरिल रमण नारायण भारत के दसवे राष्ट्रपति थे।1992 में उनकी नियुक्ती देश के नौवे उपराष्ट्रपति के रूप में की गयी, फिर 1997 में नारायण देश के राष्ट्रपति बने थे | बहुजन समुदाय से राष्ट्रपति बनने वाले वे पहले और एकमात्र राजनेता थे। मां के. आर. नारायण एक स्वतंत्र और मुखर राष्ट्रपति के नाम से प्रसिद्ध थे, जिन्होंने अपने कार्यो की बहुत सी मिसाल स्थापित कर रखी थी |
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25/10/2024
~ क्या आपको साथियों भारत के इतिहास में अगर सबसे पहले श्रमिकों को हक देने का किसी ने कार्य किया है तो है हमारे मशीहा,
विश्वरत्न,महामानव बाबसाहब डॉ.भीमराव अम्बेडकर जी ने किया है।
इसके पहले श्रमिकों पर अंतहीन अत्याचार होता था | 12 घंटे,15 घंटे,18 घंटे तक उनसे काम लिया जाता था,मगर बाबासाहब ने संविधान में एक प्रावधान किया कि उनके लिए नियम बनाए और उनके हक के लिए बाबासाहब ने संविधान के ज़रिये जो कार्य किया जिससे पूरे देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व बाबासाहेब के सामने नतमस्तक है |
श्रमिक नेता के रूप में |
~ मुख्य रूप से हम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत के संविधान निर्माता के रूप में जानते हैं लेकिन उससे पहले वो वॉयसरॉय की परिषद के श्रम सदस्य के रूप में काम कर चुके थे जिसे हम श्रम मंत्री भी कह सकते हैं. डॉ. अम्बेडकर ने श्रम मंत्री के रूप में 1942-1946 तक अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया. इस सीमित कालखंड में बाबा साहेब ने दलित एवं श्रमिक वर्ग के बंधुओं के हित में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया. उन्होंने खुद भी मजदूर संगठनों के बीच काम किया और उनकी समस्याओं को करीब से समझा |
~ साथियों याद रखना श्रम को संविधान की समवर्ती सूची में रखने, मुख्य और श्रम आयुक्तों को नियुक्त करने, श्रम जांच समिति का गठन करने आदि का श्रेय भी बाबा साहेब अम्बेडकर जी को ही जाता है |
24/10/2024
नमो बुद्धाय सादर जय भीम आपको