16/08/2026
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प्रेम के अनुबंध पर मैं गीत लिखना चाहता हूँ।
हृदय के स्पन्दनों पर प्रीत लिखना चाहता हूँ॥
रह गईं हैं हृदय में जो भी
प्रतीक्षित कामनाएं,
तक रही हैं राह अब भी
जो विवश सी याचनाएं,
उन्हीं स्मरणों का मधुरातीत लिखना चाहता हूँ।
प्रेम के अनुबंध पर मैं गीत लिखना चाहता हूँ॥
द्वार से लौट जो आईं
थीं विरह की वेदनाएँ ....