Omendra 'Bharat': भावाभिव्यक्ति - ओमेन्द्र 'भारत'

Omendra 'Bharat': भावाभिव्यक्ति - ओमेन्द्र 'भारत'

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बस...

यूं ही..

जो दिल में आ गया... वो लिख दिया

Photos from Omendra 'Bharat': भावाभिव्यक्ति - ओमेन्द्र 'भारत''s post 16/03/2024

#आदर्श... किसे होना चाहिए समाज का... और कौन बनता जा रहा..?!

कुछ विचित्र सा घटित हो रहा है समाज में...

हम लोग छोटे थे तो टीन ऐजर्स के सपने होते थे कि यार IIT निकल जाये... मेडिकल निकल जाये... किसी अच्छे कॉलेज में पढ़ने को मिले... फिर एक बढ़िया जॉब हो... कोई रॉकेट साइंटिस्ट का सपना देखता था... कोई प्रोफ़ेसर बनने का... कोई अच्छे व्यापार का सपना रखता था... और उसी हिसाब से आगे बढ़ता था...

आज एक नया टर्म coin हो गया है... "सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सर"

और कौन कितना बड़ा इन्फ़्लुएन्सर है इसका आधार सिर्फ ये है कि किसके कितने अधिक follower हैं... 1M, 10M या और अधिक... फिर ये follower चाहे कैसे भी video बनाकर बढ़ें... उसके लिए कुछ भी अंटशंट बकवास करके मिलते हों... करते रहो... फिर उससे मिले धन से महंगी महंगी गाड़ी खरीदो... उल्टे-पुल्टे शौक पालो... फिर उसके video बनाकर डालो...

अब समस्या ये है कि इसका दुष्प्रभाव समाज पर पड़ रहा है... बच्चे के कोमल मन पर ये गलत छाप छोड़ रहे हैं... बच्चे इन्हें ही अपना आदर्श समझने लगे हैं... इन्हीं की बातें करने लगे हैं... इन्हीं की तरह पैसा कमाना चाहते हैं..!!

भई हमारे आदर्श होते थे... नेताजी सुभाषचंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद, सरदार पटेल, वीर सावरकार, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविन्द सिंह साहेब... और उन सबकी जीवनियाँ... उनके संघर्ष को पढ़ पढ़ कर हम लोग बड़े हुए

आज की स्थिति ये है कि अधिकांश बच्चों को इन लोगों के नाम भी नहीं पता होंगे... नाम पता होगा तो उनकी जीवन यात्रा से अपरिचित होंगे... और इसीलिए इनके आदर्श वो नहीं बन रहे

अब है क्या कि समाज की नई पीढ़ी के आदर्श जैसे होंगे... समाज रुपी नदी के बहने की दिशा भी वही बन जाएगी... यदि अच्छे आदर्श होंगे तो समाज उत्थान की तरफ जाएगा... और यदि निरर्थक आदर्श होंगे... तो समाज ही निरर्थक हो जायेगा

अब ये जो नंगपने वाले, गाली-गलौच वाले video बना बना कर फेमस हो रहे... उसी से पैसा कमा रहे.. ये निरर्थक ही है... ये तो ये सन्देश स्थापित करना चाह रहे कि... पढ़ने लिखने की... IIT आदि कि... क्या जरुरत है... वो सब करके भी तो पैसा ही कमाना होता है... उससे अच्छा ये सब करो... बिना मेहनत नंगपने से पैसा कमाओ..!!

अब किसे क्या ही समझाया जाये... कि पढाई सिर्फ पैसे के लिए नहीं की जाती है... बल्कि सामाजिक, मानसिक व आध्यात्मिक विकास के लिए की जाती है... मनुष्य जाति लगातार विकास कर रही है और उसके पीछे कारण है कि बहुत से अध्ययनशील लोग लगातार शोधकार्यों में लगे रहते हैं... न कि इसलिए कि कुछ लोग नंगपना फैलाते रहते हैं..

पूरे समाज को चिन्तन करना होगा और कोर्स-करेक्शन करना होगा... अन्यथा अभी तो कुछ ख़ास नहीं बिगड़ा है... पर आने वाला समय और अधिक नैतिक व चारित्रिक पतन का दिखाई पड़ रहा है हमें...

सबसे पहले तो सरकार को ये प्लेटफोर्म पर या तो कोई सेंसर बैठाना चाहिए... या इसे बंद कर दीजिये... बहुत अधिक गंध फैला रहे हैं ये... इसके बाद समाज में सार्थक आदर्शों के स्थापना पर चिन्तन व क्रियान्वयन किया जाये...

..जय माँ भारती...

-ओमेन्द्र 'भारत'

06/03/2024

...योद्धा...

नहीं उलझे... जो काँटों से.. वो नई राहें.. नहीं गढ़ते
जो मखमल की.. डगर चुनते.. वो पन्नों में.. कहाँ चढ़ते
यदी दशरथ.. के सुत भी कुछ.. महल तजने.. से यूं डरते
तो सिरों पर रख.. उन्हें फिर सब.. प्रभु श्रीराम.. कहाँ कहते..??

ये जीवन है... अजब सा ही
बड़ी बारीक.. कुछ बातें
जो जीते जी.. सुकूं ढूंढें
नए प्रयोग... से भागे
जो मुश्किल देख.. सहम जावे
चुनौती को.. जो ना कह दे
कि गिरने के.. हि डर से जो
पहाड़ों पर.. नहीं चढ़ते
रहें फिर वो.. भले राजा.. स्मृति वो... नहीं चढ़ते
तो नहीं उलझे... जो काँटों से.. वो नई राहें.. नहीं गढ़ते

महापुरुषों.. से सीखो कुछ
ये जीवन को... बनावो कुछ
झुके होंगे.. बहुत से पर
वो राणा थे... नहीं झुकते
वो जंगल हो.. या रोटी-घास
जो लड़ते हैं.. वही दिखते
बरस बीतें... हजारों पर
वो मरकर भी.. नहीं मरते
जो गिरने से.. सदा डरते.. वो गिरकर फिर.. नहीं उठते
भरो हुंकार... दिखे जब रण... कि योद्धा यूं... नहीं थमते

कि नहीं उलझे... जो काँटों से.. वो नई राहें.. नहीं गढ़ते
जो मखमल की.. डगर चुनते.. वो पन्नों में.. कहाँ चढ़ते
यदी दशरथ.. के सुत भी कुछ.. महल तजने.. से यूं डरते
तो सिरों पर रख.. उन्हें फिर सब.. प्रभु श्रीराम.. कहाँ कहते..??
सिरों पर रख.. उन्हें फिर सब.. प्रभु श्रीराम.. कहाँ कहते..??

..हर हर महादेव...

-ओमेन्द्र 'भारत'

06/03/2024

बच्चों को सफलता के जो गूढ़ मंत्र मैं देता हूँ... उनमें से एक खास मंत्र है: "Retaining is more important than attaining"

अर्थात... और नए नए चैप्टर पढ़ते जाने से भी अधिक महत्वपूर्ण है... "जितना आपने पढ़ा है, उसे आप भूले न हों"

अब समस्या ये होती है कि भूलना तो मनुष्य की प्रकृति है... ये तो संभव ही नहीं है कि आप जो कुछ पढ़ें वो कभी भूले ही नहीं... पर परीक्षा में अच्छे परिणाम के लिए आवश्यकता ये होती है कि अधिकांश चीजें आप याद रख सकें... अब वो कैसे किया जा सकता है ये मैं बच्चों को सिखाता रहता हूँ... SRM यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में दिए व्याख्यान में ही मैंने यही सब समझाया था...

इस विषय को मैंने एक video के रूप में पोस्ट भी किया था: “How to forget… FORGETTING”
https://www.youtube.com/watch?v=Y4vDEfAZBLQ

अच्छा विषय है... देखिए

..जय माँ शारदे...

-ओमेन्द्र 'भारत'

26/01/2024

हम राम में...
और राम हम में...
जित भी देखूं...
बस राम रमते..
तुम भी मैं हूँ..
मैं भी तुम..
बस निहारूं..
और निहारूं...
राम ही बस
राम दिखते
और न बाकी कुछ बचा
बस राम राम
राम राम
राम राम
राम राम

.. ्रीराम ...

-ओमेन्द्र 'भारत'

Photos from Omendra 'Bharat': भावाभिव्यक्ति - ओमेन्द्र 'भारत''s post 12/01/2024

स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर आप सभी को शुभकामनाएं... साथ ही प्रस्तुत है ध्येय साधना पत्रिका के इस मासिक अंक में छपा मेरा एक लेख.. पढ़िए... गंभीरता से अंत तक पढ़िए... और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये

..जय श्री राम...

-ओमेन्द्र 'भारत'

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