UGS Rules: No Right for general caste.
Is it fair for the general category.?
NamoAgain2019
एक भारत श्रेष्ठ भारत
बहुत जिम्मेदारी और तथ्यों के आधार पर एक बात कह रहा हूँ,
1.जब तक आपके पास कोई सत्यापित सूचना न आए आप उसे सोशल मीडिया पर डालने से बचें।
2. सरकार आपसे हर बात साझा नहीं करेगी।
3. सोशल मीडिया पर रोना, हतोत्साहन, भारत सरकार को नीचा दिखाने वाली पोस्ट से अभी बचें।
4. चौथी बात जो अति महत्वपूर्ण है वह यह कि पाकिस्तान से आए सभी हिंदू भाइयों के संपर्क में हम लोग हैं, वे भारत में सुरक्षित हैं। उन्हें लेकर किसी किस्म की अफवाह और पैनिक न क्रिएट करें।
5. सामान्य व्यवहार एक दूसरे के साथ बनाए रखें।
6. सूचनाओं के लिए पोस्ट या वॉल पर जाने की बजाय इनबॉक्स का प्रयोग करें।
धन्यवाद🙏
हाँ.... तो अब वो सब आ जाएँ जिन्हें दिल्ली के रिजल्ट पर शक था... कइयों ने तो चुनौती भी दी थी... आओ चलो निकलो बाहर 😜😜😜
05/06/2024
यदि कुल 543 में 99 अंक लाने वाले को आप चैम्पियन समझ रहे हैं, तो यकीनन आप राहुल जी का समर्थक होना ही डिजर्व करते हैं।
चार से अधिक सीटों वाले 22 राज्यों में से सोलह में उनकी एकतरफा जीत हुई है, फिर भी यदि वे आपको हारते हुए दिख रहे हैं, तो फिर आप अपने आप के बारे में सोचिये। कितने अवसाद में जी रहे थे दोस्त?
अरे हम तो इस बात से दुखी थे कि हमारा विराट कोहली डबल सेंचुरी क्यों नहीं मार पाया! पर आपका वाला तो जन्मजात आकाश चोपड़ा है। उसकी एक बाउंड्री पर इतना जश्न? क्या यार?
आप कल से उछल रहे हैं कि बिहार में सेंध लगा लेंगे। पिछले 25 साल में आपसे कभी उसके घर में सेंध लगी है? ठिक से याद करिए, पिछले दस साल से आप रोते रहे हैं कि वह लूट लेता है, तोड़ लेता है, खरीद लेता है... और आज आपको लगता है कि उसके घर में सेंध लगेगी? भाई! आपके वाले अभी बियाह काटना सीख रहे हैं, वह चुटकी बजा कर गवना काटता रहा है। इस पोस्ट के लिखे जाने तक वह आपके एक मोहरे को काट चुका है। आगे देखते जाइये... रोइयेगा मत! क्योंकि शुरुआत आपने ही की थी।
हार हुई है केवल यूपी में। पर वहाँ भी बीमारी इतनी बड़ी नहीं है कि इलाज न हो सके। बस एक छोटा सा ओपरेशन करना पड़ेगा, और सब ठीक हो जाएगा। और वे बहुत आसानी से कर भी लेंगे। जानते हैं कैसे? सटासट, सटासट! खटाखट, खटाखट! दोनों भाई मेडिकल कॉलेज के टॉपर हैं जी, एक फिजिशियन है दूसरा सर्जन! देखते जाइये कैसे सर्जरी करते हैं दोनों मिल कर...
उसकी सरकार बन रही है। वह तीसरी बार आ रहा है। वह फिर पाँच साल दिखेगा। बोलेगा, गरजेगा, माथे पर त्रिपुंड लगा कर घूमेगा। हर हर महादेव, जय श्रीराम, भारत माता की जय...कैसे बरदाश्त करोगे दोस्त? लगातार तीसरी बार सत्ता पाने का रिकार्ड... पन्द्रह साल... दो राज्यों में सरकार भी बढ़ गयी। आई हो दादा...
एक बात बताऊं? उन्हें जितना मैं समझ पाया हूँ, उस हिसाब से लगता है कि वे आज से ही अपनी गलतियों को सुधारना शुरू करेंगे। और यह आपके लिए बड़ा दुखदाई होगा। बहुत ज्यादा...
उनसे हिसाब किताब करना हमारा आपसी मामला है। समर्थन दिए हैं तो सवाल पुछबे न करेंगे जी! कुछ गड़बड़ करता दिखेगा सब, तो डंटबो करेंगे, बोलबो करेंगे। है कि नहीं? लेकिन आप अपना न सोचिये जी! का होगा?
अच्छा कोई बात नहीं। जिस तरह से आप छलांग लगाए हैं, उस हिसाब से आपको 2034 तक इंतजार करना पड़ेगा। कीजिये, कीजिये। बिल्ली के भाग से कभी तो छींका टूटेगा।
07/05/2024
टाइम नाउ पर पीएम मोदी को देखा व सुना! वैश्विक स्तर से भारत के लोकतांत्रिक व्यवस्था अर्थात् चुनाव को प्रभावित करने वाले जो तत्व है न, उनके लिए समय सीमा निर्धारित कर दिया है।
4 जून
सब बुझ जाएँगे। सामर्थ्य ही नहीं बचेगा। बुझने से पहले की फड़फड़ाहट है।
पीएम ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वैश्विक स्तर से चुनाव की प्रभावित नहीं करना चाहिए। 4 जून के बाद भारत के लोकतंत्र की शक्ति को नये नजरिये से देखेंगे।
तानाशाही पर पीएम ने धज्जियाँ उड़ाते जवाब दिया है कि 1952 से 2024 तक बिंदु वार देखें, तानाशाह कौन रहा और क्या क्या किया। हमें गालियाँ देते रहते है हम जवाब नहीं देते है इससे बड़ा लोकतांत्रिक सबूत क्या होगा।
वरना गीत पसंद न आने पर जेल में डाल दिया जाता था, गाने के लिए मना कर दें तो बैन कर देते थे।
पीएम मोदी की दृष्टि देखिए और फीड बैक टीम कितनी शक्तिशाली है कि देश भर में क्या चल रहा है सबकुछ अपडेट है।
अभी तीसरा फेज है कई इंटरव्यू पाइप लाइन में होंगे और स्टेप बाय स्टेप लाइन में लगेंगे। क्योंकि मोदी अपना चुनाव ओवर कॉन्फ़िडेंस व हल्के में नहीं लड़ते है।
पीएम मोदी अपने कार्य और साख पर चुनाव में उतरते है, और यही उनकी राजनीतिक विरासत है पूँजी है। राजनीतिज्ञ व प्रशासनिक दोनों पहलुओं पर पीएम मोदी सुपर ऐक्टिव रहते हैं तभी दूसरे उन्हें सोच नहीं पाते है।
इसके उदाहरण में पीएम ने कहा, जी-20 समिट की वीडियो कॉन्फ़्रेसिंग थी तब डीप फेक का मुद्दा उठा था। सभी देश परेशान थे तब पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि इसके वीडियो के बीच में वाटर मार्क आना चाहिए, ये एआई द्वारा कृत वीडियो है।
हो सकता है पीएम मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में डीप फेक एआई एप्लीकेशन को नोटिफिकेशन दें, और अप्लाई करना अनिवार्य करें।
73 की उम्र में नई तकनीक को समझ और समाधान तलाश लेना, दूसरे जुवा नेता तो इतनी सोच भी नहीं लेते होंगे।
पीएम मोदी में कुछ तो है।
तभी तो देश और विदेश में बैठें लोग पीछे पड़े है। देश में तो ऐसे चिढ़े है भैंस खोल कर ले गये हो। पहले कोसते थे कि इसके लिए कुर्सी पर बैठाया है, राम मंदिर कहाँ है, धारा-370 हटी। जब दो बड़े मुद्दे हटा दिये तो उन्हें क्रेडिट देने की बजाय अन्य चीज़ों से तंज मारते है। कभी कभी लगता है इनका चेहरा छिला जायें तो चेहरे में अवश्य कोई और निकलेगा।
कुछ जातिगत होकर कुढ़ने लगे है।
हद है।
जिन्हें कुछ शंका है न इस इंटरव्यू को सुने। सब भ्रम टूट जाएँगे।
#प्रोफेसरलेक्चर
24/03/2024
सब लोग जरूर देखें।।
लालू पड़ी लकड़ी ले बैठें है
कल पटना रैली में पीएम मोदी पर निजी हमला बोला था आज पीएम मोदी ने अपनी रैली में देश को अपना परिवार बतलाकर लालू को जवाब दिया है।
भाजप के बड़े बड़े नेताओं ने अपना एक्स बायो बदल डाला है।
मोदी का परिवार लिखा है।
2019 चुनाव में राहुल ने चौकीदार चोर है कहा था।
अब ये लोग बाद में रोएँगे कि ईवीएम हैक कर दी।
मोदी को निशाना बनाओ, लेकिन नीतियों को लेकर, निजी हमले से ज्यादा ताकतवर बनकर निकलते है।
मोदी पर निजी हमले करके जीत जाएँगे।
ऐसा चद्दर तानों और सो जाओ।
जब मोदी बिहार में खड़े होकर लोगों से पूछेंगे आप लोग मेरे परिवार के नहीं हो, इमोशनल सेंटीमेंट कनेक्ट होगा और चुनाव का रूख पूरी तरह बदल जाएगा। पुराने सभी बयान भी ट्रेंड में आएँगे।
चाराचोर गलती कर बैठें है।😂
#मोदीकापरिवार
हर हर महादेव मित्रों।।
यदि आपके कोई जानकार तथाकथित किसान आंदोलन में सम्मिलित है,
चेता दीजिए; 10 मार्च तक इससे दूर हो जाएं!
वरना फिर शायद ही हट पाए!
हर हर महादेव 🚩
01/03/2024
2024 के चुनावों के परिणामों के बारे में कोई शर्त नहीं लगाऊंगा. कोई नहीं लगा रहा... परिणाम पता हैं.
पर हम जिस परिणाम की बात कर रहे हैं वह है लोकसभा में भाजपा के सीटों की संख्या. भाजपा इस पिच पर जम कर प्रैक्टिस कर रही है और एक अच्छा स्कोर देने की तैयारी में है.
लेकिन विपक्ष इस पिच पर है ही नहीं. वह किसी और पिच पर कोई और खेल खेलने की तैयारी कर रहा है. उसकी नजर किसी और ही परिणाम पर है.
विपक्ष के लिए ये चुनाव सबसे पहले अव्यवस्था फैलाने का एक अवसर हैं. चुनाव जीतने के लिए आपको मेजोरिटी चाहिए होता है, लेकिन अव्यवस्था फैलाने के लिए एक हिंसक माइनोरिटी काफी होती है... और विपक्ष के पास यह है.
विपक्ष का दूसरा सबसे बड़ा गोल है इस चुनाव के मुद्दे डिक्टेट करना. वे सरकार की उपलब्धियों पर सवाल खड़े करने और उसकी विफलताओं को रेखांकित करने की स्थिति में नहीं हैं... वह मुद्दा ही नहीं है. वे अधिक से अधिक विभाजनकारी मुद्दे उठाने का प्रयास कर रहे हैं... जाति, भाषा, क्षेत्रीयता का मुद्दा... अलगाववादी राजनीति का मुद्दा.
ये ऐसे मुद्दे हैं जिनपर जीतना जरूरी नहीं होता, सिर्फ उन्हें उठा देने भर से उनका काम चल जाएगा. अलगाववादी मुद्दों पर आपको मेजॉरिटी नहीं चाहिए होती है. अलगाववाद मेजॉरिटी का मुद्दा नहीं होता, वह हमेशा एक छोटी सी माइनॉरिटी का मुद्दा होता है. अगर आपने 10 या 20% लोगों को भी कन्विंस कर लिया तो आपका काम बन जाता है. आपने जितने भी लोगों को समाज की मुख्य धारा से अलग कर लिया, वही आपकी सफलता है.
तो इन चुनावों में भाजपा के प्रचारकों का काम और महत्व का हो जाता है. आपको सिर्फ अपने प्रतिद्वंद्वी को हराना भर नहीं हैं, आपको उनके मुद्दों को हराना है. आपको विमर्श का विषय डिक्टेट करना है.
जो भाजपा के वोटर हैं वे मेजॉरिटी हैं. वे चुनाव जिता देंगे. लेकिन वह इस चुनाव में हमारा मुख्य टारगेट ऑडिएंस नहीं हैं. जो निरपेक्ष हैं, जिन्हें किसी के जीतने हारने से फर्क नहीं पड़ता, जिन्हें लगता है कि किसी की सरकार आए, हमारा तो ऐसा ही चलता रहेगा, जो चुनावों को एक असुविधा गिनते हैं, या फिर छुट्टी का एक और दिन... जो इस विमर्श में कहीं नहीं हैं... उन्हें विमर्श में लाना है. यह चुनाव पहली बार प्रचार की नहीं, विचार की लड़ाई बनेगी.
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