Beti
Non profitable Beti bachao campaign बेटी सब के नसीब में कहां होती है
ख़ुदा को जो घर पसंद आए, वहां होती है।
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08/10/2025
सुधर जाओ
दे दनादन : बीवी ने ऐसी की सुताई की प्रेमिका को नानी याद आई - GLOBE महाराजपुर के नरवल मोड़ पर पति को प्रेमिका संग देखकर पत्नी का गुस्सा फूटा। बीच सड़क पर हुई मारपीट का वीडियो वायरल। .....
30/07/2025
शाबाश बेटी
एक भारतीय महिला सलवार-कमीज पहनकर WWE की रिंग में उतरती है और पूरी दुनिया उसकी ताकत और साहस को सलाम करती है? यह कहानी है हरियाणा के जिंद जिले की बेटी, कविता देवी की, जिन्होंने न केवल कुश्ती के अखाड़े में बल्कि दिलों में भी अपनी जगह बनाई।"
द ग्रेट खली की "कॉन्टिनेंटल रेसलिंग अकादमी" में प्रशिक्षण लेकर कविता ने अपनी प्रतिभा और जुनून से WWE जैसे बड़े मंच पर अपनी जगह बनाई। 2017 में "मे यंग क्लासिक टूर्नामेंट" में डेब्यू करते हुए उन्होंने न केवल रेसलिंग कौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि # भारतीय संस्कृति का परचम भी लहराया। सलवार-कमीज पहनकर रिंग में उतरना उनका एक ऐसा कदम था जिसने भारतीय परंपरा को वैश्विक स्तर पर गर्व का कारण बना दिया।
संघर्षों और असंख्य चुनौतियों के बावजूद, कविता ने कभी हार नहीं मानी। उनकी सफलता भारतीय महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है।
कविता न केवल एक रेसलर हैं, बल्कि लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा और भारतीय गौरव की जीती-जागती मिसाल हैं। उनका सफर हमें सिखाता है कि अपने सपनों को साकार करने के लिए हौसला और मेहनत ही सबसे बड़े हथियार हैं।
Games For Everyone Everton Football Club Rasli Bhabhi Everyone is Included-All People, All Places, All Ways Highlight Clips
29/07/2025
ठंडा गोश्त
ठंडा गोश्त सआदत हसन मंटो की १९५० में प्रकाशित पहली कहानी संग्रहों में से एक है, जिसे उन्होंने भारत–पाकिस्तान के १९४७ में हुए विभाजन की भयावहता और साम्प्रदायिकता पर तीखे व्यंग्य के रूप में लिखा था।
जब रात के समय, विभाजन के दंगों में लौटा इशर सिंह अपनी प्रेमिका और कथित रूप से एक मुस्लिम वैश्या सफ़िया के घर पहुंचता है। वो चाकू की धार से सफिया को जिबह (हत्या) करना चाहता है। तभी उसे अहसास होता है कि जिस देह को मार डालना चाहता था वह पहले ही गोली लगने से मरी हुई है। थाने का दरोगा कुलवंत जो कि ईशर का मित्र भी था, रहस्यमई मुस्कान के साथ पूछता है ''कैसा रहा ठंडा गोश्त।"
इशर सिंह की स्वीकारोक्ति और कुलवंत की हंसी कहानी में विभाजन की नृशंसता और मानवीय मूल्यों के तलहटी तक गिरने को उजागर करते हैं।
इस कहानी में मंटो विभाजन के दौरान व्यक्तिगत मनोविकार और सामुदायिक घृणा की विकृत परछाईं दिखाते हैं। जहाँ प्रेम और हत्या के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। अफ़सोस और दरिंदगी की इस मर्मस्पर्शी गूँज ने मंटो की लघु कथाओं को आधुनिक भारतीय साहित्य में विशेष स्थान दिलाया। यह कहानी मंटो के आसपास घटित हो रही घटनाओं में से ही कोई एक वाकया हो सकती है। और ऐसा ना भी हो तो उसे वक्त के समाज का आईना तो यह कहानी थी ही।
अगले अंक में 'खोल दो' पर चर्चा...
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ठंडा गोश्त
ठंडा गोश्त सआदत हसन मंटो की 1950 में प्रकाशित पहली कहानी संग्रहों में से एक है, जिसे उन्होंने भारत–पाकिस्तान के १९४७ में हुए विभाजन की भयावहता और साम्प्रदायिकता पर तीखे व्यंग्य के रूप में लिखा था।
जब रात के समय, विभाजन के दंगों में लौटा इशर सिंह अपनी प्रेमिका और कथित रूप से एक मुस्लिम वैश्या सफ़िया के घर पहुंचता है। वो चाकू की धार से सफिया को जिबह (हत्या) करना चाहता है। तभी उसे अहसास होता है कि जिस देह को मार डालना चाहता था वह पहले ही गोली लगने से मरी हुई है। थाने का दरोगा कुलवंत जो कि ईशर का मित्र भी था, रहस्यमई मुस्कान के साथ पूछता है ''कैसा रहा ठंडा गोश्त।"
इशर सिंह की स्वीकारोक्ति और कुलवंत की हंसी कहानी में विभाजन की नृशंसता और मानवीय मूल्यों के तलहटी तक गिरने को उजागर करते हैं।
इस कहानी में मंटो विभाजन के दौरान व्यक्तिगत मनोविकार और सामुदायिक घृणा की विकृत परछाईं दिखाते हैं। जहाँ प्रेम और हत्या के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। अफ़सोस और दरिंदगी की इस मर्मस्पर्शी गूँज ने मंटो की लघु कथाओं को आधुनिक भारतीय साहित्य में विशेष स्थान दिलाया। यह कहानी मंटो के आसपास घटित हो रही घटनाओं में से ही कोई एक वाकया हो सकती है। और ऐसा ना भी हो तो उसे वक्त के समाज का आईना तो यह कहानी थी ही।
अगले अंक में 'खोल दो' पर चर्चा...
11/07/2025
मिट्टी की दीवारें, माँ की ममता और उजाले की मिसाल 🌿 जहाँ तक रोड नहीं जाती, वहाँ तक इनका हौसला जाता है। नाम है — मालती मुर्मू आदिवासी इलाके की एक साधारण महिला, लेकिन काम ऐसा कि पूरी दुनिया सलाम करे। बच्चा गोद में है, और स्कूल की ज़िम्मेदारी भी कंधों पर। मिट्टी की दीवारों के बीच, 45 बच्चों को पढ़ा रही हैं बिना किसी सरकारी मदद के। ना कोई बड़ी सैलरी, ना कोई बड़ी पहचान — सिर्फ़ शिक्षा का उजाला और सेवा का जज़्बा। एक ऐसी कहानी जिसे न्यूज़ चैनल्स नहीं दिखाते, लेकिन दिल ज़रूर देखता है। अगर ये दीदी आपके दिल को छू गई हों, तो इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें। क्योंकि असली हीरो वही हैं, जो कैमरों से दूर काम कर रहे हैं। #मांलतीमुर्मू
मिट्टी की दीवारें, माँ की ममता और उजाले की मिसाल 🌿
जहाँ तक रोड नहीं जाती, वहाँ तक इनका हौसला जाता है।
नाम है - मालती मुर्मू
आदिवासी इलाके की एक साधारण महिला, लेकिन काम ऐसा कि पूरी दुनिया सलाम करे।
बच्चा गोद में है, और स्कूल की ज़िम्मेदारी भी कंधों पर।
मिट्टी की दीवारों के बीच, ४५ बच्चों को पढ़ा रही हैं बिना किसी सरकारी मदद के।
ना कोई बड़ी सैलरी, ना कोई बड़ी पहचान - सिर्फ़ शिक्षा का उजाला और सेवा का जज़्बा।
एक ऐसी कहानी जिसे न्यूज़ चैनल्स नहीं दिखाते, लेकिन दिल ज़रूर देखता है।
अगर ये दीदी आपके दिल को छू गई हों, तो इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें।
क्योंकि असली हीरो वही हैं, जो कैमरों से दूर काम कर रहे हैं। #मालतीमुर्मू
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