16/09/2026
आज हम बात कर रहे हैं चित्रकूट धाम के दैदीप्यमान नक्षत्र: पूज्य राजगुरु स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज
चित्रकूट की तपोभूमि आदिकाल से ही सिद्ध संतों और ऋषियों की साधना स्थली रही है। इसी पावन धरा पर अपने तप, विद्वता और अगाध भक्ति से सनातन धर्म का परचम लहराने वाले महान विभूति थे— परम्परा आचार्य आश्रम (नयागांव) के पूर्व पीठाधीश्वर, पूज्यपाद श्री श्री 1008 राजगुरु स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज।
श्री महाराज जी केवल एक संत नहीं, बल्कि साक्षात सरलता, त्याग और करुणा के प्रतिमूर्ति थे। आइए, आज हम सब मिलकर उनके पावन जीवन और अवदान को नमन करें:
✨ महान आचार्य परम्परा के संवाहक:
रामानन्द सम्प्रदाय की समृद्ध परम्परा को अक्षुण्ण रखते हुए, महाराज जी ने चित्रकूट के नयागांव स्थित 'आचार्य आश्रम' से देश-विदेश में वैदिक संस्कारों और वैष्णव भक्ति का उजियारा फैलाया।
📖 कथा व्यास और लोक कल्याण:
उनकी मुखारविंद से प्रवाहित होने वाली 'श्रीराम कथा' भक्तों के हृदय को रससिक्त कर देती थी। चित्रकूट से लेकर कटनी, विजयराघवगढ़ और रीवा तक, उन्होंने भटके हुए जनमानस को धर्म और सदाचार का सच्चा मार्ग दिखाया। भक्तगण उन्हें आदर से "बड़े गुरु जी" कहकर पुकारते थे।
🕊️ अमिट आध्यात्मिक विरासत:
नवंबर 2020 में महाराज जी का भौतिक शरीर भले ही बैकुंठ धाम को प्रस्थान कर गया, परंतु उनकी दी हुई शिक्षाएं, उनका दिव्य तेज और लोक कल्याण का संकल्प आज भी चित्रकूट की फिजाओं में जीवित है। वर्तमान में उनके सुयोग्य उत्तराधिकारी राजगुरु स्वामी बदरी प्रपन्नाचार्य जी महाराज इसी पावन परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं।
धरामंडल पर ऐसे राष्ट्रसंत और तत्वदर्शी महापुरुष का प्राकट्य संपूर्ण मानव जाति के लिए सौभाग्य की बात है। कोटि-कोटि जनों के मार्गदर्शक पूज्य स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज के चरणों में बारम्बार दंडवत प्रणाम! 🙇♂️💐