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राम राम जय सीताराम। श्री हनुमान जी मेरी श्रद्धा और सुमिरन आपकी तरह श्री राम में बनी रहे ऐसा वरदान देना। हर कठिनाइयो में,...
22/09/2026

राम राम जय सीताराम। श्री हनुमान जी मेरी श्रद्धा और सुमिरन आपकी तरह श्री राम में बनी रहे ऐसा वरदान देना। हर कठिनाइयो में, परेशानियों में, जीवन की भागदौड़ में प्रभु का चिंतन बना रहे। हे राम के दुलारे तुम ऐसी कृपा करना कि राम राम हमेशा मुख से निकलता रहे, प्रभु भक्ति में लगायें रखना। संकटमोचन प्रभु आप की कृपा से ही हम भवसागर से पार हो सकते हैं।

चित्रकूट के सीधे सच्चे संत भगवान की चर्चा करनी हो तो श्री श्री 108 परमात्मा शरण जी महाराज से श्रेष्ठ कौन हो सकता है? उनक...
20/09/2026

चित्रकूट के सीधे सच्चे संत भगवान की चर्चा करनी हो तो श्री श्री 108 परमात्मा शरण जी महाराज से श्रेष्ठ कौन हो सकता है? उनकी कुटिया हमारे आश्रम के बगल में ही थी। चित्रकूट आने वाले सभी श्रद्धालु जो उन्हें जानते हो या ना जानते हों सबका ठिकाना थी। कई श्रद्धालु ऐसे भी आये जो उन्हें पहली बार ट्रेन में, परिक्रमा मार्ग में मिले और रूकने की व्यवस्था देख रहे थे, छोटी कुटिया जिसमें दो कमरे ही थे उस वक्त परन्तु सैकड़ों का ठिकाना थी। आज बड़े बड़े धर्मशालाओं में, आश्रमों में किसी राहगीर श्रद्धालु के लिए कोई जगह नहीं है यदि उसके पास पैसे नहीं हैं। पुराने आश्रमों में श्रद्धालुओ और शिष्यों के लिए एक बड़ा आंगन होता था जहां सभी लेट सकते थे रसोइयों में बनने वाली प्रसादी पा सकते थे बगैर किसी शुल्क के। महाराज श्री का हृदय उदारता और करूणा से भरा हुआ था भगवद चर्चा और प्रभु भक्ति से उनका मन भरा हुआ था, प्रभु भजन में ध्यान लगाने वाले महाराज श्री हर संत के आदेश को सिर झुकाकर स्वीकार करते थे,उनकी लघुता ही उनकी महानता का कारण थी । सीधे सच्चे और सरल स्वभाव वाले भजनानंदी संत प्रभु को भी प्रिय होते हैं। आज वो हम सबके बीच नहीं हैं परन्तु उनकी भक्ति उनकी सरलता हमें आज भी सम्मोहित करती है।

भाई भाई के बीच प्रेम और सम्मान कैसा होना चाहिए इसकी मिसाल है राम भरत मिलाप मंदिर। ये वो स्थान है जहां प्रभु श्री राम भरत...
19/09/2026

भाई भाई के बीच प्रेम और सम्मान कैसा होना चाहिए इसकी मिसाल है राम भरत मिलाप मंदिर। ये वो स्थान है जहां प्रभु श्री राम भरत से मिले थे, जब दोनों भाई आपस में मिले तो दोनों के नैन सजल हो उठे। करूणापति की करूणा देखकर यहां पत्थर भी पिघल गये और उनके चरणों की छाप इस धरा पर सदैव के लिए अंकित हो गई। भाई भाई के बीच कैसा सम्बन्ध होना चाहिए इसकी पाठशाला हैं भरत मिलाप। जहां अयोध्या जैसा विशाल साम्राज्य भी फुटबॉल की तरह एक भाई से दूसरे भाई के बीच में झूलता रहा, छोटे भाई ने हाथ में आया हुआ पूरा राज्य ठुकरा दिया और बड़े भाई ने पिता का वचन निभाने हेतु उसे ग्रहण भी नहीं किया। सभी लोग इस पात्र से अपने जीवन में सीखें। बोलिए चारों भाइयों की....

मुख्यमंत्री मोहन यादव जी, सब कुछ याद रखा जाएगा? कैसे आपने दीनदयाल शोध संस्थान और आरोग्य धाम को ही सम्पूर्ण चित्रकूट मान ...
18/09/2026

मुख्यमंत्री मोहन यादव जी, सब कुछ याद रखा जाएगा? कैसे आपने दीनदयाल शोध संस्थान और आरोग्य धाम को ही सम्पूर्ण चित्रकूट मान लिया है ? कैसे विकास के नाम पर आपके ठेकेदारों ने हीला हवाली की है। डिवाइडर का काम दो सालों में भी पूरा नहीं हुआ। किस तरीके से आपने सम्पूर्ण चित्रकूट के अस्त व्यस्त और बाढ़ से प्रभावित जहां लोग एक एक रोटी के लिए परेशान थे उस समय आपने सैंडविच कैसे उड़ाई थी। कैसे सड़को की धूल हम चित्रकूट वासियों के आंखें में चुभती रही। कितने भ्रष्टाचार में यहां विकास कार्य हुए? Dr Mohan Yadav किस तरीके से चित्रकूट में सीवेज लाइन डाली गई वो भी मंदाकिनी से सटाकर जिसमें लगातार सीवेज उफन कर गिरता रहता है। किस तरीके से आपके अधिकारी आपकी आंखों में धूल झोंकते रहे और आप चैन की बंशी बजाते रहे ? सैकड़ों लोग चित्रकूट में सर्प दंश से और कभी सड़क दुघर्टना में मरते रहे और आपके अधिकारी आल इज वेल गाते रहे ।कैसे जगह जगह गड्ढे चित्रकूट की सड़कों में खुदे हुए हैं? कैसे यहां पर एक भी अच्छा अस्पताल नहीं है । एक सीएचसी जिसमें एक या दो डाक्टर रहते हैं, के भरोसे चित्रकूट की लाखों आबादी को छोड़ दिया गया है,हमारे जंगल और वर्षों पुराने पेड़ कैसे काटे गए ? आपके कथित विकास और पर्यटन के नाम पर हमारे सदियों पुराने मंदिर पर बुल्डोजर कैसे चला? ये सब हमें याद है । हम चित्रकूट वाले भूलेंगे नहीं ।
Shivraj Singh Chouhan PMO India Collector Satna

आज हम बात कर रहे हैं चित्रकूट धाम के दैदीप्यमान नक्षत्र: पूज्य राजगुरु स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज चित्रकूट क...
16/09/2026

आज हम बात कर रहे हैं चित्रकूट धाम के दैदीप्यमान नक्षत्र: पूज्य राजगुरु स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज
चित्रकूट की तपोभूमि आदिकाल से ही सिद्ध संतों और ऋषियों की साधना स्थली रही है। इसी पावन धरा पर अपने तप, विद्वता और अगाध भक्ति से सनातन धर्म का परचम लहराने वाले महान विभूति थे— परम्परा आचार्य आश्रम (नयागांव) के पूर्व पीठाधीश्वर, पूज्यपाद श्री श्री 1008 राजगुरु स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज।
श्री महाराज जी केवल एक संत नहीं, बल्कि साक्षात सरलता, त्याग और करुणा के प्रतिमूर्ति थे। आइए, आज हम सब मिलकर उनके पावन जीवन और अवदान को नमन करें:
✨ महान आचार्य परम्परा के संवाहक:
रामानन्द सम्प्रदाय की समृद्ध परम्परा को अक्षुण्ण रखते हुए, महाराज जी ने चित्रकूट के नयागांव स्थित 'आचार्य आश्रम' से देश-विदेश में वैदिक संस्कारों और वैष्णव भक्ति का उजियारा फैलाया।
📖 कथा व्यास और लोक कल्याण:
उनकी मुखारविंद से प्रवाहित होने वाली 'श्रीराम कथा' भक्तों के हृदय को रससिक्त कर देती थी। चित्रकूट से लेकर कटनी, विजयराघवगढ़ और रीवा तक, उन्होंने भटके हुए जनमानस को धर्म और सदाचार का सच्चा मार्ग दिखाया। भक्तगण उन्हें आदर से "बड़े गुरु जी" कहकर पुकारते थे।
🕊️ अमिट आध्यात्मिक विरासत:
नवंबर 2020 में महाराज जी का भौतिक शरीर भले ही बैकुंठ धाम को प्रस्थान कर गया, परंतु उनकी दी हुई शिक्षाएं, उनका दिव्य तेज और लोक कल्याण का संकल्प आज भी चित्रकूट की फिजाओं में जीवित है। वर्तमान में उनके सुयोग्य उत्तराधिकारी राजगुरु स्वामी बदरी प्रपन्नाचार्य जी महाराज इसी पावन परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं।
धरामंडल पर ऐसे राष्ट्रसंत और तत्वदर्शी महापुरुष का प्राकट्य संपूर्ण मानव जाति के लिए सौभाग्य की बात है। कोटि-कोटि जनों के मार्गदर्शक पूज्य स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज के चरणों में बारम्बार दंडवत प्रणाम! 🙇‍♂️💐

श्री श्री कामतानाथ जी महाराज तृतीय मुखारबिंद । जय हो कामतानाथ जी महाराज । प्रभु विकट परिस्थितियों में तुमने हर भक्त को स...
14/09/2026

श्री श्री कामतानाथ जी महाराज तृतीय मुखारबिंद ।
जय हो कामतानाथ जी महाराज । प्रभु विकट परिस्थितियों में तुमने हर भक्त को सहारा दिया है। सुख और दुख में सदैव तुम्हारा सुमिरन बना रहे। यही आशीर्वाद दीजिए।

सीता मेरी स्वामिनी, मैं सीता को दास ।जनम जनम मोहि दीजियो श्री चित्रकूट को वास ।।
14/09/2026

सीता मेरी स्वामिनी, मैं सीता को दास ।
जनम जनम मोहि दीजियो श्री चित्रकूट को वास ।।

परम पूज्य श्री करपात्री जी महाराज के बारे में लगातार अध्ययन चालू है। 1907 में जन्मे इस महापुरुष ने इस देश के लिए जो त्या...
12/09/2026

परम पूज्य श्री करपात्री जी महाराज के बारे में लगातार अध्ययन चालू है। 1907 में जन्मे इस महापुरुष ने इस देश के लिए जो त्याग किया उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। स्वामी जी का सम्पूर्ण जीवन त्याग और संघर्षो से भरा पड़ा है। कांग्रेस देश की बङी पार्टी थी मुस्लिम लीग का अस्तित्व उसके सामने कुछ नहीं था, यदि बुलंद तरीके से कांग्रेस मुस्लिम लीग की भारत विभाजन की मांग का विरोध करती तो उसे कुछ नहीं मिलता परन्तु कांग्रेस के बुढ़े हो चुके नेता इतना साहस न कर सके। हो सकता था आजादी दो चार साल देर से मिलती लेकिन भारत अखंड होता करोड़ों लोगों को विस्थापन का दंश न झेलना पड़ता। कटु सत्य यही है कि तत्कालीन नेताओं ने अखंड भारत की कोशिश भी नहीं की । परन्तु एक युवा संन्यासी के तौर पर धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज ने अपने संगठन अखिल भारतीय धर्म संघ के जरिए अखंड भारत के लिए लगातार लड़ाई की । जब देश आज़ाद हो गया तब स्वामी जी लाहौर जेल में अपनी अखंड भारत की मांग के कारण बंद थे। कितनी गजब बात है पाकिस्तान मांगने वाले किसी शख्स को जेल में नहीं डाला गया परन्तु देश की अखण्डता मांग रहे साधु जिसके एक हाथ में दण्ड और शरीर में सिर्फ भगवा कपड़े थे उन्हें जेल में डाल दिया गया। धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज आजाद भारत के पहले राजनैतिक कैदी थे। शायद उनकी मांग ट्रस्ट विद डेस्टिनी के शोर में अनसुनी कर दी गई। स्वामी जी का कहना था कि अंग्रेजों के जाने से स्वतंत्रता नहीं आयेगी स्वतंत्र विधान, स्वतंत्र संस्कृति स्वतंत्र भाषा और स्वतंत्र परम्परा से ही वास्तविक स्वतन्त्रता सुनिश्चित हो सकती है । उनकी योग्यता का स्तर यह था कि पंडित मदनमोहन मालवीय उनसे शास्त्रार्थ में पराजित हुए। रामचरित मानस की एक चौपाई की व्याख्या तेरह दिन तक प्रतिदिन तीन तीन घंटे की। उनसे शास्त्रार्थ में कोई जीत नहीं सका । हिंदू कोड बिल का विरोध करते हुए उन्होंने तत्कालीन सरकार से पूछा कि बाकी धर्मों के लिए आपके बिल कहां है आप सभी के साथ एक जैसा व्यवहार क्यों नहीं करते समान नागरिक संहिता क्यों नहीं बनाते। नेहरू को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि आपके इस बिल में कमियां ही कमियां हैं। आप चाहें तो सार्वजनिक बहस करके अपने बिल की श्रेष्ठता साबित करिए या फिर इसे वापस ले लीजिए। आजादी के बाद इस स्वतंत्रता सेनानी के साथ भी हमने कुछ भी अच्छा नहीं किया। इस देश में यदि आप हिन्दू आस्था की बात कर रहे हैं तो आप सबसे बड़े अपराधी है क्या भाजपा क्या कांग्रेस सब एक ही तरीके से काम करते हैं। स्वामी जी की मांग थी कि हिंदूओं की आस्था की केंद्रबिंदु गाय है इसलिए गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। इंदिरा गांधी जिन्होंने महाराज श्री को आश्वासन दिया था कि सत्ता पर आने के बाद वो ऐसा करेगी परन्तु सत्ता आ जाने के बाद जब इंदिरा गांधी ने गौहत्या पर प्रतिबंध नहीं लगाया तब स्वामी जी के नेतृत्व में संतों ने मिलकर गायों को लेकर संसद भवन का घेराव किया । सत्ता के मद में इंदिरा गांधी ने गोलीबारी का आदेश दिया सैकड़ों संतों और गायों की हत्या उस क्रूर सरकार ने की। उसी दिन स्वामी करपात्री जी और अनेक प्रमुख संतों को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया। स्वामी करपात्री जी महाराज को खतरनाक कैदियों के बीच में रखा गया। सरकार समर्थित उन कैदियों ने महाराज श्री के साथ मारपीट की जिससे उनको आंख और सिर में चौटे आयी । कभी फुर्सत मिले तो सोचिएगा कि क्या आप आज भी स्वतंत्र हैं । गौरे चले गए और काले आ गये है शासन का तरीका वहीं है। उन चोटों के कारण महाराज श्री का स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया । अंत में 7 फरवरी 1982 को माघ शुक्ल चतुर्दशी को वाराणसी के पवित्र केदार घाट उन्होंने स्वेच्छा से प्राण त्याग दिए। अंतिम समय में उन्होंने अपने शिष्यों से अयोध्या त्याग प्रसंग का पाठ सुना। हाथ में भगवान कृष्ण का विग्रह लेकर सीने से लगाया और तीन बार शिव शिव कहकर ब्रह्मलीन हो गए। भारतीय संस्कृति का ये अप्रतिम योद्धा सदैव के लिए यह धरा छोड़कर चला गया। जब इस पोस्ट को पढ़ें तो इसकी दी हुई जानकारी को बच्चों को जरूर सुनाये ताकि वो भी अपने इस पूर्वज के बारे में जान सके । क्योंकि किताबें तो नेहरू और इंदिरा की वानर सेना का ही गुणगान करती है। #स्वामीकरपात्रीजीमहाराज #धर्मसम्राट #अखंडभारतकेयोद्धा #अखंडभारत #स्वाधीनतासंग्राम #राजनैतिककैदी #1966गौरक्षाआंदोलन #इतिहासकेपन्ने (.

शक्ति पीठ बहुत सारे हैं, सभी की अपनी महानता है, लेकिन मैहर शक्ति पीठ के बारे में मेरा अनुभव है कि यहां मां जगदम्ब साक्षा...
11/09/2026

शक्ति पीठ बहुत सारे हैं, सभी की अपनी महानता है, लेकिन मैहर शक्ति पीठ के बारे में मेरा अनुभव है कि यहां मां जगदम्ब साक्षात विराजती हैं। जो भी यहां कहा जाये मांगा जाये वो फलीभूत जरूर होता है। मां शारदा कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करती । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां सती का हार यहां पर गिरा था इसी वजह से यह क्षेत्र मैहर (अर्थात माई का हार) के नाम से जाना जाता है। ऐतिहासिक दस्तावेज और शिलालेखों से पता चलता है कि इस स्थान पर मंदिर का निर्माण 502 ईसवी में राजा नूपुल देव ने करवाया था। 12 शताब्दी के चंदेल और कलचुरी राजाओं के शासनकाल के दौरान इस मंदिर का विस्तार हुआ। मैहर रियासत के राजा दुर्जन सिंह जुदेव ने १८२० में भक्तों की सुविधा के लिए पहाड़ पर चढ़ने वाली 1063 सीढ़ियों का निर्माण करवाया था। एक लोक मान्यता यह भी है कि त्रिकूट पर्वत पर स्थित इस मंदिर की खोज वीर आल्हा-ऊदल भाइयों ने की थी। मान्यता यह भी है कि वीर आल्हा ने घरघोर तपस्या कर मां जगदम्बा को प्रसन्न किया था और उन्होंने ही मां के प्राकट्य पर उन्हें शारदा माई कहकर संबोधित किया इसी वजह से यह शक्तिपीठ शारदा शक्तिपीठ के नाम से भी प्रसिद्ध है। मां की उपासना और भक्ति में अपना शीश अर्पित कर देने वीर आल्हा को मां ने अमरत्व का वर दिया था। मान्यता और जनश्रुतियां है कि वीर आल्हा आज भी जब दरवाजे बंद और पुजारी अनुपस्थित रहते हैं तब प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में मां की अर्चना और पुष्प चढ़ाने आते हैं। महान संगीतकार अलाउद्दीन खान मां शारदा को अपनी कुलदेवी मानते थे और मंदिर में संगीत साधना करते थे। यदि आप भी अपने जीवन में परेशानियों और कठिनाइयो का सामना कर रहे हैं तो इस मंदिर के दर्शन अवश्य करने चाहिए। शांति सम्पन्नता और खुशहाली बरसाने वाली शारदा माई किसी को निराश नहीं करती। जय मां शारदा।। @टॉप फ़ैन

चित्रकूट संतों की भूमि है। चित्रकूट समेत अनेक तीर्थ संतों से ही शोभा पाते हैं । संतों की इसी श्रृंखला में एक ऐसे संत हुए...
09/09/2026

चित्रकूट संतों की भूमि है। चित्रकूट समेत अनेक तीर्थ संतों से ही शोभा पाते हैं । संतों की इसी श्रृंखला में एक ऐसे संत हुए जिन्होंने नर सेवा नारायण सेवा को चरितार्थ कर दिखाया। औरों की बात क्या करें, मैं स्वयं मेरे माता-पिता सब उनके हितग्राही थे। उनके द्वारा स्थापित प्रेम पुजारी धर्मार्थ चिकित्सालय में मेरे सम्पूर्ण परिवार ने औषधीय लाभ लिया। आज हम बात कर रहे हैं परम भजनानंदी महान विद्वान, उच्चतम स्तर के साहित्यकार श्री श्री १००८ डॉ पुरूषोत्तम दास जी महाराज की जो श्री श्री १००८ प्रेम पुजारी दास जी महाराज के शिष्य थे । महाराज श्री संत होने के साथ साथ एक उच्चकोटि के चिकित्सक अर्थात डाक्टर भी थे। महाराज श्री दिन में अपने अस्पताल में बैठ कर लोगों का इलाज करते थे और सुबह-शाम नित्य प्रभु की आरती। महाराज श्री की विशेष रूचि साहित्य एवं चिकित्सा में थी। वे एक सुप्रसिध्द कवि एवं रोगी जनों में अपने इष्ट देव प्रभु श्री राम जी का दर्शन करने वाले अत्यंत सरल संत थे। वे प्राय: पुरुषेश उपनाम से काव्य रचना किया करते थे। श्रद्धेय डॉक्टर साहब श्री कामदगिरि प्रदक्षिणा प्रमुख द्वार (उत्तर) ट्रस्ट में सन् 1994 से सन् 2006 तक लगभग 12 साल तक महंत पद पर अभिषिक्त रहे। साथ ही साथ श्री कामदगिरि प्रदक्षिणा प्रमुख द्वार (उत्तर) ट्रस्ट एवं श्रीराम झरोखा ट्रस्ट के अध्यक्ष भी रहे। उनकी सरलता, सज्जनता ,साधुता एवं उदारता आज भी लोक प्रसिध्द है। वे भजनानंदी सन्त होते हुए भी सेवा को साधना का सर्वश्रेष्ठ अंग मानते थे। देहावसान 30 जुलाई सन् 2006 को हुआ था। उन्होंने आजीवन लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा की लेकिन कभी भी कोई फीस नहीं ली। दवा भी यथासंभव वो फ्री में ही देते रहे । आज वो हमारे बीच नहीं हैं परन्तु इस पेज और पोस्ट के माध्यम से हम अपने पुष्प उनके प्रति समर्पित करते हैं आप सभी से निवेदन है आप अपने बच्चों को महाराज श्री के बारे में जरूर बताएं और यह भी समझायें कि वास्तविक खुशी और आनंद भौतिक वस्तुएं इकट्ठा करने में नहीं बल्कि सेवा और दूसरों की सहायता करने में है।

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