11/09/2026
हाई कोर्ट के जजों की
भाषा ऐसी है जैसे
भगवान से भी ऊपर हों -
कुछ उच्च न्यायालयों की
टिप्पणियां -
कल इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिनेश चंद्र सामंत ने एक महिला समेत 4 लोगों को देवरिया पुलिस द्वारा अवैध हिरासत में रखने के आरोप में कहा कि “उत्तर प्रदेश पुलिस ‘झूठों झुंड’ है’
चारों को थानाध्यक्ष के वेतन से 65 हजार रुपए मुआवजा देने का भी आदेश दिया -
मैं मामले के गुण-दोष (merits of case) पर नहीं जाऊंगा लेकिन पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाफ अतिश्योक्तिपूर्ण बयान पर मुझे आपत्ति है - उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में करीब 3.73 लाख से 4.6 लाख लोग सक्रिय रूप से कार्यरत हैं जिनमें हवलदार से लेकर पुलिस कमिश्नर तक शामिल हैं और उत्तर प्रदेश पुलिस ने राज्य को दंगा मुक्त, माफिया मुक्त करने में सराहनीय योगदान दिया है जिस पर मुख्यमंत्री योगी जी गर्व करते हैं -
कहीं कोई गलती भी हो सकती है लेकिन एक मामले को लेकर हाई कोर्ट के जजों द्वारा इतनी बड़े पुलिस बल पर कलंक लगाना सर्वथा अनुचित है -इससे तो पुलिस बल को आप हतोत्साहित (demoralise) करने का काम कर रहे हैं - क्या कभी जजों से गलती नहीं होती - यह भी मत भूलिए कि जस्टिस यशवंत वर्मा प्रकरण से सभी जजों को भी भ्रष्टाचारी कहा जा सकता है -
दूसरे मामले में झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि “रात में किसी महिला के घर में घुसना, उसे पकड़ना और उसके कपड़े उतारना रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता (not an attempt to r**e) - 28 साल पुराने केस में अभियुक्त 8 महीने जेल में बिता चुका था और जज साहब ने Trespass का केस मान कर सजा को 8 महीने कर दिया - अब जज साहब ये बताएं कि क्या वो आरोपी महिला के घर रात में घुस कर उसके कपड़े उतार कर भजन करने गया था -
रेप के मामलों में जज “रेप विशेषज्ञ” बनते जा रहे हैं - कोई कह देता है, रेप का अभियुक्त तो 5 वक्त की नमाज पढता है और सजा कम कर देता है-
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी (अब रिटायर्ड) ने कह दिया कि “Every Sinner has a future” और 4 वर्ष की बच्ची के बलात्कारी /हत्यारे की फांसी की सजा रद्द कर आजीवन कारावास में बदल दी -
छत्तीसगढ़ के एक जज ने आदेश में कहा “योनि के ऊपर लिंग रख कर वीर्यपात करना बलात्कार नहीं है” - कोई कह देता है महिला के स्तन दबाना और उसका नाड़ा खोलना रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता - ऐसे बहुत केस हैं जिनमें जज रेप के मामलों में अपनी expetise झाड़ते हैं, बिना लाज शर्म के -
GST के एक केस की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल खेत्रपाल और जस्टिस शील जैन ने कहा कि “GST ने समस्याओं को सुलझाने की बजाय और अधिक समस्याएं पैदा कर दी और ऐसे ही लापरवाही चलती रही तो GST पंजीकरण पर रोक लगाने पर भी विचार किया जा सकता है”
हाई कोर्ट के जजों को आभास नहीं है कि GST से हर महीने 2 लाख करोड़ की वसूली होती है -इस पर आप रोक लगाना चाहते हैं - इतने बड़े नेटवर्क में कहीं कोई चूक भी हो सकती है और अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार भी हो सकता है लेकिन पूरे system खिलाफ ऐसे Sweeping Comments देना उचित नहीं है - आप अपने हाई कोर्ट में झांक कर देखिए कितने केस पेंडिंग पड़े है - क्या कभी ध्यान दिया है उन पर - क्या कहना उचित होगा कि हाई कोर्ट ने समस्याओं के निदान की जगह समस्याएं ज्यादा पैदा कर दी हैं -
#फॉलो