पश्चिम बंगाल मारवाड़ी महिला सम्मेलन

पश्चिम बंगाल मारवाड़ी महिला सम्मेलन

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A Non profitable organization by the women,of the women,for the women

17/09/2021

पश्चिम बंगाल बाल विकास
14 sep हिंदी दिवस ( हिंदी बचाओ देश बचाओ )

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में "हिंदी बचाओ देश बचाओ" पर zoom पर परिचर्चा सफलतापूर्वक संपन्न हुई l
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई l🙏बहुत ही सुंदर शब्दों से "मंजू श्री गुप्ता जी" ने "हिंदी" के महत्व पर प्रकाश डाला हिंदी हमारी जननी है ,अपनी जननी का सम्मान सभी को करना चाहिए l🙏
साथ ही पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष, सरोज जी लोधा ने ,हिंदी के शब्दों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया l
कोलकाता शाखा अध्यक्ष, पूनम जी अग्रवाल ने, हिंदी विषय पर अपने वक्तव्य रखें l
कुल्टी क्षेत्र की प्रख्यात हिंदी टीचर डॉक्टर ममता मिश्रा ने ,हिंदी को हिकारत के भाव से ना देखने के महत्व पर चर्चा की l
इस कार्यक्रम में प्रांतीय सचिव विनीता जी अग्रवाल भी मौजूद रही l
और अंत में, कार्यक्रम समापन धन्यवाद ज्ञापन से हुई l🙏


पश्चिम बंगाल मारवाड़ी महिला सम्मेलन (बाल विकास )l
कार्यक्रम संयोजिका -कुल्टी शाखा l

Photos from पश्चिम बंगाल मारवाड़ी महिला सम्मेलन's post 15/08/2021

स्वतंत्रता दिवस की सभी को बधाई🙏🇮🇳🌷

14/05/2021
23/04/2021

पृथ्वी दिवस
पर्यावरण प्रकल्प
Kids online quiz

23/04/2021

पृथ्वी दिवस

23/04/2021

राधे राधे 🙏
आप सब को पृथ्वी दिवस की बहुत-बहुत बधाई ।आज पृथ्वी दिवस है जिसके बारे में कृतज्ञता प्रकट करते हुए हम प्राय कहते हैं 🙏माता पृथ्वी पुत्रौत्हम् पृथ्व्या:🙏 यानी पृथ्वी माता है और मै पृथ्वी का पुत्र हूं वास्तव में पृथ्वी के लिए यह पूर्णतया सत्य भी है मानव ही क्यों हर चराचर पशु पक्षी कीट पतंग सब का जन्म पृथ्वी की कोख से ही हुआ है 1970 से 22 अप्रैल को प्रति वर्ष पूरा विश्व पृथ्वी दिवस मना रहा है ।
संयुक्त राष्ट्र के मानकों के अनुसार आज के दिन पृथ्वी पर मंडराते खतरों के प्रति मानव को सावधान करने के लिए ही पृथ्वी दिवस या पृथ्वी बचाओ दिवस मनाने का निर्णय हुआ पृथ्वी पर बढ़ते खतरों की बात करें तो उस पर प्राकृतिक खतरे तो बहुत कम है लेकिन मानव द्वारा पैदा किए गए खतरे असंख्य है जिसमें मुख्य रूप से असंतुलित रूप से बढ़ता हुआ उद्योगी करण है लगातार घटते वन एवं पशु पशु पक्षी जगह-जगह पर प्राकृतिक संपदा की जगह पर नए शहरों के रूप में उगते हुए बहू मंजिलें कर्किट के जंगल, पृथ्वी पर सीमेंट एवं डामर की परतें, बढ़ता हुआ सड़कों का जाल अनियंत्रित खदान एवं नदियों को जगह जगह रोके जाना बांधों का निर्माण वन्यजीवों का अपने उपयोग की वस्तुओं पाने के लिए बध करना और समुंदर में प्रतिदिन फेंके जाने वाला हजारों हजारों टन कभी भी समाप्त नहीं होने वाला नॉनबायोडिग्रेडेबल कूड़ा करकट फैक्ट्रियों से निकलते हुए रासायनिक अपशिष्ट आदि भी इसके खतरनाक कारण बन कर उभरे हैं अब मानव यह तो चाहता है कि पृथ्वी हरी भरी रहे उस पर जीवन महकता रहे लेकिन जिस गति से वृक्षों का कटान हो रहा है यह भी तय है कि इसका परिणाम बहुत ही भयंकर होने वाला है अगर सचमुच में पृथ्वी का बुखार कम करना है यानी उसका तापमान हटाना है तो फिर उस पर वृक्ष लगाने होंगे पर्यावरण को संतुलित करना होगा जहरीली गैसों को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकने के प्रयोग प्रभाव कारी उपाय करने होंगे और भावनात्मक और तार्किक तरीके से पृथ्वी को मां का दर्जा देते हुए उनको उसकी मूल भावना से सम्मान करना होगा उसकी रक्षा करनी होगी हमारे दैनिक जीवन की छोटी-छोटी चीजें जैसे टिशू पेपर जिसके बारे में मैंने नीचे वीडियो में बताने की कोशिश की है। प्लास्टिक का अंधाधुन प्रयोग हमें रोकना होगा ।आइए इस पृथ्वी दिवस पर हम यह संकल्प लें अपनी जिंदगी में प्लास्टिक का कम से कम प्रयोग करेंगे और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की कोशिश करेंगे ।
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