Kshatriya Kalyan Foundation - KKF

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Kshatriya Kalyan Foundation - KKF वीर भोग्य वसुंधरा

17/09/2026

हमें पता है कि हम कौन हैं कैसे है पर कुछ लोग अपने आप को शेर समझने बैठे है उन्हें बताना है शेर कौन होता है शेर जहां जाता ...
05/09/2026

हमें पता है कि हम कौन हैं कैसे है पर कुछ लोग अपने आप को शेर समझने बैठे है उन्हें बताना है शेर कौन होता है शेर जहां जाता है वहां शेर होता है कुत्ते झूठ में आते हैं और शेर अकेला जहां मर्जी घूम सकता है ?
यह मत सोचना की शेर कुछ वकत के लिए घायल था घायल शेर सबसे खराब होता है ...?
हर हर महादेव 🙏🙏🙏🙏🙏
जय मां भवानी 🚩🚩🚩🚩🚩
जय राजपूताना 🚩🏹🚩🏹🚩🏹🚩🏹🚩🏹

03/08/2026
1. “आरक्षण नहीं, समान अवसर चाहिए। योग्यता ही देश की असली पहचान है।”2. “युवा जाग चुका है — समान अधिकार, समान अवसर और योग्...
28/07/2026

1. “आरक्षण नहीं, समान अवसर चाहिए। योग्यता ही देश की असली पहचान है।”
2. “युवा जाग चुका है — समान अधिकार, समान अवसर और योग्यता आधारित व्यवस्था की आवाज़ बुलंद होगी।”
3. “न्याय का आधार योग्यता हो, अवसर सबको समान हो।”
4. “Equality • Merit • Justice — यही नए भारत की पहचान।”
5. “देश पहले, योग्यता सर्वोपरि, अवसर सबके लिए समान।”
6. “एक भारत, समान अवसर — यही हमारा संकल्प।”
7. “युवा बोले एक ही नारा — समान अवसर हमारा अधिकार।”
8. “हमारी आवाज़: समान अवसर, निष्पक्ष व्यवस्था और न्यायपूर्ण भविष्य।”

“समान अवसर • समान अधिकार • योग्यता का सम्मान — यही हमारे आंदोलन का संकल्प।”
Reservation Hatao Andolan (RHA)
MeritMatters JusticeForAll OneNationOneOpportunity YouthForChange EqualRights IndianYouth StandForMerit VoiceOfYouth NewIndia Bharat RHA EqualityMeritJustice SocialJustice India

"वीर भोग्या वसुंधरा"आज क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन जिला कुल्लू में संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री ज...
19/07/2026

"वीर भोग्या वसुंधरा"

आज क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन जिला कुल्लू में संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री जितेन्द्र रजपूत की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

बैठक में क्षत्रिय समाज के इतिहास, संस्कृति, धर्म, सामाजिक एकता, जातिगत नीतियों, कानूनों एवं वर्तमान व्यवस्थाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। साथ ही समाज के युवाओं, महिलाओं एवं परिवारों के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक उत्थान हेतु फाउंडेशन द्वारा भविष्य में किए जाने वाले कार्यों एवं योजनाओं पर गहन चर्चा हुई।

लगभग तीन घंटे तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला कुल्लू के प्रमुख सदस्यगण उपस्थित रहे। बैठक के दौरान सर्वसम्मति से जिला एवं घाटी स्तर की कार्यकारिणी का गठन किया गया तथा नव-नियुक्त पदाधिकारियों को समाज एवं राष्ट्रहित में संगठन को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

📌 नव-नियुक्त पदाधिकारी

🔹 जिला अध्यक्ष – श्री शिव दयाल
🔹 वरिष्ठ अध्यक्ष – श्री कमलेश ठाकुर
🔹 जिला उपाध्यक्ष – श्री गुलाब चंद
🔹 जिला महासचिव – श्री मोहित ठाकुर
🔹 कोषाध्यक्ष – श्री अमन ठाकुर
🔹 मीडिया प्रभारी – श्री राजकुमार
🔹 संगठन सचिव – श्री आलम चंद
🔹 मणिकरण घाटी अध्यक्ष– श्री तारा चंद
🔹 गढ़सा घाटी अध्यक्ष – श्री चंद्रशेखर वज़ीर

क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन सभी नव-नियुक्त पदाधिकारियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई देता है। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप सभी अपने दायित्वों का निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ निर्वहन करते हुए समाज की एकता, सम्मान, संस्कृति एवं युवा सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य करेंगे।

आइए, हम सभी मिलकर एक संगठित, शिक्षित, जागरूक और सशक्त क्षत्रिय समाज के निर्माण का संकल्प लें।

।।जय हिन्द।। 🇮🇳

⚔️ क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन, जिला कुल्लू ⚔️

⚔️ क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन ⚔️जिला कुल्लू (हि.प्र.)🚩 मासिक बैठक सफलतापूर्वक सम्पन्न 🚩"संगठन ही शक्ति है, और एकता ही समाज...
11/07/2026

⚔️ क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन ⚔️

जिला कुल्लू (हि.प्र.)

🚩 मासिक बैठक सफलतापूर्वक सम्पन्न 🚩

"संगठन ही शक्ति है, और एकता ही समाज की सबसे बड़ी पहचान है।"

आज क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन, जिला कुल्लू की मासिक बैठक का सफल आयोजन किया गया, जिसमें जिला कुल्लू एवं जिला मंडी के पदाधिकारियों एवं समाज के सम्मानित सदस्यों ने सहभागिता कर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया।

📌 बैठक के प्रमुख विषय

⚔️ जातिगत आरक्षण से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श।
⚔️ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित विषयों पर चर्चा।
⚔️ UGC Equity Bill पर विस्तृत चर्चा।
⚔️ सामान्य वर्ग आयोग (General Category Commission) के गठन एवं प्रभावी क्रियान्वयन की मांग।
⚔️ शिक्षित युवा वर्ग के रोजगार, नेतृत्व, शिक्षा एवं सामाजिक भागीदारी पर विशेष चर्चा।

📢 संगठन का निर्णय

क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन शीघ्र ही जिला कुल्लू की सभी घाटियों एवं क्षेत्रों में संगठन विस्तार एवं सदस्यता अभियान प्रारंभ करेगा।

हम सभी राजपूत परिवारों, युवाओं, मातृशक्ति एवं समाज के जागरूक नागरिकों से आग्रह करते हैं कि अधिक से अधिक संख्या में संगठन से जुड़ें और समाज की एकता, शिक्षा, स्वाभिमान एवं सामाजिक उत्थान के इस अभियान को मजबूत बनाएं।

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

⚔️ राजपूताना का संदेश ⚔️

"स्वाभिमान हमारी पहचान है, संगठन हमारी शक्ति है और एकता हमारा सबसे बड़ा अस्त्र है।"

"हमारा उद्देश्य किसी के अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि संविधान के अनुरूप समान अवसर, समान सम्मान और समाज के हितों की रक्षा के लिए संगठित प्रयास करना है।"

"राजपूत केवल इतिहास का गौरव नहीं, बल्कि वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य की आशा भी है।"

"जब समाज जागता है, तभी परिवर्तन का नया इतिहास लिखा जाता है।"

🚩 एकजुट हों • शिक्षित हों • संगठित हों • समाज के लिए समर्पित हों

⚔️ जय राजपूताना ⚔️
🚩 जय क्षत्रिय समाज 🚩

भगवान परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏पराक्रम, धर्म और सत्य के प्रतीकभगवान परशुराम जी का आशीर्वादआप और आपके परिवार ...
19/04/2026

भगवान परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
पराक्रम, धर्म और सत्य के प्रतीक
भगवान परशुराम जी का आशीर्वाद
आप और आपके परिवार पर सदैव बना रहे।
उनकी तपस्या, साहस और न्यायप्रियता
हम सभी के जीवन को सही दिशा दें।
🌼 जय परशुराम 🌼
🌼 धर्म की विजय हो 🌼
क्षत्रिय कल्याण फाउंडेशन की ओर से
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

02/04/2026
05/02/2026

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का संक्षिप्त जीवनकाल :-

* 9 मई, 1540 ई. :- कुंभलगढ़ में जन्म

* 1552 ई. :- कुंभलगढ़ से चित्तौड़गढ़ प्रस्थान

* 1554 ई. :- 14 वर्ष की उम्र में जैताणा के युद्ध में करण सिंह को मारकर वागड़ की फ़ौज को परास्त किया

* 1556 ई. :- छप्पन के इलाके को जीता

* गोडवाड़ पर विजय प्राप्त की

* 1557 ई. :- बिजोलिया की राजकुमारी अजबदे बाई सा से विवाह

* 1563 ई. :- भोमठ पर विजय

* अक्टूबर, 1567 ई. :- कुंभलगढ़ पर हुसैन कुली खां के आक्रमण को विफल किया

* 1572 ई. :- मेवाड़ के महाराणा बने व सिरोही पर कल्ला देवड़ा के ज़रिए अधिकार किया, कुछ समय बाद सिरोही राव सुरताण से मित्रता कर ली।

* 1572 ई. :- महाराणा द्वारा मंदसौर के मुगल थानों पर आक्रमण व विजय

* 1573 ई. :- गुजरात से आगरा जाती हुई मुगल फौज पर आक्रमण किया व दण्डस्वरूप खजाना लिया

* 1572 ई. से 1573 ई. के बीच अकबर द्वारा भेजे गए 4 सन्धि प्रस्तावों को खारिज किया :-
1) जलाल खां
2) राजा मानसिंह
3) राजा भगवानदास
4) राजा टोडरमल

* 1574 ई. :- चुंडावत जी के ज़रिए सिन्हा राठौड़ को परास्त कर सलूम्बर पर विजय

* 1576 ई. :- हल्दीघाटी का विश्व प्रसिद्ध युद्ध हुआ, जो कि अनिर्णित रहा।

* 23 जून, 1576 ई. :- राजा मानसिंह द्वारा गोगुन्दा पर हमला। यहां तैनात 20 मेवाड़ी बहादुर काम आए।

* अगस्त, 1576 ई. :- महाराणा प्रताप द्वारा अजमेर, गोडवाड़, उदयपुर की मुगल छावनियों पर आक्रमण

* सितम्बर, 1576 ई. :- महाराणा प्रताप ने गोगुन्दा पर आक्रमण किया व कईं मुगलों को मारकर गोगुन्दा पर अधिकार किया

* अक्टूबर, 1576 ई. :- मुगल बादशाह अकबर का 80,000 जंगी सवारों समेत मेवाड़ पर हमला

अकबर एक वर्ष तक मेवाड़ व उसके आसपास ही रहा व महाराणा प्रताप पर कईं हमले किए, पर हर बार नाकामयाबी मिली

* अकबर द्वारा कुतुबुद्दीन, राजा भगवानदास, राजा मानसिंह को गोगुन्दा पर हमला करने भेजना। छोटे-बड़े कई हमलों के बाद अंततः गोगुन्दा पर महाराणा की दोबारा विजय।

* महाराणा प्रताप के खौफ से हज यात्रियों के जुलूस की हिफाजत में अकबर द्वारा 2 फौजें भेजी गईं

* महाराणा प्रताप ने राव दूदा हाडा को बूंदी जीतने में फ़ौजी मदद की

* 1577 ई. :- महाराणा प्रताप द्वारा दिबल दुर्ग पर अधिकार

* 23 फरवरी, 1577 ई. :- महाराणा प्रताप व राय नारायणदास राठौड़ ने मिलकर लड़ा ईडर का युद्ध

* 1577 ई. :- ईडर के दूसरे युद्ध में मुगलों की रसद व दण्डस्वरूप खजाना लिया

* मई-सितम्बर, 1577 ई. :- महाराणा प्रताप ने गोगुन्दा, उदयपुर में तैनात मुगल थाने उखाड़ फेंके

* अक्टूबर, 1577 ई. :- महाराणा प्रताप ने मेवाड़ के सबसे बड़े मुगल थाने मोही पर आक्रमण किया। थानेदार मुजाहिद बेग कत्ल हुआ व मोही पर महाराणा का अधिकार हुआ।

* अक्टूबर, 1577 ई. :- अकबर ने शाहबाज खां को फौज समेत मेवाड़ भेजा

* नवम्बर, 1577 ई. :- महाराणा प्रताप द्वारा केलवाड़ा मुगल थाने पर आक्रमण, 4 मुगल हाथी पकड़े गए

* 1578 ई. :- कुम्भलगढ़ का युद्ध :- शाहबाज खां ने कुम्भलगढ़ पर अधिकार किया

महाराणा प्रताप ने कुम्भलगढ़ की पराजय के प्रतिशोध स्वरुप जालौर व सिरोंज के सभी मुगल थाने जलाकर खाक किये

* 1578 ई. :- वागड़ की फौजों से हुए युद्ध में महाराणा प्रताप द्वारा भेजे गए रावत भाण सारंगदेवोत की विजय

* 15 दिसम्बर, 1578 ई. :- शाहबाज खां का दूसरा असफल मेवाड़ अभियान

* 1578 ई. :- भामाशाह को फौज देकर मालवा पर आक्रमण करने भेजना

* 15 नवम्बर, 1579 ई. :- शाहबाज खां का तीसरा असफल मेवाड़ अभियान

* 1580 ई. :- अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना का असफल मेवाड़ अभियान, महाराणा प्रताप ने कुँवर अमरसिंह द्वारा बंदी बनाई गई रहीम की बेगमों को मुक्त कर क्षात्र धर्म का पालन किया

* 1580 ई. :- मालवा में भामाशाह के भाई ताराचंद के ज़ख़्मी होने पर महाराणा प्रताप द्वारा मालवा से ताराचंद को सुरक्षित चावण्ड लाना व रास्ते में आने वाली मुगल चौकियों को तहस-नहस करना, साथ ही मंदसौर के सबसे बड़े मुगल थाने पर आक्रमण व विजय

* अक्टूबर, 1582 ई. :- दिवेर का युद्ध :- महाराणा प्रताप द्वारा मुग़ल सेनापति सुल्तान खां की पराजय। कुँवर अमरसिंह द्वारा सुल्तान खां का वध।

* 1583 ई. :- महाराणा ने हमीरपाल झील पर तैनात मुगल छावनी हटाई

* 1583 ई. :- कुम्भलगढ़ का दूसरा युद्ध :- महाराणा प्रताप ने मुगल सेनापति को मारकर दुर्ग पर अधिकार किया।

* 1583 ई. :- महाराणा प्रताप द्वारा मांडल के थाने पर आक्रमण व विजय। मुगलों की तरफ से इस थाने के मुख्तार राव खंगार कछवाहा व नाथा कछवाहा काम आए। राव खंगार की छतरी विद्यमान है, जिसपे इस लड़ाई में मरने वालों के नाम खुदे हैं।

* 1583 ई. :- बांसवाड़ा में मानसिंह चौहान से युद्ध

* 1584 ई. :- उदयपुर के राजमहलों में तैनात मुगलों पर महाराणा प्रताप का आक्रमण व विजय। अकबर द्वारा 1576 ई. में उदयपुर का नाम 'मुहम्मदाबाद' रखने पर महाराणा द्वारा फिर से नाम बदलकर उदयपुर रखना।

* 1584 ई. :- अकबर ने जगन्नाथ कछवाहा को फौज समेत मेवाड़ भेजा, पर जगन्नाथ कछवाहा भी 2 वर्ष तक मेवाड़ में रहकर असफल होकर लौट गए

* 1584 ई. :- अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना का दोबारा असफल मेवाड़ अभियान

* 1585 ई. :- लूणा चावण्डिया को पराजित कर चावण्ड पर अधिकार व चावण्ड को राजधानी बनाना

* 1586 ई. :- मेवाड़ में लूटमार करने वाले नवाब अली खां का दमन

* 1586 ई. :- अकबर द्वारा 1568 ई. में चित्तौड़गढ़ का नाम 'अकबराबाद' रखने के कारण महाराणा प्रताप द्वारा चित्तौड़ के एक शाही थाने पर हमला व विजय, गढ़ नहीं जीतने के बावजूद महाराणा ने नाम बदलकर पुनः चित्तौड़गढ़ रखा, क्योंकि मेवाड़ की जनता ने भी अकबराबाद नाम स्वीकार नहीं किया।

* 1585 - 87 ई. :- महाराणा प्रताप व कुँवर अमरसिंह द्वारा मोही, मदारिया समेत कुल 36 मुगल थानों पर आक्रमण व विजय

* 1588 ई. :- महाराणा प्रताप की जहांजपुर विजय

* 1589 ई. महाराणा प्रताप द्वारा सूरत के शाही थानों पर आक्रमण व हाथी पर सवार सूरत के मुगल सूबेदार को भाले से कत्ल करना

* 1591 ई. :- राजनगर के युद्ध में महाराणा की फौज द्वारा दलेल खां की पराजय

* 1591 ई. :- दिलावर खां से कनेचण का युद्ध

* 19 जनवरी, 1597 ई. :- वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का देहान्त

आप पढ़ते-पढ़ते थक गए होंगे। महाराणा प्रताप ने कितना कुछ सहा, क्या कुछ झेला.... इसकी कल्पना हम और आप जैसे साधारण लोगों के बस की बात नहीं

30/01/2026

दरी बिछाओ, पार्टी का डंडा झंडा उठाओ समाज
गुलाम समाज, स्वर्ण समाज🥍

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