Asif Ali Hawari

Asif Ali Hawari

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Human Welfare is the Best Medittion for me.

02/07/2021

जवाहरलाल नेहरु पर संगठित हमला हो रहा है, सड़क से संसद तक, उस नेहरु पर जिसने अपना ही नहीं अपनी पीढ़ियों का भी जीवन देश के हवाले कर दिया l जवान होती पीढ़ी के सामने नेहरू को एक खलनायक की तरह पेश किया जा रहा है l हमलावर वो लोग है, जिनकी इस देश के इतिहास में, इस देश के निर्माण में कोई जगह नहीं I ये हमला सिर्फ नेहरु नहीं बल्कि हिंदुस्तान की लोकतान्त्रिक संस्कृति पर हो रहा है I
हालाँकि इस पर आश्चर्य नहीं, यह हमला अप्रत्याशित नहीं क्योंकि उनकी राजनीति और उनका वजूद नेहरु के विरोध इर्द-गिर्द ही घूमता है I अपना कद बढ़ाने के लिए , अपनी विचारधारा थोपने के लिए सबसे आसान रास्ता है. नेहरु का विरोध I
आश्चर्य हो रहा है कांग्रेस की चुप्पी पर ,नेहरु और उनकी विरासत पर लगातार हो रहे हमलों का माकूल जबाब कांग्रेस की तरफ से नहीं दिया जा रहा है I यह चुप्पी न सिर्फ खुद कांग्रेस के लिए बल्कि देश के लोकतान्त्रिक ढांचे और सामाजिक ताने-बाने के लिए घातक है I ये वक्त हार के सदमे में निष्क्रिय हो कर बैठने का नहीं , ये वक्त सड़क से संसद तक संघर्ष करने का है I यदि कांग्रेस ऐसा नहीं करती तो ये उसकी अब तक की सबसे बड़ी भूल होगी और इस भूल के लिए देश उसे कभी माफ़ नहीं करेगा।

01/07/2021

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के पूर्व एवं भावी मुख्यमंत्री आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।

Photos from Asif Ali Hawari's post 30/06/2021

नरसिंहरावः कांग्रेस की कृतघ्नता
डॉ. वेदप्रताप वैदिक
भारत के प्रधानमंत्री रहे पामुलपर्ती वेंकट नरसिंहराव जी का 28 जून 2021 को सौवां जन्मदिन था उनके करीबी दोस्त और भारतीय भाषा सम्मलेन के अध्यक्ष वेदप्रताप वैदिक जी का कहना है कि नरसिंहराव जी जब से आंध्रप्रदेश छोड़कर दिल्ली आए थे तब से उनके जन्मदिन पर हम दोनों का भोजन साथ-साथ होता था। हम लोगो की मुलाकात पहले शाहजहां रोडवाले फ्लेट में और फिर 9, मोतीलाल नेहरु मार्गवाले बंगले में हुआ करती थी। प्रधानमंत्री बनने से पहले वे विदेश मंत्री, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री और मानव संसाधन मंत्री रह चुके थे। 1991 में जब वे प्रधानमंत्री बने तो हमारे तीन पड़ौसी देशों के प्रधानमंत्रियों ने मुझसे पूछा कि क्या राव साहब इस पद को ठीक से संभाल पाएंगे ? तो मेने उन्हे आश्वस्त किया और नरसिंहराव जी के कार्य की प्रशंसा की वेदप्रताप जी ने बताया की उन्होंने अगले पांच साल न केवल अपनी अल्पमत की सरकार को सफलतापूर्वक चलाया बल्कि उनके कामकाज से उनकी गणना देश के चार एतिहासिक प्रधानमंत्रियों-- नेहरु, इंदिरा गांधी, नरसिंहराव और अटलजी-- के रुप में होती है। राव साहब के जन्म का यह सौवां साल है। कई अन्य प्रधानमंत्रियों का भी सौंवा साल आया और चला गया। उनके सौवें जन्मदिन पर हैदराबाद में उनकी 26 फुट ऊंची प्रतिमा का उदघाटन जरुर हुआ लेकिन वह किसने आयोजित किया ? किसी कांग्रेसी ने नहीं, किसी राष्ट्रवादी भाजपाई ने नहीं, बल्कि तेलंगाना (पूर्व आंध्र) के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने। क्या नरसिंहराव सिर्फ एक प्रांत के नेता थे ? वर्तमान कांग्रेस किस कदर एहसानफरामोश निकली है ? मुझे उससे ज्यादा उम्मीद इसलिए भी नहीं थी कि जिस दिन राव साहब का निधन हुआ (23 दिसंबर 2004), प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहनसिंह ने खुद मुझे फोन किया और कहा कि आप कांग्रेस कार्यालय पर पहुंचिए। वहीं उन्हें लाया जा रहा है। उस समय सुबह के साढ़े दस ग्यारह बजे होंगे। राव साहब का शव बाहर रखा हुआ था और सोनिया जी और मनमोहनसिंह जी के अलावा मुश्किल से 8-10 कांग्रेसी नेता वहां खड़े हुए थे। किसी के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। सिर्फ मैंने उनके चरण-स्पर्श किए। शेष लोगों ने उन्हें खड़े-खड़े चुपचाप विदाई दे दी। मैंने सोचा कि राजघाट के आस-पास अंत्येष्टि के लिए कोई स्थल तैयार कर लिया गया होगा लेकिन उसी समय शव को हवाई अड्डे ले जाया गया। हैदराबाद में हुई उनकी लापरवाह अंत्येष्टि की खबर जो दूसरे दिन अखबारों में पढ़ी तो मन बहुत दुखी हुआ लेकिन 2015 में यह जानकर अच्छा लगा कि राजघाट के पास शांति-स्थल पर भाजपा सरकार ने उनका स्मारक बना दिया है। कांग्रेस के नेता चाहते तो 28 जून को उनकी 100 वीं जन्म-तिथि पर कोई बड़ा आयोजन कर सकते थे लेकिन कांग्रेस ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। राव साहब ने अपने दो वरिष्ठ मंत्रियों की सलाह को दरकिनार करते हुए मेरे सामने ही राजीव गांधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रु. देने का निर्णय किया था। उनकी स्मृति में भाजपा कुछ करती तो कांग्रेसी आरोप लगा देते कि बाबरी मस्जिद को गिरवाने में भाजपा और राव साहब की मिलीभगत थी लेकिन 6 दिसंबर 1992 की उस घटना के बारे में ऐसा आरोप लगा देना घनघोर अज्ञान और दुराशय का परिचय देना है। ज्यों-ज्यों दिन बीतते जाएंगे, लोगों को पता चलेगा कि भारत की अर्थ-नीति और विदेश नीति को समयानुकूल नई दिशा देने में नरसिंहरावजी का कैसा अप्रतिम योगदान था।

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