28/01/2026
UGC 2026 की तो पक्का ही लंका लगेगी।
जितनी देर लगेगी, चोट भी गहरी, उतनी ही लगेगी।
UGC का मास्टर स्ट्रोक, मास्टर की ही न ले ले इस बार,
रिंग मास्टर चाहे कोई भी हो, इस यूजीसी २०२६ का।
भुलाने की तमाम कोशिश, फिर सब व्यर्थ ही जावेंगी,
सवर्णों की तलवारें जब, इतिहास फिर से लिखावेंगी।
आदतें दुस्साहसी फैसलों की, बुरी नहीं लगतीं अक्सर,
बुरी आदत के चलते दुस्साहस, लंका भी जलवाते हैं।
समझ सको तो अभी हम, प्रेम व विनम्रता से समझाते हैं,
वर्ना तांडव नृत्य का प्रदर्शन भी, हम ढंग से दिखलाते हैं।
इस बहाने से , किनकी संतानें हैं यह स्वर्ण, अब समझाते हैं।
बिगुल तुम बजा चुके, शंखनाद संग प्रत्यंचा, अब हम चढ़ाते हैं।
"सवर्ण"
#मास्टरस्ट्रोक #सवर्ण #अस्तित्व #वोट #राजनीति
03/01/2026
पिछली चित्रकूट यात्रा में कामदगिरि परिक्रमा करते हुए इन वानररूपी दिव्य संत के दर्शन और लीला के साक्षी बने।
यह दिव्य संत ही हैं जिन्होंने आसन जमाकर रखा हुआ है।
इनकी भाव भंगिमाएं आश्चर्यचकित करने वाली थीं।
वीडियो बनाने के प्रयास में कहीं संत रूष्ट न हो जाएं, इस विचार से थोड़े समय के लिए इनसे भावपूर्ण सामंजस्य स्थापित किया और तब इनसे आज्ञा लेकर कुछ छवियां इनके साथ लीं, जिनमें से एक प्रस्तुत की है, बाकी मेरे लिए अनमोल धरोहर के रूप में रक्षित हैं।
जब मैने इनकी आज्ञा लेकर छवियां लीं तो इन्होंने आसन जमाए जमाए ही कई अलग प्रकार की मुद्रा धारण करते हुए कुछ दिव्य छवियां प्रदान कीं।
यह पवित्र स्थल, कामदगिरि परिक्रमा पर स्थित सरयू धारा हैं, सो सरयू धारा के विषय में थोड़ा जानकारी साझा करने की प्रेरणा से ही यह पोस्ट उत्पन्न हो गई।
अनेकों दिव्य , रहस्यमय तथा अकल्पनीय संस्मरण से भरी इस चित्रकूट की पावन धरा से मेरे मन में भी अनेक संस्मरणों की दिव्य माला सजी हुई है।
चित्रकूट की कामदगिरि परिक्रमा में स्थित सरयू धारा का पौराणिक महत्व यह है कि यह धारा प्राचीन काल में कामदगिरि पर्वत से निकलकर मंदाकिनी नदी में मिलती थी, जो पावनता का प्रतीक मानी जाती थीं ; हालाँकि, वर्तमान में जल स्तर कम होने से यह धारा विलुप्त हो गई हैं, लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस धारा के जल से स्नान करने से मन-आत्मा की शुद्धि होती है और यह भगवान राम से जुड़े होने के कारण अत्यंत पूजनीय है।
पौराणिक कथाएँ:
भगवान राम से जुड़ाव:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, कामदगिरि पर्वत भगवान विष्णु का स्वरूप हैं और भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण ने वनवास के दौरान यहाँ समय बिताया था।
सरयू का उद्गम:
माना जाता है कि यह सरयू धारा (छोटी सरयू) कामदगिरि से निकलती थी और इसका जल पवित्र माना जाता था, जो पापों का नाश करता था।
मंदाकिनी से संगम:
यह धारा मंदाकिनी नदी में मिलती थी, जिससे पूरे क्षेत्र की पवित्रता और बढ़ जाती थी, खासकर रामघाट के पास।
महत्व और प्रभाव:
पाप-ताप हरण:
सरयू के जल को अत्यंत पवित्र माना जाता था, और ऐसी मान्यता थी कि इसमें स्नान करने से मनुष्य के सभी दुःख और मन की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं, आत्मा को शुद्धि मिलती है।
मनोकामना पूर्ति:
कामदगिरि की परिक्रमा के साथ इस धारा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह भगवान राम से जुड़े पवित्र स्थान का हिस्सा है, और परिक्रमा करने वालों की इच्छाएँ पूरी होती हैं।
ऐतिहासिक और धार्मिक जुड़ाव:
सरयू नदी का उल्लेख वेदों और पुराणों में मिलता है, और चित्रकूट में इसकी धारा का होना इस स्थान के धार्मिक महत्व को और बढ़ाता है, भले ही आज वह धारा क्षीण हो गई हो।
संक्षेप में, कामदगिरि की सरयू धारा एक पवित्र जलस्रोत थी, जो भगवान राम के वनवास काल से जुड़ी हुई थी और भक्तों के लिए मोक्ष तथा शुद्धिकरण का मार्ग थी, यद्यपि अब यह धारा केवल पौराणिक कथाओं और स्मृतियों में शेष है।
#राम #श्रीराम #चित्रकूट #सरयू #मुक्ति #भक्ति #दिव्य
31/12/2025
चित्रकूट की राम शैय्या त्रेतायुग से जुड़ी एक पौराणिक और पवित्र जगह है, जहाँ वनवास के दौरान भगवान राम और सीता माता विश्राम करते थे; यहाँ एक विशाल चट्टान पर आज भी उनके शरीर की लंबाई के अनुसार विश्राम के निशान (पदचिह्न) और धनुष-बाण के चिन्ह मौजूद हैं, जिसे भक्त भगवान के करीब होने का अनुभव करने और मोक्ष प्राप्ति के लिए दर्शन करते हैं. यह स्थल चित्रकूट नगर से करीब 10 किमी दूर है और आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जो भगवान राम की लीलाओं का साक्षी है।
राम शैय्या का इतिहास और महत्व:
वनवास लीला का साक्षी: यह वह स्थान है जहाँ भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास काल का काफी समय बिताया था, और इस चट्टान पर वे आराम करते थे।
विश्राम चिन्ह: चट्टान पर भगवान राम के शरीर की आकृति और उनके पदचिह्न आज भी स्पष्ट दिखते हैं, जिससे भक्त उस युग को महसूस करते हैं।
धनुष-बाण के निशान: मान्यता है कि राम और सीता के बीच रखे धनुष और बाण के निशान भी चट्टान पर सुरक्षित हैं।
मोक्ष और आस्था का केंद्र: इस स्थान के दर्शन मात्र से राम-लोक की प्राप्ति होती है और भक्तों के कष्ट दूर होते हैं, इसलिए यह दूर-दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
पौराणिक मान्यता: कहा जाता है कि जब भगवान राम इस विशाल चट्टान पर लेटे थे, तो वह मोम की तरह पिघल गई और उनके विश्राम के निशान उसमें समा गए, जो आज भी मौजूद हैं।
परिसर: राम शैय्या के पास एक प्राचीन कुआं और अन्य मंदिर भी हैं, जो इस क्षेत्र को और भी पवित्र बनाते हैं.
यह स्थल ऐतिहासिक और पुरातात्विक होने के साथ-साथ भक्ति और आस्था का एक जीवंत केंद्र है, जो भगवान राम के जीवन से जुड़ा है।
#राम #श्रीराम #चित्रकूट #दिव्य #भक्ति #मुक्ति
29/12/2025
The brutal killing of Anjel Chakwa in Uttarakhand is not just a tragedy—it is a national disgrace. A young man from Tripura, a proud Indian, was racially abused, dehumanized with slurs like “Chinese” and “momo,” and ultimately murdered.
This was not an isolated act of violence; it was the culmination of ignorance, prejudice, and a failure of our society to recognize and respect its own diversity.
I completely agree with Shashi Tharoor ji.
The brutal killing of Anjel Chakwa in Uttarakhand is not just a tragedy—it is a national disgrace. A young man from Tripura, a proud Indian, was racially abused, dehumanized with slurs like “Chinese” and “momo,” and ultimately murdered. This was not an isolated act of violence; it was the culmination of ignorance, prejudice, and a failure of our society to recognize and respect its own diversity.
It is shocking, and deeply shameful, that racism is rising in North India, often cloaked in casual mockery or systemic neglect. The Northeast, with its rich tapestry of cultures, languages, and traditions, is not a distant appendage to the Indian identity; it is central to it. Yet, people from the region are routinely subjected to racial profiling, exclusion, and abuse. This must end.
We must demand justice for Anjel, not only in the courts, but in the conscience of the nation. His death must not be reduced to a statistic or a fleeting headline. It must ignite a movement for education, empathy, and reform. Schools must teach the histories and cultures of all Indian communities. Media must portray Northeast Indians with dignity. And society must unlearn its biases.
Political leaders must speak out. Religious leaders must speak up. Silence is complicity. I call upon those who claim to uphold dharma to remember that Hinduism, at its core, is a tradition of pluralism & inclusion. It is a civilization that has embraced difference for millennia, welcoming tribes, castes, languages, and faiths into its fold. To be Hindu is to honor the sacredness of every human being, regardless of appearance or origin.
Let us mourn Anjel Chakwa not only with words, but with action. Let us build a society where no Indian is made to feel foreign in their own land.
08/05/2025
"आज की रात इतिहास लिखा जाएगा।।
"एक रात - पाक साफ"
NO MERCY THIS TIME.
14/03/2025
वर्षों की साध इस बार पूर्ण हुई।
कैसा #सुंदर सौभाग्य है, इस बार #होली का अद्वितीय अनुपम त्यौहार, #चित्रकूट की पावन धरा पर मनाने का सौभाग्य मिला। #गुरुदेव - #गुरु #माता तथा अनेकों #संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
ठाठीघाट पर होली अलौकिक आनंद प्रदान करने वाली रही।
चित्रकूट के अनेक साथी - बंधुओं संग सर्वोत्तम जीवन पर्यंत स्मरणीय होली का आनंद मिला।
#महादेव सबके #जीवन में उल्लासपूर्ण होली का आनंद भरें और जो भी जीवन के वास्तविक आनंद हैं उनकी अनुभूति सभी को हो।
जय #सियाराम।
जय चित्रकूट धाम।
#श्रीराम #राम #होलिकोत्सव
होली की उमंग भरी बधाई।
🥰💚🧡🩵🫶👌
20/01/2025
चित्रकूट की महिमा ऐसी है, कि हर दर्शन पर नव दर्शन, नव अनुभव, नव सुख व नव अनुभूति प्राप्त होती है, सो आज यह पंक्तियां अर्पित है।
*चित्रकूट की पुण्य धारा, राम करें उद्धार।
प्रति आगमन सुख नया दे, हरें संताप भार॥*
🙏स्वरचित (ai के सहयोग से)।।।
#चित्रकूट #राम #श्रीराम #कामतानाथ
15/11/2024
"सर्वतीर्थमयी पुर्णिमा सर्वपापप्रणाशिनी।
कात्यायनी महादेवी त्वं नमामि जगद्धिते॥"
वर्णन:
यह श्लोक कार्तिक पूर्णिमा के दिन के महत्व को स्पष्ट करता है। इस दिन को सर्वतीर्थमयी कहा गया है, जिसका अर्थ है कि यह सभी तीर्थों के समान पवित्र है। इस तिथि को गंगा स्नान, दीपदान, और विशेष पूजा का अत्यधिक महत्व है, जो जीवन के पापों को नष्ट करने वाली मानी जाती है। विशेष रूप से भगवान विष्णु और शिव की पूजा का विधान है, और इस दिन किए गए स्नान, दान, और व्रत से पुण्य की प्राप्ति होती है।
हिंदू मान्यता के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। विशेषतः भगवान विष्णु, जो इस दिन मत्स्यावतार लेकर प्रकट हुए थे, की आराधना का विशेष महत्व होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर, दीपदान और ध्यान कर, व्यक्ति अपने सभी पापों का प्रायश्चित कर सकता है और जीवन में शांति और मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है।
इस प्रकार, कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व आध्यात्मिक शक्ति, पवित्रता, और जीवन के कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला है।
*"सभी का कल्याण हो।
भारत का कल्याण हो।
सत्य सनातन धर्म की सदा ही जय हो।
भक्त और भगवान की सदा ही जय हो।🙏
जय जय श्री सीताराम।🙏
हर हर महादेव।🙏"*
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