|| आखिरी दिन ||
टूर प्रोग्राम बनाकर यात्रा कराने वाली एक बड़ी एजेंसी ने चार दिन का प्रोग्राम बनाकर एक स्थानीय समाचार पत्र में अपना विज्ञापन निकाला, कि हमारी एजेंसी उत्तर प्रदेश के सात ऐतिहासिक स्थानों का सुरक्षित भ्रमण करायेगी, सभी यात्रियों के सुख सुबिधा का पूरा ध्यान रखा जायेगा, इच्छुक यात्री अपना स्थान आरक्षित करा सकतें हैं, तीस सीट वाले एक शानदार लग्जरी बस में कुल अट्ठाईस यात्रियों ने अपनी बुकिंग करायी, चलने के समय तक कुल दो स्थान रिक्त रह गया, नियत समय पर यात्रा प्रारम्भ हुई, सभी स्थानों का सुरक्षित भ्रमण कराके यात्रा के अपने शहर पहुँचने की आखिरी रात थी, शुबह आठ बजे तक लखनऊ पहुँचने वाली थी, यात्रा कर रहे सभी यात्री आपस में अपने-अपने अनुभव के बारे में एक दूसरे से चर्चा कर रहे थे, कि अचानक तेज हवा चलने लगी, हवा ऐसी थी कि क्या पाए क्या उड़ा ले जाये, धीरे-धीरे बढ़ती हुई हवा ने भयंकर तूफ़ान का रूप ले लिया, सामान्य सी रात भयंकर तूफानी रात में बदल गई, तूफ़ान बढ़ गया, बादल गरज रहे थे बिजली चमक रही थी, ऐसा लग रहा था कि किसी भी पल बिजली बस पर गिर जयेगी और बस में बैठे हुए सभी यात्रियों की जानें चली जाएगी, सब लोग बहुत डरे सहमे हुए थे, जो बस चालक था वह बहुत कुशल था, कोशिस कर रहा था कि किसी भी तरह से इस भयंकर तूफानी रात से बस को और सारे यात्रियों को बचाते हुए हम गंतव्य स्थान तक पहुँच जाय, जब उसे लगा कि अब तूफ़ान बहुत बढ़ गया है, हालत बहुत खराब होते जा रहे हैं, बस को सड़क पर चलाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है, तो उसने सड़क के किनारे लगे एक पेड़ से कुछ दूरी पर ले जाकर बस को खड़ा कर दिया, बस को खड़ा करते देख सारे के सारे यात्री हैरान परेसान हो गये और पूछने लगे कि अरे भाई डराइबर साहब ! यह बस यहाँ क्यों रोक रहे हो ? हमें जल्दी हमारे गंतव्य तक पहुँचाओ, हम सबकी जान खतरें में है, बस ड्राईबर ने कहा- कि मुझे ऐसा लग रहा है कि इस बस में कोई तो एक ऐसा शख्श है जिसकी मृत्यु आज इस तूफ़ान से होना निश्चित है, और उसी वजह से सारी बस शंकट में आ पड़ी है, सब लोग एक दूसरे को देखने लगे और हैरान हो गये कि क्या करें ऐसी परिस्थिति में ? कैसे पता लगेगा कि किसके कारण यह सब हो रहा है,
तब बस चालक बस को सड़क के किनारे पर रोककर खड़ा कर दिया, और अपनी सीट से उठकर सभी यात्रियों के सामने आकर कहा- भाई मेरे पास इस समय इस तूफ़ान से बचने का बस एक ही हल हमारे समझ में आता है, कि एक-एक करके हर इन्सान इस बस में से बस से नीचे उतरेगा और वह जो पास में पेड़ है उसके पास जाकर उसे पकड़ कर खड़ा हो जायेगा, एक मिनट वहाँ खड़े होकर वापस आ जायेगा और बस में बैठ जाएगा, अगर इस तूफ़ान और बिजली
से उस व्यक्ति की मृत्यु होनी तय होगी तो हो जाएगी, कम से कम इस बस में बैठे बाकी लोग तो बच जायेंगे, आज यह तूफ़ान किसी एक की तलाश में है और उसके मृत्यु का समय आ गया है, यह तूफ़ान उस व्यक्ति को सबसे अलग करना चाहती है, सबको उसकी बात ठीक लगी कि भाई एक व्यक्ति की वजह से बाकी सबकी जान तो नहीं जानी चाहिए न, सब लोगों एक स्वर से उसे ठीक मान लिया और वैसा ही करने का मन बना लिया,
सभी लोग बे मन से, अनमने मन से, बिना इच्छा से, लेकिन एक-एक कर सभी यात्रियों ने बस से उतरना शुरू किया, पहला यात्री बहुत घबराते हुए, ईश्वर का जाप करते हुए बस से उतरा कि हे भगवान ! हे पवन देवता ! आज इस तूफ़ान से बचा लेना और हमें घर पंहुचा देना, हमारी बहुत जरुरत है मेरे परिवार को, वह उतरा और धीरे-धीरे डरता घबड़ाता हुआ पेड़ के पास जाकर उसे पकड़कर एक मिनट तक खड़ा हुआ, लेकिन उस समय बिजली नहीं गिरी, तो वह यात्री बहुत खुश हुआ और वापस आकर बस में बैठ गया और बोला कि नहीं-नहीं आज मेरी मृत्यु नहीं आयी है, भगवन ने हमारे उपर बहुत कृपा की और हमारी पुकार सुन ली, यह शिलशिला हर यात्री के साथ चलता रहा, यही शिलशिला चालक और यात्रा प्रबन्धक के साथ भी चला, क्योकि उसी बस में वे दोनों भी थे, वह भी गए, पेड़ को पकड़कर एक मिनट खड़े रहे और वापस आकर बस में अपनी सीट पर बैठ गए,
अब बस केवल यात्री ही बचा था, क्योकि बाकी के लोग सुरक्षित वापस आ गए थे, अब उसे लगा कि मेरी मृत्यु तो आज सौ प्रतिशत पक्की है, यह बिजली मुझे मारने के लिए ही गिरने वाली थी, अब आज तूफ़ान और बिजली गिरने के रूप में मेरी मृत्यु ही आयी हुई है, इस डर को मन में लिए हुए, भगवान का नाम जपते हुए, अपनी गलतियों का भगवान से क्षमा मांगते हुए बस से उतरा, पेड़ के पास पहुंचकर खड़ा ही हुआ था कि इतने में भयंकर तूफ़ान गड़गड़ाहट की आवाज करते हुए बिजली गिरी, लेकिन पेड़ के पास खड़े व्यक्ति पर नहीं, वहीँ पास में खड़ी हुई बस पर गिरी और बस में बैठा हर शख्स बिजली गिरने से अपनी जान गवां बैठा था,
जिन्दगी के अक्सर यह होता है कि जब हमारे साथ कुछ बुरा होता है तो हम किसी और को जिम्मेदार समझ लेते है, लेकिन जब कुछ अच्छा हो रहा होता है तब हम किसी और को श्रेय देना नहीं चाहते है,
उस बस में बैठे लोग यही नहीं समझ पा रहे थे कि वह एक व्यक्ति था जिसकी वजह से पूरे बस वालों की जान बची हुई थी, जैसे ही वह व्यक्ति बस से बाहर निकला उसी क्षण बस में बैठे हर एक शख्स की जान चली गयी, हमारे आस-पास जिन्दगी में बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें हम छोटी-बड़ी किसी भी बात का श्रेय देना नहीं चाहते है, हमारे साथ जो कुछ अच्छा होता है वह बस मेरी वजह से नहीं होता है, हमारे आस-पास के लोगों का योगदान उसमे होता है, इसलिए बारीकी से ध्यान दीजिये, जिसकी वजह से जीवन का सुख आपको मिल रहा है उसे दिल से धन्यवाद करना न भूलिए, खुशियों के लिए धन्यवाद देना सीख लीजिए आपकी खुशिया बढ़ जायेगी,
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DIVYA SEWAK SANGH -DSS
दिव्य सेवक संघ एक राजनैतिक संगठन है व RSS व BJP की विचारधारा को समर्थन करता है ।
27/09/2022
इस सरकारी अस्पताल की व्यवस्था को 2013 में जन निगरानी द्वारा ठीक कराया था ।आज पुनः कार्यकर्ता द्वारा चेक कराया ।आज की यह चमकती हुई फ़ोटो है ।बिलकुल ठीक चलता मिला ।डॉक्टर साहब बहुत अच्छे से कार्य कर रहे थे | ऐसे 100 अस्पतालों को जनता की निगरानी टीम बनाकर 2013 में सबको सुचारु तौर पर संचालित कराया गया था ।
अब इस वर्ष ऐसे 300 सरकारी अस्पतालों को जन निगरानी द्वारा सुधारने का कार्य शुरू किया जा रहा है ।
23/09/2022
सूचना -
अयोध्या में 2 , काशी में 1 , गोरखपुर में 1 व कानपुर में 1 और Almora में 1 ग्राम ,उनको “आदर्श ग्राम ” बनाने की दिशा में अग्रसर करने के लिए लेना है ।ताकि ये गाँव अगले कुछ वर्षों में रामराज्य की सुखद अनुभूति दे सकें ।
इन गाँव में एक व्यक्ति निर्माण केंद्र या विपश्यना आधारित evening स्कूल ” ज्ञान केंद्र -संस्कारशाला “ खोला जाना है ।यह ज्ञान केंद्र वहीं खोले जा सकते हैं जहां कोई बड़ी जगह निःशुल्क उपलब्ध हो जैसे कोई आश्रम , मठ ,स्कूल इत्यादि ।
साथ ही यह ज्ञान केंद्र वहीं खोले जा सकते हैं जहाँ कोई कर्मठ संघ विचारधारा का स्वयं सेवक या वीपस्सी साधक रहते हों और वो अपने ग्राम को आदर्श ग्राम बनाने में रुचि रखते हों ।ज्ञान केंद्र संचालित करने का खर्च हम लोगों के द्वारा वहन किया जाएगा ।
यदि आप उपरोक्त criteria पूरा करते हों तो हमें सम्पर्क कर सकते हैं ।
नीरज राठौड़
अध्यक्ष
दिव्य ग्राम निर्माण प्रकल्प
रामराज्य ग्राम निर्माण प्रकल्प
M- 8756187439
16/09/2022
आज की अच्छी सूचना यह है की अयोध्या में सनातन धर्म की शुद्ध साधना पद्धति विपश्यना ध्यान आधारित पहला गुरुकुल “ज्ञान केंद्र -संस्कारशाला” दीपावली 24 October 2022 से शुरू हो रहा है ।गंगा किनारे के 2 प्रमुख स्थानों काशी व कानपुर
में यह प्रकल्प पहले से चल रहा है ।
अयोध्या में भगवान श्री राम का मंदिर बन रहा है ।अब मंदिर बन रहा है तो वहाँ रामराज्य भी आना चाहिए ।तो हम लोग आगामी वर्षों में “राम राज्य” लाने के लिए पहले चरण में वहाँ 40 ग्राम में विपश्यना ध्यान आधारित 40 गुरुकुल “ज्ञान केंद्र -संस्कारशाला “ व 40 ग्रामीण चिकित्सालय खोल रहे हैं व अन्य कई प्रकल्प शुरू कर रहे हैं ।व्यक्ति निर्माण आधारित इन सभी कार्यों से आगामी वर्षों में ये सभी गाँव में राम जी जैसा राज्य ज़रूर आ जाएगा अर्थात् यह सभी राम राज्य ग्राम में परिवर्तित हो जाएँगे ।पहले ग्राम के चयन की प्रक्रिया चल रही है जल्दी ही आपको ग्राम की सूचना दी जाएगी ।
इस पुनीत धर्म कार्य की सफलता के लिए आप सभी का साथ ,सहयोग ,आशीर्वाद अति आवश्यक है ।
प्रणाम 💐🌸
नीरज राठौड़
दिव्य ग्राम निर्माण प्रकल्प
राम राज्य ग्राम निर्माण प्रकल्प
इस कुदरत के हर प्राणी के जीवन की हर घटना तय है ।
✔️फिर यह सवाल उठता है की यह कौन तय करता है की अगली घटना क्या होगी ?
इसका उत्तर है की हमारा मन तय करता है की अगली घटना क्या होगी ।क्योंकि हर घटना पहले हमारे मन में होती है फिर वाणी व शरीर से होती है ।
✔️फिर सवाल उठता है की मन में घटना पहले क्यों होती है ?
इसका उत्तर है की हम अपने मन में जो भरते हैं वही बाहर आता है और इसमें अनंत जन्मों का डेटा सुरक्षित होता है ।जैसे अभी हमने क्रोध किया या हमारे मन में वासना आयी तो यह बीज के तौर पर हमारे मन में भर गया और इस बीज से पौधा व फिर पौधे से फल बनेगा और यह बीज इस जन्म से लेकर अनंत जन्मों तक फल देता रहेगा ।जैसे एक आम की गुठली या गेहूं के बीज से हज़ारों फल आते हैं उसी तरह क्रोध या वासना का फल अगले जन्मों या आने वाले दिनों में ब्याज के साथ आएगा और हम पहले से ज़्यादा क्रोधी या वासना युक्त होंगे ।इस कुदरत में हर कर्म भी बीज है ।अब मन में डाले गए कौन से बीज का फल कब तक आएगा , कब आएगा यह कोई पूर्ण ज्ञानी ही बता सकता है ।
मन में आ रहे इन्हीं फलों को कर्म का फल कहते हैं ।यह बीज भी मन ही डालता है और फल भी उसी में आता है जिससे हमें सुख दुःख का अनुभव होता है ।कर्म भी मन ही सर्वप्रथम कर्ता है और फल भी सर्वप्रथम वही भोगता है ।
✔️अब सवाल उठता है की मन को कौन नियंत्रित करता है ?
मन को मन का जानने वाला प्रथम हिस्सा विज्ञान नियंत्रित करता है ।यदि यह शक्तिशाली होता है तो मन पहले ही देख लेता है की हमारा मन क्या करने जा रहा है और फिर यह मन को सही कर्म करने की दिशा में प्रेरित करता है ।यदि यह प्रथम हिस्सा कमजोर है तो मन अपने अंदर आए फल के अनुसार कार्य करता है ।
✔️तो फिर सवाल उठता है की मन को कैसे नियंत्रित किया जाए की यह केवल अच्छे कर्म करे व पूर्व जन्मों के जो फल आ रहे हैं अनचाहे उनसे उत्पन्न व्याकुलता से कैसे बचे व मनचाहे में समता में कैसे रहे ?
तो इसके लिए आपको मन के पहले हिस्से को शक्तिशाली बनाना होगा ।इसका एक सरल अभ्यास बता देता हूँ बाक़ी पूर्ण अभ्यास किसी विपश्यना केंद्र या किसी विपश्यना के श्रेष्ठ आचार्य से सीखें ।
✔️अभ्यास -
किसी शांत स्थान पर सुखपूर्वक बैठ जाएँ ।पंखा लाइट बंद रखें ।अब अपनी आँखें बंद कर लें व अपनी आती जाती साँसों को महसूस करें ।इससे मन का प्रथम हिस्सा मजबूत होगा ।आपको शांति मिलेगी ।पूर्व जन्मों में जो बीज लगे हैं उनसे जो अन चाहे फलों के आने से व्याकुलता है कम होगी व वर्तमान में भी ठीक बीज मन में लगेंगे ।जिससे वर्तमान जीवन के साथ अगले जन्मों में ठीक फल आएँगे ।
✔️कुदरत ने या परमात्मा ने “कर्म के नियम” बना दिए हैं अर्थात् एक CRPC या समविधान बना दिया है वही समविधान हमें नियंत्रित करता है और यह सभी प्राणियों पर उन्हीं के मन के माध्यम से लागू होता है ।
✔️तो आज जो भी जिस भी स्थिति में अपने वर्तमान या पूर्व कर्म के कारण है और आज भी उसके मन का बड़ा हिस्सा उसके जानने वाले मन को नियंत्रण में लेकर उससे कार्य करा रहा है ।अर्थात् ज़्यादातर मनुष्य जो कर रहे हैं उस पर उनका नियंत्रण नहीं है उनका मन नियंत्रित कर रहा है उनको ।
✔️तो जब तक आप अपने मन को नियंत्रित नहीं करते तब तक आप ठीक कर्म नहीं कर सकते ।तो ऊपर दिया अभ्यास करें और इसके बाद भी मन को नियंत्रित तभी कर पाएँगे जब आप सच बोलने का अभ्यास करें , चोरी , हिंसा , व्यभिचार , नशा न करने का प्रयास करें ।प्रयास से धीरे धीरे मन कुछ कुछ नियंत्रित होने लगता है और अज्ञानता दूर होती है व स्वतः ज्ञान आने लगता है ।और एक दिन या वर्षों या कई जन्मों में अवश्य पूर्ण नियंत्रित हो जाता है उसी प्राणी को बुद्ध कहते हैं ।मन को जानने वाला हिस्सा होता है जिसको हम अभ्यास से मज़बूत करते हैं उसको आत्म भी कह सकते हैं इसी आत्म से आत्मा बना है ।
✔️तो एक लाइन में कुदरत या परमात्मा के नियम हमें नियंत्रित करते हैं ।और वो नियम एक लाइन में है जो वर्तमान या पूर्व जन्मों में बोए होगे वही काटोगे ।अतः मन में बोने के प्रति सतर्क रहें ।
✔️फिर बहुत से लोग पोस्ट पढ़कर सोच रहे होंगे जब सब तय है तो क्या हाथ पर हाथ बांधकर बैठे रहें ? इसका उत्तर है की आप बैठे रही नहीं सकते क्योंकि आप अपने मन के नियंत्रण में हैं और वो अपने अंदर आ रहे फलों के अनुसार आपसे कार्य कराएगा ।क्योंकि बैठना ही तो इस कुदरत में सबसे बड़े तपस्वी का कार्य है ।जिसने मन को कुछ नियंत्रित कर लिया वही बैठ पाएगा ।
अतः आप वर्तमान में मन में हो रहे कर्म को ऊपर बतायी विधि अनुसार देखने का अभ्यास करें व इसको नियंत्रित करने का ।कुछ न करने से अच्छा कुछ करना ।
नीरज राठौड़
13/09/2022
दिव्य ग्राम बनने की ओर अग्रसर पालीधाम ,कानपुर में आगामी October माह से कानपुर के प्रतिष्ठित हॉस्पिटल DELTA HOSPITAL व Dr Shailesh Kumar Singh MCh Neurosurgery, Brain & Spine Surgeon, Kanpur
के सहयोग से हम लोग स्वामी विवेकानंद ग्रामीण चिकित्सालय की शुरुआत करने जा रहे हैं ।यह चिकित्सालय निः शुल्क होगा व ग्रामीणों को झोलाछाप डाक्टरों से निजात दिलाएगा ।इस चिकित्सालय के माध्यम से नागरिक super specialist चिकित्सकों से भी इलाज करा सकेंगे ।
युवा नेतृत्वकर्ता Sachin Kumar Singh व ज्ञान केंद्र प्रमुख Mahendra Singh के नेतृत्व में यह चिकित्सालय चलेगा ।
दिव्य ग्राम निर्माण मिशन
दिव्य सेवक संघ
एक बार की बात है एक बहुत ही पुण्यात्मा सपरिवार तीर्थ के लिए निकले। कई कोस दूर चलते चलते साथ लेकर चला गया पानी समाप्त हो गया। पूरे परिवार को प्यास लगने लगी, ज्येष्ठ का महीना था, आस पास कहीं पानी नहीं दिखाई पड़ रहा था। उसके बच्चे प्यास से व्याकुल होने लगे। समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। ऐसे समय उसे भगवान से प्रार्थना करनी पड़ी कि, "हे प्रभु ! अब आप ही कुछ कीजिये।"
इतने में उसे कुछ दूर पर एक साधु तप करते हुए नजर आए। व्यक्ति ने उस साधु से जाकर अपनी समस्या बताई। साधु बोले कि यहाँ से एक कोस दूर उत्तर की दिशा में एक छोटी दरिया बहती है जाओ जाकर वहाँ से पानी की प्यास बुझा लो।
साधु की बात सुनकर उसे बड़ी प्रसन्नता हुई और उसने साधु का धन्यवाद किया। पत्नी एवं बच्चो की स्थिति नाजुक होने के कारण वहीं रुकने के लिया बोला और खुद पानी लेने चला गया।
जब वो दरिया से पानी लेकर लौट रहा था तो उसे रास्ते में पांच व्यक्ति मिले जो अत्यंत प्यासे थे। पुण्य आत्मा को उन पांचो व्यक्तियों की प्यास देखी नहीं गयी और अपना सारा पानी उन प्यासों को पिला दिया। जब वो दोबारा पानी लेकर आ रहा था तो पांच अन्य व्यक्ति मिले जो उसी तरह प्यासे थे। उस पुण्य आत्मा ने फिर अपना सारा पानी उनको पिला दिया।
यही घटना बार-बार हो रही थी, और काफी समय बीत जाने के बाद जब वो नहीं आया तो साधु उसकी तरफ चल पड़ा। बार बार उसके इस पुण्य कार्य को देख कर साधु बोला, "हे पुण्य आत्मा ! तुम बार-बार अपना बाल्टी भरकर दरिया से लाते हो और किसी प्यासे के लिए खाली कर देते हो। इससे तुम्हें क्या लाभ मिला ?" पुण्य आत्मा ने कहा, "मुझे क्या मिला ? या क्या नहीं मिला, इसके बारें में मैंने कभी नहीं सोचा, पर मैंने अपना स्वार्थ छोड़ कर अपना धर्म निभाया है।"
साधु बोला, "ऐसे धर्म निभाने से क्या फायदा जब तुम अपना कर्तव्य नहीं निभा पाये। बिना जल के तुम्हारे अपने बच्चे और परिवार ही जीवित ना बचें ? तुम अपना धर्म ऐसे भी निभा सकते थे जैसे मैंने निभाया।" पुण्य आत्मा ने पूछा, "कैसे महाराज ?"
साधु बोला, "मैंने तुम्हे दरिया से पानी लाकर देने के बजाय दरिया का रास्ता ही बता दिया। तुम्हे भी उन सभी प्यासों को दरिया का रास्ता बता देना चाहिए था, ताकि तुम्हारी भी प्यास मिट जाये और अन्य प्यासे लोगों की भी। फिर किसी को अपनी बाल्टी खाली करने की जरुरत ही नहीं होती।" इतना कहकर साधु अंतर्ध्यान हो गया।
पुण्य आत्मा को सब कुछ समझ आ गया कि केवल स्वयं पुण्य कमाने में ना लगकर, अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए दूसरों को भी पुण्य की राह दिखायें।
किसी का भी भला करने का सबसे सही तरीका यही है कि उसे परमात्मा और सच्चाई की राह दिखा दें।
12/09/2022
आज “ज्ञान केंद्र -संस्कारशाला ,पालीधाम ,कानपुर” में बच्चों के बीच था ।बच्चों को “शुद्ध सनातन ध्यान प्रक्रिया(विपश्यना आनपान सती) ” का अभ्यास करते देखकर आनंद आ गया ।ज्ञानकेंद्र प्रमुख Mahendra SinghMahendra Singh जी ,शिक्षक द्वय प्रतिभा यादव जी व शिवम् यादव जी के बच्चों को संस्कारवान बनाने के सरल तरीक़े को देखकर आनंद आ गया ।पढ़ते तो आजकल ज़्यादातर बच्चे हैं लेकिन पढ़ने के बाद बच्चे सदाचारी हों तभी स्कूल जाना सार्थक है ।वह यहाँ आपको देखने को मिलेगा ।सभी स्कूलों में यह व्यवस्था लागू हो जाए तो देश देखते देखते सोने की चिड़िया बन जाए ।मन का नियंत्रण न कर पाना ही सब समस्याओं का कारण है ।सभी को बाल्यकाल से यह सिखाना चाहिए ।
आज बच्चों में आश्रम परिसर को स्वच्छ कराकर स्वच्छता का संस्कार ,कुछ बच्चों को गुल्लक देकर बचत का संस्कार ,माता पिता व अन्य बड़ों को प्रातः व सायं पैर छूकर अहंकार मुक्त व उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संस्कार व सबको अभिवादन स्वरूप “आपका मंगल हो” कहने का संस्कार डाला गया ।
दिव्य सेवक संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष व भाजपा के युवा नेता Sachin Kumar SinghSachin Kumar Singh जी के नेतृत्व में यह प्रकल्प पालीधाम में चल रहा है ।अब अन्य ज़िलों के लोग भी इस प्रकल्प को सीखने के लिए आने लगे हैं ।आज मेरठ से आए साधक विश्वदेव त्रिपाठी जी ने ऐसा ही प्रकल्प मेरठ ,अलीगढ़ में शुरू करने हेतु पाली धाम में प्रवास कर इस प्रकल्प की बारीकियों को सिखा ।आज बच्चों ने खेलकूद दिवस भी मनाया ।
10/09/2022
कल पाली धाम ,कानपुर में …….
ऐसे भावी “ग्राम प्रधान व ज़िला पंचायत सदस्य” के चुनाव के भविष्य के उम्मीदवारों का प्रशिक्षण जो कम से कम एक ग्राम को “दिव्य ग्राम” बनाना सीखने को उत्सुक हैं ।
प्रशिक्षण हेतु ऐसे नेताओं का चयन 2 चरण की स्क्रूटिनी के बाद किया गया है जो भारत को अपनी माँ मानते हैं व आध्यात्मिक अभिरुचि के हैं ।इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य है की भविष्य में देश को ऐसे नेता मिलें जो कम से कम एक गाँव ठीक किए हुए हों और साधना व सेवा में रत हों ।
तो कल मिलते हैं पालीधाम , कानपुर में ………..
04/09/2022
यह #घटना उस समय की है जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने विदेश जाकर देश को आजाद कराने के लिए आजाद हिंद फौज के गठन का कार्य प्रारंभ किया।
उसी दौरान उन्होंने रेडियो प्रसारण पर एक आह्वान किया था कि "हम अपनी स्वतंत्रता का मूल्य अपने रक्त से चुकाएंगे"
उस समय वे बर्मा मे थे।
आजाद हिंद फौज के गठन व युवाओं को भरती करने के लिए उन्होंने अपना एक कमांडर भारत में नियुक्त किया.. कैप्टन ढिल्लों।
कैप्टन को विशेष निर्देश दिए कि ऐसे युवक को फौज में भर्ती न किया जाए जो अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र हो। उपयुक्त नियम का सख्ती से पालन करना है...
उस दिन कैप्टन ढिल्लों भर्ती होने के लिए सैकड़ों युवक जो पंक्ति मे खड़े थे उनका शारीरिक नापजोख करते थे और उनसे अंत में एक प्रश्न पूछते थे कि क्या आप अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र हो?
उपयुक्त उत्तर मिलने पर भर्ती कर लिया जाता था उस दिन उन्होंने अन्य युवकों की भांति एक युवक की छाती को मापकर तोल लेने वाली मशीन पर उसका वजन लिया, सब कुछ ठीक-ठाक पाया, वह युवक फौज में ले लिए जाने की आशा से मुस्कुरा रहा था अंत में कैप्टन ढिल्लो ने उससे पूछा..
तुम्हारे ओर कितने भाई हैं?
उस नौजवान ने कहा " मैं तो अकेला हूं, मेरे पिता भी इस समय जीवित नहीं है घर में सिर्फ मेरी मां है"
"क्या करते हो तुम" कैप्टन ढिल्लों ने पूछा..
"मैं गाय भैंस पालता हूं खेती भी करता हूं"
"हिंदुस्तान में कहां के रहने वाले हो" ?
"पंजाब(आज का हरियाणा) से हूँ"
तुम्हारा नाम?
"अर्जुन सिंह"
कैप्टन ढिल्लो ने कुछ उदास होकर कहा..
अर्जुन सिंह मुझे अफसोस है कि तुम्हें फौज में नहीं लिया जा सकता मुझे तुम्हारी देशभक्ति पर कोई संदेह नहीं है लेकिन तुम अपनी मां के अकेले बेटे हो, जाओ अपना खेत और अपने पशुओं को संभालो मां की सेवा करो अर्जुन की खुशी उदासी में बदल गई...
वह घर लौटा तो मां ने पूछा क्यों अर्जुन तुम तो आजाद हिंद सेना में गए थे भर्ती होने इतनी जल्दी आ गए क्या?
अर्जुन सिंह ने अपनी बूढ़ी मां को सब कुछ बता दिया..
सुनकर मां शांत होकर बोली घबराओ मत बेटे एक-दो दिन बाद फौज में तुम जरूर जाना तुम ले लिए जाओगे तुम देश के सच्चे सपूत बनकर दिखाओ, दिल को छोटा मत करो।
तीसरे दिन पुनः अर्जुन सिंह फौज में भर्ती होने वाले युवकों की पंक्ति में खड़ा था... सामने से आते ही कैप्टन ढिल्लों ने उसे पहचान लिया और बोला कि तुम फिर आ गए तुम्हें याद नहीं है... मैंने तुम्हें क्या कहा था,,
अर्जुन सिंह ने भरे हुए गले से कहा..
"कैप्टन साहब मुझे आपकी बात खूब याद है किंतु मेरी बूढ़ी मां ने कुएं में कूदकर अपनी जान ही दे दी, कुएं में कूदने के पहली रात को उसने मुझसे कहा था कि यह मेरे लिए बड़ी लज्जा की बात है कि मेरे कारण से तुम आजाद हिंद सेना में नहीं लिए जा सके नेताजी का सहयोगी बनकर देश के काम नहीं आ सके"...
इतना सुनते ही कैप्टन ढिल्लो की आंखों में आंसू भर गए उन्होंने उसी समय अर्जुन को भर्ती कर लिया और 2 दिन बाद जब सुभाष बाबू निरीक्षण के लिए आए तो कैप्टन ने अर्जुन को नेताजी से मिलवाया।
अर्जुन सिंह को देखकर नेता जी ने कहा की अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए हमें यह जीवन अंतिम सांस तक दुश्मन से लड़ते हुए मोर्चे पर बिताना है इसमें यदि हमारी मृत्यु भी होती है तो भी पीछे नहीं हटना है...
अर्जुन सिंह ने नेताजी को वचन दिया और अपना वादा निभाया मोर्चे पर वह तब तक लड़ता रहा जब तक कि उसकी राइफल में एक भी गोली बाकी थी..
अर्जुन सिंह के शहीद होने का समाचार नेताजी सुभाष को जब मिला तो वे स्वयं गये जहां अर्जुन सिंह की मे स्मृति में एक छोटा सा स्मारक उन्होंने बनवाया और उस पर उन्होंने लिखा था "मृत्यु से खेलने वाले इन मां और पुत्र दोनों को मेरा प्रणाम"....
ऐसे ऐसे महान रत्नों को खोकर मिली है आजादी... इस आजादी का मोल समझिए और भारत को सशक्त व महान राष्ट्र बनाने में अपना योगदान दीजिए...।
04/09/2022
“ज्ञान केंद्र -संस्कारशाला ” पालीधाम ,कानपुर के बच्चों ने आज “प्रथम विश्व बाल गौसेवा दिवस” मनाया ।बच्चों ने गाय को रोटी व अन्न खिलाकर अपने रेशे रेशे द्वारा हम सबका पालन पोषण करने के लिए गाय के प्रति कृतज्ञता प्रकट की ।बच्चों को आज गौ के प्रति कृतज्ञता रखने का संस्कार दिया गया ।बच्चों ने प्रतिदिन पहली रोटी गौ को खिलाने का संकल्प लिया ।
दिव्य युवा नेतृत्वकर्ता Sachin Kumar Singh के नेतृत्व में यह कार्यक्रम हुआ ।साधक Mahendra Singh , ज्ञान केंद्र की शिक्षक प्रतिभा जी व शिवम् जी और उनकी पूरी टीम को बहुत मेहनत द्वारा इस कार्यक्रम को आयोजित करने हेतु बधाई ।
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