कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश

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किसानों की सेवा के लिए सदैव तत्पर कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश

13/07/2024

गन्ने की फसल में बारिश के बाद फसलों की वृद्धि होती है. लेकिन साथ ही कई तरह के रोग भी उत्पन्न हो सकते हैं. इनमें से एक प्रमुख और खतरनाक रोग है पोक्का रोग, जो हाल के वर्षों में गन्ने की खेती के लिए अत्यंत घातक साबित हो रहा है. अगर इस रोग का समय पर प्रबंधन और रोकथाम नहीं करते हैं, तो इससे गन्ने की फसल को भारी नुकसान हो सकता है. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शांहजहापुर ने जानकारी दी है कि गन्ने की फसल में पोक्का बोइंग रोग का प्रकोप शुरू हो गया है. इससे किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है, अन्यथा गन्ने की उपज को भारी नुकसान हो सकता है. यह रोग फ्यूजेरियम नामक कवक से फैलता है. यह रोग रुक-रुक कर होने वाली बारिश और धूप के कारण फैलता है.

लीफ सीथ यानी जहां पत्ती और तना जुड़ते हैं, वहां पर सफेद धब्बे दिखाई देते हैं. पत्तियां मुरझाकर काली पड़ जाती हैं और पत्ती का ऊपरी भाग सड़कर गिर जाता है, जिससे गन्ने का विकास प्रभावित होता है. ग्रसित पत्तियों के नीचे का अगोला छोटा और अधिक हो जाता है. पोरियों पर चाकू से कटे निशान भी दिखाई देते हैं. यह रोग उन गन्ने की किस्मों को अधिक प्रभावित करता है जिनकी पत्तियां चौड़ी होती हैं. इससे गन्ना छोटा और बौना हो जाता है.उत्तर प्रदेश शोध परिषद के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस रोग का लक्षण ऊपर की पत्तियों में साफ तौर पर दिखाई पड़ता है. रोग की प्रारंभिक अवस्था में अगोले की पत्तियों पर सफेद धब्बे पड़ते हैं, जिनमें पत्तियां मुड़ने लगती हैं और एक-दूसरे से लिपट कर चाबुक जैसी आकृति बना लेती हैं. अधिक देर तक प्रभाव रहने के कारण पौधे की चोटी में पत्तियां अविकसित रह जाती हैं. पत्ती सड़कर नीचे गिर जाती हैं. संक्रमण की तीव्रता अधिक होने पर अगोले की सारी पत्तियां मुड़कर, सुखकर गिर जाती हैं. गन्ने का ऊपरी भाग ठूंठ की तरह दिखाई देता है, जिससे गन्ने की लंबाई नहीं बढ़ पाती और गन्ना टेढ़ा और बौना हो जाता है. पोक्का रोग से बचाव के उपाय
इस रोग से प्रभावित गन्ने का पौधा छूने मात्र से टूट जाता है. मानो किसी धारदार हथियार से काटा गया हो. दूसरा, गन्ने के पौधे की वृद्धि अपने आप रुक जाती है जिससे उत्पादन में काफी कमी आ जाती है. पोक्का रोग की रोकथाम के लिए किसान कार्बेंडाजिम 50 WP का 400 ग्राम को 400 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें. यह छिड़काव रोग के प्रथम लक्षण दिखाई देने पर ही करें. कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 WP का 800 ग्राम 400 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें या कासूकीमाईसीन 5 WP और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 45 WP की 400 ग्राम दवा को 400 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें. यह स्प्रे 10 से 15 दिन के बाद पुनः दोहराया जा सकता है.

04/10/2023
17/08/2023

कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण योजना (ATMA) के तहत किसानों को कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान, विपणन एवं इसके नए तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है। परिणामस्वरूप, उन्हें खेती की लागत कम व फसल उत्पादन अधिक मिलता है।

30/06/2023

खेती को चिंतामुक्त बनाते हुए किसानों को आत्मनिर्भर करने के लिए #किसानक्रेडिटकार्ड की आज के समय में एक बड़ी आवश्यकता है।
सहकारी बैंक, वाणिज्यिक बैंक, लघु वित्त बैंक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा #किसानक्रेडिटकार्ड बनवाया जा सकता है।

05/04/2023

माननीय केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के मुख्य आतिथ्य में 6-7 अप्रैल 2023 को प्रदर्शनी मैदान, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में पशु प्रदर्शनी एवं कृषि मेला का आयोजन किया जा रहा है।
#पशु_प्रदर्शनी_एवं_कृषि_मेला

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